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Tuesday,25-August-2026
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नाजुक युद्धविराम के बीच बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे जेडी वेंस, ईरान के न्यूक्लियर मुद्दे पर रहेगा फोकस

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वॉशिंगटन, 9 अप्रैल : अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हंगरी की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद अब इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद के लिए रवाना होंगे। जहां वह ईरान के साथ वार्ता के लिए एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वॉशिंगटन हाल के हफ्तों में हुई सैन्य तनातनी के बाद बने नाज़ुक युद्धविराम को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन इस संघर्ष विराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है।

व्हाइट हाउस ने बुधवार को कहा कि वार्ता टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल होंगे। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन अब उस चरण के बाद एक संगठित कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा, “मैं यह घोषणा कर सकती हूं कि राष्ट्रपति इस सप्ताहांत वार्ता के लिए अपनी टीम इस्लामाबाद भेज रहे हैं, जिसका नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस, विशेष दूत विटकॉफ और श्री कुशनर करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “इन वार्ताओं का पहला दौर शनिवार को होगा।”

हंगरी से स्वदेश लौटते समय मीडिया से बात करते हुए वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान और ईरान के बीच समानांतर कूटनीतिक बातचीत पहले ही तय हो चुकी थी। हमारी एक बातचीत है जो इस वीकेंड शुरू होनी है। यह सच है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा कदम है।”

यह बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के बाद घोषित दो हफ्ते के सीजफायर के बाद हो रही है। इस सीजफायर को लेकर सरकार का कहना है कि इसने ईरान की मिलिट्री क्षमता को काफी कम कर दिया है।

प्रेस सचिव लेविट ने कहा, “यह अमेरिका की जीत है जिसे राष्ट्रपति और हमारी जबरदस्त सेना ने मुमकिन बनाया।” व्हाइट हाउस के मुताबिक, मिलिट्री ऑपरेशन के दबाव ने तेहरान को सीजफायर करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर राजी होने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति के ज्यादा से ज्यादा दबाव और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता से बने फायदे की वजह से ईरानी सरकार ने सीजफायर का प्रस्ताव मांगा और अंत में उसके लिए राजी हो गई।”

वेंस ने कहा कि युद्धविराम का ढांचा शर्तों पर आधारित है। यह एक सीजफायर के साथ-साथ बातचीत की प्रक्रिया है। हम अपनी तरफ से कुछ देते हैं और बदले में उनसे उम्मीद करते हैं कि समुद्री रास्ते (स्ट्रेट्स) दोबारा खोले जाएंगे।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद, सरकार ने चेतावनी दी है कि सीजफायर अभी अस्थिर है। लेविट ने कहा, “यह एक नाजुक सीजफायर है। सीजफायर प्रकृति से ही नाजुक होते हैं।”

इस्लामाबाद के कोर एजेंडा पर वेंस ने साफ किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम सेंट्रल होगा। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार न बना पाए। हम चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर फ्यूल छोड़ दे।”

लेविट ने दोहराया कि राष्ट्रपति की शर्तें यानी ईरान में यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह समाप्त करना, अब भी जस की तस बनी हुई हैं और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

वहीं, वेंस ने ईरान के प्रस्तावों पर आई मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “तीन अलग-अलग 10-बिंदुओं वाले प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन पहला प्रस्ताव तो तुरंत ही खारिज कर दिया गया।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन का मानना ​​है कि तेहरान अब ज्यादा गंभीरता से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, “ईरान में जमीन पर जो हो रहा है, वह यह है कि सरकार की स्थिति साफ है, जो कि अमेरिका के साथ बातचीत करने की है।”

अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

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तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।

फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।

इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”

आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।

इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।

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