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भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला, सेंसेक्स में 400 अंकों की उछाल
मुंबई, 9 फरवरी : सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स अपने पिछले बंद (83,580.40) से 597.11 अंक उछलकर 84,177.51 पर खुला, तो वहीं निफ्टी अपने पिछले बंद (25,693.70) से 195 अंकों की बढ़त के साथ 25,888.70 पर खुला।
खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.30 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 441.77 अंकों यानी 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 84,022.17 पर था, जबकि एनएसई निफ्टी 128.95 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की उछाल के साथ 25,822.65 पर ट्रेड कर रहा था।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की तेजी देखी गई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.76 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।
विभिन्न सेक्टर्स में, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल देखने को मिली, तो वहीं निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 1.7 प्रतिशत और निफ्टी मेटल इंडेक्स में 0.9 प्रतिशत की तेजी देखी गई।
सेंसेक्स पैक में, एसबीआई, टाइटन, इटरनल, कोटक बैंक, टाटा स्टील, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, इंडिगो के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली और ये टॉप गेनर्स में शामिल रहे। तो वहीं पावर ग्रिड, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एचयूएल और आईसीआईसीआई के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले शेयर रहे।
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि पिछले सत्र में निफ्टी50 की शुरुआत कमजोर रही और दिन के पहले हिस्से में बिकवाली का दबाव बना रहा। हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में जोरदार रिकवरी देखने को मिली और निचले स्तरों से करीब 210 अंकों की बढ़त के साथ इंडेक्स 25,693.70 पर बंद हुआ। यह दर्शाता है कि निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी मजबूत रही। तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 25,850-25,900 का दायरा नजदीकी रेजिस्टेंस है, जबकि 25,550-25,600 के स्तर पर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है।
एक्सपर्ट ने कहा कि पिछले कारोबारी दिन, शुक्रवार यानी 6 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बाजार में 1,950 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,265 करोड़ रुपए से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की।
एक्सपर्ट ने आगे बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बने अस्थिर बाजार माहौल में ट्रेडर्स को अनुशासन बनाए रखने और चुनिंदा रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस करना बेहतर रहेगा। निफ्टी के 26,000 के ऊपर स्पष्ट ब्रेकआउट दिखाने के बाद ही नई लॉन्ग पोजिशन बनानी चाहिए, क्योंकि इससे बाजार की समग्र धारणा में स्थायी सुधार के संकेत मिलेंगे।
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कच्चे तेल में तेजी के बीच लाल निशान में खुला शेयर बाजार, बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली

कच्चे तेल में लगातार जारी तेजी के बीच भारतीय शेयर की शुरुआत मंगलवार को कमजोरी के साथ हुई। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 203 अंक या 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,099 और निफ्टी 50 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,042 पर था।
शुरुआती कारोबार में बिकवाली का नेतृत्व बैंकिंग शेयर कर रहे थे। निफ्टी बैंक में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट थी। इसके अलावा, फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी फार्मा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी हेल्थकेयर लाल निशान में थे। दूसरी तरफ, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी ऑटो हरे निशान में थे।
हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 157 अंक या 0.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,405 और निफ्टी स्मॉलकैप 103 अंक या 18,004 पर था।
सेंसेक्स पैक में कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, एमएंडएम, एलएंडटी, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईटीसी, एनटीपीसी, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड और सन फार्मा गेनर्स थे। एसबीआई, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, ट्रेंड, टाइटन, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग लाल निशान में थे। हालांकि, बैंकॉक और सोल में हरे निशान में थे। अमेरिका शेयर बाजार सोमवार को मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ,जबकि टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
बाजार में कमजोरी की वजह कच्चे तेल में लगातार तेजी को माना जा रहा है, जो कि मंगलवार को 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
कॉमेक्स पर ब्रेंट क्रूड का दाम 0.97 प्रतिशत बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 1.05 प्रतिशत बढ़कर 97.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल में तेजी ऐसे समय पर देखी जा रही है, जब अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। अमेरिका को दिए प्रस्ताव में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार हो गया था और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हटने के बाद परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने को तैयार था, लेकिन अमेरिका का मानना है कि दोनों मुद्दों का हल एक साथ निकाला जाना चाहिए, अन्यथा उसका पक्ष कमजोर हो जाएगा।
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मार्केट आउटलुक : फेड, कच्चा तेल, ईरान-अमेरिका वार्ता और आर्थिक आंकड़े अगले हफ्ते निर्धारित करेंगे शेयर बाजार की चाल

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। अमेरिकी फेड की बैठक, चौथी तिमाही के नतीजे, ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी।
ब्याज दरों पर अमेरिकी फेड की बैठक 28-29 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।
इसके अलावा, ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता पर नए अपडेट भी बाजार को प्रभावित करेंगे। फिलहाल के लिए दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को टाल दिया गया है। वहीं, अगले हफ्ते कच्चे तेल की चाल पर भी निवेशकों की निगाहें होंगी। फिलहाल वैश्विक अस्थिरता के कारण उच्च स्तर पर बना हुआ है।
नतीजों के सीजन के चलते घरेलू बाजारों में आगामी हफ्ते में हलचल बनी रहने उम्मीद है। इस दौरान एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, कोल इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक, एसबीआई कार्ड्स, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, इटरनल, मारुति सुजुकी, अदाणी पावर, एसीसी, अदाणी एंटरप्राइजेज और गोदरेज एग्रोवेट जैसी कंपनियां अपने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी।
इसके अतिरिक्त,सरकार द्वारा इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन के आंकड़े 28 अप्रैल को जारी किए जाएंगे, जिस पर निवेशकों की निगाहें होंगी।
बीता हफ्ता भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस दौरान सेंसेक्स 1,829.33 अंक या 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,664.21 और निफ्टी 455.60 अंक या 1.87 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,897.95 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया। निफ्टी आईटी में 10.31 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। निफ्टी ऑटो 2.96 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 2.54 प्रतिशत,निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.49 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.37 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.13 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में था।
वहीं, निफ्टी एनर्जी 2.63 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 2.23 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.56 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.53 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
व्यापार
भारत में 7 हफ्तों में पहली बार 106 मिलियन डॉलर का आया निवेश: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले सप्ताह के दौरान 106 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया है, जो पिछले सात हफ्तों में पहली बार सकारात्मक रहा है।
एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, यह इनफ्लो पिछले छह हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी (आउटफ्लो) के बाद आया है, जिससे संकेत मिलता है कि भारत-केंद्रित फंड्स से बिकवाली का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि साप्ताहिक आउटफ्लो पहले के 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर करीब 180 मिलियन डॉलर रह गया है।
इस बीच, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) ने रिकवरी में अहम भूमिका निभाई और इस हफ्ते 220 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जबकि लॉन्ग-ओनली फंड्स में अभी भी लगभग 400 मिलियन डॉलर की निकासी देखी गई।
खास बात यह रही कि अमेरिका स्थित फंड्स, जो हाल के हफ्तों में भारी बिकवाली कर रहे थे, उन्होंने सात हफ्तों की लगातार निकासी (कुल 3.3 अरब डॉलर) के बाद इस हफ्ते 225 मिलियन डॉलर का निवेश किया।
हालांकि, सुधार के बावजूद भारत-केंद्रित निवेश रणनीतियों में लगातार नौ हफ्तों से निकासी जारी है।
वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति चौथे हफ्ते भी मजबूत बनी रही, जिसमें प्रमुख फंड कैटेगरी में लगातार निवेश आ रहा है।
अमेरिकी इक्विटी फंड्स में पिछले एक महीने में हर हफ्ते 10 अरब से 22 अरब डॉलर तक का निवेश आया, जबकि ग्लोबल फंड्स में 16 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया।
ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (जीईएम) फंड्स में हर हफ्ते करीब 2 अरब डॉलर तक का निवेश जारी रहा, जबकि इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का निवेश आया।
इसके विपरीत, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेश निकल रहा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रुझान दिखाता है।
कमोडिटी से जुड़े इक्विटी फंड्स में हाल के समय में तेजी के बाद अब निवेश की रफ्तार धीमी हो गई है।
साथ ही, ऊर्जा सेक्टर के फंड्स में निकासी कम हुई है, सोने में निवेश की गति धीमी गति से स्थिर हुई है, जबकि चांदी से जुड़े फंड्स में निवेश कमजोर बना हुआ है।
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