राष्ट्रीय
दिल्ली में कोरोना वायरस से पहली मौत की पुष्टि
नई दिल्ली, 31 मई। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को कोरोना से पहली मौत की पुष्टि हुई है। 60 वर्षीय मृतक महिला पहले से ही कई बीमारियों से जूझ रही थी। कोरोना को लेकर लोगों के बीच में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
दिल्ली में कोरोना के मामलों में तेजी देखने को मिल रही है। लेकिन, स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि वो हर प्रकार की परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से दुरूस्त कर ली गई है।
राजधानी में कोरोना के 104 मामले सक्रिय हैं। इनमें से 99 मामले पिछले एक सप्ताह के दौरान बढ़े हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में सबसे ज्यादा सक्रिय मामले केरल में हैं। इसके बाद महाराष्ट्र और दिल्ली का नंबर आता है। केरल में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या 430, महाराष्ट्र में 209 और दिल्ली में 104 हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 मई तक 24 सक्रिय मामले थे। लेकिन, एक ही हफ्ते में 99 मामले और बढ़े, जबकि 24 मरीज अब तक रिकवर हुए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, कई राज्यों में सक्रिय मामले बढ़े हैं, जिनमें केरल (+355), महाराष्ट्र (+153) और दिल्ली (+24) शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ जगहों पर मौतों में भी इजाफा हुआ है, जिनमें महाराष्ट्र (+4) और कर्नाटक (+1) शामिल हैं। हालांकि, बहुत से राज्यों में कोई नया मामला या मौत नहीं दर्ज की गई है।
इसके अलावा, कोविड-19 से सबसे ज्यादा मरीज महाराष्ट्र में ठीक हुए हैं। महाराष्ट्र में 8,29,849, केरल में 6,84,927 और आंध्र प्रदेश में 2,32,635 में सबसे अधिक मरीजों ने कोरोना को मात दी है। सबसे ज्यादा मौतें (कोरोना की पहली लहर से अब तक) : महाराष्ट्र (1,48,606), तमिलनाडु (38,086) और कर्नाटक (40,412) में हुई हैं।
बता दें कि 19 मई के बाद देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के नए मामले दर्ज किए गए हैं। जिनमें आंध्र प्रदेश में (4), छत्तीसगढ़ में (1), गोवा में (1), गुजरात में (76), हरियाणा में (8), कर्नाटक में (34), मध्य प्रदेश में (2), राजस्थान में (11), तमिलनाडु में (3) और तेलंगाना में (1) मरीज शामिल हैं।
राष्ट्रीय
एलपीजी व उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा को लेकर राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी की होगी बैठक

नई दिल्ली, 2 अप्रैल : पश्चिम एशिया संकट को लेकर बनाई गई इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी की बैठक गुरुवार को होगी। गुरुवार शाम 5 बजे कर्तव्य भवन में होने वाली बैठक की रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अध्यक्षता करेंगे। बैठक में एलपीजी और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति को लेकर समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग रोकने को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अप्रैल को 7 लोक कल्याण मार्ग पर सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की एक विशेष बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा हुई।
कैबिनेट सचिव ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलएनजी/एलपीजी की आपूर्ति और पर्याप्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी। एलपीजी की खरीद के लिए स्रोतों में विविधता लाई जा रही है, जिसके तहत विभिन्न देशों से नई आपूर्ति शुरू की गई है। इसी तरह, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भी अलग-अलग देशों से प्राप्त की जा रही है।
इसके अलावा कृषि, नागर विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री ने आम आदमी के लिए आवश्यक सामानों की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ और रबी मौसमों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत जानकारी और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी के सुचारू प्रवाह पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव उपाय करें।
राष्ट्रीय
कर्मयोगी साधना सप्ताह में नरेंद्र मोदी ने बताई भविष्य की दिशा, बोले-तकनीक और एआई से बदलेगा प्रशासन

PM MODI
नई दिल्ली, 2 अप्रैल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कर्मयोगी साधना सप्ताह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कर्मयोगी साधना सप्ताह के इस आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 21वीं सदी के इस कालखंड में तेजी से बदलती व्यवस्थाएं, तेजी से बदलती दुनिया और उनके बीच उसी रफ्तार से आगे हमारा भारत आगे बढ़ रहा है। इसके लिए सार्वजनिक को समय के अनुरूप निरंतर अपडेट करना जरूरी है। इस आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कर्मयोगी साधना सप्ताह उसी प्रयास की एक अहम कड़ी है।”
पीएम मोदी ने कहा, “आप सभी परिचित हैं कि आज शासन के जिस सिद्धांत को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसका मूलमंत्र है ‘नागरिक देवो भवः’। इस मंत्र में समाहित भावना के साथ आज पब्लिक सर्विस को ज्यादा काबिल और नागरिकों के लिए ज्यादा संवेदनशील बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। सफलता का एक बड़ा सिद्धांत ये भी है कि दूसरों की लकीर छोटी करने के बजाय अपनी लकीर बड़ी करो। हमारे देश में आजादी के बाद से कई तरह की संस्थाएं अलग-अलग उद्देश्य के साथ काम कर रही थीं, लेकिन आवश्यकता थी एक ऐसी संस्था की, जिसका लक्ष्य क्षमता निर्माण हो, जो सरकार में काम करने वाले हर कर्मचारी, हर कर्मयोगी का सामर्थ्य बढ़ाए।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “कर्मयोगी हमारे प्रयासों को नई शक्ति और गति प्रदान कर रहा है। इन प्रयासों के माध्यम से हम सक्षम कर्मयोगियों की एक टीम का निर्माण कर सकेंगे। विकसित भारत के लिए हमें तीव्र आर्थिक विकास की आवश्यकता है। हमें देश में कुशल कार्यबल तैयार करना होगा। हम सब जानते हैं कि पुरानी व्यवस्था में अधिकारी बनने पर अधिकार पर ही जोर दिया जाता था, लेकिन आज देश में कर्तव्य पर अधिक बल दिया जाता है। हमें हमारे वर्तमान मूल्यों को भविष्य के एक कैनवास पर बड़े पैमाने पर देखना चाहिए। 2047 में विकसित भारत, यही हमारा कैनवास है, यही हमारा लक्ष्य है।”
जब हम सीखने की बात करते हैं, तो आज के समय में टेक्नोलॉजी का महत्व बहुत बढ़ जाता है। हम शासन और वितरण से लेकर अर्थव्यवस्था तक तकनीकी क्रांति की ताकतों को देखते हैं। अब एआई के प्रोसेसर के बाद ये बदलाव और तेजी से होने वाला है। इसलिए प्रौद्योगिकी को लोड किया गया और उसका उपयोग करना अब सार्वजनिक सेवा का आवश्यक हिस्सा बन गया है। हम प्रगतिशील और पिछड़ी अवस्थाओं की परिभाषा को समाप्त कर रहे हैं। हमें विभिन्न अवस्थाओं के बीच हर प्रकार की खाई को पाटना होगा। हमें अलगाव को तोड़ना होगा।”
अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल के तौर पर क्षमता निर्माण आयोग 2 से 8 अप्रैल 2026 तक ‘साधना सप्ताह 2026’ की शुरुआत की है। यह पहल भारत की प्रशासनिक सेवाओं के पूरे तंत्र में क्षमता निर्माण के सबसे बड़े साझा प्रयासों में से एक होगी। यह पहल दो महत्वपूर्ण उपलब्धियों क्षमता निर्माण आयोग का स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने से मेल खाती है।
साधना सप्ताह का अर्थ है राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूलनीय विकास और मानवीय योग्यता को सशक्त बनाना। यह पहल केन्द्रीय मंत्रालयों, विभागों और संगठनों, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों, तथा 250 से अधिक प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा राष्ट्रीय क्षमता निर्माण प्रयास में एक साथ लाएगी। देश भर के प्रशासनिक अधिकारी क्षमता निर्माण के ऐसे सुनियोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, जिन्हें ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी दक्षताओं को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
राष्ट्रीय
मुख्यमंत्री छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को मिलती रहेगी जेड प्लस सुरक्षा, बिहार गृह विभाग ने जारी किया आदेश

पटना, 2 अप्रैल : नीतीश कुमार के जल्द मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चाओं के बीच उनकी सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद भी जेड प्लेस सुरक्षा दी जाएगी। इस संबंध में बिहार गृह विभाग ने आदेश जारी किया है।
बिहार के गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र लिखा है। इस देश में नीतीश कुमार की सुरक्षा के अलावा उनके राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का जिक्र है।
आदेश में कहा गया है, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘बिहार स्पेशल सिक्यूरिटी एक्ट-2000’ के तहत सुरक्षा अनुमान्य है। नीतीश कुमार वर्तमान में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं और निकट भविष्य में बिहार विधान परिषद की सदस्यता और मुख्यमंत्री के पद से त्याग पत्र देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।”
इसमें आगे लिखा, “उक्त आलोक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा की समीक्षा के उपरांत ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया जाता है।” पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में कहा गया कि इन्हें (नीतीश कुमार) राज्य सरकार के उपर्युक्त निर्णय के आलोक में सुरक्षा प्रदान करने की जाए।
संभावनाएं हैं कि नीतीश कुमार खरमास के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। राज्यसभा सदस्य घोषित किए जाने के बाद 30 मार्च को सीएम नीतीश ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया। वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार के इस कदम के साथ बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होने की संभावना है। हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है।
मुख्यमंत्री आवास से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे। वे 8 या 9 अप्रैल को पटना से दिल्ली जाएंगे। फिर मुख्यमंत्री पद से उनका इस्तीफा 13 अप्रैल के बाद कभी भी सकता है। 14 अप्रैल को खरमास खत्म हो रहा है।
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