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Wednesday,02-September-2026
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इमरान ने ‘ध्रुवीकरण’ करने के लिए मैंक्रों की आलोचना की

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Imran-Khan...

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामोफोबिया पर अपनी टिप्पणी को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनानेल मैक्रों की आलोचना करते हुए कहा कि ‘आगे के लिए ध्रुवीकरण और हाशिए पैदा करना, अनिवार्य रूप से कट्टरता की ओर लेकर जाता है।’ खान मैक्रों के 21 अक्टूबर के बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘फ्रांस कार्टून को लेकर हार नहीं मानेगा।’ उन्होंने यह टिप्पणी सैमुअल पैटी को श्रद्धांजलि देते हुए की थी।

गौरतलब है कि सैमुअल पैटी की इस महीने पैगंबर मुहम्मद का कार्टून दिखाने को लेकर सिर काट कर हत्या कर दी गई थी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कई ट्वीट के माध्यम से कहा, “एक नेता की पहचान इंसानों को एकजुट करना है, जैसा कि (नेल्सन) मंडेला ने किया था, न कि उन्हें विभाजित करना। लेकिन एक आज का समय है, जब राष्ट्रपति मैक्रों देश से रेसिज्म, ध्रुवीकरण हटाने की बजाय अतिवादियों को हीलिंग टच और अस्वीकृत स्थान देने में लगे हैं, जो निश्चित रूप से उनकी कट्टरवादी सोच को दिखाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह हिंसा करने वाले आतंकवादियों, भले ही वह मुसलमान, श्वेत वर्चस्ववादी या नाजी विचारक वाला हो, उस पर हमला करने के बजाय इस्लाम पर हमला करके इस्लामोफोबिया को प्रोत्साहित कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अफसोस की बात है कि राष्ट्रपति मैक्रों इस्लाम और हमारे पैगंबर को निशाना बनाने वाले ईशनिंदा कार्टून के प्रदर्शन को बढ़ावा दे रहे हैं अपने स्वयं के नागरिकों सहित मुसलमानों को जानबूझकर भड़कने पर मजबूर कर रहे हैं।”

इमरान खान ने आगे कहा, “बिना इस्लाम को सही तरह से जाने उस पर हमला करके राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोप और दुनियाभर में लाखों मुसलमानों की भावनाओं पर हमला किया और उन्हें चोट पहुंचाई।”

उन्होंने आगे कहा, “आखिरी चीज जिसे दुनिया चाहती है या जरूरत है, वह और अधिक ध्रुवीकरण है। अज्ञानता पर आधारित सार्वजनिक बयान अधिक नफरत, इस्लामोफोबिया के साथ चरमपंथियों के लिए जगह बनाएंगे।”

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा खान ने रविवार को सोशल मीडिया, फेसबुक को इस्लामोफोबिया पर प्रतिबंध लगाने और इस्लाम के खिलाफ नफरत फैलाने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी लिखा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिकी राजदूत गोर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से मिले, साझेदारी बढ़ाने पर जताई प्रतिबद्धता

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अमेरिका ने किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। अमेरिकी पक्ष ने सोमवार को बिश्केक में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए अवसर मौजूद हैं।

अमेरिका के नई दिल्ली में राजदूत और दक्षिण और मध्य एशिया में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि सर्जियो गोर ने कहा, “बिश्केक में किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति झापारोव से मुलाकात की। हमारे पास दोनों देशों के लिए मिलकर काम करने के कई बेहतरीन अवसर हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अगले महीने राष्ट्रपति जापारोव के स्वागत के लिए उत्सुक है। इस दौरान दोनों देश अपनी बढ़ती साझेदारी को और आगे ले जाने की दिशा में बातचीत करेंगे।

दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। जापारोव आने वाले समय में अमेरिका की यात्रा पर भी जाने वाले हैं।

इस मुलाकात को मध्य एशिया में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और किर्गिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

अमेरिका शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का सदस्य नहीं है। गोर के दौरे को आधिकारिक रूप से किर्गिजस्तान की स्वतंत्रता दिवस की 35वीं वर्षगांठ और विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन से जोड़ा गया है।

पिछले साल तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन के दौरान मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीरें अमेरिका में चर्चा का कारण बनी थीं। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव के बीच पीएम मोदी की चीन यात्रा से वॉशिंगटन काफी असहज हो गया था।

विपक्ष और आलोचकों ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उनकी नीतियों की वजह से भारत अमेरिका से दूर जा रहा है। ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में खो दिया है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराया सुपरटैंकर, लगी आग : ईरान

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होर्मुज के पास स्थित लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद मध्य एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे एक सुपरटैंकर में दो समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद आग लग गई और जहाज को रोकना पड़ा। आईआरजीसी ने सोमवार को इसे लेकर बयान जारी किया।

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने आईआरजीसी के हवाले से बताया कि टैंकर ने जलडमरूमध्य में आवाजाही के लिए जारी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया था। आईआरजीसी ने अन्य जहाजों को भी चेतावनी दी कि उसके निर्देशों की अनदेखी करने वाले जहाजों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

आईआरजीसी नौसेना ने अपने बयान में कहा, “होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले जहाजों का हश्र अलग नहीं होगा।” नौसेना ने कहा कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और नौवहन के लिए उसके द्वारा जारी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

ईरान ने हाल के दिनों में होर्मुज से होकर होने वाले जहाजों के आवागमन पर काफी हद तक रोक लगा दी है। हालांकि, कुछ जहाज ओमान के तट के करीब से गुजरने वाले समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ मामलों में इन जहाजों को अमेरिका की मदद भी मिली है।

तेहरान इन वैकल्पिक मार्गों को लगातार ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताता रहा है और जहाजों को इनका इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी देता रहा है।

आईआरजीसी ने शिपिंग कंपनियों को अमेरिका के खिलाफ भी चेतावनी दी। बयान में कहा गया कि कंपनियों को अमेरिकी सेना के उकसावे में नहीं आना चाहिए और अपने जहाजों तथा चालक दल की जान-माल को अनावश्यक खतरे में नहीं डालना चाहिए।

होर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां समुद्री यातायात में किसी भी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

जापान: 11 साल बाद जन्मदर में मामूली सुधार, इस साल छह महीने में 3.42 लाख बच्चों का जन्म

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जापान में बुजुर्ग होती आबादी और लगातार घटती जन्म दर के बीच थोड़ी राहत की खबर सामने आई है। ये खुशखबरी एक दशक से अधिक समय बाद सुनने को मिली है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के दौरान देश में 3,42,068 बच्चों का जन्म हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 0.8 प्रतिशत अधिक है। इसमें विदेशी नागरिकों के यहां जन्मे बच्चे भी शामिल हैं।

क्योडो न्यूज एजेंसी ने शनिवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की। बताया गया कि स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की पहली छमाही के मुकाबले इस साल 2,788 अधिक बच्चों का जन्म हुआ है। जनवरी-जून अवधि में यह वृद्धि 11 साल बाद पहली बार दर्ज की गई है।

जापान में जन्म दर में लंबे समय से गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 1973 में देश के दूसरे बेबी बूम के दौरान करीब 20.9 लाख बच्चों का जन्म हुआ था। इसके बाद जन्म दर में लगातार कमी आती गई।

हालिया बढ़ोतरी के पीछे विवाह की संख्या में सुधार को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। वर्ष 2024 और 2025 में जापान में विवाहों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2025 में विदेशी नागरिकों से होने वाली शादियों को शामिल करते हुए करीब 5.05 लाख विवाह हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.1 प्रतिशत अधिक और लगातार दूसरी वार्षिक वृद्धि थी।

वहीं, जनवरी-जून 2026 के दौरान 2,38,979 जोड़ों ने विवाह किया, जो एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 0.2 प्रतिशत अधिक है।

आंकड़ों के मुताबिक, देश के 47 में से 26 प्रांतों में जन्म संख्या बढ़ी। टोक्यो में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई, जहां नवजातों की संख्या 2,278 बढ़ी। इसके बाद आइची में 517 और फुकुओका में 438 की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, 21 प्रांतों में जन्म संख्या में गिरावट दर्ज की गई। इनमें इशिकावा में सबसे बड़ी कमी 360 की रही।

हालांकि, विशेषज्ञों और विभिन्न अनुमानों के मुताबिक जापान की जन्म दर में यह सुधार लंबे समय तक कायम रहने की संभावना सीमित है। देश में बच्चे पैदा करने की उम्र वाली आबादी लगातार घट रही है। साथ ही, विवाह में देरी करने या विवाह नहीं करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है, जिसका सीधा असर भविष्य में जन्मों पर पड़ सकता है।

इसी बीच जनवरी-जून 2026 के दौरान जापान में 7,78,982 लोगों की मौत हुई, जो पिछले साल की समान अवधि से 6.9 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद जन्म और मृत्यु के बीच भारी अंतर बना रहा। छह महीनों में देश की प्राकृतिक आबादी 4,36,914 कम हुई।

जापान में 2025 में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या घटकर करीब 7.05 लाख रह गई थी। यह लगातार दसवां साल था जब जन्म संख्या ने नया रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ। इसके बाद सरकार पर उन लोगों के लिए सहायता बढ़ाने का दबाव बढ़ा है जो विवाह करना और बच्चे पैदा करना चाहते हैं।

जापान की घटती आबादी केवल जनसांख्यिकीय चुनौती नहीं है, बल्कि इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कामकाजी आबादी कम होने से कई क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी बढ़ सकती है, जबकि उपभोक्ताओं की संख्या घटने से कारोबार और स्थानीय सेवाओं की व्यवहार्यता प्रभावित होने का खतरा है।

विशेषज्ञों के लिए एक और बड़ी चिंता सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है। आबादी में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ने और कामकाजी लोगों की संख्या घटने से स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि 2026 की पहली छमाही के आंकड़े जापान के लिए एक छोटी सकारात्मक खबर लेकर आए हैं, लेकिन फिलहाल इसे देश की दशकों पुरानी जनसंख्या गिरावट में निर्णायक बदलाव मानना जल्दबाजी होगी।

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