व्यापार
वैश्विक संकेतों के बीच सपाट खुला बाजार, सेंसेक्स 0.40 प्रतिशत फिसला; आईटी और मेटल शेयरों में खरीदारी
पिछले दिन की शानदार तेजी के बाद वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ सपाट खुला।
सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,315.61 से 25.47 अंक चढ़कर 74,341.08 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,997.35 से 0.29 प्रतिशत यानी 67.75 अंक चढ़कर 23,065.10 के स्तर पर खुला।
हालांकि बाद के कारोबारी सत्र में दोनों बेंचमार्कों पर दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स 302.62 अंक यानी 0.40 प्रतिशत फिसलकर 74,012.99 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि शुरू में इसने 74,504.34 का दिन का उच्चतम स्तर छुआ।
वहीं, दिन के कारोबार में निफ्टी 50 गिरकर 22,913.80 के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया, जो 151.3 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
निफ्टी50 इंडेक्स में एचडीएफसी लाइफ, बीएसई, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, श्रीराम फाइनेंस और रिलायंस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.5 प्रतिशत और 0.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 2.6 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इसके बाद निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल और निफ्टी पीएसयू बैंक का स्थान रहा, जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, शुक्रवार को एशियाई बाजारों में अधिकतर में तेजी देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.38 प्रतिशत बढ़ा, जबकि टॉपिक्स में लगभग 1.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.56 प्रतिशत उछला, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एएसएक्स 200 1.01 प्रतिशत बढ़ा।
वॉल स्ट्रीट पर, गुरुवार को तीनों प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने प्रमुख प्रौद्योगिकी शेयरों से निकलकर अन्य बाजार क्षेत्रों में निवेश किया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जो 500 से अधिक अंक या लगभग 1.1 प्रतिशत बढ़ा। एसएंडपी 500 में लगभग 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 0.1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई।
वहीं, एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने लगातार तीन सत्रों से चली आ रही गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया।
सप्ताह के दौरान, एसएंडपी 500 में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसके विपरीत, डाउ जोन्स लगभग 1 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त की ओर अग्रसर था।
वहीं, ब्रेंट क्रूड का भाव शुक्रवार को 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा और मध्य पूर्व में आपूर्ति संबंधी बढ़ती चिंताओं के बीच यह साप्ताहिक बढ़त की ओर अग्रसर था।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह भारतीय बाजारों ने अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 में 668 अंकों की बढ़त दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बेहतर प्रदर्शन एआई शेयरों में कमजोरी, आगामी बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स में संभावित बदलावों की उम्मीद और दूसरी तिमाही के अब तक अपेक्षा से बेहतर आए नतीजों के कारण देखने को मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रमुख आईटी कंपनियों के अच्छे नतीजों और सकारात्मक प्रबंधन टिप्पणियों के चलते आईटी इंडेक्स में करीब 9 प्रतिशत की मजबूत वापसी हुई है, जिसने निफ्टी को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दूरसंचार, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और तांबा, एल्युमीनियम तथा जिंक जैसी धातुओं से जुड़ी कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी मजबूत रहने की उम्मीद है, जिससे बाजार को बुनियादी समर्थन मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि एक और सकारात्मक संकेत अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड का घटकर 5.07 प्रतिशत पर आना है। रुपये की मजबूती के साथ मिलकर यह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली को कुछ हद तक सीमित कर सकता है।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि जब तक 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक बना रहेगा, तब तक एफआईआई की बिकवाली जारी रह सकती है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,200 से 23,600 का दायरा अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। हालांकि हालिया तेज उछाल के बाद 23,070 के नीचे रहने पर बाजार में औसत स्तरों की ओर लौटने वाली चाल (मीन रिवर्जन) देखने को मिल सकती है। उनका मानना है कि 22,780 के स्तर से नीचे बड़ी गिरावट नहीं होने तक निचले स्तरों पर खरीदारी का रुझान बना रह सकता है।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजार शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जिससे अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर दिखाई दिया। एसएंडपी 500 शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि टेक्नोलॉजी-आधारित नैस्डैक 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ लगभग सपाट बंद हुआ।
राष्ट्रीय समाचार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत : निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द अंतिम रूप देने की वकालत करते हुए कहा कि इसका निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा।
बैंकॉक में आयोजित आईएमएफ-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि एक-दो दिन पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि यह समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है।
उन्होंने कहा, “भारत तमाम चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास दर को बनाए रखने में सफल रहा है। वास्तव में, कोविड के बाद पिछले चार-पांच वर्षों से हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहे हैं।”
सीतारमण ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया।
उन्होंने कहा, “हम इस बात को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं कि सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए हम यह अच्छी तरह समझते हैं कि अर्थव्यवस्था के कमजोर वर्गों की मदद करते हुए भी हमें अनियंत्रित खर्च नहीं करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय पर सार्वजनिक खर्च ने देश में बुनियादी ढांचे के निर्माण को गति दी है और इसका अर्थव्यवस्था पर व्यापक गुणक प्रभाव (मल्टीप्लायर इफेक्ट) पड़ा है।
गौरतलब है कि एक दिन पहले पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका बीटीए की पहली खेप (फर्स्ट ट्रांच) को अंतिम रूप दिया जा चुका है और वर्तमान में उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
गोयल ने कहा था कि यह समझौता तब लागू किया जाएगा, जब भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ सुनिश्चित हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश जल्द ही इसे अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।
नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए गोर ने कहा था कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब पहुंच चुके हैं।
राष्ट्रीय समाचार
हरियाणा सरकार ने 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की

हरियाणा सरकार ने लक्ष्य का 27 प्रतिशत यानी 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की और किसानों को 1,221 करोड़ रुपए वितरित किए।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई। बैठक में धान की आवक, खरीद, उत्खनन, किसानों को भुगतान और खरीद प्रणाली को अधिक कुशल, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी-आधारित पहलों की प्रगति का भी आकलन किया गया।
समीक्षा में कटाई के पूरे मौसम में सुचारू खरीद संचालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों, ट्रांसपोर्टरों और चावल मिल मालिकों के बीच निर्बाध समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार ने बताया कि हरियाणा की मंडियों में अब तक 21.27 लाख मीट्रिक टन धान आ चुका है, जिसमें से 15.52 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है और 7.69 लाख मीट्रिक टन धान उठाया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा खरीफ ऋतु 2026-27 के लिए निर्धारित 58 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद के लक्ष्य के मुकाबले राज्य लगभग 27 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुका है।
मुख्य सचिव की समीक्षा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसानों को खरीद केंद्रों पर कुशल सेवाएं मिलें और आवक जारी रहने के साथ-साथ खरीदे गए धान की आवाजाही सुचारू बनी रहे।
बैठक में खरीद एजेंसियों और ट्रांसपोर्टरों के बीच समन्वय सुधारने, पर्याप्त उठान व्यवस्था बनाए रखने, पारदर्शी वजन और नमी परीक्षण की सुविधा प्रदान करने और खरीद संबंधी दस्तावेजों की कुशल प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
समीक्षा के दौरान खरीद प्रणाली के महत्वपूर्ण पहलुओं में समय पर भुगतान, सुचारू गेट-पास प्रक्रिया और प्रभावी डिजिटल सत्यापन शामिल थे। उपायुक्तों से बातचीत करते हुए मुख्य सचिव ने उन्हें बाधाओं को दूर करने और समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया ताकि खरीद और उठान कार्यों में और तेजी लाई जा सके।
जिलावार समीक्षा में कई जिलों में खरीद के उत्साहजनक संकेतक सामने आए। कुरुक्षेत्र में आवक-से-नीलामी अनुपात 88.2 प्रतिशत रहा, इसके बाद यमुनानगर में 81.8 प्रतिशत और अंबाला में 80.7 प्रतिशत रहा।
राज्य का औसत 74.7 प्रतिशत रहा। नीलामी से खरीद में रूपांतरण के मामले में, पंचकुला में 93.7 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र में 92.4 प्रतिशत और कैथल में 90.9 प्रतिशत रहा, अंबाला में 89.3 प्रतिशत, यमुनानगर में 85.4 प्रतिशत और करनाल में 78.5 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि राज्य का औसत 86 प्रतिशत था। नीलामी से खरीद में रूपांतरण के मामले में, पंचकुला में 57.1 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र में 55 प्रतिशत और कैथल में 52.2 प्रतिशत रहा, जबकि अंबाला में 49.4 प्रतिशत रहा।
राष्ट्रीय समाचार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, मार्को रुबियो की भारत यात्रा से पहले हो सकता है ऐलान: सर्जियो गोर

भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ शेष बिंदुओं पर बातचीत जारी है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए गोर ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा लगभग तैयार हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि दोनों देश जल्द ही इसे अंतिम रूप दे देंगे।
उन्होंने कहा, “बड़ी तस्वीर, व्यापक ढांचा और प्रमुख मुद्दों पर काम पूरा हो चुका है।”
इस बीच, उन्होंने इन वार्ताओं को दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली सबसे तेजी से आगे बढ़ रही व्यापार चर्चाओं में से एक बताया।
गोर ने कहा कि बातचीत अब उत्पाद-विशिष्ट और शुल्क स्तर से जुड़े मुद्दों तक पहुंच चुकी है, जिसमें अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
उन्होंने माना कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत स्वाभाविक रूप से जटिल होती है, लेकिन दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं।
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए अमेरिकी राजदूत ने भारत को अमेरिका का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया।
उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना की और कहा कि भारत उन शुरुआती देशों में शामिल रहा है, जिन्हें महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी साझेदारियों में आमंत्रित किया गया।
गोर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रौद्योगिकी विकास, स्वच्छ ऊर्जा और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और माइक्रोन जैसी प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारत में बढ़ाए जा रहे निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी है और रोजगार सृजन में मदद करती है।
रक्षा संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। हाल के संयुक्त अभ्यासों और भारत में एफ-35 लड़ाकू विमानों की भागीदारी को उन्होंने बढ़ते रणनीतिक विश्वास का प्रमाण बताया।
गोर ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही भारत की यात्रा करेंगे। उनकी मुंबई और जामनगर में कई बैठकें और कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के बीच इस यात्रा का प्रमुख फोकस व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारियों पर रहेगा।
रूस से जुड़े प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर उठ रही चिंताओं पर गोर ने कहा कि ये कदम किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा अभी जारी है और अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिया जाएगा।
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