राजनीति
गृहमंत्री से की गई सुदर्शन टीवी के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील
विवाद का रूप ले चुके ‘यूपीएससी जिहाद’ को लेकर 91 पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह ने गृहमंत्री अमित शाह को और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिविल सेवाओं में मुस्लिम अधिकारियों के साजिशन घुसपैठ या यूपीएससी जिहाद और सिविल सर्विसेज जिहाद जैसे बयान विकृत विचारधारा का उदाहरण और दंडनीय अपराध है। पत्र में हस्ताक्षरकतार्ओं ने कहा, “ऐसे सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना बयानों से नफरत फैलती है और पूरे समुदाय की बदनामी होती है।”
पत्र में गृहमंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण, दिल्ली के उपराज्यपाल व दिल्ली के मुख्यमंत्री सचिव, गृह मंत्रालय सचिव, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और पुलिस आयुक्त दिल्ली को संबोधित किया गया है।
पूर्व सिविल सेवकों ने कहा, “हम इस पत्र के माध्यम से सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल द्वारा एक सांप्रदायिक आरोप, विभाजनकारी और सनसनीखेज सीरीज के प्रसारण को लेकर एक जरूरी मुद्दा उठा रहे हैं। यह सीरीज देश के दो सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं आईएएस और आईपीएस में मुस्लिम अधिकारियों की संख्या में अचानक वृद्धि होने को लेकर भर्ती प्रक्रिया में साजिश का पदार्फाश करने का दावा करती है।”
उन्होंने समाचार चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आगे कहा, “इस संबंध में जामिया मिलिया इस्लामिया को चुना गया है। हम जानते हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सीरीज के टेलीकास्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, हमें लगता है कि इसे लेकर मजबूत कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।”
पत्र में कहा गया, “यह आरोप लगाना कि सिविल सेवाओं में मुस्लिम अधिकारियों की साजिशन घुसपैठ करने, या इस संबंध में यूपीएससी जिहाद या सिविल सेवा जिहाद जैसे शब्दों का प्रयोग अत्यंत अनुचित है। ऐसे सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना बयान और भाषण से घृणा फैलने के साथ पूरे समुदाय की बदनामी होती है।”
हस्ताक्षरकतार्ओं ने पत्र में कहा, “यदि इस कार्यक्रम के प्रसारण की अनुमति दी जाती है तो यह देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिमों के प्रति बिना किसी ठोस आधार के घृणा उत्पन्न करेगा। देश में मुस्लिमों के खिलाफ कोरोना जिहाद और लव जिहाद के आरोप सहित कई घृणित भाषण के मुद्दे पहले ही सुलग रहे हैं, जिसे विभिन्न अदालतों ने भी गलत माना है। यह टेलीकास्ट उसी आग को बढ़ाने में ईंधन का काम करेगा।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह सिविल सेवा भर्ती के लिए प्रमुख संगठन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की त्रुटिहीन प्रतिष्ठा को, इसके भर्ती प्रकिया के पक्षपाती होने का दावा करते हुए धूमिल करेगा।
पत्र में आगे कहा गया है, “यह सरकारी सेवाओं में खासकर आईएएस और आईपीएस सेवाओं के लिए चुने जाने वाले मुसलमानों की संख्या में वृद्धि के बारे में गलत धारणा फैलाएगा।”
उन्होंने कहा, ” ‘यूपीएससी जिहाद’ और ‘सिविल सेवा जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल देश के नागरिक प्रशासन को धर्म के आधार पर बांटने का एक प्रयास है और पूरे भारत के विकास के लिए प्रशासकों द्वारा किए गए उत्कृष्ट योगदान को नजरअंदाज करने वाला है।”
हाल ही में इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कार्यक्रम के प्रसारण पर कोई रोक न लगाते हुए कहा, “हम ध्यान दें कि सक्षम प्राधिकरण, वैधानिक प्रावधानों के तहत कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए शक्तियों के साथ निहित है, जिसमें सामाजिक सौहार्द और सभी समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक कानून के प्रावधान भी शामिल हैं।”
उन्होंने मांग करते हुए कहा, “इसलिए हम केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने का आग्रह करते हैं। हम सूचना और प्रसारण मंत्रालय और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्डस अथॉरिटी ऑफ इंडिया से यह भी जांच करने का अनुरोध करते हैं कि वे जांच करे कि यह शो केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994, केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) अधिनियम के तहत चलना चाहिए या नहीं और उसके बाद कोड ऑफ एथिक्स और ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड के अनुसार उन पर कार्रवाई करें।”
इस पत्र पर दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग, आईएफएस (सेवानिवृत्त) व पूर्व विदेश सचिव और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष राहुल खुल्लर, मध्य प्रदेश सरकार में काम कर चुके हर्ष मंदर, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग में पूर्व सचिव अनीता अग्निहोत्री और सीबीआई में पूर्व स्पेशल डायरेक्टर के. सलीम अली ने हस्ताक्षर किए हैं।
वहीं अन्य हस्ताक्षरकतार्ओं में राजस्थान में पूर्व मुख्य सचिव सलाउद्दीन अहमद, कैबिनेट सचिवालय में पूर्व विशेष सचिव आनंद अरनी, मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्य सचिव शरद बेहर, पूर्व स्वास्थ्य सचिव जाविद चौधरी, भारतीय खाद्य निगम के पूर्व अध्यक्ष पी. आर. दासगुप्ता, यूनाइटेड किंगडम के पूर्व उच्चायुक्त नरेश्वर दयाल, वित्त मंत्रालय में पूर्व सचिव और मुख्य आर्थिक सलाहकार नितिन देसाई, पूर्व स्वास्थ्य सचिव केशव देसीराजू, पूर्व सचिव (राजस्व) और एशियन डेवलपमेंट बैंक के पूर्व एक्जीक्यूटिव निर्देशक पी.के. लाहिड़ी भी शामिल हैं।
वहीं पत्र पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई कुरैशी, संस्कृति मंत्रालय के पूर्व सचिव और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जौहर सिरकार, इंटर स्टेट काउंसिल के पूर्व सचिव अमिताभ पांडेय, गुजरात सरकार में पूर्व पुलिस महानिदेशक पी. जी. जे नामपूथिरी, पूर्व विदेश सचिव व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी के पूर्व चेयरमैन श्याम सरन और वित्त मंत्रालय में पूर्व सचिव नरेंद्र सिसोदिया ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
ई-20 पेट्रोल के विरोध में 4 अगस्त को पीएम आवास तक मार्च करेंगे अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि ई-20 पेट्रोल नीति के विरोध में मंगलवार को वह पार्टी के 100 कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। उनका कहना है कि इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम तैयार की गई ऑनलाइन याचिका और जनता के पत्र उन्हें सौंपने का प्रयास किया जाएगा। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री उनसे मुलाकात करेंगे और इस मुद्दे पर लोगों की चिंताओं को सुनेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि ई-20 पेट्रोल के खिलाफ शुरू किए गए ऑनलाइन अभियान को कुछ ही दिनों में 2,33,238 लोगों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि इतने लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस नीति को लेकर जनता की चिंता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि वह मंगलवार दोपहर 12 बजे आम आदमी पार्टी मुख्यालय से प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना होंगे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले प्रधानमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि अब वह स्वयं प्रधानमंत्री आवास जाकर लोगों की ओर से तैयार की गई याचिका और पत्र सौंपने का प्रयास करेंगे तथा इस विषय पर चर्चा करना चाहेंगे। केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ई-20 नीति पर कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सरकार बिना पर्याप्त वैज्ञानिक और तकनीकी जवाब दिए देशभर में ई-20 पेट्रोल को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस ईंधन के उपयोग से लोगों की गाड़ियों की माइलेज प्रभावित हो रही है और कई वाहन मालिकों को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास इस नीति के पक्ष में ठोस तर्क हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से रखा जाना चाहिए। केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि ई-20 के विरोध में आवाज उठाने वालों को डराने और दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और आम नागरिक यदि इस मुद्दे पर सवाल उठाते हैं तो उन्हें ट्रोल किया जाता है और कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आती है। उनके अनुसार इससे लोगों में भय का माहौल बन रहा है।
उन्होंने दावा किया कि हाल ही में आयोजित ई-20 विरोधी टाउनहॉल कार्यक्रम को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला। केजरीवाल के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद थे, जबकि लाखों लोगों ने इसे ऑनलाइन भी देखा। उन्होंने इसे ई-20 के खिलाफ बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया। अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि ई-20 नीति के पीछे कोई ‘छिपा हुआ एजेंडा’ हो सकता है।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या भारत पर इथेनॉल नीति को किसी बाहरी दबाव में लागू किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर इथेनॉल आयात किए जाने की संभावना है और इस संबंध में केंद्र सरकार को देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने कहा है कि मंगलवार का मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और उसका उद्देश्य केवल प्रधानमंत्री तक जनता की चिंताओं और मांगों को पहुंचाना है।
राजनीति
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: कांग्रेस ने अनुभव और नए चेहरों के बीच बनाया संतुलन, नागेंद्र को शामिल करना चौंकाने वाला फैसला

कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को कर्नाटक कैबिनेट के विस्तार में अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाए रखा। हालांकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक बी. नागेंद्र को शामिल करना पार्टी नेतृत्व के सबसे चौंकाने वाले फैसलों में से एक रहा है।
उम्मीद है कि विपक्ष कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित घोटाले को लेकर सरकार को घेरेगा।
एक कथित घोटाले और उसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच से जुड़े आरोपों के कारण नागेंद्र ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि उन्हें दोबारा मंत्री बनाने का फैसला करने से पहले पार्टी लीडरशिप ने सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कानूनी राय ली थी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य सीआईडी ने नागेंद्र को क्लीनचिट दे दी है जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी रखे हुए है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने मंत्रिमंडल में उनकी वापसी को मंजूरी देने से पहले कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर विचार किया है।
कैबिनेट विस्तार में कई चौंकाने वाले फैसले और कुछ लोगों को शामिल न करने जैसी बातें भी सामने आईं, जो कांग्रेस हाईकमान की ओर से किए गए सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने की कोशिश को दिखाती हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की करीबी राजनीतिक सहयोगी मानी जाने वाली पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर को विस्तारित मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला। राजनीतिक विश्लेषक उनके इस फैसले को एक बड़ा झटका मान रहे हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एचसी महादेवप्या, तनवीर सैत, दिनेश गुंडू राव, एसएस मल्लिकार्जुन और एचके पाटिल भी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
नए शामिल किए गए नेताओं में से पूर्व मंत्री मधु बंगारप्पा ने पार्टी नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया और समाज के सभी वर्गों के लिए काम करने का वादा किया।
बंगारप्पा ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिला है। जनता और पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है। हम उन लोगों के लिए काम करेंगे जिन्होंने हमें वोट दिया है और जिन्होंने नहीं दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के पुत्र अजय सिंह ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कलबुर्गी जिले के जेवरगी निर्वाचन क्षेत्र की जनता के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि इस अवसर के लिए मैं पार्टी नेतृत्व का आभारी हूं। मैं कर्नाटक की जनता और जेवरगी के मतदाताओं का भी आभारी हूं। मैं 2018 और 2023 में चुनाव नहीं लड़ पाया। मेरे पिता हमेशा कहते थे कि राजनीति में धैर्य रखना पड़ता है और इंतजार करना ही पड़ता है। उनकी सलाह आखिरकार सच साबित हुई है।
पूर्व मंत्री शिवराज तंगदागी ने उन पर भरोसा जताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे सहित कांग्रेस नेतृत्व को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, मेरे समर्थको ने मंत्रिमंडल में मेरी वापसी के लिए प्रतिदिन प्रार्थना की। उन्होंने मंत्रालय और तिरुपति की तीर्थयात्रा भी की। मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और कर्नाटक की जनता का आभार अर्जित करूंगा।”
चल्लाकेरे के विधायक टी. रघु मूर्ति (तीसरी बार विधायक) ने अपने पदभार ग्रहण करने को वर्षों की निष्ठा और दृढ़ता का पुरस्कार बताया।
उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया का धन्यवाद करता हूं। मुझे मुख्यमंत्री का फोन आया था, जिसमें उन्होंने मुझे शामिल किए जाने की जानकारी दी। मैंने पहली बार 2008 में पार्टी टिकट की इच्छा जताई थी लेकिन मुझे टिकट नहीं मिला। पार्टी के लिए वर्षों तक काम करने के बाद आखिरकार मुझे मनोनीत किया गया। चित्रदुर्ग जिले में भाजपा की शानदार जीत के बावजूद मैंने अपनी सीट बरकरार रखी। मेरी निष्ठा और अनुभव को मान्यता मिली है।
पांच बार के विधायक एचसी बालकृष्ण ने मुख्यमंत्री शिवकुमार, डीके सुरेश, सिद्धारमैया और कांग्रेस हाईकमान को उन पर विश्वास जताने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि मुझ पर रखे गए भरोसे पर मै खरा उतरूंगा। मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया है। मैं अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा। बालकृष्ण मुख्यमंत्री पद के लिए शिवकुमार की उम्मीदवारी के प्रबल समर्थकों में से एक थे।
हावेरी के विधायक रुद्रप्पा लमानी ने कहा कि उनकी नियुक्ति से यह साबित होता है कि समर्पण और कड़ी मेहनत का अंततः फल मिलता है। उन्होंने कहा कि मैंने मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए पैरवी नहीं की। जब मैं अपने पैतृक स्थान पर था तब मुझे मुख्यमंत्री का फोन आया। इससे साबित होता है कि ईमानदारी और मेहनत का फल मिलता है। मैं कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। पेयजल आपूर्ति और भूमिगत जल निकासी व्यवस्था में सुधार मेरी प्राथमिकताओं में शामिल होंगे।
मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्व मंत्री जमीर अहमद खान की वापसी भी हुई, जिनका शामिल होना दावनगेरे उपचुनाव के बाद हुए विवादों के मद्देनजर कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आश्चर्य की बात थी।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि उनकी संगठनात्मक क्षमता और केरल में कांग्रेस के चुनाव प्रचार में उनके योगदान को नेतृत्व द्वारा विचार किए गए कारकों में शामिल किया गया था।
एक और चौंकाने वाला नाम बेगलुरु के विधायक रिजवान अरशद का था, जिन्हें कांग्रेस के युवा चेहरों में से एक माना जाता है। पार्टी नेताओं ने दावणगेरे उपचुनाव के दौरान उनके संगठनात्मक कार्यों और प्रयासों को मंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत करने वाले कारक बताया।
पूर्व मंत्री संतोष लाड ने मंत्रिमंडल विस्तार का स्वागत किया और एक बार फिर लेबर पार्टी का पोर्टफोलियो संभालने की अपनी इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं श्रम विभाग को वापस लाना चाहता हूं। सरकार ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाया है। जब भी ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से कुछ असंतोष होता है। कुल मिलाकर, मैं मंत्रिमंडल के विस्तार का स्वागत करता हूं।”
पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव (जिन्हें मंत्रालय में शामिल नहीं किया गया) ने कहा कि उन्हें इस फैसले से कोई निराशा नहीं है। उन्होंने कहा, “मेरी कोई अपेक्षा नहीं थी। मैं पहले ही मंत्री के रूप में कार्य कर चुका हूं। दूसरों को भी अवसर मिलना चाहिए और प्रशासनिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए। यह अच्छी बात है कि राज्य में अब पूर्ण रूप से गठित मंत्रिमंडल है।”
राजनीति
कांग्रेस सांसदों ने पप्पू यादव पर हमले को गलत बताया, कहा-सरकार लोगों को डरा रही

संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए संसद में सार्थक चर्चा की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की, प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तृत बहस की आवश्यकता जताई और छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मामले में गृह मंत्री से संसद में बयान देने की मांग दोहराई।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पप्पू यादव पर हुए कथित हमले को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमत होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके साथ हिंसक या अनुचित व्यवहार किया जाए। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और असहमति का जवाब संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
संसद में लाए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने बहुमत के बल पर कई बार विधेयकों को ध्वनि मत से पारित करा देती है, जिससे विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ विधेयकों के दौरान विपक्ष के नेता को पूरा समय नहीं मिला और बहस आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह गई। उनका कहना था कि संसद का उद्देश्य केवल विधेयक पारित करना नहीं बल्कि सभी पक्षों की राय सुनना और लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करना भी है। संख्या बल के आधार पर चर्चा को सीमित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी पप्पू यादव पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका जवाब हिंसा, गाली-गलौज या किसी भी प्रकार की आक्रामक प्रतिक्रिया से नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू यादव ने किसी मंच पर अपनी बात रखी है तो उसका जवाब भी तर्क और शब्दों से ही दिया जाना चाहिए।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस और संवाद ही मतभेदों का समाधान है। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव छह बार सांसद रह चुके हैं और उनकी राय को सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
संसद के विधायी एजेंडे पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सदन में चार विधेयक पेश होंगे या नहीं। उन्होंने बताया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक दोपहर 1:05 बजे निर्धारित है, जिसमें यह तय होगा कि सदन में कितने विधेयकों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि बैठक के बाद ही इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।
पप्पू यादव पर हुए कथित हमले के संबंध में जेबी माथर ने भी इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे, चाहे वह राम मंदिर से जुड़ा हो या कोई अन्य संवेदनशील विषय, पर विरोध प्रदर्शन पत्र लिखकर, लेख प्रकाशित कर, प्लेकार्ड और बैनर के साथ प्रदर्शन करके या नारे लगाकर किया जा सकता है, लेकिन हिंसा या डराने-धमकाने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
इसी दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीतिक संभावनाओं पर भी सुखदेव भगत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने और जनता के बीच अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने प्रशांत किशोर को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब यह जनता तय करेगी कि उनके वादों और रणनीति पर कितना भरोसा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई पार्टी के रूप में जन सुराज के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा होगी।
उधर, कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने छात्रों पर कथित तौर पर एके-47 और पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस मामले पर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद के दोनों सदनों में आकर इस पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें। उनके अनुसार यह बेहद गंभीर विषय है और सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जेबी माथर ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा क्योंकि छात्रों से जुड़े मामलों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
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