राष्ट्रीय समाचार
कर्नाटक में अलग-अलग सड़क हादसों में पांच की मौत, 23 घायल
कर्नाटक के हावेरी और मंड्या जिलों में गुरुवार को हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 23 से अधिक अन्य लोग घायल हो गए।
कर्नाटक के उडुपी जिले में एक अलग घटना में ब्रह्मावर कस्बे के पास एक निजी बस में आग लगने से सात यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई।
वहीं, हावेरी जिले के राणेबेन्नूर कस्बे के बाहरी इलाके में चालागेरी क्रॉस के पास गुरुवार तड़के एक कार खड़े ट्रक से जा भिड़ी, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
मृतकों की पहचान 27 वर्षीय सिद्धार्थ, 29 वर्षीय हसनमुखी और 51 वर्षीय यशोदा बाई के रूप में हुई है। तीनों दावणगेरे शहर के निवासी थे। घायलों सौंदर्या, सिंधु और एक वर्षीय काश्वाश्री को उपचार के लिए दावणगेरे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार राणेबेन्नूर से दावणगेरे की ओर जा रही थी, तभी वह सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। राणेबेन्नूर ग्रामीण पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।
एक अन्य दुर्घटना में मंड्या जिले के बेल्लूर टोल के पास एक निजी स्लीपर बस के पलट जाने से दो लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए।
यह हादसा मंगलुरु-बेंगलुरु राजमार्ग पर हुआ। बताया जा रहा है कि बस पहले सड़क किनारे लगे एक साइनबोर्ड से टकराई और फिर पलट गई। पुलिस को आशंका है कि तेज रफ्तार हादसे का कारण हो सकती है। घायलों को उपचार के लिए बेल्लूर कस्बे के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।
इस बीच, उडुपी जिले के ब्रह्मावर के पास एक निजी बस में आग लगने की घटना में सात यात्री सुरक्षित बच निकले। यह बस उडुपी से सागर की ओर जा रही थी, तभी वाहन के अंदर से धुआं निकलता दिखाई दिया। इसके बाद बस के इलेक्ट्रिकल बॉक्स में आग लग गई और धीरे-धीरे फैलने लगी।
कंडक्टर ने तुरंत बस रुकवाई और सभी सात यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। उडुपी के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा कर्मी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। आग लगने के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
राजनीति
तेजस्वी का मार्च राजनीतिक फायदा के लिए, बिहार की जनता पहले ही कर चुकी है रिजेक्ट: संजय झा

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के मार्च पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला (छात्र आंदोलन) पहले ही सुलझ चुका है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा, “मैंने पहले भी कहा है कि वे एक गैर-मुद्दे को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मामला पहले ही सुलझ चुका है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह से विफल रहा है।”
उन्होंन कहा, “यह उनका पार्ट-टाइम राजनीति करने का तरीका है। लोकतंत्र के लिए यह जरूरी है कि विपक्ष का नेता मजबूत रहे और राज्य के लिए सही मुद्दे उठाए, लेकिन वे इस मामले में लगातार विफल रहे हैं।”
संजय झा ने कहा, “उन्हें पहले अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए। उनकी पार्टी के विधायकों को भी लगता है कि जिस तरह की राजनीति वहां हो रही है, उसमें उनका कोई भविष्य नहीं है। मेरा मानना है कि बिहार सरकार ने जिस तरह से इस मामले को संभाला और मुख्यमंत्री ने जिस तरह से स्थिति पर नजर रखी और कार्रवाई की, वह तारीफ के काबिल है। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं। नीतीश जी ने पहले ही कई सुधार किए हैं और अभी भी कई सुधार लागू किए जा रहे हैं।”
भाजपा दफ्तर के सामने तेजस्वी यादव के वीडियो बनाने पर संजय झा ने कहा, “यह उनकी घटिया राजनीति है। उन्हें कोई ठोस बात करनी चाहिए। उन्हें पानी में कूदकर भी वीडियो बनाए थे। उसके बाद चुनावों के नतीजे सबसे सामने हैं। बिहार की जनता ने उन्हें बिल्कुल रिजेक्ट किया। इसलिए उन्हें लोगों के बीच में जाना चाहिए था और पता करना चाहिए था कि जनता ने क्यों रिजेक्ट किया।”
कांग्रेस के पूर्ण ‘वंदे मातरम’ गीत गाने से इनकार पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा, “राष्ट्रीय गीत को संसद ने पास किया है। इसलिए इसको सभी को मानना चाहिए। कोई भी उससे ऊपर नहीं है। सभी को कानून के दायरे में ही रहना है।”
राष्ट्रीय समाचार
भारत की ऑटो इंडस्ट्री ने लागत दबाव के बावजूद पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया : रिपोर्ट

भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने लागत दबाव के बाद भी वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है। इस दौरान मार्जिन को बचाए रखने के लिए कई दोपहिया वाहन निर्माताओं ने कीमत बढ़ोतरी और लागत नियंत्रण का सहारा लिया। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार, ज्यादातर दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों (ओईएम) ने तिमाही के दौरान मार्जिन में बहुत कम गिरावट दर्ज की, जिससे पता चलता है कि उन्होंने बढ़ती इनपुट लागत दबाव को बेहतर तरीके से मैनेज किया।
रिपोर्ट में बताया गया कि कमर्शियल वाहन बनाने वाली कंपनियों का तिमाही प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा। यह टू-व्हीलर और पैसेंजर वाहन बनाने वाली कंपनियों के बीच रहा।
रिपोर्ट में कमोडिटी की लागत को इस सेक्टर के लिए एक मुख्य चुनौती बताया गया है। हालांकि, मौजूदा तिमाही में कीमतें थोड़ी कम हुई हैं और इनपुट लागत मोटे तौर पर स्थिर बनी हुई है, लेकिन ये मुनाफे पर दबाव डाल रही हैं और लागत के दबाव को कम करने के लिए, ज्यादातर वाहन निर्माताओं ने जुलाई और अगस्त में कीमतें बढ़ाई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में इस बढ़ोतरी से मार्जिन को कुछ हद तक सहारा मिलना चाहिए, हालांकि इसका फायदा मांग में बदलाव और कमोडिटी की लागत में कमी की रफ्तार पर निर्भर करेगा।
ग्लोबल ब्रोकरेज के विश्लेषकों ने बताया कि बार-बार कीमतें बढ़ने के बावजूद सभी तरह के वाहनों की मांग अच्छी बनी हुई है और दूसरी छमाही में मिड-सिंगल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। यह ज्यादातर ओईएम के लिए पहले की गई लो-सिंगल-डिजिट ग्रोथ की भविष्यवाणी से बेहतर है। एचएसबीसी ने यह भी कहा कि अब मानसून से जुड़ी चिंताएं कुछ कम हुई हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कीमतों में और बढ़ोतरी और तुलना के लिए ऊंचा आधार वित्त वर्ष 27 की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 28 में ग्रोथ के लिए चुनौतियां पैदा कर सकते हैं, खासकर अगर ग्राहकों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है।
वैल्यूएशन पर एचएसबीसी ने कहा कि उसके कवरेज दायरे में आने वाले स्टॉक्स अपने ऐतिहासिक औसत से प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जिसमें टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियां पैसेंजर वाहन बनाने वाली कंपनियों की तुलना में काफी महंगी लग रही हैं।
ब्रोकरेज ने कहा कि अगले एक-दो सालों में वह ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देगी जो उचित वैल्यूएशन, अलग-अलग तरह के और सुरक्षित रेवेन्यू प्रोफ़ाइल और लंबे समय तक चलने वाले स्ट्रक्चरल ग्रोथ ड्राइवर्स पेश करती हैं।
राष्ट्रीय समाचार
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस : माइक्रोन के सेमीकंडक्टर प्लांट को 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा के साथ 12 घंटे की शिफ्ट की मंजूरी

भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में गुजरात की स्थिति अधिक मजबूत बने, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। इस निर्णय के अंतर्गत माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साणंद स्थित प्लांट में 12 घंटे की कार्य शिफ्ट चलाने की मंजूरी दी गई है।
गुजरात में इस प्रकार की यह पहली मंजूरी है। राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रोत्साहन देकर नए रोजगार पैदा होंगे। इस 12 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारियों के लिए सप्ताह में कुल कामकाज का समय 48 घंटे ही रहेगा।
यह मंजूरी ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड, 2020 के प्रावधानों के तहत दी गई है, जो 21 नवंबर, 2025 से समग्र देश में लागू हुआ है। यह कोड राज्य सरकारों को आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों के साथ कुछ परिस्थितियों में फैक्ट्रियों को निश्चित प्रावधानों से छूट देने का अधिकार देता है, परंतु यह भी सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों के साप्ताहिक कार्य के घंटे निर्धारित सीमा से अधिक न हों।
गुजरात के श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने कहा, ”ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड का मुख्य उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ कंप्लायंस को प्रोत्साहन देना है। कोड में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे के कामकाज का प्रावधान है, लेकिन उपयुक्त सरकार को फैक्ट्रियों के संदर्भ में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। गुजरात सरकार ने राज्य के व्यापक सार्वजनिक हित, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए इस प्रावधान का उपयोग किया है।”
बावलिया ने स्पष्टता करते हुए जोड़ा, “किसी भी औद्योगिक इकाई को कर्मचारियों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट रखने के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है। मंजूरी के बिना कोई भी औद्योगिक समूह कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट नहीं करा सकेगा। इस प्रकार का प्रावधान निश्चित उद्योगों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।”
गुजरात भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपना नेतृत्व अधिक मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में यह मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अग्रसर बनाने के विजन में सेमीकंडक्टर को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में स्थान दिया है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बना है, जहां फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन जैसे क्षेत्रों में निरंतर निवेश हो रहा है।
माइक्रोन टेक्नोलॉजी का साणंद प्लांट कंपनी के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में 5 लाख वर्ग फीट से अधिक क्लीनरूम क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-फ्लोर सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट क्लीनरूम में से एक क्लीनरूम होगा। वर्ष 2026 के दौरान यहाँ करोड़ों सेमीकंडक्टर चिप्स की असेंबली एवं टेस्टिंग शुरू होने की अपेक्षा है, जबकि 2027 से उत्पादन क्षमता हर वर्ष सैकड़ों मिलियन चिप्स तक पहुंचने की संभावना है।
सेमीकंडक्टर उत्पादन परंपरागत फैक्ट्रियों से अलग है, क्योंकि यहां अत्यंत नियंत्रित क्लीनरूम परिस्थिति में उत्पादन प्रक्रिया निरंतर चलती है। चिप असेंबली तथा टेस्टिंग के लिए अत्याधुनिक ऑटोमेटेड मशीनें 24 घंटे कार्यरत रहती हैं, जिसके कारण निरंतर उत्पादन बनाए रखना कार्यदक्षता एवं गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार 12 घंटे की शिफ्ट विश्वभर की सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयों में स्वीकृत कार्य पद्धति है। लंबी शिफ्ट के कारण शिफ्ट बदलने की संख्या कम होती है, क्लीनरूम में प्रवेश कम होता है, मशीनों का अधिक कार्यक्षम उपयोग होता है और अरबों रुपए के निवेश वाले प्लांट में निरंतर उत्पादन बनाए रखा जा सकता है। साथ ही, कर्मचारी सप्ताह में कम दिन काम करते हैं, जिससे कुल साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे ही रहता है।
राज्य सरकार ने इस मंजूरी के साथ श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए कड़ी शर्तें लागू की हैं। वयस्क कर्मचारी प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे काम कर सकेंगे, परंतु सप्ताह में कुल कामकाज का समय 48 घंटे से अधिक नहीं होगा। शेष दिनों को सवेतन अवकाश माना जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल अपनी स्वैच्छिक लिखित सहमति देने वाले कर्मचारी ही 12 घंटे की शिफ्ट में काम कर सकेंगे। राज्य सरकार ने यह भी निर्धारित किया है कि आराम के अंतराल सहित कुल कार्य समय प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक नहीं होगा।
कंपनी के लिए इस व्यवस्था के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों का अलग रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। साथ ही फैक्ट्रियों के चीफ इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर द्वारा लागू की गईं अतिरिक्त शर्तों का भी पालन करना होगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होगा, तो दी गई मंजूरी रद्द कर दी जाएगी और संबंधित संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री कांतिलाल अमृतिया ने कहा, ”यह छूट राज्य की औद्योगिक प्रगति को गति देने, आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने, नए रोजगार का सृजन करने और विशेष रूप से राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।”
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विशेष नीति घोषित करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य था। इस नीति के तहत उद्योगों को व्यापक प्रोत्साहन एवं सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके परिणामस्वरूप इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूर हुए छह बड़े प्रोजेक्ट गुजरात को मिले हैं, जिनके माध्यम से लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इन प्रोजेक्टों से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की अपेक्षा है, जो भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के केन्द्र के रूप में गुजरात की स्थिति को और मजबूत बनाएगा।
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