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मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार

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मुंबई, 16 मई। भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में आईटी, फाइनेंशियल सर्विस और फार्मा सेक्टर में बिकवाली देखी गई।

सुबह करीब 9.29 बजे सेंसेक्स 231.64 अंक या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,299.10 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 49.95 अंक या 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,012.15 पर था।

निफ्टी बैंक 52.40 अंक या 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,303.20 पर था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 169.20 अंक या 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 56,700.05 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 78.45 अंक या 0.46 प्रतिशत चढ़कर 17,318.40 पर था।

विश्लेषकों के अनुसार, टेक्निकल फ्रंट पर, निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक मजबूत बुलिश कैंडल फॉर्म की है, जो इनसाइड बार पैटर्न को तोड़कर महत्वपूर्ण 25,000 के स्तर से ऊपर बंद हुआ।

चॉइस ब्रोकिंग के हार्दिक मटालिया ने कहा, “इंडेक्स में लगभग 200 अंकों की इंट्राडे रिकवरी देखी गई, जो निरंतर तेजी की गति को दर्शाता है। तत्काल समर्थन 24,850-24,700 स्तर पर है, जबकि प्रतिरोध 25,100 और 25,235 पर देखा जा रहा है। 25,235 के स्तर से ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट इंडेक्स को 25,500-25,743 क्षेत्र की ओर ले जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि ट्रेडर्स को सख्त जोखिम प्रबंधन के साथ “बाय ऑन डिप्स” रणनीति अपनाने और वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण लार्ज ओवरनाइट पॉजिशन लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

इस बीच, सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, इंडसइंड बैंक, एसबीआई, इंफोसिस, एचसीएल टेक और एमएंडएम टॉप लूजर्स रहे। जबकि अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स रहे।

एशियाई बाजारों में चीन, हांगकांग और जापान लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि बैंकॉक, जकार्ता और सोल हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।

अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस 271.69 अंक या 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 42,322.75 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 24.35 अंक या 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5,916.93 पर बंद हुआ और नैस्डैक 34.49 अंक या 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,112.32 पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों ने कहा कि अप्रैल के आर्थिक आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बारे में संकेतों का एक दिलचस्प मिश्रण पेश करते हैं। प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) में 0.5 प्रतिशत की आश्चर्यजनक गिरावट देखी गई, जो अर्थशास्त्रियों की 0.2 प्रतिशत वृद्धि की अपेक्षाओं से काफी अलग थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा, “फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने गुरुवार को फेड के फ्रेमवर्क रिव्यू पर चर्चा की, जो केंद्रीय बैंक की मौद्रिक-नीति रणनीति पर एक दशक में दो बार की समीक्षा है। उन्होंने कहा कि फेड 2020 महामारी के बाद मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के दृष्टिकोण में सार्थक बदलावों को ध्यान में रखते हुए एडजस्टमेंट करने की प्रक्रिया में है।”

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 15 मई को 5,392.94 करोड़ रुपए की इक्विटी के शुद्ध खरीदार थे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,668.47 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची।

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ईरान-अमेरिका में तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला; निफ्टी 24000 के नीचे

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ईरान-अमेरिका में तनाव बढ़ने के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 904 अंक या 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,424 और निफ्टी 263 अंक या 1.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,927 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा गिरावट बनी हुई है। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी ऑटो सूचकांकों में टॉप लूजर थे। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजम्पशन, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी इन्फ्रा के साथ करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 423 अंक या 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 61,487 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 84 अंक या 0.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,623 पर था।

सेंसेक्स पैक में टाइटन, इंडिगो, इटरनल, एसबीआई, एसबीआई, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, एचयूएल, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक,आईटीसी, एशियन पेंट्स, कोटक महिंद्रा बैंक और टीसीएस लूजर्स थे।

एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो, हांगकांग और जकार्ता लाल निशान में थे। वहीं, शंघाई, बैंकॉक और सोल हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे। इस दौरान मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स सपाट रहा। वहीं, टेक्नोलॉजी सूचकांक नैस्डैक 1.71 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।

भारत के साथ वैश्विक बाजारों के गिरने की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान का शांति प्रस्ताव स्वीकार नहीं करना है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैंने ईरानी प्रतिनिधियों के जवाब पढ़ा। यह मुझे पसंद नहीं आया है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए जो शांति प्रस्ताव भेजा उसमें युद्ध समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी, लेकिन अमेरिका यूरेनियम को सौंपने जैसी मांगों पर अड़ा हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल में बढ़त का असर! भारतीय शेयर में जारी यह सकती है विदेशी निवेशकों की बिकवाली : एक्सपर्ट्स

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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं और इस महीने की शुरुआत से अब तक (8 मई तक) 14,232 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं। वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल में तेजी के चलते आने वाली समय में भी यह सिलसिला जारी रह सकती है। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।

2026 में अब तक एक्सचेंजों के माध्यम से कुल एफपीआई बिक्री का आंकड़ा 2,18,540 करोड़ रुपए हो गया है। हालांकि, प्राथमिक बाजारों के माध्यम से एफपीआई की खरीद/निवेश की ट्रेंड जारी है, इस वर्ष अब तक कुल निवेश 12,340 करोड़ रुपए रहा है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, “भले ही एफपीआई शुद्ध विक्रेता हैं, लेकिन वे ऊर्जा, निर्माण और पूंजीगत वस्तुओं जैसे कुछ क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण ट्रेंड यह है कि एफपीआई मिड-कैप और चुनिंदा रूप से स्मॉल-कैप शेयरों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें उच्च विकास क्षमता है और जो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।”

भारत में मुद्रा अवमूल्यन और आय वृद्धि को लेकर चिंताएं इस वर्ष विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली के प्रमुख कारक रहे हैं।

उन्होंने बताया, “एआई बूम के कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में इस वर्ष अपेक्षित प्रभावशाली आय वृद्धि ने एफपीआई प्रवाह को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है।”

राज्य विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद विदेशी निवेशकों ने सकारात्मक रुख के साथ सप्ताह की शुरुआत की। केंद्र में सत्तारूढ़ दल के मजबूत प्रदर्शन से सकारात्मक माहौल बना। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण वे सप्ताह के शेष चार सत्रों में शुद्ध विक्रेता रहे।

बजाज ब्रोकिंग के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च, पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “भू-राजनीतिक तनाव, तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर रुपए के कारण पिछले कुछ महीनों में एफआईआई शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं और इस साल के बाकी हिस्से में ही विदेशी निवेशकों के शुद्ध विक्रेता बने रहने की संभावना है।

निफ्टी ने पिछले सप्ताह उच्च अस्थिरता के साथ एक सीमित दायरे में कारोबार किया और लगातार दूसरे सप्ताह 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

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बाजार की पाठशाला: ईपीएफओ कैसे बनाता है सुरक्षित रिटायरमेंट फंड? समझें ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई का पूरा गणित

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आज के दौर में अक्सर लोग नौकरी शुरू करते समय रिटायरमेंट प्लानिंग पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन समय रहते की गई छोटी-छोटी बचत भविष्य में बड़ी आर्थिक सुरक्षा बन सकती है। कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ एक ऐसा ही माध्यम है, जो नौकरी के दौरान बचत, बीमा और रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का लाभ देता है। ईपीएफओ की योजनाएं कर्मचारियों को लंबी अवधि में आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि भारत में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा संस्थान माना जाता है। यह श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का प्रबंधन करता है।

ईपीएफओ मुख्य रूप से तीन प्रमुख योजनाओं के जरिए कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिनमें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) शामिल हैं।

ईपीएफओ ने हाल ही में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि कैसे एक कर्मचारी नौकरी शुरू करने से लेकर रिटायरमेंट तक ईपीएफओ की मदद से मजबूत आर्थिक सुरक्षा तैयार कर सकता है।

ईपीएफओ ने पोस्ट में बताया कि जब कोई कर्मचारी अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, तो उसके साथ आर्थिक स्वतंत्रता की शुरुआत भी होती है। इसी समय वह ईपीएफओ प्रणाली का हिस्सा बनता है, जो उसके लंबे समय के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करती है। नौकरी के साथ शुरू हुई यह छोटी बचत आगे चलकर बड़ा रिटायरमेंट फंड बन जाती है।

ईपीएफओ में शामिल होने के बाद कर्मचारी को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन (यूएएन) दिया जाता है। यह नंबर कर्मचारी की स्थायी पहचान के रूप में काम करता है। इसके जरिए कर्मचारी अपने पीएफ खाते की जानकारी, बैलेंस और अन्य सेवाओं को आसानी से ट्रैक कर सकता है। नौकरी बदलने पर भी यही यूएएन नंबर काम आता है और सभी पीएफ खाते एक ही पहचान से जुड़े रहते हैं।

इसके बाद कर्मचारी की सैलरी का एक हिस्सा हर महीने ईपीएफ खाते में जमा होता है। कंपनी भी कर्मचारी की ओर से योगदान करती है। यह पैसा कर्मचारी के ईपीएफ और ईपीएस खातों में जमा होता रहता है। लगातार होने वाला यह निवेश समय के साथ कंपाउंडिंग के जरिए तेजी से बढ़ता है और रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फंड तैयार करता है।

ईपीएफओ की ईडीएलआई योजना कर्मचारियों के परिवार को बीमा सुरक्षा भी देती है। यदि किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके परिवार को आर्थिक सहायता मिलती है। इस तरह ईपीएफओ केवल रिटायरमेंट बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण साधन बनता है।

ईपीएफओ ने बताया है कि लंबे समय तक नौकरी और नियमित योगदान के बाद कर्मचारी कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत मासिक पेंशन पाने का पात्र बन जाता है। इससे रिटायरमेंट के बाद भी नियमित आय बनी रहती है और आर्थिक स्थिरता मिलती है। यही कारण है कि ईपीएफओ को कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों को अपने ईपीएफओ निवेश और रिटायरमेंट योजना को समझदारी से मैनेज करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लेकर निवेश योजना बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है, ताकि भविष्य में आर्थिक परेशानियों से बचा जा सके।

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