राष्ट्रीय समाचार
केदारनाथ धाम में बीकेटीसी कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, मांगों को लेकर मंदिर के सामने निकाली रैली
केदारनाथ धाम में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी है। बुधवार को कर्मचारियों ने बाबा केदारनाथ मंदिर के सामने रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।
कर्मचारियों का कहना है कि 20 से 25 वर्षों से अल्प वेतन पर सेवा देने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री की वन टाइम सेटलमेंट की घोषणा को लागू करने और समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग उठाई।
केदारनाथ धाम में कड़ाके की ठंड के बीच मंदिर समिति के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कई दिनों से जारी प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने बुधवार को केदारनाथ मंदिर के सामने रैली निकालकर अपनी मांगें दोहराईं। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से भगवान की सेवा में जुटे हैं लेकिन उन्हें अब तक उचित वेतन और नियमितीकरण का लाभ नहीं मिल पाया है।
कर्मचारी आशुतोष शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2024 में कर्मचारियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट की घोषणा की थी लेकिन दो वर्ष बीतने के बावजूद इस पर अमल नहीं हुआ। कर्मचारियों ने बोर्ड को पहले ही नोटिस दिया था लेकिन सुनवाई नहीं होने पर उन्हें बाबा केदारनाथ के सामने याचना करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंदिर समिति के अध्यक्ष से जल्द मांगें पूरी करने की अपील की। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लागू करने की मांग उठाई।
वहीं, केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित उमेश चन्द्र पोस्ती ने भी कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्षों से धाम में भगवान की सेवा और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कई कर्मचारी आठ से बारह घंटे के बजाय 20 घंटे तक काम करते हैं लेकिन उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से वन टाइम सेटलमेंट की मांग पर जल्द निर्णय लेने और समान कार्य-समान वेतन का सिद्धांत लागू करने की अपील की। पूरा तीर्थ पुरोहित समाज कर्मचारियों के साथ खड़ा है और उनकी मांगों का जल्द समाधान होना चाहिए ताकि धाम की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलती रहें।
राजनीति
यूपी चुनाव 2027: कानपुर नगर की इन विधानसभा सीटों पर 2022 में ऐसे रहे थे समीकरण

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानपुर नगर जिले का बड़ा महत्व है। कानपुर भारत के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है। यह गंगा नदी के दक्षिणी तट पर बसा हुआ है और प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 80 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।
कानपुर नगर जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें बिल्हौर, बिठूर, कल्याणपुर, गोविंदनगर, सीसामऊ, आर्यनगर, किदवई नगर, कानपुर कैंट, महाराजपुर और घाटमपुर के नाम शामिल हैं।
बिल्हौर (सुरक्षित) सीट उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 209वें नंबर की है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और कानपुर नगर जिले में आती है। लोकसभा चुनाव में यह क्षेत्र मिश्रिख संसदीय सीट के अंतर्गत आता है। 2022 के चुनाव में इस सीट पर लगभग 3,92,993 पंजीकृत मतदाता थे। मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के मोहित सोनकर बच्चा हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी की रचना सिंह को हराया था।
बिठूर के मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के अभिजीत सिंह सांगा हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में उन्होंने करीब 44.46 प्रतिशत वोट प्राप्त कर समाजवादी पार्टी के मुनींद्र शुक्ला को हराया था। यहां मतदान प्रतिशत 65.63 प्रतिशत रहा था।
कल्याणपुर उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 211वीं सीट है और कानपुर नगर जिले में स्थित है। यह एक सामान्य अनारक्षित सीट है। पिछले चुनाव में इस सीट पर लगभग 3,55,100 पंजीकृत मतदाता थे। मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी की नीलिमा कटियार हैं।
गोविंद नगर से मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के सुरेंद्र मैथानी हैं। उन्होंने 2022 के चुनाव में करीब 61.13 प्रतिशत वोट प्राप्त कर समाजवादी पार्टी के सम्राट विकास यादव को बड़े वोटों के अंतर से हराया था। यहां मतदान प्रतिशत 54.87 प्रतिशत रहा था।
2022 के विधानसभा चुनाव में सीसामऊ सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार इरफान सोलंकी जीते थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सलिल विश्नोई को हराया था।
आर्य नगर सीट उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 214वें नंबर की है और कानपुर नगर जिले में आती है। यह सामान्य अनारक्षित सीट है और लोकसभा में कानपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आती है। मौजूदा विधायक समाजवादी पार्टी के अमिताभ बाजपेयी हैं। उन्होंने 2022 के चुनाव में करीब 50.56 प्रतिशत वोट प्राप्त कर भाजपा के सुरेश अवस्थी को हराया था। यहां मतदान प्रतिशत 50.97 प्रतिशत रहा था।
किदवई नगर 403 सीट में से 215वीं सीट है और कानपुर नगर में स्थित है। यह सामान्य अनारक्षित सीट है। पिछले चुनाव में यहां लगभग 3,48,846 पंजीकृत मतदाता थे। मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के महेश त्रिवेदी हैं।
कानपुर कैंट (छावनी) से समाजवादी पार्टी के मोहम्मद हसन रूमी विधायक हैं। उन्होंने 2022 के चुनाव में करीब 49.99 प्रतिशत वोटों से जीत हासिल की और भाजपा के रघुनंदन सिंह भदौरिया को हराया था। यहां का मतदान प्रतिशत 52.40 प्रतिशत रहा था।
महाराजपुर 403 में से 217वीं सीट है और कानपुर नगर जिले में स्थित है। यह सामान्य अनारक्षित सीट है। पिछले चुनाव में यहां लगभग 4,48,458 पंजीकृत मतदाता थे। मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के सतीश महाना हैं।
घाटमपुर सुरक्षित सीट है। यहां से अपना दल (सोनेलाल) की सरोज कुरील विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में सरोज कुरील ने समाजवादी पार्टी के भगवती सागर को 14,474 वोटों के अंतर से हराया था।
अगर इस जिले की बात करें तो वायु मार्ग से लखनऊ का अमौसी यहां का निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर है। कानपुर का अपना भी एक हवाई अड्डा है चकेरी एयरपोर्ट। रेल मार्ग से कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ा है। दिल्ली, वाराणसी, लखनऊ, हावड़ा, गोरखपुर, झांसी, कन्नौज, मथुरा, आगरा, बांदा, मुंबई, चेन्नई, जबलपुर, भोपाल, मानिकपुर आदि शहरों के लिए नियमित रेलगाड़ियां हैं। शताब्दी, राजधानी, नीलांचल, मगध, विक्रमशिला, वैशाली, गोमती, संगम, पुष्पक आदि ट्रेनें कानपुर से होकर गुजरती हैं। सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग 2 इसे दिल्ली, प्रयागराज, आगरा और कोलकाता से जोड़ता है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग 25 कानपुर को लखनऊ, झांसी और शिवपुरी से जोड़ता है।
इसे प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस शहर की स्थापना सचेंदी राज्य के राजा हिंदू सिंह ने की थी। कानपुर का मूल नाम कान्हपुर था। जिले के बारे में इतिहास बताता है कि अवध के नवाबों के शासनकाल के अंतिम चरण में यह नगर पुराना कानपुर, पटकापुर, कुरसवां, जुही और सीमामऊ गांवों के मिलने से बना था।
राष्ट्रीय समाचार
आरक्षित श्रेणियों के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा में निकली भर्ती, सीनियर मैनेजर सहित 11 पदों पर आवेदन शुरू, जानें कौन पात्र

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जो लोग नौकरी की तलाश में जुटे हैं, उनके लिए एक खास मौका सामने आया है। दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने विशेष भर्ती अभियान-2026 के तहत आरक्षित श्रेणियों (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग) के उम्मीदवारों के लिए बैकलॉग रिक्तियों के अंतर्गत नियमित आधार पर विभिन्न 11 पदों पर भर्ती की घोषणा एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके की है।
बीओबी की ओर से जारी 11 रिक्तियों में सीनियर मैनेजर – प्रोजेक्ट फाइनेंस – इंफ्रास्ट्रक्चर और ईएसजी (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – एमएसएमई क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – एंटरप्राइज और ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – फ्रॉड इंसिडेंस और रूट कॉज एनालिसिस (एमएमजी/एस-III) का 1, मैनेजर – डिजिटल फ्रॉड (एमएमजी/एस-II) के 2, सीनियर मैनेजर – एमएसएमई रिलेशनशिप (एमएमजी/एस-III) का 1, सीनियर मैनेजर – बिजनेस फाइनेंस (एमएमजी/एस-III) के 2 और चीफ मैनेजर – इंटरनल कंट्रोल्स (एसएमजी/एस-IV) के 2 पद शामिल हैं।
इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 28 अक्टूबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 17 नवंबर तक तय की गई है। जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे बीओबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से सीनियर मैनेजर – प्रोजेक्ट फाइनेंस – इंफ्रास्ट्रक्चर और ईएसजी, सीनियर मैनेजर – एमएसएमई क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट और सीनियर मैनेजर – एंटरप्राइज और ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या संबंधित क्षेत्र में फुल-टाइम एमबीए/पीजीडीएम या इसके समकक्ष योग्यता; सीनियर मैनेजर – फ्रॉड इंसिडेंस और रूट कॉज एनालिसिस के लिए एनालिटिक्स, डेटा साइंस, फाइनेंस या अकाउंटिंग के क्षेत्र में बैचलर या मास्टर डिग्री या चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या कंपनी सेक्रेटरी (सीएस); मैनेजर – डिजिटल फ्रॉड के लिए कंप्यूटर साइंस/आईटी/डेटा साइंस/एमसीए में ग्रेजुएशन/पोस्ट-ग्रेजुएशन डिग्री; सीनियर मैनेजर – एमएसएमई रिलेशनशिप के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री; सीनियर मैनेजर – बिजनेस फाइनेंस और चीफ मैनेजर – इंटरनल कंट्रोल्स के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन और योग्यता से चार्टर्ड अकाउंटेंट होने चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास पद के अनुसार प्रासंगिक क्षेत्र में निर्धारित न्यूनतम 3 से 8 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है।
आवेदकों की न्यूनतम आयु पोस्ट के अनुसार 24 से 30 वर्षों के बीच और अधिकतम आयु 34 से 40 वर्षों के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, ऑनलाइन टेस्ट, साइकोमेट्रिक टेस्ट या अन्य टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और/या इंटरव्यू (या इंटरव्यू के कई दौर) और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित की सैलरी 64,820 से 1,20,940 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, अभ्यर्थियों को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 850 रुपए और एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी, ईएसएम/डीईएसएम और महिला उम्मीदवारों के लिए 175 रुपए तय किया गया है।
राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर के बारामूला में रेत निकालते समय दो युवकों की मौत

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में रेत निकालते समय दो युवक जिंदा दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को जिले के रफियाबाद इलाके के दचनपोरा में रेत निकालते समय दो युवक रेत के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
यह हादसा देर रात दचनपोरा में हुआ, जब रेत निकालते समय रेत का ढेर ढह गया और दोनों युवक वहीं दब गए।
उनके शव पूरी रात रेत में दबे रहे और बुधवार सुबह स्थानीय लोगों की कड़ी मशक्कत के बाद निकाले जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालने में मदद की।
मृतकों की पहचान 28 वर्षीय जावेद अहमद मीर और 29 वर्षीय मोहम्मद अनीस मलिक के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों दचनपोरा के ही रहने वाले थे। दोनों के शव मिलने के बाद पूरे गांव में मातम छा गया।
पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और मौतों से जुड़े हालात की जांच शुरू कर दी है। अभी और जानकारी का इंतजार है।
जम्मू-कश्मीर में निर्माण उद्योग के लिए रेत निकालना एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है, लेकिन इसमें अवैध खनन, पर्यावरण को नुकसान और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियां भी शामिल हैं।
‘जम्मू-कश्मीर माइनर मिनरल कंसेशन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन एंड प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग रूल्स, 2016’ के तहत छोटे खनिजों के खनन को नियंत्रित किया जाता है। इसमें नदी तल से मिलने वाली सामग्री (आरबीएम) जैसे रेत, गाद, बजरी और पत्थर शामिल हैं।
कानूनी रूप से खनन करने के लिए एक स्वीकृत माइनिंग प्लान, पर्यावरण मंजूरी (ईसी) और संबंधित अधिकारियों से काम करने की अनुमति (कंसेंट टू ऑपरेट) लेना जरूरी है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अक्सर नदी तल में बिना अनुमति या बिना नियम-कानून के किए जाने वाले खनन पर जुर्माना लगाता है।
अक्सर नावों या नदी के किनारों से हाथों से रेत निकालने के काम में डूबने और रेत के ढेर ढहने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है।
इस महीने की शुरुआत में, बारामूला जिले के पट्टन इलाके में, सिंगपोरा में रेत निकालते समय सिर पर गंभीर चोट लगने से 17 वर्षीय एक लड़के की मौत हो गई थी।
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