Connect with us
Wednesday,28-October-2026
ताज़ा खबर

व्यापार

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार 2033 तक 44 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान

Published

on

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र आर्थिक विकास, निजी निवेश और औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ाने में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसके साथ ही देश के वैज्ञानिक और रणनीतिक उद्देश्यों को भी मजबूती मिल रही है। सरकार का लक्ष्य 2033 तक भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यह जानकारी बुधवार को जारी सरकारी फैक्टशीट में दी गई।

फैक्टशीट में कहा गया कि न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने भारतीय उद्योग को इसरो द्वारा विकसित 83 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित करने के लिए 118 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके परिणामस्वरूप निवेशकों का भरोसा भी बढ़ रहा है। 31 मार्च 2026 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप में कुल निवेश लगभग 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

ये सभी घटनाक्रम दर्शाते हैं कि भारत की उभरती अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां न केवल देश की क्षमताओं को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए उद्यम आधारित एक मजबूत अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था भी तैयार कर रही हैं।

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्पैडेक्स मिशन के जरिए भारत कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों की स्वायत्त डॉकिंग हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश भी बन गया। वहीं, गगनयान मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान संबंधी लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है।

सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान (एनजीएलवी) के विकास को मंजूरी दी थी। इसके लिए स्वीकृत 8,240 करोड़ रुपए की राशि में विकास लागत, तीन विकासात्मक उड़ानें, आवश्यक सुविधाएं, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान शामिल हैं।

एनजीएलवी को पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में अधिकतम 30 टन तक का भार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी क्षमता भारत के मौजूदा प्रक्षेपण यान एलवीएम3 की 10 टन की एलईओ क्षमता से तीन गुना अधिक होगी। इसके अलावा, अंतरिक्ष तक कम लागत में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एनजीएलवी का आंशिक रूप से पुन: उपयोग योग्य संस्करण विकसित किया जा रहा है, जो एलईओ में 14 टन तक का भार ले जा सकेगा। इसकी पुन: उपयोग की सुविधा से अंतरिक्ष तक पहुंचने की लागत भी कम होगी।

एनजीएलवी राष्ट्रीय और वाणिज्यिक, दोनों तरह के मिशनों को सक्षम बनाएगा। इनमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के साथ-साथ चंद्रमा और अंतरग्रहीय अन्वेषण अभियान शामिल हैं। इसके अलावा, यह पृथ्वी की निचली कक्षा में संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के समूहों को स्थापित करेगा। इन मिशनों से पूरे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होगा और देश की क्षमताओं एवं क्षमता विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

भारत का अंतरिक्ष मिशन आम नागरिकों की सेवा के उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है। यही दृष्टिकोण अब देशभर में लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। संचार उपग्रह दूरदराज और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का विस्तार करते हैं। वहीं, पृथ्वी अवलोकन से प्राप्त आंकड़े कृषि, आपदा आकलन, योजना निर्माण, पर्यावरण निगरानी और अन्य राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।

मौसम संबंधी उपग्रह चक्रवातों और मानसून पर नजर रखते हैं, जिससे समय रहते चेतावनी जारी की जा सकती है और लोगों की जान बचाने में मदद मिलती है। मछुआरे, किसान और तटीय समुदाय अपनी आजीविका की सुरक्षा के लिए इन चेतावनियों पर निर्भर रहते हैं। ये प्रणालियां नागरिकों को जोड़ती हैं, समुदायों की सुरक्षा करती हैं, शासन व्यवस्था को मजबूत बनाती हैं और समावेशी तथा सतत विकास को गति देती हैं।

फैक्टशीट में कहा गया है कि इन सेवाओं के अलावा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी भारत की सीमाओं की सुरक्षा में भी योगदान देती है और देश के भविष्य को आकार देती है। अंतरिक्ष आधारित संचार प्रणालियां राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती हैं।

व्यापार

2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य, भारत बनेगा स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र

Published

on

भारत ने 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख मीट्रिक टन (5 एमएमटी) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, यह पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन भारत को अधिक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। मिशन के तहत वर्ष 2030 तक जीवाश्म ईंधन आयात पर होने वाले कुल खर्च में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए की बचत का अनुमान है।

इस मिशन का उद्देश्य केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को भी नई गति देना है। सरकार का अनुमान है कि इस पहल से 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित होगा और विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, अनुसंधान तथा परियोजना विकास जैसे क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

फैक्टशीट में कहा गया है कि मिशन के तहत निर्धारित मात्रा में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन और उपयोग होने से हर वर्ष लगभग 5 करोड़ टन (50 एमएमटी) कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इससे भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में उल्लेखनीय मदद मिलेगी।

ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए छह राज्यों ने पहले ही समर्पित नीतियां अधिसूचित कर दी हैं। इनमें गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, बिहार और केरल अपनी-अपनी ग्रीन हाइड्रोजन नीतियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।

वहीं हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने ग्रीन हाइड्रोजन को अपनी मौजूदा औद्योगिक और नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों में शामिल किया है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मोर्चे पर भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब, यूएई और उज्बेकिस्तान के साथ विभिन्न समझौते, आशय-पत्र और संयुक्त घोषणाएं की हैं। इसके अलावा नीदरलैंड्स के साथ नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हस्ताक्षरित किया गया है।

भारत और अमेरिका के बीच स्ट्रैटेजिक क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप के तहत एक विशेष इंडिया-यूएस हाइड्रोजन टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन को भारत-अमेरिका नई और उभरती नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्ययोजना (आरईटीएपी) का भी प्रमुख क्षेत्र माना गया है।

ग्रीन हाइड्रोजन के लिए विश्वसनीय प्रमाणन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से अप्रैल 2025 में ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम ऑफ इंडिया शुरू की गई थी। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) प्रमाणन एजेंसियों को अधिकृत करता है, जबकि जून 2026 में इसके लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी शुरू किया गया। सरकार का कहना है कि पारदर्शी और विश्वसनीय प्रमाणन से भारतीय उत्पादकों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य इन प्रयासों के जरिए औद्योगिक क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करना, घरेलू विनिर्माण को मजबूत बनाना और भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह पहल वर्ष 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूती प्रदान करेगी।

Continue Reading

व्यापार

सऊदी रिफाइनरी पर हमले से उछला कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर के पार; वैश्विक सप्लाई पर बढ़ी चिंता

Published

on

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक को मिसाइल से निशाना बनाया, जिसके बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गईं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल महंगा हो गया।

ब्रेंट क्रूड के दिसंबर वायदा अनुबंध में 1.55 डॉलर यानी 1.36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.43 प्रतिशत बढ़कर 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।

हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली इस रिफाइनरी पर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद बाजार में संभावित आपूर्ति व्यवधान की आशंका बढ़ गई, जिससे तेल कीमतों में तेजी लौट आई।

यह बढ़त ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट दर्ज की गई थी। मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते बाजार में राहत का माहौल बना था। साथ ही अमेरिकी कच्चे तेल भंडार में वृद्धि की संभावनाओं ने भी उस समय कीमतों पर दबाव डाला था।

हाल ही में तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बैठक हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, सभी पक्षों ने शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है।

इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि रविवार को होने वाली ओपेक+ की बैठक में दिसंबर के उत्पादन लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। संगठन के प्रमुख उत्पादक देशों, जिनमें सऊदी अरब, रूस और इराक शामिल हैं, का उत्पादन अभी भी निर्धारित लक्ष्यों से नीचे चल रहा है।

सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की आपूर्ति संबंधी चिंता का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।

विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बना हुआ है। यह विश्व ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता था।

ऊर्जा बाजार पहले से ही सतर्क बने हुए थे, क्योंकि पिछले सप्ताह ईरान द्वारा जलडमरूमध्य के आसपास तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, जो अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। सोमवार को भी ब्रेंट ने कुछ समय के लिए 117 डॉलर का स्तर छुआ था।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, डब्ल्यूटीआई क्रूड ने मंगलवार को 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर पर मजबूती दिखाई, जिसके बाद खरीदारी बढ़ी। फिलहाल 103 से 104 डॉलर का स्तर निकटतम प्रतिरोध माना जा रहा है। इसके ऊपर 106 से 107 डॉलर और फिर 108 डॉलर के स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे। दूसरी ओर 99 से 100 डॉलर का स्तर प्रमुख समर्थन बना हुआ है, जबकि इसके नीचे 96 से 97 डॉलर अगला महत्वपूर्ण आधार क्षेत्र होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में तेल बाजार की दिशा कूटनीतिक प्रयासों और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि क्षेत्रीय स्थिति में सुधार होने पर बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

सरकार ने चालू इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए 17.73 लाख करोड़ रुपए

Published

on

सरकार ने सोमवार को बताया कि सितंबर 2026 तक केंद्र के 17 मंत्रालयों और विभागों में कुल 37.56 लाख करोड़ रुपए की नवीनतम अनुमानित लागत वाली 1,853 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी की जा रही है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स पर अब तक कुल 17.73 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जो प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का लगभग 47.21 प्रतिशत है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

बयान में कहा गया, “काफी संख्या में प्रोजेक्ट्स अग्रिम चरण में पहुंच गए हैं। कुल 654 प्रोजेक्ट्स (35 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की गई है, जबकि 338 प्रोजेक्ट्स (18 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय कार्य पूरा हो चुका है।”

कुल 1,853 जारी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से 780 मेगा प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपए या इससे अधिक है। वहीं, 1,073 प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत 1,000 करोड़ रुपए से कम है।

बयान के अनुसार, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सबसे अधिक 1,320 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनकी कुल लागत 20.07 लाख करोड़ रुपए है। यह कनेक्टिविटी आधारित बुनियादी ढांचे के विकास को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है।

बयान में आगे कहा गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत सबसे अधिक 974 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का 53 प्रतिशत है। इनकी संशोधित कुल लागत 9.46 लाख करोड़ रुपए है, जो सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 25 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका को दिखाता है।

रेल मंत्रालय के तहत 284 प्रोजेक्ट्स (15 प्रतिशत) जारी हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 7.21 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लागत का 19 प्रतिशत है।

कोयला मंत्रालय के तहत 121 प्रोजेक्ट्स (6 प्रतिशत) चल रहे हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 2.22 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल लागत का 6 प्रतिशत है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग क्रमशः 115, 106, 49 और 35 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को क्रियान्वित कर रहे हैं। इनकी संबंधित लागत क्रमशः 4.30 लाख करोड़ रुपए, 6.40 लाख करोड़ रुपए, 3.41 लाख करोड़ रुपए और 1.95 लाख करोड़ रुपए है।

बयान में कहा गया कि शेष 169 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (9 प्रतिशत) विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अंतर्गत आते हैं। इनकी कुल लागत 2.62 लाख करोड़ रुपए है, जो सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 7 प्रतिशत है।

Continue Reading
Advertisement
राष्ट्रीय समाचार11 minutes ago

जम्मू-कश्मीर के बारामूला में रेत निकालते समय दो युवकों की मौत

राजनीति33 minutes ago

यूपी विधानसभा चुनाव 2027: शामली जिले में पिछली बार नहीं खुला था भाजपा का खाता, सपा गठबंधन का रहा दबदबा

व्यापार52 minutes ago

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार 2033 तक 44 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान

व्यापार2 hours ago

2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य, भारत बनेगा स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र

राष्ट्रीय समाचार2 hours ago

मध्य प्रदेश : कूनो में चीते को गोली मारे जाने की जांच के लिए एसटीएफ का गठन

महाराष्ट्र2 hours ago

महाराष्ट्र में सूखे के चलते सहकारी संस्थाओं के चुनाव टले, 304 तहसीलों में चुनाव पर रोक

राष्ट्रीय समाचार2 hours ago

काली पूजा और दीपावली से पहले कोलकाता में एक्यूआई कम, चक्रवात अर्नब के कारण अस्थायी राहत

खेल3 hours ago

एशियन पैरा गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट नीरज यादव ने किया सुसाइड

राष्ट्रीय समाचार3 hours ago

मध्य प्रदेश में 1236 कृष्णमृगों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया : सीएम मोहन यादव

अंतरराष्ट्रीय समाचार3 hours ago

राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच रक्षा सहयोग पर चर्चा

बॉलीवुड4 weeks ago

टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में 10 साल बाद कोर्ट ने बॉयफ्रेंड पर सुनाया फैसला

अपराध3 weeks ago

दिल्ली पुलिस ने मकोका के दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपए बरामद

राजनीति3 weeks ago

“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

राष्ट्रीय समाचार3 weeks ago

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों से विरोध-प्रदर्शन के कारण यात्रा की योजना पहले से बनाने की दी सलाह

खेल4 weeks ago

‘आपकी जीत बेहतरीन प्रदर्शन, दृढ़ संकल्प और टीम वर्क की भावना का सबूत,’ गोल्ड जीतने पर राष्ट्रपति मुर्मु ने टीम इंडिया को सराहा

मनोरंजन3 weeks ago

‘तुम झूठे हो गौतम गुलाटी’, प्रियंका चाहर चौधरी से भिड़े गौतम, ‘राइज एंड फॉल 2’ में छिड़ी तीखी जंग

व्यापार4 weeks ago

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

मनोरंजन4 weeks ago

बर्थडे बॉय रणबीर कपूर पर बॉलीवुड ने बरसाया प्यार, मां नीतू और रवि दुबे ने भी दी बधाई

मनोरंजन3 weeks ago

कनिका-लव की लड़ाई में कूदी आम्रपाली, गुल्लू से हुई बहस

राजनीति3 weeks ago

जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

रुझान