राष्ट्रीय समाचार
रामायण से जुड़े प्रसंगों पर बनेंगे मंच, नई प्रतिभाओं को भी प्रस्तुति का मिलेगा मौका
अयोध्या, 5 जनवरी। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले सरकार राममय माहौल बनाने में जुटी है। कण-कण में व्याप्त राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का काम चल रहा है। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध परंपरा को और निखारकर पूरे प्रदेश को राममय किया जा रहा है।
इसी क्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बनाए जाने वाले मंच भी रामायण से जुड़े प्रसंगों पर होंगे।
योगी सरकार प्रतिदिन उत्तर प्रदेश समेत देश के नामचीन व नवोदित 500 प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराएगी। साथ ही रामनगरी के कई प्रमुख स्थानों, 25 पौराणिक स्थलों-चौराहों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए जाएंगे।
पर्यटन और सांस्कृतिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार की कल्पना है कि अयोध्या के प्रमुख स्थानों पर रामायणकालीन प्रसंगों पर आधारित मंच भी बने, जिससे नई पीढ़ी भी श्रीराम की सदाशयता से अवगत हो। सरकार की तरफ से श्रीराम मंदिर उद्घाटन के अवसर पर राम की पैड़ी पर पुरुषोत्तम मंच, भजन संध्या स्थल पर सरयू मंच, सांस्कृतिक संकुल प्रेक्षागृह में भरत मंच, रामकथा पार्क में कागभुशुन्डि मंच, तुलसी उद्यान में तुलसी मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुर सरिता बहाने का निर्देश दिया गया है।
साथ ही शहर के प्रमुख 25 पौराणिक स्थलों – चौराहों पर भी सांस्कृतिक आयोजन होंगे। इसमें नामचीन व नवोदित प्रतिभाएं भी अपनी कला दिखाएंगी।
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर संतों द्वारा रामकथा, अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय रामलीलाओं का मंचन, रामायण परंपरा पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां, शास्त्रीय-उप शास्त्रीय, लोकगायन-वादन व नृत्य की प्रस्तुतियां, रंगोली-चित्रकला, रामायण पर आधारित क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन कराएगी। लोक में राम पर आधारित नाट्य व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देगी। इसका उद्देश्य पूरे यूपी को राममय करना है।
बीते दिनों लखनऊ में हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण, कीर्तन, रामचरित मानस के आयोजन कराने के निर्देश दिए थे। अयोध्या के दिगंबर अखाड़ा, वाल्मीकि मंदिर नया पुरवा, वेद मंदिर, मौनी बाबा मंदिर, जानकी महल, रामजानकी मंदिर भरत कुंड, जालपा मां मंदिर, गुप्तार घाट, रामानंद आश्रम निकट छोटी छावनी, वाल्मीकि भवन, सूर्यकुंड समेत कई स्थानों पर 14 जनवरी से 24 मार्च तक भजन-कीर्तन, रामायण-रामचरित मानस पाठ, सुंदरकांड आदि कार्यक्रम के आयोजन पर भी जोर है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार श्रीराम जन्मभूमि में 1111 शंखों का वादन करते हुए विश्व रिकॉर्ड किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए एनसीजेडसीसी व आईजीएनसीए की मदद ली जाएगी। इसके अलावा सामूहिक सरयू आरती व सौष्ठव कलाओं के प्रदर्शन का विश्व रिकॉर्ड बनेगा।
चुनाव
चुनाव आयोग का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम घोषित! मतदान 23 और 29 अप्रैल को, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

ELECTIONS
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने रविवार, 15 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम घोषित कर दिया। मतदान 2 चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 मई तक पूरी होने का कार्यक्रम है। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आगामी चुनावों में 6.44 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जिनमें 5.23 लाख पहली बार वोट डालने वाले मतदाता शामिल हैं। सीईसी ने आश्वासन दिया कि चुनाव कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएँगे।
चुनाव अधिकारी सुचारू मतदान के लिए पूरे राज्य में 80,719 मतदान केंद्र स्थापित करेंगे। बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। सीईसी ने आगे कहा कि चुनावों के दौरान हिंसा, डराने-धमकाने या किसी भी तरह की धांधली के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया जाएगा।
इस चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच एक कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है, जिनमें सत्ताधारी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (अपने सहयोगियों के साथ) शामिल हैं। 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में, पिछले चुनाव में मिली जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस अभी एक मज़बूत स्थिति में है। 2026 के चुनावों के नतीजे ही अगले पाँच वर्षों के लिए राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
भारत और सेशेल्स के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये–2026’ हुआ आरंभ

भारत की सशस्त्र सेनाओं का एक संयुक्त दल हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स पहुंच गया है। यहां यह भारतीय सैन्य दल सेशेल्स रक्षा बलों के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये–2026’ में भाग ले रहा है।
यह सैन्य अभ्यास 9 मार्च से 20 मार्च तक सेशेल्स की रक्षा अकादमी में आयोजित किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान भारत और सेशेल्स के सैनिक संयुक्त रूप से प्रशिक्षण लेंगे, विभिन्न मिलिटरी मिशनों की योजनाएं बनाएंगे और अलग-अलग सामरिक गतिविधियों को अंजाम देंगे। इसमें अर्ध-शहरी वातावरण में संभावित खतरों को निष्क्रिय करने के लिए कई प्रकार की युद्धक कार्रवाई की जाएंगी।
इसके साथ ही नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीक के उपयोग का अभ्यास भी किया जाएगा। ‘लामितिये’ शब्द क्रियोल भाषा का है, जिसका अर्थ मित्रता होता है। यह अभ्यास हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है और वर्ष 2001 से नियमित रूप से सेशेल्स में आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष यह इस महत्वपूर्ण अभ्यास का ग्यारहवां संस्करण है।
भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर दोनों पक्षों का मुख्य फोकस है। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से इस अभ्यास का आयोजन किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का अभ्यास विशेष महत्व रखता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पहली बार भारत की तीनों सेनाएं शामिल हो रही हैं। यहां पहुंचे भारतीय सैन्य दल में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान शामिल हैं। ये सभी एक साथ इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय सैन्य दल में मुख्य रूप से असम रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना का युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिकंड’ तथा भारतीय वायु सेना का भारी परिवहन विमान ‘सी–130’ भी इस अभ्यास में भाग ले रहा है। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय, सहयोग और संयुक्त कार्य क्षमता को मजबूत बनाना है। अभ्यास के दौरान विशेष रूप से अर्ध-शहरी क्षेत्रों में होने वाले अभियानों से जुड़े प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा शांति स्थापना से जुड़े अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने का भी प्रयास किया जाएगा। करीब बारह दिनों तक चलने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में मैदानी प्रशिक्षण, सामरिक चर्चा, अध्ययन उदाहरण, व्याख्यान और प्रदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभ्यास के अंतिम चरण में दो दिनों का अंतिम संयुक्त अभ्यास किया जाएगा, जिसमें अब तक सीखे गए सभी कौशलों और रणनीतियों का परीक्षण किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, समझ और सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे सैनिकों को एक-दूसरे के अनुभव, कौशल और श्रेष्ठ सैन्य तरीकों को साझा करने का अवसर मिलता है। भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से घनिष्ठ रक्षा संबंध रहे हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत बनाने के लिए दोनों देश समय-समय पर इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करते रहे हैं। ‘लामितिये–2026’ अभ्यास भी दोनों देशों के सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
खामेनेई की मौत के बाद बदले की आग में जल उठा ईरान, मुख्य सलाहकार बोले-हमला कर अमेरिका भाग नहीं सकता

अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम नेता खामेनेई की मौत के बाद ईरानी अधिकारी बदले की आग में जल रहे हैं। ईरान के सबसे ताकतवर लोगों में से एक, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिका के दिल में चाकू घोपने की कसम खाई है।
अली लारीजानी ने कहा, “अमेरिकियों ने ईरानी लोगों के दिल में छुरा घोंपा है और हम उनके दिल में छुरा घोपेंगे।” उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ और जवाबी कार्रवाई का वादा करते हुए कहा, “हमारी सेना का रिएक्शन और भी ज्यादा मजबूत होगा। उन्हें पता होना चाहिए कि वे बस हमला करके भाग नहीं सकते।”
अली लारीजानी खामेनेई के एक अहम सलाहकार थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और न्यायपालिका के प्रमुख वाला एक टेम्पररी लीडरशिप स्ट्रक्चर जल्द ही बन जाएगा। ईरान ने इलाके के नेताओं को भरोसा दिलाया है कि वह उनके साथ जंग नहीं चाहता, लेकिन मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी बेस को टारगेट करना जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, “यह हमेशा के लिए साफ कर देना चाहिए कि अमेरिकी ईरान को डरा-धमका नहीं सकते।”
ईरान की सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी के एक टेलीग्राम पोस्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ( आईआरजीसी) के पूर्व टॉप कमांडर और सीनियर ईरानी अधिकारी मोशेन रेजाई ने रविवार को कहा कि किसी भी अमेरिकी वॉरशिप को फारस की खाड़ी में जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
ईरान के सरकारी मीडिया ने शनिवार को अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह और उसकी आर्म्ड फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ दोनों के मारे जाने की पुष्टि की।
इससे पहले ईरान ने आईआरजीसी के नेता मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और डिफेंस काउंसिल सेक्रेटरी अली शमखानी की मौत की पुष्टि की थी।
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