व्यापार
मेक इन इंडिया के तहत फॉक्सकॉन ‘आईफोन 15’ की प्रोडक्शन को लेेकर तैयार
‘मेक इन इंडिया’ की पहल के तहत एप्पल निर्माता फॉक्सकॉन तमिलनाडु के पास श्रीपेरंबुदूर में ‘आईफोन 15’ की प्रोडक्शन को लेेकर पूरी तरह से तैयार है। कंपनी का पूरा ध्यान मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाकर भारत में तेजी से अपनी जगह बनाना है। वहीं कंपनी का लक्ष्य वैश्विक बाजार में भी अपने पैर जमाना है।
करीबी सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि एप्पल का लक्ष्य अगले महीने के मध्य में वैश्विक स्तर पर ‘आईफोन 15’ को बाजार में वितरित करना है, ताकि लॉन्च के बाद बाजार में इसकी उपलब्धता कम न हो।
सूत्रों के अनुसार, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ‘आईफोन 15’ के निर्माण के बाद कंपनी का लक्ष्य इसे कम समय में अन्य देशों में निर्यात करने का है।
उन्होंने कहा कि भारत में अन्य एप्पल आपूर्तिकर्ता जैसे पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन (टाटा समूह द्वारा अधिग्रहित) भी जल्द से जल्द ‘आईफोन 15’ को असेंबल करेंगे।
पिछले साल सितंबर में एप्पल ने भारत में ‘आईफोन 14’ को असेंबल करना शुरू किया था, यह पहली बार था जब देश में वैश्विक लॉन्च के कुछ हफ्तों के भीतर एक नया आईफोन असेंबल किया गया।
इस बार समय डेडलाइन को लगभग एक महीने पहले कर दिया गया है, ताकि स्थानीय रूप से असेंबल किया गया ‘आईफोन 15’ त्योहारी सीजन से ठीक पहले वैश्विक स्तर पर देश में बिक्री के लिए उपलब्ध हो सके, साथ ही तेजी से निर्यात भी किया जा सके।
इस महीने की शुरुआत में एप्पल के सीईओ टिम कुक ने घोषणा की थी कि कंपनी ने आईफोन की मजबूत बिक्री के कारण भारत में जून तिमाही में रिकॉर्ड बनाया है।
वित्तीय वर्ष 2023 की तीसरी तिमाही के नतीजों के दौरान कुक ने कहा कि “भारत में हमारे नए स्टोर का प्रदर्शन हमारी उम्मीदों से अधिक रहा”।
कुक ने कहा, “आप जानते हैं कि हमने भारत में जून तिमाही में राजस्व रिकॉर्ड बनाया और हमने मजबूत दोहरे अंक में वृद्धि की। हमने इस दौरान अपने पहले दो स्टोर भी खोले और निश्चित रूप से यह फिलहाल शुरुआती दौर में है, लेकिन वे जिस तरह से काम कर रहे हैं, उसके मामले में वे हमारी उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हम कंपनी चैनल बनाने और देश में अपने डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ऑफर में अधिक निवेश करने पर काम करना जारी रखे हुए हैं।
उन्होंने कहा, “इस स्मार्टफोन बाजार में अभी भी हमारी हिस्सेदारी बहुत कम है, इसलिए मुझे लगता है कि यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा अवसर है और हम ऐसा करने के लिए अपनी सारी ऊर्जा लगा रहे हैं।”
आईडीसी के अनुसार 929 डॉलर के उच्चतम औसत बिक्री मूल्य के साथ एप्पल ने अप्रैल-जून की अवधि में भारत में 61 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की।
भारत अब वैश्विक स्तर पर एप्पल के शीर्ष 5 बाजारों में से एक है। आईफोन निर्माता ने अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट (45,000 रुपये और उससे अधिक) में नेतृत्व जारी रखा है।
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में एप्पल की बाजार हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी।
व्यापार
वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने और रुपए में मजबूती से सेंसेक्स 1,073 अंक चढ़कर बंद; निफ्टी 24,000 के पार

वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,073.61 अंक या 1.42 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,488.96 और निफ्टी 312.40 अंक या 1.32 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,031.70 पर बंद हुआ।
बाजार में चौतरफा खरीदारी देखी गई। इसे बैंकिंग शेयरों ने लीड किया। निफ्टी बैंक 2.29 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। निफ्टी पीएसयू बैंक 2.90 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 2.09 प्रतिशत की मजबूती देखी गई।
इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 2.24 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 2.71 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी, 1.50 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.34 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी में 0.85 प्रतिशत की मजबूती देखी गई। सूचकांकों में केवल निफ्टी एफएमसीजी 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 577.30 अंक या 0.94 प्रतिशत की मजबूती के साथ 61,966.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.50 अंक या 1.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,202.70 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, एक्सिस बैंक, टाइटन, मारुति सुजुकी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, आईटीसी और एशियन पेंट्स गेनर्स थे। इन्फोसिस, टीसीएस, सन फार्मा और एचयूएल लूजर्स थे।
बाजार में तेजी की वजह वैश्विक स्तर पर स्थिरता लौटने के संकेत मिलना है। अमेरिका-ईरान के बीच शांति के लिए लगातार बातचीत चल रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर आज बड़ी खबर आ सकती है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि दोनों देश के बीच बातचीत अब अंतिम चरण में है।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती भी बाजार में तेजी की वजह है। अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले भारतीय मुद्रा में सत्र में करीब 0.50 प्रतिशत की तेजी देखी गई और सत्र में यह करीब 1.35 प्रतिशत की मजबूती आ चुकी है। हालांकि, यह अभी भी 95 के ऊपर बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 76,000 के ऊपर

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 720 अंक या 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,135 और निफ्टी 247 या 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,967 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को ऑटो शेयर लीड कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी पीएसई के साथ ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183 अंक या 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,149 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 433 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 61,847 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एसबीआई, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, सन फार्मा और एनटीपीसी लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ खुले। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक हरे निशान में थे। वहीं, जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट खुलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ अमेरिकी की बातचीत अंतिम दौर में है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है।
खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 5.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 97.90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 91.12 डॉलर प्रति बैरल पर था।
व्यापार
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान वार्ता के चलते इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में दर्ज की गई उल्लेखनीय बढ़त

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरों से बाजार की धारणा मजबूत हुई, जिसके चलते इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
निफ्टी में सप्ताह के दौरान 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और आखिरी कारोबारी दिन यह 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 231 अंक या 0.31 प्रतिशत बढ़कर 75,415 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.24 प्रतिशत की तेजी रही।
एक विश्लेषक ने कहा, “बाजार में सुधार के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं। ऊंचे स्तरों पर मजबूत खरीदारी नहीं दिखने से बाजार की तेजी सीमित रही।”
आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन के कारण इसमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
रियल्टी, सीमेंट और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती बनी रही, जबकि एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर कमजोर रहे। थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के असर से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की चिंता बनी रही।
मिडकैप इंडेक्स ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप100 में 1.36 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की लगातार कोशिशों से रुपए को भी समर्थन मिला।
हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं के कारण घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इससे लगातार बनी महंगाई, ऊंची ऊर्जा कीमतों और बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक लिक्विडिटी और जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर अहम सपोर्ट एरिया रहेगा।
वहीं, बैंक निफ्टी में 54,200 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस देखा जा रहा है, जबकि 53,600 से 53,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिकवाली करते रहे और कुल निकासी लगभग 7,570 करोड़ रुपए रही।
निवेशकों की नजर अब भारत के अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर है, जिससे यह संकेत मिल सकता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालिया कमजोरी अस्थायी है या लंबे समय तक रहने वाली है।
इसके अलावा, आरबीआई की जून मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर पीसीई आंकड़े भी बाजार के लिए अहम संकेतक रहेंगे। यदि पीसीई आंकड़े ज्यादा आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में एफआईआई निवेश सीमित रह सकता है।
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