अंतरराष्ट्रीय
ईरान आने वाले हफ्तों में और कमजोर हो जाएगा : मार्को रुबियो
वॉशिंगटन, 28 मार्च: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान “समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे” चल रहा है। और उम्मीद जताई कि इसके लक्ष्य “महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में” पूरे हो जाएंगे। यह बयान वाशिंगटन द्वारा तेहरान के खिलाफ अपने अभियान में तेज़ी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पेरिस में जी7 सहयोगियों के साथ बैठकों के बाद बोलते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इस मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय की गई थी।
उन्होंने कहा, “हम ईरान की नौसेना को नष्ट करेंगे, उनकी वायुसेना को नष्ट करेंगे। हम मूल रूप से उनकी मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को उनकी फैक्ट्रियों में खत्म कर देंगे।”
उन्होंने जोड़ा कि इस अभियान का उद्देश्य “मिसाइल लॉन्चरों की संख्या को काफी कम करना” है, ताकि ईरान “इनके पीछे छिपकर परमाणु हथियार बनाने और दुनिया को धमकाने” में सक्षम न रहे।
रुबियो ने कहा कि प्रगति लगातार हो रही है। “हम इस ऑपरेशन में समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे हैं और उम्मीद है कि इसे उचित समय पर महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरा कर लिया जाएगा। प्रगति बहुत अच्छी है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं होगी। इन लक्ष्यों को बिना किसी ग्राउंड ट्रूप्स के हासिल किया जा सकता है।
रुबियो ने ऑपरेशन के बाद संभावित जोखिमों की भी चेतावनी दी, खासकर होर्मुज जलडमरू मध्य में, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि ईरान वहां टोल प्रणाली लागू करने की कोशिश कर सकता है, जिसे उन्होंने “अवैध”, “अस्वीकार्य” और “दुनिया के लिए खतरनाक” बताया।
उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि दुनिया इसके खिलाफ एक योजना बनाए,” और जोड़ा कि अमेरिका इसमें भाग लेने के लिए तैयार है, “लेकिन हमारे लिए इसका नेतृत्व करना जरूरी नहीं है।”
रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि जी7 के अलावा, खासकर एशिया के देशों की भी इसमें बड़ी हिस्सेदारी है और उन्हें यह सुनिश्चित करने में योगदान देना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग किसी “राष्ट्र-राज्य या आतंकवादी सरकार” के नियंत्रण में न हों।
उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण को सहयोगियों का व्यापक समर्थन मिला है। इस विचार के प्रति काफी समर्थन दिखा…और इसे काफी हद तक स्वीकार किया गया।
अभियान का बचाव करते हुए, रुबियो ने ईरान की सरकार और वहां की जनता के बीच अंतर बताया। उन्होंने कहा, ईरान के लोग शानदार हैं। वे इससे कहीं बेहतर के हकदार हैं जबकि नेतृत्व को “कट्टर शिया धर्मगुरु शासन” बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह शासन देश की संपत्ति का इस्तेमाल “आतंकवाद को बढ़ावा देने, रॉकेट, ड्रोन, मिसाइल और समुद्री माइंस बनाने” में कर रहा है बजाय विकास में निवेश करने के।
रुबियो ने कहा, “ईरान पहले से ही कमजोर था। जब हम अगले कुछ हफ्तों में अपना काम पूरा कर लेंगे, तो वे हाल के इतिहास की तुलना में और भी कमजोर होंगे।” उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे शासन को परमाणु हथियार हासिल करने देना “पागलपन” होगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर रुबियो ने शांति स्थापित करने में अमेरिका की भूमिका निभाने की तत्परता दोहराई। उन्होंने कहा, “हम उस युद्ध को खत्म करने के लिए जो भी रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं, उसके लिए तैयार हैं।” हालांकि फिलहाल कोई बैठक तय नहीं है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर यूक्रेन के लिए निर्धारित अमेरिकी सैन्य आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को सैन्य जरूरत होती है…तो हमारे संसाधनों के मामले में हम हमेशा पहले आएंगे।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
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