राजनीति
टीचर्स के लिए जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस ने अकादमी की शुरुआत की
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में स्थित टॉप पीजीडीएम इंस्टीट्यूट जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस ने शुक्रवार को कहा कि इसने सामथ्र्य टीचर्स ट्रेनिंग अकादमी ऑफ रिचर्स (एसटीटीएआर या स्टार) की शुरूआत की है ताकि ऑनलाइन पद्धति से पढ़ाने की प्रक्रिया को जारी रखने में टीचर्स की मदद की जा सकें। संस्थान ने कहा कि यह सभी स्तरों पर शिक्षकों के साथ नियमित रूप से जुड़े रहने और शिक्षकों व संस्थान के प्रशिक्षण की जरूरतों के विश्लेषण के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने 15 जुलाई को एक वर्चुअल इवेंट में अकादमी का उद्घाटन करते हुए कहा, “स्टार जैसी पहल शिक्षकों के ज्ञान के आधार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी जिससे आखिरकार लाखों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।”
जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस ने कहा, इस अकादमी की शुरूआत टीचर्स और स्कूल के लीडर्स को कौशल और दक्षता से लैस करने के उद्देश्य से शुरू की गई है जिनकी आवश्यकता विद्यार्थियों में रिसर्च, डिजाइन सोच और उनमें बेहतर जिज्ञासा उत्पन्न करने के विकास लिए पड़ती है जिससे उनके सीखने के अनुभवों को यथार्थ बनाया जा सके।
इसके उद्घाटन समारोह पर बात करते हुए सेठ आनंदराम जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष शिशिर जयपुरिया ने कहा कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र प्रतिमान बदलाव के दौर से गुजर रहा है और महामारी के चलते बनी अनिश्चित स्थिति और प्रौद्योगिकी के विकास में तेजी से वृद्धि होने के वजह से इसमें और गति आई है।
उन्होंने कहा कि ये बदलाव रहने वाले हैं और मौजूदा दौर में बने रहने के लिए हर शिक्षण संस्थान को इस बदलाव को तेजी से आत्मसात करना होगा और भविष्य में हाइब्रिड शिक्षण के लिए विद्यालयों को खुद को तैयार करना होगा।
स्टार के एकेडमिक काउंसिल व अध्यक्ष विनोद मल्होत्रा ने कहा, “हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि यह ट्रेनिंग अकादमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्कूलों, निजी व सरकारी दोनों में शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू कर सकती है जिसके तहत ऑनलाइन पद्धति से पढ़ाने की प्रक्रिया को जारी रखने उन्हें सहायता प्रदान की जा सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “इससे सभी स्कूलों को समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने में मदद मिलेगी। नवीनतम प्रौद्योगिकी के इस प्रदर्शन से पूरे शिक्षक समुदाय को लाभ होगा।”
संस्थान ने कहा कि स्टार भाग लेने के आधार पर व्यापक अनुकूलित प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करने के लिए भी सुसज्जित है।
राष्ट्रीय समाचार
आरक्षित श्रेणियों के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा में निकली भर्ती, सीनियर मैनेजर सहित 11 पदों पर आवेदन शुरू, जानें कौन पात्र

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जो लोग नौकरी की तलाश में जुटे हैं, उनके लिए एक खास मौका सामने आया है। दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने विशेष भर्ती अभियान-2026 के तहत आरक्षित श्रेणियों (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग) के उम्मीदवारों के लिए बैकलॉग रिक्तियों के अंतर्गत नियमित आधार पर विभिन्न 11 पदों पर भर्ती की घोषणा एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके की है।
बीओबी की ओर से जारी 11 रिक्तियों में सीनियर मैनेजर – प्रोजेक्ट फाइनेंस – इंफ्रास्ट्रक्चर और ईएसजी (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – एमएसएमई क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – एंटरप्राइज और ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – फ्रॉड इंसिडेंस और रूट कॉज एनालिसिस (एमएमजी/एस-III) का 1, मैनेजर – डिजिटल फ्रॉड (एमएमजी/एस-II) के 2, सीनियर मैनेजर – एमएसएमई रिलेशनशिप (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – बिजनेस फाइनेंस (एमएमजी/एस-III) के 2 और चीफ मैनेजर – इंटरनल कंट्रोल्स (एसएमजी/एस-IV) के 2 पद शामिल हैं।
इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 28 अक्टूबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 17 नवंबर तक तय की गई है। जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे बीओबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से सीनियर मैनेजर – प्रोजेक्ट फाइनेंस – इंफ्रास्ट्रक्चर और ईएसजी, सीनियर मैनेजर – एमएसएमई क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट और सीनियर मैनेजर – एंटरप्राइज और ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या संबंधित क्षेत्र में फुल-टाइम एमबीए/पीजीडीएम या इसके समकक्ष योग्यता; सीनियर मैनेजर – फ्रॉड इंसिडेंस और रूट कॉज एनालिसिस के लिए एनालिटिक्स, डेटा साइंस, फाइनेंस या अकाउंटिंग के क्षेत्र में बैचलर या मास्टर डिग्री या चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या कंपनी सेक्रेटरी (सीएस); मैनेजर – डिजिटल फ्रॉड के लिए कंप्यूटर साइंस/आईटी/डेटा साइंस/एमसीए में ग्रेजुएशन/पोस्ट-ग्रेजुएशन डिग्री; सीनियर मैनेजर – एमएसएमई रिलेशनशिप के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री; सीनियर मैनेजर – बिजनेस फाइनेंस और चीफ मैनेजर – इंटरनल कंट्रोल्स के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन और योग्यता से चार्टर्ड अकाउंटेंट होने चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास पद के अनुसार प्रासंगिक क्षेत्र में निर्धारित न्यूनतम 3 से 8 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है।
आवेदकों की न्यूनतम आयु पोस्ट के अनुसार 24 से 30 वर्षों के बीच और अधिकतम आयु 34 से 40 वर्षों के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, ऑनलाइन टेस्ट, साइकोमेट्रिक टेस्ट या अन्य टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और/या इंटरव्यू (या इंटरव्यू के कई दौर) और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित की सैलरी 64,820 से 1,20,940 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, अभ्यर्थियों को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 850 रुपए और एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी, ईएसएम/डीईएसएम और महिला उम्मीदवारों के लिए 175 रुपए तय किया गया है।
राष्ट्रीय समाचार
केदारनाथ धाम में बीकेटीसी कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, मांगों को लेकर मंदिर के सामने निकाली रैली

केदारनाथ धाम में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी है। बुधवार को कर्मचारियों ने बाबा केदारनाथ मंदिर के सामने रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।
कर्मचारियों का कहना है कि 20 से 25 वर्षों से अल्प वेतन पर सेवा देने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री की वन टाइम सेटलमेंट की घोषणा को लागू करने और समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग उठाई।
केदारनाथ धाम में कड़ाके की ठंड के बीच मंदिर समिति के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कई दिनों से जारी प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने बुधवार को केदारनाथ मंदिर के सामने रैली निकालकर अपनी मांगें दोहराईं। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से भगवान की सेवा में जुटे हैं लेकिन उन्हें अब तक उचित वेतन और नियमितीकरण का लाभ नहीं मिल पाया है।
कर्मचारी आशुतोष शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2024 में कर्मचारियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट की घोषणा की थी लेकिन दो वर्ष बीतने के बावजूद इस पर अमल नहीं हुआ। कर्मचारियों ने बोर्ड को पहले ही नोटिस दिया था लेकिन सुनवाई नहीं होने पर उन्हें बाबा केदारनाथ के सामने याचना करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंदिर समिति के अध्यक्ष से जल्द मांगें पूरी करने की अपील की। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लागू करने की मांग उठाई।
वहीं, केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित उमेश चन्द्र पोस्ती ने भी कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्षों से धाम में भगवान की सेवा और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कई कर्मचारी आठ से बारह घंटे के बजाय 20 घंटे तक काम करते हैं लेकिन उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से वन टाइम सेटलमेंट की मांग पर जल्द निर्णय लेने और समान कार्य-समान वेतन का सिद्धांत लागू करने की अपील की। पूरा तीर्थ पुरोहित समाज कर्मचारियों के साथ खड़ा है और उनकी मांगों का जल्द समाधान होना चाहिए ताकि धाम की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलती रहें।
राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर के बारामूला में रेत निकालते समय दो युवकों की मौत

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में रेत निकालते समय दो युवक जिंदा दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को जिले के रफियाबाद इलाके के दचनपोरा में रेत निकालते समय दो युवक रेत के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
यह हादसा देर रात दचनपोरा में हुआ, जब रेत निकालते समय रेत का ढेर ढह गया और दोनों युवक वहीं दब गए।
उनके शव पूरी रात रेत में दबे रहे और बुधवार सुबह स्थानीय लोगों की कड़ी मशक्कत के बाद निकाले जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालने में मदद की।
मृतकों की पहचान 28 वर्षीय जावेद अहमद मीर और 29 वर्षीय मोहम्मद अनीस मलिक के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों दचनपोरा के ही रहने वाले थे। दोनों के शव मिलने के बाद पूरे गांव में मातम छा गया।
पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और मौतों से जुड़े हालात की जांच शुरू कर दी है। अभी और जानकारी का इंतजार है।
जम्मू-कश्मीर में निर्माण उद्योग के लिए रेत निकालना एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है, लेकिन इसमें अवैध खनन, पर्यावरण को नुकसान और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियां भी शामिल हैं।
‘जम्मू-कश्मीर माइनर मिनरल कंसेशन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन एंड प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग रूल्स, 2016’ के तहत छोटे खनिजों के खनन को नियंत्रित किया जाता है। इसमें नदी तल से मिलने वाली सामग्री (आरबीएम) जैसे रेत, गाद, बजरी और पत्थर शामिल हैं।
कानूनी रूप से खनन करने के लिए एक स्वीकृत माइनिंग प्लान, पर्यावरण मंजूरी (ईसी) और संबंधित अधिकारियों से काम करने की अनुमति (कंसेंट टू ऑपरेट) लेना जरूरी है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अक्सर नदी तल में बिना अनुमति या बिना नियम-कानून के किए जाने वाले खनन पर जुर्माना लगाता है।
अक्सर नावों या नदी के किनारों से हाथों से रेत निकालने के काम में डूबने और रेत के ढेर ढहने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है।
इस महीने की शुरुआत में, बारामूला जिले के पट्टन इलाके में, सिंगपोरा में रेत निकालते समय सिर पर गंभीर चोट लगने से 17 वर्षीय एक लड़के की मौत हो गई थी।
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