व्यापार
भारत में 2025 में सस्ते 5जी स्मार्टफोन के शिपमेंट में रिकॉर्ड 1,900 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 9 फरवरी : साल 2025 में भारत में सस्ते 5जी स्मार्टफोन की शिपमेंट (डिलीवरी) में साल-दर-साल आधार पर 1,900 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। इसकी बड़ी वजह आक्रामक कीमतें, एंट्री-लेवल 5जी चिपसेट की बेहतर उपलब्धता और देश भर में 5जी नेटवर्क का तेजी से विस्तार रहा।
साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का स्मार्टफोन बाजार एक बड़े बदलाव के दौर में पहुंच गया। इस दौरान सस्ते 5जी फोन की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और महंगे (प्रीमियम) स्मार्टफोन की मांग भी बनी रही। सबसे बड़ा बदलाव 6,000 से 8,000 रुपए की कीमत वाले फोन सेगमेंट में देखने को मिला।
रिपोर्ट में बताया गया कि कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में 5जी फोन की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत रही, जो सालाना आधार पर 12 प्रतिशत ज्यादा है। इससे साफ है कि 5जी अब सिर्फ महंगे फोन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।
भारत में एप्पल ने सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और मार्केट शेयर 9 प्रतिशत तक पहुंच गया। आईफोन 16 सीरीज में बेस मॉडल आईफोन 16 की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत रही, जिससे पता चलता है कि लोग प्रो या प्लस मॉडल के बजाय कम कीमत वाले मॉडल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सीएमआर की सीनियर एनालिस्ट मेनका कुमारी ने कहा, “2025 भारत के स्मार्टफोन बाजार के लिए गिरावट का नहीं, बल्कि दोबारा संतुलन बनाने का साल रहा। भले ही कुल बिक्री में थोड़ी कमी आई हो, लेकिन सस्ते 5जी फोन की तेजी, महंगे फोन की स्थिर मांग और नए ब्रांड्स के उभरने से यह साफ है कि बाजार कमजोर नहीं हो रहा, बल्कि बदल रहा है।”
2025 में 6.7 इंच या उससे बड़े डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत रही, जिससे साफ है कि अब ग्राहक बड़े स्क्रीन वाले फोन ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्मार्टफोन चिपसेट बाजार में मीडियाटेक 45 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। वहीं, प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में क्वालकॉम ने 34 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ बढ़त बनाए रखी।
सीएमआर में इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप के एनालिस्ट पंकज जादली ने कहा कि 2026 में कंपोनेंट और मेमोरी की बढ़ी हुई लागत के चलते स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। इसका असर यह होगा कि साल भर उपभोक्ताओं का खरीदारी व्यवहार ज्यादा सोच-समझकर और सीमित रहेगा।
उन्होंने बताया कि उपभोक्ता स्मार्टफोन बाजार से दूर नहीं हुए हैं, बल्कि वे अब ज्यादा चयनशील हो गए हैं। लोग अपने मौजूदा फोन का इस्तेमाल लंबे समय तक कर रहे हैं और तभी अपग्रेड कर रहे हैं, जब उन्हें नए डिवाइस में वाकई बेहतर वैल्यू नजर आती है।
व्यापार
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलना बेहद जरूरी, घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम: सऊदी अरामको सीईओ

सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं, लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं, जिससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला अल्पकालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा।
नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन बाजारों पर दबाव बना रह सकता है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है।
अरामको प्रमुख ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुल जाने के बाद भी वैश्विक तेल भंडार को दोबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने में करीब दो वर्ष तक का समय लग सकता है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान दबाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम अवधि तक भी बने रह सकते हैं।
गौरतलब है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, को प्रभावित किया था। इसके चलते तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने निर्यात बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नतीजतन, कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तरों के करीब पहुंचने लगी है।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने तेल परिवहन बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के टैंकर बेड़ों का उपयोग बढ़ाया है। वहीं सऊदी अरामको ने रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और हालिया हमले के बाद प्रभावित हुई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को भी लगभग 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है।
इसके बावजूद बाजार में खतरे की धारणा बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल बाजार अभी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को कीमतों में शामिल कर रहा है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि निवेशक अभी भी संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंतित हैं।
व्यापार
संचार साथी पोर्टल पर विजिट्स 30 करोड़ के पार; 5,000 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी रोकने में मिली मदद

संचार साथी पोर्टल पर मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से कुल विजिट्स की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो गई है और इससे 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के संदिग्ध साइबर-फ्रॉड से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिली है। यह जानकारी संचार मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इससे 14 लाख से ज्यादा खोए और चोरी हुए हैंडसेट बरामद करने में भी मदद मिली है। साथ ही, इसने अपने नाम पर मौजूद मोबाइल कनेक्शन के बारे में जानने के लिए नागरिकों के 4 करोड़ से ज्यादा अनुरोधों का समाधान किया गया।
दूरसंचार विभाग (डीओटी) की ओर से विकसित किया गया यह पोर्टल हर मोबाइल यूजर को आसान और इस्तेमाल में सरल टूल देता है, जिनसे वे संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट कर सकते हैं, यह जान सकते हैं कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं, खोए या चोरी हुए हैंडसेट को ब्लॉक कर सकते हैं, और हैंडसेट खरीदने से पहले यह पता कर सकते हैं कि वह असली है या नहीं।
मंत्रालय ने बताया कि पोर्टल पर हर विजिट नागरिक की सुरक्षा करती है और उनके द्वारा रिपोर्ट किया गया हर संदिग्ध कम्युनिकेशन कई अन्य लोगों की सुरक्षा करता है। ‘संचार साथी’ पर नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी को ऐसी काम की जानकारी में बदला जाता है, जिससे डीओटी, बैंकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को धोखेबाजों को उनके अगले शिकार तक पहुंचने से पहले ही रोकने में मदद मिलती है। इस तरह, ‘संचार साथी’ का इस्तेमाल करने वाला हर नागरिक एक साइबर वॉरियर और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक ढाल के तौर पर काम करता है।
संचार साथी पोर्टल को आसान और यूजर-फ्रेंडली सर्विस प्रोसेस के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें पब्लिक डैशबोर्ड और टेलीकॉम सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और जिम्मेदार डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में व्यापक जानकारी शामिल है। अंग्रेजी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध संचार साथी मोबाइल ऐप नागरिकों को ये सभी सेवाएं उनकी अपनी भाषा में और मोबाइल पर इस्तेमाल करने की सुविधा के साथ देता है।
व्यापार
विमान से सफर करना होगा महंगा, इंडिगो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बढ़ाएगा फ्यूल चार्ज

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने सोमवार को ऐलान किया कि वह एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में वृद्धि के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज में इजाफा करने जा रही है।
एयरलाइन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह बढ़ोतरी मंगलवार से बुक होने वाली उसकी सभी उड़ानों पर लागू होगी।
एयरलाइन ने कहा, “ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल ही में महीने-दर-महीने कीमतों में 14 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी के कारण एटीएफ की लागत पिछले एक दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) एयरलाइन की ऑपरेटिंग लागत का एक बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इस बढ़ोतरी का असर एयरलाइंस की लागत संरचना और नेटवर्क इकोनॉमिक्स पर पड़ने की उम्मीद है, जिसमें इंडिगो भी शामिल है।”
एयरलाइन ने बताया कि घरेलू मार्ग पर 500 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 375 रुपए, 501 से 1,000 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 600 रुपए, 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ानों के लिए 900 रुपए, 1,501 से 2,000 किलोमीटर की उड़ानों के लिए 1,150 रुपए और 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ानों के लिए 1,300 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा।
वहीं, इंटरनेशनल रूट पर, सार्क क्षेत्र के अंदर 500 किलोमीटर तक की दूरी वाली उड़ानों पर 1,000 रुपए और 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाली उड़ानों पर 3,000 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा। साउथ-ईस्ट एशिया, जीसीसी, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ व ईस्ट एशिया जाने वाली उड़ानों पर 5,500 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा, जबकि अफ्रीका और यूरोप जाने वाली उड़ानों पर 6,000 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा।
कंपनी ने कहा, “ईंधन की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए ईंधन शुल्क में काफी ज्यादा बढ़ोतरी की जरूरत है, लेकिन ग्राहकों पर असर कम करने के लिए इंडिगो ने एक संतुलित और अपेक्षाकृत मामूली बदलाव किया है।”
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बीते 3 महीने में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिससे एयरलाइन के लिए परिचालन काफी महंगा हो गया है।
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