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Monday,17-August-2026
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गोगामुख में पीएम मोदी की विशाल रैली, बोले- असम में भाजपा-एनडीए की हैट्रिक तय

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PM MODI

गोगामुख, 1 अप्रैल : असम के गोगामुख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए चुनावी बिगुल फूंक दिया। असम विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद यह उनकी पहली जनसभा रही।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि सामने उमड़ा जनसैलाब, युवाओं का उत्साह और माताओं-बहनों का आशीर्वाद साफ संकेत दे रहा है कि इस बार जीत की हैट्रिक तय है। उन्होंने कहा, “आपके आशीर्वाद से मुझे प्रधानमंत्री के रूप में हैट्रिक बनाने का अवसर मिला। इसी मैदान में भी मैं तीसरी बार आया हूं और अब असम में भी भाजपा सरकार की हैट्रिक बनने जा रही है।”

प्रधानमंत्री ने इस चुनाव को ‘विकसित असम से विकसित भारत’ बनाने का चुनाव बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा और एनडीए की सरकार तीसरी बार सत्ता में आएगी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की हार की हैट्रिक भी तय है और कांग्रेस के स्वयंभू राजकुमार चुनावी हार का शतक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने असम में पिछले 10 वर्षों के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि पहले सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में और फिर हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में राज्य में सुशासन और सेवा का नया दौर शुरू हुआ है।

उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में 22 लाख से अधिक परिवारों को पक्के घर दिए गए हैं। भाजपा के संकल्प पत्र में यह वादा किया गया है कि जिन लोगों को अभी तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें भी पक्का घर दिया जाएगा। साथ ही आने वाले समय में 15 लाख और परिवारों को पक्का मकान देने की गारंटी दी गई है।

प्रधानमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा वादा करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी।

महिलाओं के सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने ‘लखपति दीदी अभियान’ के बारे में बताया कि इस योजना के तहत अब तक असम की करीब 3 लाख महिलाएं ‘लखपति बैदेउ’ बन चुकी हैं। वहीं, एनडीए सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 40 लाख महिलाओं को लखपति बनाया जाए। असम भाजपा ‘ओरुनोदोई’ योजना का विस्तार कर उसमें और सुविधाएं जोड़ने जा रही है।

बता दें कि असम सरकार की ओरुनोदोई योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लिए एक प्रमुख प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना है, जिसे 2 अक्टूबर 2020 को शुरू किया गया था।

प्रधानमंत्री ने असम की पहचान और संस्कृति को सुरक्षित रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने और आदिवासी समाज व छठी अनुसूची के क्षेत्रों की परंपराओं की रक्षा करने जैसे फैसले असम की पहचान को मजबूत करेंगे।

उन्होंने बाढ़ की समस्या पर भी बात की और बताया कि ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ के तहत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च कर आधुनिक तटबंध बना रही है, ताकि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत असम के करीब 11 लाख किसानों को 730 करोड़ रुपए से अधिक का क्लेम मिल चुका है।

उन्होंने कहा कि पहले असम की पहचान सिर्फ चाय के लिए होती थी, लेकिन अब राज्य टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही असम में सेमीकंडक्टर प्लांट से ‘चिप’ का उत्पादन शुरू होगा, जिससे राज्य आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आने वाले समय में मोबाइल फोन, गाड़ियां, टीवी और फ्रिज जैसे कई उपकरण असम में बनी चिप से चलेंगे। यही विकसित असम का हमारा रोडमैप है।”

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने 60-65 साल के शासन में ब्रह्मपुत्र नदी पर केवल 3 पुल बनाए, जबकि डबल इंजन सरकार ने 10-11 साल में 5 बड़े पुल तैयार किए हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि पुलों की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई लोगों की जान भी गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले असम हिंसा और अशांति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां विकास की खबरें आती हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के दौरान हजारों युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है।

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अरुणाचल सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर ओवैसी के सवाल, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

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एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन की गतिविधियों और भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को रोके जाने की खबरों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार से सीमा पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और देश को पूरी जानकारी देने की मांग की है।

एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार की लगातार चुप्पी के कारण वह अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर स्थिति को लेकर अपने सवाल दोहरा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलओ) ने हाल में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम को उस इलाके में जाने से रोका है, जहां जवान पहले नियमित रूप से गश्त करते रहे हैं।

एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम द्वारा इलाके में बनाए गए किसी अस्थायी ढांचे को नष्ट किया है। इसके अलावा उन्होंने पूछा कि क्या चीन ने उन क्षेत्रों में टेंट लगाए हैं, जहां पहले भारतीय पेट्रोलिंग टीम जाती थी और जो भारत के क्षेत्र में आते हैं।

ओवैसी ने इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश की सीमा को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। उन्होंने कहा था कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि सीमा पर वास्तव में क्या हो रहा है। उनके मुताबिक, अब तक सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी अपर्याप्त और अस्पष्ट है।

अगले पोस्ट में एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने लिखा था, ‘एक तरफ सीमा पर यह सब हो रहा है, हम अगले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नई दिल्ली आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या चीनी सैनिकों से डील करने की यह हमारी नीति है, जो हमारे इलाके में टेंट गाड़ रहे हैं और हमारे गश्त को रोक रहे हैं? या हमने वो सभी शर्तें स्वीकार कर ली हैं, जो बीजिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘सामान्य’ बनाने के लिए हमारे सामने रखी हैं?’

बता दें कि ओवैसी के सवाल ऐसे समय में सामने आए हैं जब अरुणाचल प्रदेश से लगी चीन सीमा पर चीनी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने और सीमा की स्थिति पर देश को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। साथ ही उनके सवालों ने भारतीय क्षेत्र में कथित चीनी गतिविधियों और सीमा पर गश्त से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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यूजीसी-नेट में गड़बड़ी पर राहुल का सरकार पर निशाना, बोले-एनटीए की गलती की कीमत छात्र क्यों चुकाएं, तय हो जवाबदेही

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राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा प्रश्न पत्रों में कई त्रुटियां पाए जाने के बाद तीन विषयों के यूजीसी नेट परीक्षा पत्रों की पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि इन परीक्षा अनियमितताओं के कारण छात्रों के साल बर्बाद हो रहे हैं।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मोदी जी, देखिए आपकी एनटीए ने अभी क्या किया है।”

उन्होंने कहा कि सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स के लिए यूजीसी-नेट परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। करीब दो महीने बाद एनटीए ने इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया, क्योंकि कथित तौर पर गलत प्रश्नपत्र सेट किए गए थे और पुराने सवाल दोहराए गए थे।

राहुल गांधी ने कहा कि हजारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तक तैयारी की, परीक्षा फॉर्म भरे, फीस जमा की और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की। अब उन्हें सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि गलती एनटीए की है, लेकिन इसकी कीमत छात्रों को क्यों चुकानी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि वह कोटा, देहरादून और प्रयागराज में पहले भी यह मुद्दा उठा चुके हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था अब शिक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि “एक्सट्रैक्शन मशीन” बन गई है, जो छात्रों का पैसा, समय, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास छीन लेती है और बदले में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं देती।

राहुल गांधी ने एनटीए से यह भी सवाल किया कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और एनटीए अपनी गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते और गड़बड़ी वाले मामलों में जवाबदेही तय नहीं होती।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहला कदम था, आखिरी नहीं। राहुल गांधी ने एनटीए के नेतृत्व की भी जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों से कहा कि समस्या वे नहीं हैं और उनके अधिकारों के लिए विपक्ष सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

बता दें कि रविवार को इससे पहले, राष्ट्रीय शिक्षा प्राधिकरण (एनटीए) ने घोषणा की कि प्रश्न पत्रों में कई त्रुटियां पाए जाने के बाद वह अंग्रेजी, समाजशास्त्र और वाणिज्य के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-एनईटी) का पुनः आयोजन करेगा। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में परीक्षा एजेंसी की विफलता को लेकर बढ़ती आलोचनाओं में और इजाफा हुआ है।

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लखीसराय भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया शोक, पीएम बोले- मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ

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बिहार के लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, “बिहार के लखीसराय जिले में भगदड़ की दुर्घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में भगदड़ से हुई मौतों से दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है।”

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में हुई घटना हृदयविदारक है। इस दुःखद हादसे से मन व्यथित है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने एवं शोकाकुल परिजनों को कठिन घड़ी में संबल देने की प्रार्थना करता हूं।”

बिहार सरकार में मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “लखीसराय की हृदयविदारक घटना में 7 महिलाओं के निधन से मन अत्यंत व्यथित है। प्रभु दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान दें, परिजनों को धैर्य तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें।”

जदयू नेता राजीव रंजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह बेहद दुखद घटना है और कई श्रद्धालुओं की मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। एसडीपीओ ने कुछ अफवाहों का जिक्र किया है, लेकिन जब तक सरकार पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक पक्ष नहीं रखती, तब तक कुछ भी पक्के तौर पर कहना ठीक नहीं होगा।”

बता दें कि भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है और 12 से ज्यादा लोग घायल हैं। बिहार सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

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