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Tuesday,07-July-2026
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विदेशी कंपनियों, निवेशकों के साथ किस तरह खुलेआम भेदभाव कर रहा चीन

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पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा पर जारी गतिरोध के बीच भारत में चीनी कंपनियों और उनके परिचालन के खिलाफ भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। चीन ने कई एप्स पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक नियमों को हवाला दिया है और साथ ही वह खुद को नए जमाने के व्यापार का अग्रदूत कहता है। मगर उसकी खुद की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। चीन खुद लंबे समय से उद्योगों के बीच भेदभाव कर रहा है। विशेष रूप से विदेशी संस्थाओं के खिलाफ, जो उस देश में काम करने के लिए आती हैं। चीन में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के मार्च के एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आधे से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है।

विदेशी कंपनियों ने लंबे समय से चीनी व्यवसायों, विशेषकर राष्ट्र के स्वामित्व वाले उद्यमों के साथ असमान प्रतिस्पर्धा के बारे में शिकायत की है।

उदाहरण के लिए चीन में काम करने वाली भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों टीसीएस, एचसीएल, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और विप्रो की वृद्धि एक दशक के परिचालन के बाद भी बाजार पहुंच प्रतिबंध और गैर-टैरिफ बाधाओं से पंगु हो गई है।

चीन ने देश में चलने वाली वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक सख्त नियम बनाकर रखे हैं और यह चीन के तथाकथित ‘ग्रेट फायरवॉल’ से इंटरनेट सेंसरशिप के कारण अवरुद्ध (ब्लॉक) हैं।

वैसे तो चीन भारत की ओर से सुरक्षात्मक ²ष्टिकोण से उसके एप्स पर लगाए गए प्रतिबंधों का रोना रो रहा है, मगर वह अपने गिरेबां में झांकना तक नहीं चाहता। चीनी सरकार ने विकिपीडिया, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और कुछ अन्य गूगल सेवाओं को अपने देश के लिए खतरनाक बताते हुए पूरी तरह से अवरुद्ध या अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया हुआ है।

विदेशी निवेशकों के खिलाफ चीन की भेदभावपूर्ण नीतियों को भी अच्छी तरह से जाना जाता है।

चीन में दीर्घकालिक वीजा प्राप्त करना वास्तव में मुश्किल है। इसके लिए निवेशकों को एक कंपनी बनाने और चीन के अविकसित पश्चिम में 500,000 डॉलर का निवेश करने की जरूरत होती है। इसके अलावा एक केंद्रीय प्रांत में 1,000,000 डॉलर या किसी अन्य क्षेत्र में 2,000,000 डॉलर का निवेश करके चीनी निवेश वीजा प्राप्त करना होता है।

विदेशी (स्थानीय लोग भी) चीन में संपत्ति को फ्री होल्ड नहीं कर सकते हैं। भूमि का हर भूखंड शुद्ध रूप से राष्ट्र का है और अधिकतम 70 साल की लीजहोल्ड पर ही प्राप्त किया जा सकता है। यह रियल एस्टेट निवेशकों के लिए व्यापार को बहुत कठिन बनाता है। शेयर निवेशकों को भी गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। विदेशी केवल हांगकांग के माध्यम से ‘ए-शेयर’ खरीद सकते हैं। ऐसा करने के लिए आपको हांगकांग ब्रोकरेज में अकाउंट खोलना होगा।

चीन की नियामक और कानूनी प्रणालियों में पारदर्शिता की कमी और कानून के शासन की कमी विदेशी निवेशकों को भेदभावपूर्ण प्रथाओं जैसे नियमों के चयनात्मक प्रवर्तन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के लिए असुरक्षित छोड़ने पर मजबूर करती है।

कुछ विदेशी कारोबारियों ने बताया है कि स्थानीय अधिकारी और नियामक कभी-कभी तो केवल स्वैच्छिक प्रदर्शन आवश्यकताओं या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ ही ऐसे निवेश को स्वीकार करते हैं, जो कुछ घरेलू उद्योगों को विकसित करने और स्थानीय नौकरियों के सृजन में मदद कर सके।

चीन में व्यवसाय को लेकर इस तरह के अन्य कई मापदंड हैं, जो विदेशी व्यवसायियों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं। मगर इसके बावजूद चीन खुद को नए जमाने के व्यापार का तथाकथित अग्रदूत कहता है और भारत द्वारा उसके एप्स पर सुरक्षा के ²ष्टिकोण से प्रतिबंध लगाने पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के उल्लंघन का रोना रोता है।

व्यापार

लगातार चार सत्रों की तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार में मुनाफावसूली, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद

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लगातार चार सत्रों की तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को मुनाफावसूली देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 104.35 अंक या 0.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,180.72 और निफ्टी 31.65 अंक या 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,398.70 पर था।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 186.20 अंक या 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,285.30 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.70 अंक या 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,213.40 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाइटन, इटरनल, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, आईटीसी और एसबीआई गेनर्स थे। ट्रेंट, बीईएल, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, टाटा स्टील, सन फार्मा, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल लूजर्स थे।

सूचकांकों में निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी मिड स्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑयलएंडगैस लाल निशान में थे।

बाजार के जानकारों ने कहा कि सत्र के दूसरे हिस्से में मुनाफा वसूली देखने को मिली। इसकी वजह एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी फेड के मिनट्स से पहले निवेशकों का सतर्क होना है।

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, आईटी शेयरों ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और जून तिमाही के नतीजों के सीजन से पहले अपनी बढ़त बनाए रखी। अमेरिका-ईरान विवाद और ट्रेड टैरिफ को लेकर चिंताएं कम होने के साथ, बाजार का ध्यान अब वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजों और मानसून की प्रगति पर जा रहा है। इस बीच, विदेशी निवेश में सुधार और रुपए में स्थिरता से बाजार के सेंटीमेंट को निकट भविष्य में सहारा मिलने की उम्मीद है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारतीय शेयर बाजार कच्चे तेल में गिरावट और आईटी शेयर में खरीदारी से उछला; सेंसेक्स 77,000 के पार

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कच्चे तेल में गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई। सुबह 9:15 पर सेंसेक्स 217 अंक या 0.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,139 और निफ्टी 74 अंक या 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,074 पर था।

शुरुआती कारोबार में तेजी का नेतृत्व आईटी शेयर कर रहे थे। इस कारण सूचकांकों में निफ्टी आईटी 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑटो, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी कमोडिटीज हरे निशान में थे। दूसरी तरफ निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी मीडिया लाल निशान में थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी बनी हुई है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 187 अंक या 0.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 62,196 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 86 अंक की मजबूती के साथ 19,018 पर था।

सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, इटरनल, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व,एमएंडएम, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एचयूएल, एशियन पेंट्स आईटीसी और एसबीआई गेनर्स थे। एनटीपीसी, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एलएंडटी, बीईएल, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट लूजर्स थे।

आईटी शेयर में बढ़त के अलावा बाजार में तेजी के वजह कच्चे तेल में गिरावट को माना जा रहा है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का दाम कम होकर 70.75 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के चलते, यह बीते एक महीने में करीब 25 प्रतिशत लुढ़क गया है।

वैश्विक बाजारों में गिरावट का रुझान देखा जा रहा है। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। केवल हांगकांग और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को लाल निशान में बंद हुआ था, जिसमें डाओ जोन्स मामूली 0.03 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। वहीं, टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.66 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

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राष्ट्रीय समाचार

केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने बढ़ाया अदाणी पोर्ट्स का ईएसजी स्कोर, पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में फिर साबित की मजबूत स्थिति

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पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ईएसजी) के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति को और मजबूत करते हुए अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईज़ेड) को केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने 84.3 का ईएसजी स्कोर दिया है।

यह स्कोर बताता है कि ईएसजी से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन, पारदर्शी खुलासों, मजबूत नीतियों और बेहतर प्रदर्शन के मामले में अदाणी पोर्ट्स “लीडरशिप” स्थिति में है। वहीं कंपनी के पिछले 81 अंकों के मुकाबले इस बार उसका स्कोर 3.3 अंक बढ़ा है।

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह रेटिंग केयरएज ईएसजी रेटिंग्स की वार्षिक समीक्षा के बाद दी गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों को भी शामिल किया गया है।

कंपनी के अनुसार, यह रेटिंग बढ़ोतरी ईएसजी प्रदर्शन और पारदर्शिता में लगातार हुए सुधार को दर्शाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण के क्षेत्र में उत्सर्जन, ऊर्जा, पानी और कचरे की तीव्रता में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरण संबंधी पहलुओं को शामिल करने जैसे कदमों ने कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाया है।

सामाजिक क्षेत्र में सुरक्षा प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने, विविधता, समान वेतन और कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने जैसे प्रयासों का भी सकारात्मक असर देखने को मिला।

कंपनी ने बताया कि बोर्ड स्तर पर ईएसजी की निगरानी, व्यापक गवर्नेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम और वैल्यू चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय जैसी पहल ने उसके कॉरपोरेट गवर्नेंस ढांचे को और मजबूत किया है।

कंपनी ने कहा, “यह रेटिंग इस बात की पुष्टि करती है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। यह पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन से जुड़े सभी पहलुओं में सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और लगातार सुधार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

इसी सप्ताह एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी अदाणी पोर्ट्स की लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को “बीबीबी-” से बढ़ाकर “बीबीबी” कर दिया था। साथ ही कंपनी के लिए “स्टेबल” आउटलुक भी बरकरार रखा था।

एसएंडपी ने यह अपग्रेड कंपनी की मजबूत नकदी प्रवाह क्षमता और स्वस्थ वित्तीय स्थिति बनाए रखते हुए बड़े विस्तार कार्यक्रम को पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया है।

इस अपग्रेड के बाद एसएंडपी की ओर से अदाणी पोर्ट्स की रेटिंग भारत की सॉवरेन रेटिंग के बराबर पहुंच गई है।

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