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Saturday,01-August-2026
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जी- 23 में चुनाव चाहने वाले अब मना कर रहे, उनका मन क्यों बदला मेरे समझ से बाहर: शशि थरूर

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कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मलिकार्जुन खड़गे बनाम शशि थरूर है। खड़गे को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिला है वही जी 23 के नेताओं ने भी खड़गे को ही अपना समर्थन दिया। शशि थरूर का मानना है कि, जिन लोगों ने पार्टी में चुनाव की बात कही थी अब वह आम सहमति की बात कर रहे, अचानक उनका मन इतनी जल्दी क्यों बदल उन्हें इसकी जानकारी नहीं। वहीं शशि थरूर ने राजस्थान सियासी घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया ना देते हुए दुख व्यक्त किया है, उनका कहना है कि जो राजस्थान में हुआ वह दु:खद है। इसके साथ ही शशि थरूर का मानना है कि जिस तरह अध्यक्ष पद के चुनाव हो रहे हैं उसी तर्ज पर वकिर्ंग कमेटी के भी चुनाव होने चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए लड़ रहे चुनाव को लेकर शशि थरूर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, 5 साल बाद कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर चुनाव हो रहा है, गांधी परिवार ने तय किया कि अध्यक्ष पद चुनाव में वह शामिल नहीं होंगे। सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ही मानते हैं कि चुनाव से पार्टी की मजबूती होगी जो की बेहद अच्छा है।

केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री भी कह चुके हैं कि गांधी परिवार संगठन निष्पक्ष रहेंगे। मैंने अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है और जगह-जगह अपने लोगों से मैं मुलाकात भी कर रहा हूं।

सवाल: क्या जी 23 नेताओं का समर्थन ना मिलने पर आपको बुरा लगा?

जवाब: जी 23 कोई संगठन नहीं था, सोनिया गांधी को जिन वरिष्ठ नेताओं ने चिट्ठी लिख कर भेजी थी उन्होंने कई लोगों से समर्थन मांगा और 100 लोगों से संपर्क किया था। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के कारण कई लोगों के चिट्ठी पर हस्ताक्षर नहीं हो सके। वही चिट्ठी पर सिर्फ 23 लोग जो दिल्ली में उस वक्त मौजूद थे उन्होंने अपने हस्ताक्षर किए और उन्हीं 23 लोगों के हस्ताक्षर लेकर सोनिया गांधी को चिट्ठी भेजी गई।

जिन मुख्य तीन लोगों ने चिट्ठी पर हस्ताक्षर किए थे वह अब पार्टी में नहीं हैं, उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। मैं जी 23 का कोई प्रतिनिधि नहीं था और ना ही होने की इच्छा है मैं सिर्फ उनके विचारों के समर्थन में था, इनमें एक विचार था की पार्टी में चुनाव होने चाहिए। अब मैं चुनाव लड़ भी रहा हूं और 1 दिन वकिर्ंग कमेटी के लिए भी चुनाव होने चाहिए।

जिन लोगों ने पार्टी में चुनाव की बात कही थी अब वह आम सहमति होनी चाहिए और चुनाव नहीं चाहिए मुझे समझ नहीं आ रहा उनका मन इतनी जल्दी कैसे बदल गया। लेकिन मेरा मन नहीं बदला और मैं चुनाव लड़ रहा हूं जो मैंने चिट्ठी में लिखा था मैं उस पर अभी भी कायम हूं।

सवाल : आपको भरोसे में लेकर और खड़गे के समर्थन में प्रस्तावक बनना, आपको दुख है?

जवाब : हर व्यक्ति आजाद है और वह अपना पक्ष रख सकते हैं, मुझे इसका दुख नहीं है क्योंकि मैंने उनसे बात करके या एक साथ रहना चाहिए ऐसा कुछ नहीं कहा हम सब पार्टी में एक हैं, दोस्त हैं और सहयोगी भी हैं। यदि उनको कुछ अलग लगा तो वह उनकी मर्जी।

सवाल- क्या आप आखिर तक चुनाव लड़ेंगे नामांकन वापस लेने की कोई उम्मीद?

मैं यह कैसे वापस ले सकता हूं, मेरे साथ 60 प्रस्तावक हैं। उन्होंने मेरी उम्मीदवारी पर दस्तखत किए हैं कई लोगों ने मेरे लिए अपना समय भी दिया है। जो भरोसा उन्होंने मुझे दिया मैं कैसे धोखा दे सकता हूं। मैं उनके लिए उनकी आवाज होकर इस चुनाव में लडूंगा। हां मेरी हस्ताक्षर की सूची में इतने बड़े लोग नहीं हैं जो कि खरगे जी की सूची में है।

कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और साधारण व्यक्ति मेरे साथ हैं इसलिए मैं नामांकन पत्र वापस नहीं ले सकता हूं और ना ही कोई इसकी गुंजाइश है।

सवाल: आप कैसे अपना समर्थन जुटा और लोगों तक पहुंच रहे हैं?

जवाब: आगामी 15 दिनों के अंदर में 12 शहरों में जाकर समर्थन जुटाऊँगा। लोगों से संपर्क करूंगा पब्लिक मीटिंग करूंगा और कई जगहों पर व्यक्तिगत रूप से भी मैं मिलने जाऊंगा। अलग-अलग माध्यम के जरिए मैं लोगों तक अपनी बात पहुंचा लूंगा और अपने अध्यक्ष पद चुनाव को लेकर समर्थन मांगूंगा।

हालांकि जो डेलीगेट्स की सूची मुझे दी गई है उन सूची में 90 फीसदी लोगों के फोन नंबर नहीं है, तो उन तक पहुंचना आसान नहीं है। इन सूची में कहीं पर नंबर है तो कहीं पता दिया हुआ है तो कहीं सिर्फ जिले का ही नाम शामिल है। मैंने विचार किया था कि जितने लोगों के नंबर मेरे पास होंगे मैं उनको एक संदेश भेजूंगा लेकिन यह अब संभव नहीं है।

सवाल: राजस्थान घटनाक्रम पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, क्योंकि वहां से पहले अशोक गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे थे?

जवाब: राजस्थान में जो हुआ वह बेहद दुखद है लेकिन मैं इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा क्योंकि मैं इस बैठक में नहीं शामिल था और अंदर क्या बात हुई मुझे जानकारी नहीं है।

सवाल: कांग्रेस पार्टी में बदलाव केलिए आप वोट मांग रहे हैं, आपको लगता है खड़गे रहेंगे तो कठपुतली की तरह काम करेंगे?

जवाब: बिल्कुल नहीं क्योंकि मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं, हम कोई युद्ध नहीं कर रहे हैं। हम सब सहयोगी हैं हमने एक साथ काम किया है और भविष्य में चुनाव बाद भी हमें साथ मिलकर ही काम करना होगा। मैं अध्यक्ष बनता हूं तो क्या मैं खड़गे जी को पार्टी की बहतरी के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे? यह कोई सवाल नहीं। यदि आप किसी से भी पूछेंगे कि गांधी परिवार के अलावा वरिष्ठ नेताओं का नाम ले तो हर सूची में खड़गे साहब का नाम जरूर आएगा।

महाराष्ट्र

मुंबई: बीएमसी ने कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, अतिक्रमण और बिना इजाज़त कंस्ट्रक्शन हटाए, और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए कदम उठाए

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मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने पूरे मुंबई इलाके में एक ज़्यादा बड़ा और असरदार सफ़ाई अभियान शुरू किया है। इसके मुताबिक, शहर और उसके आस-पास के इलाकों में सफ़ाई बढ़ाने, खुले में कचरा फेंकने से रोकने और कचरा कमज़ोर जगहों (जीवीपीएस) को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। बाज़ारों, मुख्य सड़कों, फुटपाथों, पब्लिक जगहों और प्लॉटों, बैंकों और नालों और दूसरी पानी की जगहों के आस-पास के इलाकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सभी जीवीपीएस पर सीसीटीवी से नज़र रखी जा रही है, और जो लोग कचरा फैलाते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ़ सज़ा वाली कार्रवाई की जाएगी। म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने एडमिनिस्ट्रेटिव वार्ड के सभी असिस्टेंट कमिश्नरों को अपने-अपने इलाकों में सफ़ाई के बारे में रेगुलर इंस्पेक्शन करने और असरदार, बड़े पैमाने पर सफ़ाई पक्का करने का निर्देश दिया है। स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे और मेट्रो स्टेशनों, बस डिपो और बाज़ारों के आस-पास के इलाकों में फुटपाथ से सभी कब्ज़े हटाने के लिए तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि यह पक्का हो सके कि फुटपाथ बिना रुकावट वाले और आसानी से पहुँचने लायक हों। बिना इजाज़त के बने कंस्ट्रक्शन को गिरा दिया जाना चाहिए और उन्हें किसी भी हालत में रेगुलर नहीं किया जाना चाहिए। ज़रूरी सड़कों पर ट्रैफिक जाम की वजह बनने वाली चीज़ों को हटाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। अश्विनी भिड़े ने आगे निर्देश दिया कि नगर निगम के ‘मार्ग’ ऐप के ज़रिए मिली गड्ढों से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। भिड़े आज (1 अगस्त, 2026) नगर निगम हेडक्वार्टर में हुई मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के अलग-अलग डिपार्टमेंट की रिव्यू मीटिंग को संबोधित कर रहे थे, जो हाई कोर्ट के आदेशों के बाद हुई थी। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में हाई कोर्ट की मीटिंग में एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (सिटी) प्राजक्ता वर्मालावांगिरे, एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर, एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (ईस्टर्न सबर्ब्स) डॉ. अविनाश ढकने, जॉइंट कमिश्नर (विजिलेंस) डॉ. एम. देवेंद्र सिंह, और डिप्टी कमिश्नर (म्युनिसिपल कमिश्नर ऑफिस) श्री प्रशांत गायकवाड़ शामिल हुए। जॉइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, असिस्टेंट कमिश्नर और डिपार्टमेंट के हेड भी मीटिंग में शामिल हुए। हाई कोर्ट ने कंजरमार्ग वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में बदबू कंट्रोल में हुए बड़े सुधार को देखते हुए बीएमसी एडमिनिस्ट्रेशन और संबंधित कॉन्ट्रैक्टर द्वारा उठाए गए कदमों की तारीफ़ की है। इसे देखते हुए, म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने सभी ज़ोनल डिप्टी कमिश्नर, असिस्टेंट कमिश्नर और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के वार्ड-लेवल के सफ़ाई स्टाफ़ को निर्देश दिया है कि वे पूरी मुंबई में सफ़ाई पक्का करने और कचरे से प्रभावित इलाकों को हमेशा के लिए हटाने पर ध्यान दें।
म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने कहा कि मुंबई इलाके में सफ़ाई पक्का करने के लिए, बीएमसी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने उन जगहों की पहचान की है जहाँ अक्सर कचरा जमा होता है (हॉटस्पॉट)। वार्ड और ज़ोन के हिसाब से कैटेगरी में बांटी गई जगहों की एक लिस्ट तैयार की गई है और गूगल मैप्स पर मार्क की गई है। हर जगह का अब एक सिस्टमैटिक प्रोसेस से असेसमेंट किया जाएगा। प्रोसेस के मुख्य पहलुओं में कचरे के सोर्स और टाइप की पहचान करना; कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन, मैनपावर और मशीनरी में कमियों का असेसमेंट करना; निवासियों, बाज़ारों और कमर्शियल जगहों से जुड़ना; लोगों में जागरूकता और व्यवहार में बदलाव के उपाय लागू करना; सीसीटीवी-बेस्ड निगरानी और नियम लागू करना; और बार-बार नियम तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ डिसिप्लिनरी कार्रवाई करना शामिल है। इस कैंपेन की निगरानी वार्ड-वाइज़ रिकॉर्ड, फ़ोटोग्राफ़िक सबूत, डिजिटल मैपिंग और रेगुलर रिव्यू के ज़रिए की जाएगी। मार्केट, मुख्य सड़कों और फुटपाथ के साथ-साथ पब्लिक जगहों, खुले प्लॉट, तटीय इलाकों और नालों और दूसरे पानी के सोर्स के आस-पास के इलाकों में खास सफाई और नियम लागू करने के कैंपेन चलाए जाएंगे। इसके अलावा, अश्विनी भिड़े ने कहा कि प्लास्टिक और ठोस कचरे को नालों, नहरों और समुद्र में जाने से रोकने के लिए खास जगहों पर कंटेनमेंट और इंटरसेप्शन सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इस बीच, असिस्टेंट कमिश्नर को अपने-अपने इलाकों में रेगुलर जाकर सफाई पक्की करनी चाहिए। उन्हें लोकल लोगों को भरोसे में लेकर सफाई के टारगेट को पूरा करने के लिए असरदार तरीके से काम करना चाहिए। जोनल डिप्टी कमिश्नर को हर हफ्ते सफाई के काम का रिव्यू करना चाहिए और पॉजिटिव सुधार लाने के लिए कदम उठाने चाहिए। चूंकि मानसून के दौरान सड़कों के किनारे जमा होने वाला कचरा लोगों की सेहत और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसी जगहों को रेगुलर साफ किया जाना चाहिए। इन इलाकों से कचरा तुरंत हटाया जाना चाहिए, और लगातार निगरानी रखने पर खास ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, हेरिटेज साइट्स, टूरिस्ट जगहों, मुख्य पब्लिक जगहों और ऊंची जगहों पर नजर रखें।

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महाराष्ट्र

मुंबई साइबर फ्रॉड: बैंक से 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश में 7 लोग गिरफ्तार, 84 साइबर केस में वॉन्टेड आरोपी पुलिस कस्टडी में

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मुंबई; मुंबई साइबर पुलिस ने साइबर फ्रॉड में शामिल 7 लोगों को बैंक अकाउंट से 10 लाख रुपये निकालते हुए गिरफ्तार करने का दावा किया है। साइबर पुलिस को जानकारी मिली थी कि मुंबई में ओवरसीज बैंक बोरीवली ब्रांच से सलमान पठान अपने मेवल बैंक अकाउंट से पैसे निकालने वाला है। जब उसके साथी इंडिया ओवरसीज बैंक आए और 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश की, तो पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया। उनसे पूछताछ की गई। दोनों चेक के जरिए बैंक से 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने सलमान पठान के केजीएन ऑफिस पर छापा मारा और यहां से चार लोगों को हिरासत में लिया। जब सातों आरोपियों से पूछताछ की गई, तो पता चला कि फर्जी अकाउंट बनाकर फ्रॉड किया जा रहा था और बैंकों से पैसे निकाले जा रहे थे। इस मामले में केस दर्ज कर सात आरोपियों सलमान हबीब पठान (37), साजिद नौशाद कोटवाल (43), चिराग केतन (31), सैयद वजाहत (41), राकेश रमाशंकर मिश्रा (42), रश्तित राजंद (35) और आर्यन रितेश ठक्कर (18) को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 10 लाख रुपये कैश, 16 मोबाइल फोन, अलग-अलग कंपनियों की 31 सील, अलग-अलग कंपनियों के 23 सिम कार्ड, कुल 22 बैंक अकाउंट, 7 इंडियन ओवरसीज बैंक अकाउंट, एक कैश गिनने की मशीन, बैंक अकाउंट खोलने के डॉक्यूमेंट, 11 लोगों के आधार कार्ड, अलग-अलग बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट खोलने वाले टैब मिले हैं। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि उनके खिलाफ देशभर में 84 से ज़्यादा केस दर्ज हैं। साइबर सेल ने अपील की है कि साइबर जालसाजों के जाल में न फंसें और अपने बैंक अकाउंट की डिटेल न दें। साथ ही, सोशल मीडिया पर बात करते समय अपनी पर्सनल डिटेल न बताएं क्योंकि उनका इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया जाता है। साइबर डीसीपी बजरंग बनसोडे ने बताया कि पुलिस को इस मामले में साइबर फ्रॉड की जानकारी मिली थी और पुलिस ने साइबर मामलों में वॉन्टेड आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। उनके पास से 10 लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपियों के डॉक्यूमेंट्स समेत दूसरी चीजें भी जब्त की हैं।

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राष्ट्रीय समाचार

पिंगली वेंकैया: ब्रिटिश सैनिकों को सलामी देते देख आया था राष्ट्रीय ध्वज का विचार, फिर बना भारत का तिरंगा

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15 अगस्त 1947 को सुबह 5:30 बजे फहराया गया ध्वज एक नए युग के उदय के प्रतीक के रूप में शान से खड़ा था। सदियों के औपनिवेशिक शासन को सहने वाले राष्ट्र के लिए यह अपार खुशी, गौरव और राहत का क्षण था। उस विजयपूर्ण सुबह तक का सफर लंबा और कठिन था, जिसमें भारत के राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न स्वरूपों में बदलाव हुए। तीन रंगों और 24 चक्रों वाला राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा किसी डिजाइनर की कल्पना से नहीं बना, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रप्रेम की भावना और देश को विश्व में अपनी विशिष्ठ पहचान देने का एक संकल्प था। पिंगली वेंकैया ही वे शख्सियत थे, जिन्होंने हिंदुस्तान को उसके अभिमान का प्रतीक तिरंगा दिया।

2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे पिंगली वेंकैया एक स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी की लड़ाई के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को डिजाइन किया, जो आजादी के आंदोलन का प्रतीक बन गया था। जुलाई 1947 में हुई संविधान सभा की बैठक में इस ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया।

इतिहास में दर्ज है कि पिंगली वेंकैया ने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा की और दक्षिण अफ्रीका के एंग्लो-बोअर युद्ध में भाग लिया था। यहीं से पिंगली गांधीजी के संपर्क में आए और उनकी विचारधारा से बहुत प्रभावित हुए।

युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों को उनके ध्वज को सलाम करते देखकर वह अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने सोचा कि भारत के पास इस प्रकार का कोई ध्वज नहीं है और यहां से भारत के ध्वज के डिजाइन बनाने की शुरुआत हुई।

1906 में एआईसीसी के अधिवेशन में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को बनाने की इच्छा दिखाई। उन्होंने गांधीजी को सुझाव दिया कि हमारा अपना ध्वज होना चाहिए। गांधीजी को सुझाव पसंद आया और उन्होंने कहा कि अच्छा होगा कि वे स्वयं ध्वज का डिजाइन करें।

इतिहासकार राजीव लोचन ने एक इंटरव्यू में बताया, “पिंगली वेंकैया ने विचार किया कि हमें देश के लिए अलग से झंडा बनाना चाहिए, जोकि हमारे देश को आसानी से बता सके और उन्होंने झंडे के लिए तकरीबन 25 डिजाइनें चुनीं। झंडे के बारे में उन्होंने लोगों से चर्चा करना भी शुरू कर दिया था।”

कई बदलाव के बाद उन्होंने महात्मा गांधी के सामने एक फाइनल डिजाइन प्रस्तुत किया। 1921 में ध्वज ने अपना अधिक परिचित स्वरूप धारण किया, जिसे पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। तीन पट्टियां भारत के अलग-अलग समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं और विविधता में एकता का आह्वान करती थीं। केंद्र में स्थित चरखा भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक था।

अंतिम परिवर्तन 1931 में हुआ, जब ध्वज के रंगों को अंतिम रूप दिया गया। केसरिया रंग साहस का, सफेद रंग शांति का और हरा रंग उर्वरता और विकास का प्रतीक था। चरखे की जगह धर्म चक्र को शामिल किया गया, जो शाश्वत धर्मचक्र और प्रगति का प्रतीक है। यह ध्वज, जिसे संविधान सभा की ओर से 22 जुलाई 1947 को औपचारिक रूप से अपनाया गया था, आज हमारा पूजनीय तिरंगा बन गया।

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