राजनीति
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक घोटाला: विजयन के मामले में कांग्रेस में मतभेद, सीएम को विरोध का सामना करना पड़ रहा
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में राज्य सरकार के रुख को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर गहरे मतभेद सामने आए हैं। विधायक मैथ्यू कुझलनादन के कड़े विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने पिनाराई विजयन के खिलाफ जल्दबाजी में मामला दर्ज न करने के फैसले का बचाव किया है।
कांग्रेस विधायक दल की एक बैठक में कुझलनादन ने सवाल उठाया कि विजयन को वह न्याय क्यों मिलना चाहिए, जिससे एलडीएफ सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी को वंचित रखा था।
इस बहस से उन लोगों के बीच का मतभेद सामने आ गया, जो तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। वहीं, पार्टी नेतृत्व इस बात पर जोर दे रहा है कि इस मामले को कानूनी और राजनीतिक सूझबूझ के साथ संभाला जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, सतीशन ने बैठक में कहा कि कुझलनादन युवा जोश में ऐसा कर रहे हैं और सही राजनीतिक तरीका यह है कि किसी मामले में जल्दबाजी न की जाए। दोनों के बीच लंबी बहस हुई, जिसमें गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला, स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने मुख्यमंत्री का समर्थन किया।
यह टकराव तब हुआ जब कुझलनादन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के रुख की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद सरकार को अपना रुख बदलना चाहिए और सरकार को मिली कानूनी सलाह पर भी सवाल उठाए।
कुझलनादन ने कहा कि उन्होंने ‘एक्सलॉजिक’ मामले को काफी हद तक अकेले ही लड़ा है और इसके कारण उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसमें विजिलेंस जांच भी शामिल है। उन्होंने सरकार के इस रवैये का विरोध करते हुए गृह मंत्री को पत्र भी लिखा था।
चेन्नीथला ने जवाब दिया कि इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि कुझलनादन इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। अगर उनसे सलाह ली जाती, तो वे ऐसा न करने की सलाह देते।
सतीशन ने तर्क दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के किसी संचार के आधार पर जल्दबाजी में कोई कदम उठाना राजनीतिक रूप से नासमझी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले की गई कानूनी कार्रवाइयों से विजयन को ही फायदा हुआ है।
इस विवाद ने कांग्रेस के उस रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे उसने अप्रैल के विधानसभा चुनावों में अपने प्रचार का एक बड़ा मुद्दा बनाया था।
सत्ता में आने से पहले, यूडीएफ नेसीएमआरएल-एक्सालॉजिक से जुड़े आरोपों को लेकर पिछली सरकार को कई बार निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम से पार्टी के कुछ धड़ों में असंतोष पैदा हो गया है। नेतृत्व के सतर्क रवैये को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस पिछली सरकार पर लगाए गए अपने मुख्य आरोपों में से एक से पीछे हट रही है। इस बीच, यह मुद्दा फिर से तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विजयन ने हाई कोर्ट के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।
महाराष्ट्र
सीएम फडणवीस का विपक्ष पर हमला, प्रशांत भूषण की टिप्पणी के बाद कहा- ‘आखिर होठों पर आ गई मन में छुपी बात’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के विवादित ‘सत्ता परिवर्तन’ (रेजीम चेंज) बयान के बाद छिपा हुआ सच आखिरकार सामने आ गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रशांत भूषण का एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “हो गया भाई, सब कुछ सामने आ गया। आखिरकार, यह सब ‘सत्ता परिवर्तन’ (रेजीम चेंज) के बारे में ही तो था।”
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने और सत्ता हथियाने के लिए विरोध प्रदर्शनों को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। फडणवीस ने अपने पोस्ट में लिखा, “आखिर मन में छुपी बात होठों पर आ ही गई। सारा खेल सत्ता की कुर्सी पाने का है, फिर उसके लिए विद्यार्थियों और किसानों को उकसाना ही क्यों ना पडे। जाति और भाषा के नाम पर द्वेष फैलाना पडे, या देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रतिमा मलीन करनी पडे।”
विपक्षी दलों और प्रशांत भूषण पर हमला जारी करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाना ही ‘इनका’ उद्देश्य है।”
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब प्रशांत भूषण ने सीजेपी प्रतिनिधियों और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुले तौर पर ‘सत्ता परिवर्तन’ (रेजीम चेंज) से जुड़े उद्देश्यों पर चर्चा की।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में सुनियोजित तरीके से अराजकता फैलाने के आरोप लगाए। सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं का कहना है कि इन बयानों (प्रशांत भूषण की टिप्पणी) ने विपक्ष के असली एजेंडे को उजागर कर दिया है।
तीखी आलोचना के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सफाई देने की कोशिश की। देर रात हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने कहा कि उनके विरोध-प्रदर्शन का मकसद ‘सत्ता परिवर्तन’ नहीं था, बल्कि वे सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रूस के कामचटका क्षेत्र में भूकंप के जबरदस्त झटके, रिक्टर स्केल पर 6.9 दर्ज की गई तीव्रता

रूस के कामचटका प्रायद्वीप क्षेत्र में शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रूस की विज्ञान अकादमी की भूभौतिकी सेवा की कामचटका शाखा के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.9 दर्ज की गई। भूकंप के कारण हुए नुकसान या हताहतों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के हवाले से समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि शुक्रवार को 03:35 (स्थानीय समयानुसार) पर रूस के ओजर्नोव्स्की से 76 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र 143.2 किलोमीटर की गहराई पर था और शुरुआती आकलन के अनुसार यह 52.01 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 157.25 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।
रूसी समाचार एजेंसी ‘टास’ की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के झटके महसूस होने के बाद क्षेत्रीय प्रशासनिक केंद्र के कई निवासी एहतियात के तौर पर अपने घरों और अपार्टमेंट से बाहर निकल आए।
रिहायशी इमारतों के अंदर झूमर और लाइटें जोर-जोर से हिलने लगीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि भूकंप के झटके साफ तौर पर महसूस हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थानीय समयानुसार दोपहर 3:35 बजे आए ये झटके करीब एक मिनट तक जारी रहे।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के तुरंत बाद कोई सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया गया। अमेरिकी नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने कहा कि झटकों के बाद कोई खतरा नहीं है।
कामचटका प्रायद्वीप ‘रिंग ऑफ फायर’ में टेक्टोनिक बेल्ट पर स्थित है, जो प्रशांत महासागर के अधिकांश हिस्से को घेरे हुए है और भूकंपीय गतिविधियों का एक हॉटस्पॉट है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और आईओएम ने प्रवासन और रोजगार के अवसरों पर की चर्चा

विदेश मंत्रालय (एमईए) की सचिव (सीपीवी और ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) महानिदेशक एमी पोप ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बैठक की। इस दौरान वैश्विक प्रवासन और लोगों की आवाजाही के रुझानों पर चर्चा हुई। साथ ही बदलते माहौल में भारत के लिए नए अवसरों को बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने वैश्विक प्रवासन और लोगों की आवाजाही के नए रुझानों पर विचार-विमर्श किया और इस बात पर चर्चा की कि भारत इन परिस्थितियों का बेहतर लाभ कैसे उठा सकता है।
इससे पहले गुरुवार को एमी पोप ने नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से मुलाकात की।
बैठक में कौशल की मान्यता (स्किल्स रिकग्निशन), नैतिक भर्ती (एथिकल रिक्रूटमेंट) और ऐसे वैध रोजगार मार्गों पर चर्चा हुई जो श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करें।
मुलाकात के बाद एमी पोप ने ‘एक्स’ पर लिखा, “कौशल लोगों के लिए नए अवसर खोल सकता है, लेकिन लोगों की आवाजाही सुरक्षित होनी चाहिए और उससे लोगों को फायदा मिलना चाहिए। आज श्रम मंत्री शोभा करंदलाजे के साथ हमने कौशल की मान्यता, नैतिक भर्ती और सुरक्षित रोजगार मार्गों पर व्यावहारिक सहयोग को लेकर चर्चा की।”
एमी पोप ने चेन्नई में उन श्रमिकों से भी मुलाकात की जिन्हें आईओएम के मोबाइल वर्कर रिसोर्स सेंटरों के माध्यम से सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा, “चेन्नई में मैंने ऐसे कामगारों से मुलाकात की जिन्हें आईओएम वहां मदद पहुंचा रहा है जहां वे रहते और काम करते हैं। सही समय पर सही जानकारी किसी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। निजी क्षेत्र के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र का प्रवासन संगठन और अधिक कामगारों तक यह सहायता पहुंचा रहा है।”
इस साल मई में, न्यूयॉर्क में आयोजित इंटरनेशनल माइग्रेशन रिव्यू फोरम 2026 के दौरान, विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी एमी पोप से मुलाकात की थी।
उस बैठक में नियमित और सुरक्षित प्रवासन के अवसर बढ़ाने, उन्हें विविध बनाने तथा भारत में ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन और आईओएम की गतिविधियों के कार्यान्वयन पर चर्चा हुई थी। कीर्ति वर्धन सिंह ने उस समय कहा था कि भारत सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, हाल की बैठकों में भारत और आईओएम ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती श्रमिक गतिशीलता और कौशल आधारित रोजगार के अवसरों का लाभ उठाते हुए, लोगों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन व्यवस्था विकसित की जाए।
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