व्यापार
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री बीते 10 वर्षों में 6 गुना से अधिक बढ़ी
मुंबई, 31 जनवरी। भारतीय एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में बीते 10 वर्षों में 6 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर दिसंबर 2024 में 66.93 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि दिसंबर 2014 में 10.51 लाख करोड़ रुपये था। यह जानकारी शुक्रवार को एक रिपोर्ट में दी गई।
पैसिव फंड्स का एयूएम बढ़कर 10.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है और कुल मार्केट शेयर में हिस्सेदारी बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई है। एक्टिव फंड्स का एयूएम बढ़कर 56.08 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एमओएएमसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल एयूएम में इक्विटी की हिस्सेदारी सबसे अधिक 60.19 प्रतिशत है। इसके बाद डेट की 26.77 प्रतिशत, हाइब्रिड की 8.58 प्रतिशत और अन्य की 4.45 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एमडी और सीईओ प्रतीक अग्रवाल ने कहा कि यह विस्तार विभिन्न निवेशकों की जरूरतों को पूरा करने और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की उद्योग की क्षमता को दर्शाता है। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और जरूरतों के मुताबिक समाधान विकास को बनाए रखने और भविष्य के अवसरों को तलाशने में महत्वपूर्ण होंगे।
वित्त वर्ष 25 की तीसरी तिमाही में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में 1,98,000 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया है। इसमें से इक्विटी की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। तिमाही में 84 नई स्कीमें लॉन्च हुई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि नेट इनफ्लो में इक्विटी सेगमेंट की हिस्सेदारी 69 प्रतिशत से अधिक की थी। वहीं, डेट फंड्स का नेट इनफ्लो 38,000 करोड़ रुपये से भी अधिक का था।
मल्टी एसेट फंड्स में करीब 9,300 करोड़ रुपये और बैलेंस एडवांटेज फंड्स में 4,800 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में डीमैट खातों की संख्या में भी उछाल आया है।
अगस्त 2024 तक 17.10 करोड़ से अधिक डीमैट खाते खोले जा चुके थे। वित्त वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 2.3 करोड़ था। इस अवधि के दौरान डीमैट खातों की संख्या में 650 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
व्यापार
अदाणी मामले के समाधान से भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को मिलेगा बढ़ावा: यूएसआईएसपीएफ

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड से जुड़े कानूनी मामले के समाधान से भारत-अमेरिका की बढ़ती आर्थिक साझेदारी में एक बड़ी बाधा दूर हो गई है और इससे अमेरिका में नए भारतीय निवेशों के लिए मार्ग खुल गया है। यह बयान यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसएफ) ने सोमवार को दिया।
यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष और सीईओ डॉ. मुकेश अघी ने कहा, “अदाणी एंटरप्राइज से जुड़े मामले में अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले से चल रहे कानूनी मामले का अंत हो गया है, जो मजबूत अमेरिका-भारत आर्थिक साझेदारी के लिए एक बाधा बना हुआ था।”
यूएसआईएसपीएफ का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ द ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने सोमवार को ऐलान किया था कि अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने ईरान से संबंधित प्रतिबंधों के 32 कथित उल्लंघनों को लेकर संभावित नागरिक दायित्व को निपटाने के लिए 275 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है।
अघी ने कहा कि अमेरिका में अदाणी समूह के नियोजित निवेश अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की बढ़ती रुचि के व्यापक रुझान को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा, “अदाणी एंटरप्राइजेज द्वारा 10 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की हालिया घोषणा पर आधारित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में विभिन्न क्षेत्रों में 20.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की योजना बना रही हैं।”
यूएसआईएसपीएफ के प्रमुख ने कहा कि भारतीय कंपनियां अमेरिका को एक दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में देखती हैं।
अघी ने कहा, “यूएसआईएसएफ में हम दृढ़ता से मानते हैं कि ये निवेश अमेरिका में मजबूत साझेदार बनने की भारतीय कंपनियों की इच्छा को बल देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय निवेश दोनों देशों में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान देंगे।
उन्होंने कहा, “ये निवेश मौजूदा सहयोग को और मजबूत करेंगे, रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगे, बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे और दीर्घकालिक द्विपक्षीय आर्थिक विकास को गति देंगे।”
पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का काफी विस्तार किया है, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी संबंधों के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरे हैं।
भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में, निवेश में लगातार वृद्धि की है।
यूएसआईएसएफ ने दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संबंधों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई है और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए वाशिंगटन और नई दिल्ली में नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों के साथ नियमित रूप से काम करता है।
व्यापार
वैश्विक अस्थिरता के बीच सोने में सीमित दायरे में कारोबार

वैश्विक अस्थिरता के बीच सोने की शुरुआत मंगलवार को सपाट हुई और शुरुआती कारोबार में सोने एक सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,59,401 रुपए के मुकाबले 498 रुपए या 0.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,59,899 रुपए पर खुला।
सुबह 10 बजे सोना 20 रुपए की मामूली बढ़त के साथ 1,59,421 रुपए पर था। सोने ने अब तक के कारोबार में 1,59,161 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,59,899 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
सोने के उलट चांदी में कमजोरी देखी जा रही है।
चांदी के 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,76,651 रुपए के मुकाबले 380 रुपए की मामूली कमजोरी के साथ 2,76,271 रुपए पर खुला।
खबर लिखे जाने तक चांदी 2,351 रुपए या 0.85 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,74,300 रुपए पर थी। अब तक के सत्र में चांदी का न्यूनतम स्तर 2,74,236 रुपए और उच्चतम स्तर 2,76,666 रुपए पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक, सोना 0.35 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,542 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76.47 डॉलर प्रति औंस पर थी।
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी हुई है। वहीं, अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले को टाल दिया गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की नरमी देखने को मिली है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के सुझाव पर अमेरिका ने ईरान पर कल होने वाले हमले को टाल दिया है। इसके साथ, ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ शांति के लिए बातचीत चल रही है।
इसके अतिरिक्त, सोने और चांदी ने बीते एक साल में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस दौरान डॉलर में सोना ने करीब 40 प्रतिशत और चांदी ने करीब 135 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
अंतरराष्ट्रीय
‘व्यापार, रक्षा और विकसित भारत 2047 विजन पर फोकस’, पीएम मोदी की स्वीडन यात्रा पर बोले विदेश सचिव सिबी जॉर्ज

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्वीडन में व्यापार और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और बेहतर बनाने पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के विन को आगे बढ़ाते हुए स्वीडिश कंपनियों को भारत के विकास में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे दोनों देशों के लिए एक ‘विन-विन’ साझेदारी की संभावना बनी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी 5 देशों की यात्रा के दौरान रविवार को स्वीडन दौरे का तीसरा चरण पूरा किया। नॉर्वे में अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना होने से पहले विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस नॉर्डिक देश की प्रधानमंत्री की यात्रा की छह महत्वपूर्ण सफलताओं की भी जानकारी दी।
सिबी जॉर्ज ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने रवींद्रनाथ टैगोर की साझा सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए एक-दूसरे को विशेष उपहार भेंट किए। इससे भारत और स्वीडन के बीच सांस्कृतिक और बौद्धिक जुड़ाव मजबूत हुआ है। भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को बढ़ावा मिला है और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को प्रोत्साहन मिला है।”
उन्होंने बताया कि स्वीडिश कंपनियां और बिजनेस भारत की विकास यात्रा में हिस्सा ले सकते हैं। जॉर्ज ने कहा, “छोटी और मध्यम स्वीडिश कंपनियां भारत की विकास गाथा में हिस्सा ले सकती हैं, जिस पर सहमति भी बनी। हमने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा की।”
सिबी जॉर्ज ने कहा, “कई स्वीडिश बिजनेस सीईओ ने ‘विकसित भारत’ के बारे में बात की। वे हमारे ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को समझते हैं। वे सभी हमारे साथ आगे बढ़ना चाहते हैं और भारत की ओर से दिए जा रहे अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं।”
विदेश सचिव सिबी जॉर्ज ने आगे कहा, “वह पहली बड़ी बिजनेस बैठक थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एफटीए को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ईयू के साथ हिस्सा लिया। यह बैठक आज ‘यूरोपियन राउंडटेबल फॉर इंडस्ट्री’ की बैठक के दौरान हुई।”
जॉर्ज ने अपने बयान में कहा कि हम वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं ने इस पर चर्चा की और इस मामले पर अपने विचार व चिंताएं साझा कीं। उन्होंने इस यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण और सफल बताया।
इस दौरान, विदेश सचिव सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “नीदरलैंड में रधानमंत्री मोदी ने एक विशेष ‘डाइक’ (बांध) परियोजना का दौरा किया, जो मीठे पानी को समुद्री पानी से अलग करती है। यह एक अनोखी परियोजना है, जिसका दौरा उन्होंने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर किया।”
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