राजनीति
गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को कश्मीर में करेंगे सुरक्षा समीक्षा बैठक
श्रीनगर, 8 अप्रैल। जम्मू-कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे पर मौजूद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे।
श्रीनगर के राजभवन में रात भर रुकने के बाद वह सुबह करीब 11 बजे से अपने व्यस्त कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे और केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली विकास समीक्षा की बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शामिल होंगे।
इसके बाद गृह मंत्री एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी निदेशक तपन डेका, जम्मू और कश्मीर मामलों से जुड़े गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जम्मू और कश्मीर पुलिस के प्रमुख, अर्धसैनिक बलों के प्रमुख और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी शामिल होंगे। ये दोनों बैठक राजभवन में आयोजित होने वाली हैं।
सोमवार को जम्मू-कश्मीर दौरे पर पहुंचने के बाद अमित शाह ने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित हुमहामा इलाके का दौरा किया था। यहां उन्होंने जम्मू और कश्मीर पुलिस के डिप्टी एसपी शहीद हुमायूं भट के परिवार से मुलाकात की। गृह मंत्री ने परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। वह करीब 20 मिनट तक हुमायूं के पिता, सेवानिवृत्त आईजीपी गुलाम हसन भट के साथ रुके। उन्होंने शहीद पुलिस अधिकारी की पत्नी फातिमा को भी संवेदना दी और अधिकारी के 20 महीने के बच्चे को आशीर्वाद दिया। शहीद के परिवार से मिलने के दौरान गृह मंत्री के साथ एलजी मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला भी थे।
बता दें कि हुमायूं 13 सितंबर, 2003 को अनंतनाग जिले के कोकरनाग तहसील के जंगलों में आतंकवादियों के एक समूह से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। अपनी बहादुरी के लिए अधिकारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।
इसके बाद गृह मंत्री राज भवन गए, जहां उन्होंने कुछ व्यक्तियों और प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। जम्मू दौरे के दौरान अमित शाह ने कठुआ जिले में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए चार पुलिसकर्मियों के परिवारों से भी मुलाकात की।
जम्मू में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है, लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। जम्मू विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के जम्मू स्थित आवास पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस के सदस्यों के साथ बंद कमरे में बैठक की।
सोमवार को कठुआ में बीएसएफ की सीमा चौकी के दौरे के दौरान गृह मंत्री ने बीएसएफ की देश के एक विशिष्ट सीमा प्रहरी बल के रूप में प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि सीमा की पूरी तरह तकनीक आधारित निगरानी के लिए बीएसएफ को अत्याधुनिक तकनीक मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने तैनात बीएसएफ जवानों से कहा कि देश सीमा की सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण बल का बहुत सम्मान करता है।
उन्होंने बीएसएफ अधिकारियों और जवानों से कहा कि आप साल भर, 24 घंटे अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं। बीएसएफ का एक गौरवशाली अतीत है और आप वास्तव में उस प्रतिष्ठा के हकदार हैं जो बीएसएफ ने देशवासियों के बीच अर्जित की है।
श्रीनगर में अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद अमित शाह दोपहर में दिल्ली लौट आएंगे।
राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी को आई मां की याद, बोले- ‘आज भी महसूस करता हूं कमी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपनी मां को याद किया। उन्होंने कहा कि वे आज भी मां की कमी महसूस करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ के विमोचन के समय उनके जीवन संघर्षों का विशेष उल्लेख किया। इसी बीच, पीएम मोदी ने अपनी मां को भी याद किया।
उन्होंने कहा, “मैं भाग्यशाली रहा हूं कि मेरी मां सौ साल से भी अधिक समय तक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं। उसके बावजूद आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।”
रामनाथ कोविंद के जीवन के बारे में बात करते प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है और लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं, जबकि जीवन की मुश्किलों और कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। मगर जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हो, तब व्यक्ति समाज की कमियां निकालने में समय नहीं गंवाता है। वह उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है। वह अपनी सफलता में समाज को बराबर की भागीदार मानता है। रामनाथ कोविंद की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा, “रामनाथ कोविंद का कानपुर देहात के क्षेत्र में एक साधारण परिवार में जन्म हुआ। कोविंद जी ने अपनी किताब में है ‘कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई। उनकी मां अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थी। आखिर एक सामान्य परिवार में मां के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में आग में फंसकर उनकी मां की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं कि छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना कितना दर्दनाक रही होगी। यह ऐसा घटनाक्रम था, कोई भी उससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों को मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “संघर्षों के बीच रामनाथ कोविंद ने शिक्षा को अपना सामर्थ बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, संसाधनों की कमी को कमजोर नहीं बनने दिया और एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना तब लोगों ने नहीं की होगी। वे भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने। इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व और उनकी सादगी कायम रही।”
उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद के भीतर देशसेवा की भावना थी। मोरारजी भाई देसाई के साथ काम करके उन्हें सीखने को मिला। साथ ही,नया रास्ता मिला। वहां से राजनीति और समाजसेवा को कोविंद जी ने अपना मार्ग बनाया। वे अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे और सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में रामनाथ कोविंद का कार्यकाल इसका गवाह है।
महाराष्ट्र
मुंबई मानखुर्द एटीएम कार्ड फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर फ्रॉड करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 5 अगस्त को शिकायत करने वाली महिला पैसे निकालने के लिए मंगल मूर्ति जंक्शन पर बने एटीएम सेंटर गई थी। एटीएम से पैसे निकालते समय उसके पीछे खड़े एक अनजान व्यक्ति ने कार्ड का पिन देख लिया। इसके बाद उसने चालाकी से एटीएम रॉड बदलकर 19,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में फ्रॉड का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग दिखे थे जो एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हुए पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान कल्याण के रहने वाले 30 साल के कासिम अली बरकत अली और 38 साल के परवेज अकबर अली शेख के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों से आगे की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने पहले कितने लोगों को ठगा है। यह कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी के निर्देश पर डीसीपी समीर शेख ने की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
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