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Wednesday,28-October-2026
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सऊदी रिफाइनरी पर हमले से उछला कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर के पार; वैश्विक सप्लाई पर बढ़ी चिंता

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक को मिसाइल से निशाना बनाया, जिसके बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गईं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल महंगा हो गया।

ब्रेंट क्रूड के दिसंबर वायदा अनुबंध में 1.55 डॉलर यानी 1.36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.43 प्रतिशत बढ़कर 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।

हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली इस रिफाइनरी पर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद बाजार में संभावित आपूर्ति व्यवधान की आशंका बढ़ गई, जिससे तेल कीमतों में तेजी लौट आई।

यह बढ़त ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट दर्ज की गई थी। मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते बाजार में राहत का माहौल बना था। साथ ही अमेरिकी कच्चे तेल भंडार में वृद्धि की संभावनाओं ने भी उस समय कीमतों पर दबाव डाला था।

हाल ही में तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बैठक हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, सभी पक्षों ने शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है।

इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि रविवार को होने वाली ओपेक+ की बैठक में दिसंबर के उत्पादन लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। संगठन के प्रमुख उत्पादक देशों, जिनमें सऊदी अरब, रूस और इराक शामिल हैं, का उत्पादन अभी भी निर्धारित लक्ष्यों से नीचे चल रहा है।

सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की आपूर्ति संबंधी चिंता का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।

विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बना हुआ है। यह विश्व ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता था।

ऊर्जा बाजार पहले से ही सतर्क बने हुए थे, क्योंकि पिछले सप्ताह ईरान द्वारा जलडमरूमध्य के आसपास तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, जो अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। सोमवार को भी ब्रेंट ने कुछ समय के लिए 117 डॉलर का स्तर छुआ था।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, डब्ल्यूटीआई क्रूड ने मंगलवार को 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर पर मजबूती दिखाई, जिसके बाद खरीदारी बढ़ी। फिलहाल 103 से 104 डॉलर का स्तर निकटतम प्रतिरोध माना जा रहा है। इसके ऊपर 106 से 107 डॉलर और फिर 108 डॉलर के स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे। दूसरी ओर 99 से 100 डॉलर का स्तर प्रमुख समर्थन बना हुआ है, जबकि इसके नीचे 96 से 97 डॉलर अगला महत्वपूर्ण आधार क्षेत्र होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में तेल बाजार की दिशा कूटनीतिक प्रयासों और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि क्षेत्रीय स्थिति में सुधार होने पर बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

राष्ट्रीय समाचार

सरकार ने चालू इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए 17.73 लाख करोड़ रुपए

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सरकार ने सोमवार को बताया कि सितंबर 2026 तक केंद्र के 17 मंत्रालयों और विभागों में कुल 37.56 लाख करोड़ रुपए की नवीनतम अनुमानित लागत वाली 1,853 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी की जा रही है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स पर अब तक कुल 17.73 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जो प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का लगभग 47.21 प्रतिशत है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

बयान में कहा गया, “काफी संख्या में प्रोजेक्ट्स अग्रिम चरण में पहुंच गए हैं। कुल 654 प्रोजेक्ट्स (35 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की गई है, जबकि 338 प्रोजेक्ट्स (18 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय कार्य पूरा हो चुका है।”

कुल 1,853 जारी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से 780 मेगा प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपए या इससे अधिक है। वहीं, 1,073 प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत 1,000 करोड़ रुपए से कम है।

बयान के अनुसार, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सबसे अधिक 1,320 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनकी कुल लागत 20.07 लाख करोड़ रुपए है। यह कनेक्टिविटी आधारित बुनियादी ढांचे के विकास को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है।

बयान में आगे कहा गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत सबसे अधिक 974 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का 53 प्रतिशत है। इनकी संशोधित कुल लागत 9.46 लाख करोड़ रुपए है, जो सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 25 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका को दिखाता है।

रेल मंत्रालय के तहत 284 प्रोजेक्ट्स (15 प्रतिशत) जारी हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 7.21 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लागत का 19 प्रतिशत है।

कोयला मंत्रालय के तहत 121 प्रोजेक्ट्स (6 प्रतिशत) चल रहे हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 2.22 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल लागत का 6 प्रतिशत है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग क्रमशः 115, 106, 49 और 35 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को क्रियान्वित कर रहे हैं। इनकी संबंधित लागत क्रमशः 4.30 लाख करोड़ रुपए, 6.40 लाख करोड़ रुपए, 3.41 लाख करोड़ रुपए और 1.95 लाख करोड़ रुपए है।

बयान में कहा गया कि शेष 169 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (9 प्रतिशत) विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अंतर्गत आते हैं। इनकी कुल लागत 2.62 लाख करोड़ रुपए है, जो सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 7 प्रतिशत है।

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व्यापार

सोने की कीमतों में मामूली बदलाव, चांदी 1.95 लाख रुपए के नीचे स्थिर

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सोने और चांदी ने सोमवार को एक सीमित दायरे में कारोबार किया। इससे सोने का दाम 1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 1.95 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे स्थिर रहा।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 80 रुपए बढ़कर 1,41,710 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,41,630 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,29,806 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,29,733 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

वहीं, 18 कैरेट सोने का दाम 1,06,223 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,06,283 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है।

सोने के चांदी की कीमतों में भी मामूली बदलाव देखा गया है।

चांदी का दाम 64 रुपए बढ़कर 1,94,479 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 1,94,415 रुपए प्रति किलो था।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में तेजी देखी जा रही है।

कॉमेक्स पर खबर लिखे जाने तक सोने का दाम 0.55 प्रतिशत बढ़कर 4,029 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 0.26 प्रतिशत बढ़कर 54.09 डॉलर प्रति औंस हो गया है।

जानकारों ने कहा कि सोना कारोबारी सत्र में एक सीमित दायरे में रहा। हालांकि, कॉमेक्स पर सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम सपोर्ट स्तर के आसपास टिकने में कामयाब रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं के चलते डॉलर को मजबूती मिल रही है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस हफ्ते सबकी नजरें फेड के नीतिगत फैसले पर टिकी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि महंगाई की चिंताओं और अमेरिकी चुनावों से जुड़ी अनिश्चितता के बीच, बाजार के प्रतिभागी ब्याज दरों के भविष्य और केविन वॉर्श के मार्गदर्शन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। नीतिगत फैसले से पहले कॉमेक्स पर सोने की कीमत 3,950 डॉलर से 4,100 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। इसके बाद, अगला ट्रेंड फेड के फैसले और उनकी टिप्पणी पर निर्भर करेगा।

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व्यापार

भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद की वापसी, मार्केटकैप करीब 5 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

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भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद दमदार वापसी की। दिन के अंत में सेंसेक्स 482.92 अंक या 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,606.75 और निफ्टी 153.20 अंक या 0.68 प्रतिशत की मजबूती के साथ 22,675 पर बंद हुआ।

इस तेजी से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 456 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो कि शुक्रवार को करीब 451 लाख करोड़ रुपए था।

बाजार में व्यापक आधार पर तेजी देखी गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 245.55 अंक या 1.38 प्रतिशत की तेजी के साथ 17,985.00 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 664.75 अंक या 1.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ 56,465.40 पर बंद हुआ।

सूचकांकों में निफ्टी मेटल (2.21 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (1.77 प्रतिशत) और निफ्टी फार्मा (1.76 प्रतिशत) की मजबूती के साथ टॉप गेनर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी कमोडिटीज (1.60 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (1.46 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (1.35 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (1.25 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (1.18 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (1.12 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग (1.03 प्रतिशत) और निफ्टी आईटी (0.87 प्रतिशत) की मजबूती के साथ सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांक थे।

केवल निफ्टी मीडिया (0.34 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (0.21 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुए।

सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इंडिगो, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, इन्फोसिस, एक्सिस बैंक, एलएंडटी, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, टाइटन, आईटसीआईसीआई बैंक,टेक महिंद्रा, टीसीएस, एसबीआई और एमएंडएम गेनर्स थे।

दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक और पावर ग्रिड लूजर्स थे। वहीं, एचयूएल और सन फार्मा सपाट बंद हुए।

जानकारों ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार आज के सत्र में रिकवरी देखने को मिली, जिसमें वैल्यू बाइंग और मेटल, बिजली और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों का मजबूती का योगदान रहा। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और फेड, ईसीबी और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों से पहले बरती जा रही सतर्कता ने बाजार के रुख को संतुलित रखा।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले सप्ताह की तेज गिरावट के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी कुछ सुधार देखने को मिला, हालांकि निवेशक चुनिंदा बने रहे और उन्होंने मुनाफे की स्पष्टता और बेहतर वैल्यूएशन को प्राथमिकता दी। शुरुआती तिमाही नतीजों से संकेत मिलता है कि बिजली उत्पादन, धातु और रिफाइनिंग क्षेत्रों में कमोडिटी-आधारित मुनाफे में वृद्धि होगी, लेकिन उच्च ऊर्जा लागत और ब्याज दरों से आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की समग्र वृद्धि में कमी आने का अनुमान है।

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