अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत ने चीन से कहा, एलएसी पर पीएलए की भारी तैनाती भड़काऊ कदम
भारत ने चीन से कहा है कि वह (चीन) लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों की बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए एक विश्वसनीय स्पष्टीकरण देने में विफल रहा है। सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के इतर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मॉस्को में गुरुवार को ढाई घंटे तक बातचीत हुई।
बैठक में भारत ने एलएसी पर हथियारों और उपकरणों के साथ चीनी सैनिकों की भारी तैनाती को लेकर पुरजोर तरीके से अपनी चिंता को जाहिर किया।
यह मानते हुए कि चीनी सेना की तैनाती एलएसी पर तनाव बढ़ाने वाले भड़काऊ कदम हैं, जयशंकर ने अपने चीनी विदेश मंत्री को बताया कि इतनी ज्यादा संख्या में सैनिकों की उपस्थिति 1993 और 1996 के समझौतों के अनुसार उचित नहीं है।
जयशंकर ने वांग से कहा, “चीनी पक्ष ने इस तैनाती के लिए कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दिया है। एलएसी पर संघर्ष की कई घटनाओं में चीनी फ्रंटलाइन सैनिकों के भड़काऊ व्यवहार ने भी द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के प्रति उपेक्षा दिखाई।”
सूत्रों ने कहा कि भारत ने स्पष्ट रूप से चीन को अवगत कराया कि वह सीमा क्षेत्रों के प्रबंधन पर सभी समझौतों के पूर्ण पालन की उम्मीद करता है और एकतरफा रूप से यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास को नहीं मानेगा। जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय सैनिकों ने सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रबंधन से संबंधित सभी समझौतों और प्रोटोकॉलों का बखूबी पालन किया है।
जयशंकर ने वांग यी से टकराव वाले सभी क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि 1976 में राजदूत स्तर के संबंधों को फिर से शुरू करने और 1981 से सीमा वार्ता आयोजित करने के बाद से, भारत-चीन संबंध बड़े पैमाने पर सकारात्मक रूप में विकसित हुए हैं।
अपनी चर्चा के अंत में, मंत्रियों ने पांच बिंदुओं पर एक समझौता किया जो मौजूदा स्थिति के संदर्भ में उनके प्रयासों को दिशा देगा।
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को भारत-चीन संबंधों को विकसित करने पर नेताओं की आम सहमति से मार्गदर्शन लेना चाहिए, जिसमें मतभेदों को विवाद न बनने देना शामिल है।
वे इस बात पर सहमत हुए कि सीमावर्ती क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति दोनों पक्षों के हित में नहीं है और इसलिए दोनों पक्षों के सीमा सैनिकों को अपना संवाद जारी रखना चाहिए, जल्दी से पीछे हटना चाहिए, उचित दूरी बनाए रखना चाहिए और तनाव कम करना चाहिए।
दोनों पक्ष चीन-भारत सीमा मामलों पर सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करने, सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और ऐसे विवाद से बचने जो मामलों को आगे बढ़ा सकते हैं, पर सहमत हुए।
दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा मसले पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र के माध्यम से संवाद जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान: नाले में गिरी बस, पांच की मौत और 27 घायल

पाकिस्तान के पंजाब में गुरुवार को एक बस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि 27 अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने आपातकालीन सेवा प्रदाता संस्था के हवाले से ये जानकारी दी।
प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन ने बताया कि देश की आपातकालीन सेवा प्रदाता संस्था ‘रेस्क्यू 1122’ के अनुसार पंजाब के हाफिजाबाद जिले में एक यात्री बस के नाले में गिरने से हादसा हुआ।
रेस्क्यू दल ने बताया कि यह हादसा पिंडी भटियां तहसील के फतेहके इलाके में हुआ। बताया जा रहा है कि बस रायविंड से चिनियोट जा रही थी।
रेस्क्यू कर्मियों के मुताबिक, तेज रफ्तार के कारण ड्राइवर का गाड़ी से नियंत्रण हट गया। हादसे के तुरंत बाद, ‘रेस्क्यू 1122’ की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि उनमें से 20 लोगों को अस्पताल ले जाया गया।
स्थानीय प्रशासन की मदद से एक क्रेन का इस्तेमाल करके बस को बाहर निकाला गया, जिसके बाद गाड़ी के नीचे से पांच लोगों के शव बरामद किए गए।
इस आशंका के बीच कि मलबे के नीचे और भी यात्री फंसे हो सकते हैं, रेस्क्यू टीमों ने अपना तलाशी अभियान जारी रखा। इस बचाव अभियान में पांच रेस्क्यू वाहनों ने हिस्सा लिया।
एक हफ्ते में ये दूसरा भयावह बस हादसा है। पिछले हफ्ते, बलूचिस्तान में क्वेटा-कराची हाईवे पर उथल के पास ‘जीरो पॉइंट’ के निकट एक मिनीबस और यात्री कोच की आमने-सामने की टक्कर में 12 यात्रियों की मौत हो गई थी और 24 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
इससे पहले राजनपुर जिले की रोजहान तहसील में इंडस हाईवे पर एक यात्री बस सड़क के डिवाइडर से टकराकर पलट गई थी, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी और 44 अन्य घायल हो गए थे।
वहीं, मीडिया आउटलेट जियो न्यूज के अनुसार नहर या नाले में गिरने से हुए हादसों की ये नई कड़ी है। इसी साल जून 2026 में धर्मपुरा-चौबचा फाटक (लाहौर) के पास एक तेज रफ्तार यात्री वैन के नहर में गिर जाने से सात लोग घायल हो गए थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच रक्षा सहयोग पर चर्चा

फिलीपींस के सेबू में बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस) से इतर हुई इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा की गई। इसके साथ ही सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच उपयोगी बातचीत हुई, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें एडीएमएम-प्लस बैठक से इतर ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स से मिलकर प्रसन्नता हुई।
राजनाथ सिंह ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के व्यापक रणनीतिक साझेदारी संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बहुत महत्व देता है। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करना इस बातचीत का प्रमुख उद्देश्य रहा। सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल से संयुक्त सैन्य गतिविधियों और अभियानों में सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। राजनाथ सिंह 28 और 29 अक्टूबर को सेबू में आयोजित 13वीं एडीएमएम-प्लस बैठक में हिस्सा लेने के लिए फिलीपींस के दौरे पर हैं। इस मंच पर भारत सहित आसियान देशों और उनके आठ संवाद साझेदारों के रक्षा मंत्री रक्षा एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। भारत इस मंच के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग और हिंद-प्रशांत में स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
गौरतलब कि यहां राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से भी वार्ता की है। भारत और अमेरिका ने रक्षा तकनीक, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के 10 वर्षीय रक्षा ढांचे के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की।
बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ उनकी बैठक बेहद अच्छी रही। दोनों पक्षों ने 10 वर्षीय भारत-अमेरिका रक्षा ढांचे के तहत अब तक हुई प्रगति पर चर्चा की। इस ढांचे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच सैन्य तकनीक, सूचनाओं के आदान-प्रदान और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने का रास्ता खुलता है।
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ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री भारत दौरे पर, एस जयशंकर के साथ अहम बैठक आज

भारत दौरे पर आईं ऑस्ट्रिया की यूरोपीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों की संघीय मंत्री बीआटे माइनल-रीसिंगर बुधवार को अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात करेंगी। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह बैठक नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में होगी।
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से ये वार्ता अहम मानी जा रही है।
माइनल-रीसिंगर 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद वह 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी।
दोनों देश व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय संपर्कों के जरिए अपने संबंधों को आगे बढ़ाया है।
भारत और ऑस्ट्रिया के द्विपक्षीय संबंध वर्तमान में ‘उन्नत साझेदारी’ के रूप में लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों ने कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर लिए हैं। संबंधों को मजबूत बनाने की खातिर जुलाई 2024 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियना का दौरा किया था। यह 41 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ऑस्ट्रिया यात्रा थी।
अप्रैल 2026 में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर भारत यात्रा पर आए। इस दौरान भी द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति बनी थी। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा संवाद शुरू करने और कंपनियों तथा निवेशकों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था स्थापित करने की घोषणा की थी।
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.47 अरब डॉलर रहा था। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार समृद्ध हो रहे हैं। भारत मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान, वस्त्र और मशीनरी का निर्यात करता है, जबकि ऑस्ट्रिया से भारी मशीनरी, इस्पात और वाहन आयात किए जाते हैं।
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