राजनीति
भारत दौरे पर आए बुल्गारिया के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला से की मुलाकात
नई दिल्ली, 5 जनवरी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में रिपब्लिक ऑफ बुल्गारिया की नेशनल असेंबली के प्रेसीडेंट रॉसेन ज़ेल्याज़कोव के नेतृत्व में भारत के दौरे पर आए संसदीय शिष्टमंडल के साथ बैठक की।
बैठक के दौरान, भारत और बुल्गारिया के बीच वर्षों पुराने और सुदृढ़ मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, रूल ऑफ लॉ, जन केंद्रित शासन व्यवस्था और पारदर्शिता के साझे मूल्यों में विश्वास करते हैं।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उल्लेख किया कि दिसंबर 2024 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के घनिष्ठ संसदीय संबंधों पर चर्चा के दौरान बुल्गारिया की नेशनल असेंबली में “फ्रेंडशिप ग्रुप फॉर इंडिया” के गठन पर बिरला ने हर्ष व्यक्त किया।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह समूह दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने में सक्रिय योगदान देगा। बिरला ने शिष्टमंडल को सूचित किया कि भारत की संसद में भी “फ्रेंडशिप ग्रुप” का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्व में भारत के बढ़ते कद का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि भारत सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली मजबूत और स्थिर सरकार के कारण भारत वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रदान कर रहा है और वैश्विक एजेंडा तय कर रहा है। जी 20 में भारत के नेतृत्व के विषय में उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान, अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर भारत वैश्विक एजेंडा निर्धारित करने और कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद मुद्दों पर आम सहमति बनाने में सक्षम रहा।
भारत की लोकतान्त्रिक विरासत का उल्लेख करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा की कि आजादी के 75 वर्षों में भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत हुआ है तथा इसकी जड़ें और गहरी हुई हैं। दोनों देशों के साझे मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति के कारण आज दोनों देश विकास और समृद्धि के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
बिरला ने दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने की अपार संभावनाओं पर ज़ोर देते हुए कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा, व्यापार और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग में और वृद्धि हो। उन्होंने विचार व्यक्त किया कि नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहन और कृषि क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
भारत और बुल्गारिया के बीच वैश्विक मंचों पर सहयोग की लंबी परंपरा का जिक्र करते हुए बिरला ने सुझाव दिया कि बुल्गारिया भारत द्वारा शुरू की गई अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन जैसी अंतर्राष्ट्रीय पहलों में शामिल होने पर भी विचार करे।
इस अवसर पर बुल्गारिया की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष रोसेन ज़ेल्याज़कोव ने बिरला को धन्यवाद देते हुए वैश्विक मामलों में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना की। उन्होंने जी20 में भारत के नेतृत्व और देश की बढ़ती आर्थिक वृद्धि की भी सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारत और बुल्गारिया के द्विपक्षीय संबंध अधिक सदृढ़ और समृद्ध बनेंगे।
महाराष्ट्र
मुंबई : मुलुंड में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की बड़ी कार्रवाई, बिना लेबल वाला खाना ज़ब्त, स्टॉक ज़ब्त, दुकानें बंद

मुंबई: फ़ूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट ने FDA कमिश्नर तकाराम मुंडे के आदेश पर और जॉइंट कमिश्नर (फ़ूड) महेश चौधरी और असिस्टेंट कमिश्नर छत्रपाल सिंह देवी की देखरेख में अनहाइजीनिक फ़ूड आइटम्स के खिलाफ़ कार्रवाई करते हुए अनहाइजीनिक फ़ूड आइटम्स ज़ब्त करने का दावा किया है। सेफ्टी ऑफ़िसर ऋषिकेश राजेश दर्शनवाद और मेघना पवार की एक स्पेशल टीम ने मुंबई में गैर-कानूनी और नियम न मानने वाले फ़ूड ट्रेडर्स के खिलाफ़ एक्शन लेने के लिए एक ड्राइव शुरू की है। इस ड्राइव के तहत, टीम ने मुलुंड में “गुप्ता चना भिंडर” (गाला नंबर TG 137, 1/1 डंपिंग रोड, गौतम नगर, मिलिंद वेस्ट, मिलिंद सेंट्रल, ग्रेटर मुंबई) के प्लांटेशन का फिजिकल इंस्पेक्शन किया। इंस्पेक्शन के दौरान, फ़ैक्टरी और गोदाम में बहुत खराब और अनहाइजीनिक हालात पाए गए। इसके अलावा, फ़ैक्टरी में बनाए और बेचने के लिए रखे गए अलग-अलग फ़ूड आइटम्स के पैकेट्स पर कोई लीगल लेबल नहीं था, जैसे कि मैन्युफैक्चरर, बनाने की तारीख या एक्सपायरी डेट (बिना लेबल के)। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे इन गंभीर मामलों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने फैक्ट्री से कुल 114.2 किलोग्राम खाद्य सामग्री कानूनी तौर पर जब्त की है, जिसकी अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपये है। जब्त की गई वस्तुओं में पानी पुरी, सूखी पुरी, हरी मटर व अन्य सामान शामिल हैं। खाद्य सामग्री की जब्ती एवं नमूनों की जांच : उपरोक्त सभी बिना लेबल वाले एवं संदिग्ध रंग वाले स्टॉक को कानूनी तौर पर जब्त कर लिया गया है तथा खाद्य सामग्री के नमूने आगे की प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए भेज दिए गए हैं। विश्लेषण रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। व्यवसाय बंद करने का नोटिस फार्म में कीटों के संक्रमण की संभावना एवं बड़े पैमाने पर कानूनों के उल्लंघन की आशंका को देखते हुए प्रशासन द्वारा पहचानी गई कमियों को पूरी तरह से दूर करने एवं परिसर को पूरी तरह से कीटाणुरहित व साफ करने तक उक्त फार्म के व्यवसाय को तत्काल बंद करने का आदेश जारी किया गया है। इसलिए एफडीए ने खाद्य सामग्री के खिलाफ कार्रवाई की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान संघर्ष पर रूस फिक्रमंद, दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील

मास्को, 10 जून: रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता जताई है और दोनों पक्षों से तत्काल संयम बरतने की अपील की है। यह तनाव 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद सबसे गंभीर माना जा रहा है। अमेरिका इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम तो ईरान जवाबी कार्रवाई बता रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि रूस “नए दौर के अमेरिका-ईरान सशस्त्र संघर्ष को लेकर अत्यंत चिंतित” है। उन्होंने इसे “बिना उकसावे के अमेरिका-इजरायल की ईरान के खिलाफ कार्रवाई” बताते हुए स्थिति को गंभीर करार दिया।
जखारोवा ने कहा कि रूस दोनों पक्षों से अपील करता है कि वे संयम बरतें और तुरंत सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकें, ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।
रूस और ईरान के संबंध लंबे समय से अमेरिका की मध्य एशिया, अफगानिस्तान और इराक में नीतियों को लेकर साझा अविश्वास पर आधारित रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह रणनीतिक साझेदारी समय के साथ और मजबूत हुई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई मौकों पर ईरान के साथ संबंधों को “रणनीतिक प्राथमिकता” बता चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है।
इस बयान के साथ ही रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने की दिशा में प्रयास तेज करे, ताकि पश्चिम एशिया में स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो।
वहीं, चीन ने भी चिंता जाहिर करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लीन जिआन ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “सभी पक्षों को संयम बनाए रखने की जरूरत है, संघर्ष को और बढ़ाने से बचना चाहिए। इससे क्षेत्र में हालात बनेंगे नहीं बल्कि और बिगड़ेंगे ही।”
इस बीच, ईरान की ओर से खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। आईआरजीसी ने इसकी जिम्मेदारी ली और इसे अमेरिकी कार्रवाई का जवाब बताया। बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर किए गए ईरानी हमलों की यूएई, कतर समेत तमाम खाड़ी देशों ने आलोचना की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान पर और बड़े हमलों की चेतावनी, ट्रंप बोले-‘बातचीत में देरी की कीमत चुकानी होगी’

वाशिंगटन, 10 जून: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख और सख्त करते हुए हमले और तेज करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर तेहरान जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो अमेरिका उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है।
फॉक्स न्यूज को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ” मैं ईरान के बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं पर नए हमलों की मंजूरी देने पर विचार कर रहा हूं।” उनके अनुसार, ईरान समझौते के लिए बातचीत में जरूरत से ज्यादा समय ले रहा है।
ट्रंप का ये बयान पश्चिम एशिया में बदलते और बढ़ते तनाव के बीच आया है। पिछले 48 घंटों में हवाई हमलों में तेजी आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को ही ट्रुथ सोशल पर एक कड़ा संदेश भी जारी किया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने समझौते के लिए बातचीत में बहुत अधिक समय गंवा दिया है और अब उसे इसकी “कीमत चुकानी होगी।” दावा ये भी किया कि ईरान की मिलिट्री, नेवी और एयरफोर्स पूरी तरह तबाह हो चुकी है। ईरान सिर्फ बात करता है हालांकि कुछ करता नहीं है। मध्य पूर्व में सबको धमकाने वाले की हिम्मत टूट चुकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित कार्रवाई किस प्रकार की होगी या अमेरिका आगे कौन से कदम उठाने जा रहा है। हालांकि फॉक्स से उन्होंने एक बार फिर ईरानी पुलों और आधारभूत ढांचों को बर्बाद करने की बात जरूर कही।
अगर अमेरिका वास्तव में ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढांचे को निशाना बनाता है, तो इसका प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान लगातार कहता रहा है कि वह बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल चीन और रूस समेत कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
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