राष्ट्रीय
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.99 बिलियन डॉलर बढ़कर 692.7 बिलियन डॉलर के पार
नई दिल्ली, 31 मई। आरबीआई के लेटेस्ट साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 23 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 6.99 बिलियन डॉलर की शानदार वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 692.72 बिलियन डॉलर हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का एक प्रमुख घटक, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 4.52 बिलियन डॉलर बढ़कर 586.17 बिलियन डॉलर हो गईं।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार घटक के मूल्य में भी जबरदस्त वृद्धि हुई, जो 2.37 बिलियन डॉलर बढ़कर 83.58 बिलियन डॉलर हो गई।
स्पेशल ड्राइंग राइट्स (एसडीआर) 81 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.571 बिलियन डॉलर हो गए।
आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान आईएमएफ के साथ भारत की आरक्षित स्थिति 30 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.401 बिलियन डॉलर हो गई।
16 मई को समाप्त हुए पिछले सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.89 बिलियन डॉलर घटकर 685.73 बिलियन डॉलर रह गया था।
हालांकि, इससे पहले 9 मई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 4.5 बिलियन डॉलर बढ़कर 690.62 बिलियन डॉलर हो गया था।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में किसी भी तरह की मजबूती से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए को मजबूती मिलती है।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दर्शाती है और आरबीआई को अस्थिर होने पर रुपए को स्थिर करने के लिए अधिक गुंजाइश देती है।
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आरबीआई को रुपए को गिरने से रोकने के लिए अधिक डॉलर जारी कर स्पॉट और फॉरवर्ड करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है।
इसके विपरीत, गिरता विदेशी मुद्रा भंडार आरबीआई को रुपए को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए कम जगह देता है।
इस बीच, वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत होकर उभरा है। वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल निर्यात में अप्रैल में 12.7 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई तथा यह 73.8 अरब डॉलर के स्तर को छू गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 65.48 अरब डॉलर था।
देश का वस्तु निर्यात इस महीने में 9.03 प्रतिशत बढ़कर 38.49 अरब डॉलर हो गया, जिसमें उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो देश के बढ़ते विनिर्माण आधार को दर्शाता है।
इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात अप्रैल में 39.51 प्रतिशत बढ़कर 3.69 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 2.65 अरब डॉलर था।
इंजीनियरिंग सामान का निर्यात इस महीने में 11.28 प्रतिशत बढ़कर 9.51 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल अप्रैल में यह 8.55 अरब डॉलर था।
आभूषण निर्यात 10.74 प्रतिशत बढ़कर 2.26 बिलियन डॉलर से 2.5 बिलियन डॉलर हो गया।
राजनीति
भारतीय जलक्षेत्र के पास ईरानी युद्धपोत डुबाने की अमेरिकी कार्रवाई पर ओवैसी बोले- सरकार तुरंत दे स्पष्टीकरण

हैदराबाद, 6 मार्च : एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जलक्षेत्र के करीब अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी युद्धपोत को डुबोने पर कड़ी आलोचना की। ओवैसी ने मांग करते हुए कहा कि भारत सरकार को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करनी चाहिए।
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “अमेरिकी नौसेना के भारतीय जलक्षेत्र के इतने करीब ईरानी जहाज डुबोने के बारे में बहुत सारे सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिले हैं। जवाब सरकार को देने चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री चुप हैं। यह हमारे देश के लोगों के प्रति उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज करना है।”
हैदराबाद के सांसद ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या ट्रंप प्रशासन ने ईरानी जहाज को निशाना बनाने से पहले उन्हें सूचित किया था। सांसद ने पोस्ट में लिखा, “क्या ट्रंप प्रशासन ने भारतीय जलक्षेत्र के इतने करीब न्यूक्लियर सबमरीन इस्तेमाल करने और वॉर जोन को बढ़ाने का फैसला करने से पहले भारत सरकार को बताया था? आखिर हम भी क्वाड के सदस्य हैं और अमेरिका के रणनीतिक साझेदार हैं।”
उन्होंने पूछा, “अगर यह चीनी नौसेना के लिए इन जलक्षेत्र में काम करने का एक उदाहरण बन जाता है, तो क्या मोदी सरकार तब भी चुप रहेगी?”
एक अन्य पोस्ट में ओवैसी ने लिखा, “अगर अमेरिका आसपास मौजूद दो अन्य ईरानी जहाजों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई दोहराता है, तो क्या सरकार तब भी ‘रेत में सिर छिपाए शुतुरमुर्ग’ की तरह व्यवहार करेगी।”
असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा, “यह भारत की लंबे समय से बनी रणनीतिक संप्रभुता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है और हमें वैश्विक मंचों पर अप्रासंगिक बना सकता है।”
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करे और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमले पर अपना विस्तृत रुख स्पष्ट करे।
राजनीति
महाराष्ट्र में वेतन, पेंशन और ब्याज पेमेंट पर 2025-26 में 3,12,556 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

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मुंबई, 6 मार्च : वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर महाराष्ट्र सरकार 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 3,12,556 करोड़ रुपये खर्च करेगी। जो 6,06,855 करोड़ रुपये के राजस्व खर्च का 50 प्रतिशत से अधिक होगा। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राजस्व मिलने का अनुमान 5,60,964 करोड़ रुपये है।
2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार का वेतन पर खर्च 1,72,760 करोड़ रुपये (कुल राजस्व खर्च का 28.5 प्रतिशत) है। जबकि 2024-25 में यह 1,46,037 करोड़ रुपये (25.9 प्रतिशत) था।
राज्य सरकार पेंशन भुगतान पर 75,137 करोड़ रुपये (12.4 प्रतिशत) का खर्च करेगी। जबकि 2024-25 में यह 60,038 करोड़ रुपये (10.7 प्रतिशत) था।
ब्याज भुगतान पर राज्य सरकार का खर्च 64,659 करोड़ रुपये (10.7 प्रतिशत) होगा। जबकि 2024-25 में यह 54,687 करोड़ रुपये (9.7 प्रतिशत) था।
इसके अलावा, राज्य सरकार को 2024-25 में 60,623 करोड़ रुपये (10.8 प्रतिशत) के मुकाबले 58,528 करोड़ रुपये (9.6 प्रतिशत) खर्च करने होंगे। राज्य सरकार अनुदान सहायता (वेतन के अलावा) पर 1,70,546 करोड़ रुपये (28.1 प्रतिशत) खर्च करेगी। जबकि 2024-25 में यह राशि 1,78,094 करोड़ रुपये (31.6 प्रतिशत) थी।
राज्य सरकार का अन्य मदों पर खर्च 2024-25 में 63,520 करोड़ रुपये (11.3 प्रतिशत) के मुकाबले 65,225 करोड़ रुपये (10.7 प्रतिशत) होगा। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राजस्व व्यय 2024-25 में 5,62,999 करोड़ रुपये के मुकाबले 6,06,855 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
इस बीच, आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2025 तक, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में राज्य 31 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान पर बना रहा। 2024-25 के दौरान, राज्य से निर्यात ने भारत के कुल निर्यात में 15 प्रतिशत का योगदान दिया।
चालू वर्ष में, जनवरी 2026 तक राज्य से सॉफ्टवेयर निर्यात 1,74,798 करोड़ रुपये रहा। आईटी और आईटीईएस नीति 2023 के लागू होने के बाद से, दिसंबर 2025 तक, लगभग 18,595 करोड़ रुपये के निवेश से 37 सार्वजनिक आईटी पार्क स्थापित किए गए और लगभग 2.7 लाख रोजगार सृजित किए गए।
10 फरवरी 2026 तक, अखिल भारतीय स्तर पर स्टार्टअप में राज्य की हिस्सेदारी सबसे अधिक (17 प्रतिशत) है। महाराष्ट्र में दिसंबर 2025 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमईज की कुल संख्या 63.85 लाख थी (62.11 लाख सूक्ष्म, 1.55 लाख लघु और 0.18 लाख मध्यम), जिनमें कुल 252.84 लाख रोजगार सृजित थे।
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र को एक प्रमुख वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र उद्योग, निवेश और सेवा नीति 2025 की घोषणा की है। जिसका लक्ष्य पर्याप्त निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाना है।
राष्ट्रीय
जुमे की नमाज से पहले श्रीनगर के लाल चौक इलाके में कड़े प्रतिबंध, लोगों की आवाजाही पर रोक

श्रीनगर, 6 मार्च : अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध से यहां का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर लोगों में गुस्सा है। इसी के विरोध में घाटी के कई इलाकों में पिछले दिनों प्रदर्शन भी देखने को मिले, जिसके बाद से सुरक्षा बल लगातार अलर्ट मोड पर हैं।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर कई जगहों पर पाबंदियां अभी भी जारी हैं। घाटी के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए ताकि किसी तरह की हिंसा या टकराव की स्थिति न बने।
शुक्रवार की नमाज को देखते हुए प्रशासन ने श्रीनगर के मुख्य इलाके लाल चौक और आसपास के क्षेत्रों में कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जुमे की नमाज के बाद अक्सर भीड़ ज्यादा हो जाती है, इसलिए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।
सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक पूरे शहर में सुरक्षा और भी कड़ी की जाएगी। एहतियात के तौर पर लाल चौक की तरफ आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। बिना जरूरी कारण किसी को भी उस इलाके में जाने या वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा, कश्मीर घाटी के दूसरे जिलों में भी सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की अतिरिक्त टुकड़ियां लगाई गई हैं। जगह-जगह नाकाबंदी की गई है और कई चौराहों पर बैरिकेड लगाए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि इन सभी कदमों का मकसद सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। अधिकारी लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं और लोगों से भी शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
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