व्यापार
साल के आखिरी दिन हरे निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, मेटल स्टॉक्स में शानदार उछाल
मुंबई, 31 दिसंबर: कैलेंडर वर्ष 2025 के आखिरी और सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला और प्रमुख बेंचमार्कों में अच्छी बढ़त देखने को मिली।
शुरुआती कारोबारी सत्र में खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 215 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की उछाल के साथ 84,890 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। तो वहीं एनएसई निफ्टी 66.95 (0.26 प्रतिशत) अंकों की बढ़त के साथ 26,005.80 पर ट्रेड करता नजर आया। इस दौरान निफ्टी के सभी इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
इसी के साथ निफ्टी 50 इंडेक्स लगातार 10वें साल बढ़त के साथ साल खत्म करने की ओर बढ़ रहा है। अब तक इसमें करीब 10 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। वहीं, सेंसेक्स इस साल लगभग 8.3 प्रतिशत ऊपर है।
व्यापक बाजार की बात करें, तो निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.52 प्रतिशत ऊपर रहा।
वहीं सेक्टर के हिसाब से देखें, तो बुधवार को निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे आगे रहा और इसमें 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। इसके अलावा निफ्टी मीडिया और निफ्टी केमिकल्स भी बढ़त वाले सेक्टर रहे।
सेंसेक्स पैक में टाटा स्टील, बीईएल, ट्रेंट, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, टाइटन, एचयूएल और एनटीपीसी टॉप गेनर्स वाले शेयर रहे। तो वहीं बजाज फिनसर्व, टीसीएस, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, इटरनल और भारती एयरटेल टॉप लूजर्स वाले शेयरों में शामिल रहे।
चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि साल के अंत की वजह से बुधवार को कई विदेशी बाजार या तो बंद हैं या सीमित गतिविधि के साथ चल रहे हैं, इसलिए घरेलू बाजार में सीमित दायरे में कारोबार और कम उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। एशियाई बाजार मिले-जुले चल रहे हैं, जबकि अमेरिकी बाजार पिछली सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे शुरुआत में थोड़ा सतर्क माहौल रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हैं और रुपया भी स्थिर बना हुआ है, जिससे बड़ी गिरावट का जोखिम कम रहता है।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि तकनीकी तौर पर देखा जाए तो निफ्टी 50 अभी एक अच्छे कंसोलिडेशन फेज में है और लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी सकारात्मक है। निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 25,750-25,800 के बीच है, जबकि रेजिस्टेंस 26,050–26,100 के पास है। अगर निफ्टी इस रेजिस्टेंस के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो आगे 26,200-26,300 तक जाने की संभावना बन सकती है। वहीं अगर ऐसा नहीं हो पाता, तो इंडेक्स सीमित दायरे में ही घूमता रह सकता है।
उन्होंने कहा कि बैंक निफ्टी भी हाल की तेजी के बाद कंसोलिडेशन में है। इसका सपोर्ट 58,800-58,900 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 59,400-59,500 के बीच देखा जा रहा है। रेजिस्टेंस के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट आने पर आगे और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि नीचे फिसलने पर बाजार साइडवेज रह सकता है।
इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स कई महीनों के निचले स्तर के करीब बना हुआ है, जो सीमित इंट्राडे उतार-चढ़ाव का संकेत देता है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में बाजार में रेंज में ट्रेडिंग और गिरावट पर खरीद की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। हालांकि, कम लिक्विडिटी की वजह से अचानक उछाल आ सकता है, इसलिए ट्रेड करते समय सख्त स्टॉप-लॉस लगाने की सलाह दी जाती है।
व्यापार
मजबूत डॉलर से सोने और चांदी में गिरावट, दाम करीब 0.70 प्रतिशत घटे

सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली और इससे दोनों की कीमती धातुओं का दाम करीब 0.70 प्रतिशत घट गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,54,381 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले गिरावट के साथ 1,53,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
सुबह 10:30 बजे यह 828 रुपए या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,53,553 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,53,050 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,54,059 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई।
चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोंजिग 2,41,603 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,40,004 रुपए प्रति किलो पर था। खबर लिखे जाने तक यह 1,689 रुपए या 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,39,914 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,39,893 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,41,122 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में कमजोरी देखी जा रही थी। कॉमेक्स पर सोना 0.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,391 प्रति औंस और चांदी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66 डॉलर प्रति औंस पर था।
जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह डॉलर इंडेक्स में तेजी को माना जा रहा है। यह अभी 100 के ऊपर बना हुआ है, जो कि बीते चार हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद भी कीमती धातुओं में गिरावट की एक वजह है।
डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा डॉलर की दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं- यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक- के मुकाबले स्थिति को दिखाता है।
राष्ट्रीय समाचार
एआई के बढ़ते इस्तेमाल से चीन में युवाओं की नौकरियों पर मंडराया खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से काम करने के तौर-तरीके बदल रहे हैं। इससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ रही है, लेकिन नौकरियां जाने का डर भी बढ़ गया है, खासकर युवाओं में।
क्वार्ट्ज की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे बीजिंग अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में एआई को शामिल करने की कोशिश कर रहा है, इसका असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सर्विस तक हर क्षेत्र में कर्मचारियों पर दिखने लगा है।
इनमें से एक हैं बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन, जिन्होंने अपनी नौकरी तब गंवा दी जब उनकी कंपनी ने यह देखना शुरू किया कि क्या एआई इंसानों वाले कोडिंग के काम कर सकता है। फेई उन करीब 160 कर्मचारियों में से थे जिनकी कंपनी में छंटनी के दौरान नौकरी चली गई।
उन्होंने कहा कि एआई की क्षमता लगातार बेहतर हो रही है और कई मिड-लेवल प्रोग्रामिंग की नौकरियां अब आसानी से बदली जा सकती हैं। नौकरी जाने के बाद फेई ने टेक इंडस्ट्री से दूरी बना ली है और अब शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं, साथ ही अगले करियर के बारे में सोच रहे हैं।
चीन में एआई अपनाने की रफ्तार हैरान करने वाली है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म आईडीसी के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियां एआई मॉडल और एजेंट का इस्तेमाल कर रही थीं। पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गया। यह दिखाता है कि कंपनियां कितनी तेजी से खर्च कम करने और काम तेज करने के लिए इस तकनीक को अपना रही हैं।
इस बदलाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिख रहा है। लॉजिस्टिक्स में ह्यूमनॉइड रोबोट लगाए जा रहे हैं, जिनमें पार्सल छांटने की सुविधा भी शामिल है, जबकि स्वायत्त मशीनें ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे काम करने लगी हैं। शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट भी आम होते जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी से जुड़ी सेवाओं में लगे लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
लेबर मार्केट पर इसका असर ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन के युवाओं के लिए पहले से ही मुश्किलें हैं। देश में शहरी बेरोजगारी दर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन 16 से 24 साल के उन युवाओं में बेरोजगारी काफी ज्यादा है जो पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है। जानकारों का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से युवाओं के लिए स्थिर नौकरी पाना और भी मुश्किल हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि एआई के फायदे तो साफ हैं, लेकिन यह बदलाव बड़े सामाजिक परिणाम ला सकता है। ऑटोमेशन से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और आर्थिक विकास को मदद मिलेगी, लेकिन अगर नई नौकरियां जल्दी नहीं बनीं तो बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने से बेरोजगारी का दबाव और बढ़ सकता है और सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।
व्यापार
एफपीआई की बिकवाली सितंबर में 23,676 करोड़ रुपए रही, कच्चे तेल में तेजी और वैश्विक अस्थिरता ने बढ़ाया दबाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का आउटफ्लो सितंबर में अब तक (1 से 19 सितंबर) 23,676 करोड़ रुपए रहा है, इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार थे। यह जानकारी एनालिस्ट्स की ओर से दी गई।
हालांकि, विदेशी निवेशक प्राइमरी बाजार में लगातार खरीदार बने हुए हैं। सितंबर में अब तक, उन्होंने करीब 2,703 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो कि 2026 में एफपीआई द्वारा किया कुल निवेश 48,550 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ.वी.के. विजयकुमार ने कहा कि इससे सेकेंडरी मार्केट के सुस्त प्रदर्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी की कुछ हद तक वजह समझ में आती है।
पिछले हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला।
ऊंची एनर्जी कीमतों से महंगाई पर पड़ने वाले असर और आर्थिक विकास पर इसके नतीजों को लेकर चिंताएं बनी रहीं।
सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ।
एनालिस्ट्स का कहना है कि कई हफ्तों तक अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते के आखिर में मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे बड़े इंडेक्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार की धारणा को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहे। यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी ने ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी।
आगे चलकर, एफपीआई फ्लो पर ईरान-यूएस के बीच चल रहे टकराव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर का काफी असर पड़ेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और यूएस बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर (यूएस 10-वर्षीय यील्ड 5 प्रतिशत पर) भारतीय इक्विटी बाजार और एफपीआई फ्लो के लिए नकारात्मक हैं।
हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बेहतर कमाई की उम्मीदें सकारात्मक कराक हैं।
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