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पीछे हटने के बीच भी, FII ने कुछ कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है
भारतीय इक्विटी सेगमेंट से पैसा निकालने वाले विदेशी निवेशकों ने हाल के महीनों में कई सुर्खियां बटोरीं। पिछले आठ महीनों में भारतीय बाजारों से 42 बिलियन डॉलर या 3.26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी करते हुए, विदेशी निवेशक इन सीधे महीनों के दौरान भारतीय बाजार में नेट-सेलर्स रहे हैं।
एफपीआई पूरे बोर्ड में बिकवाली कर रहे हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में अधिक दबाव देखा जा रहा है और कुछ में कम।
पीछे हटने के कारण यह है कि बढ़ती मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनावों को दूर करने के लिए प्रमुख उधार दरों में वृद्धि के माध्यम से मौद्रिक नीति कार्यों को सख्त करने के बीच शेयर बाजार में महत्वपूर्ण अस्थिरता देखी जा रही है। बढ़ती ब्याज दरें आम तौर पर आर्थिक विकास के लिए एक बाधा हैं क्योंकि यह उद्योगों की उधार लागत बढ़ाती है।
मार्केट्स मोजो के मुख्य निवेश अधिकारी सुनील दमानिया ने कहा कि कुछ बड़े स्टॉक हैं जहां विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है और वे आईटीसी, सन फार्मा, ओएनजीसी, एनटीपीसी, पावरग्रिड और जेएसडब्ल्यू स्टील हैं।
जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान इन कंपनियों में एफआईआई की हिस्सेदारी क्रमश: 2 फीसदी, 0.9 फीसदी, 1.04 फीसदी, 0.2 फीसदी, 1.16 फीसदी और 0.37 फीसदी बढ़ी है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के शोध प्रमुख सिद्धार्थ भामरे ने कहा , “इसके अलावा, ऑटो सेक्टर इस गिरते बाजार में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और एफआईआई जैसे मजबूत हाथ भी इस तेजी में भाग ले सकते हैं और सांख्यिकीय रूप से, निफ्टी 100 स्पेस में 3 स्टॉक हैं जहां पिछली 4 तिमाहियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि हुई थी। ये शेयर आईओसी, सीमेंस और एनटीपीसी हैं।”
यह पूछे जाने पर कि क्या यह शेयर बाजार में निवेश करने का सही समय नहीं है, जो अन्य सुरक्षित संपत्ति विकल्प हैं, भामरे ने कहा कि इक्विटी हमेशा किसी भी बाजार की स्थिति में निवेश के अच्छे अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने ऊपर प्रकाश डाला, गिरते बाजारों में भी लार्ज कैप स्पेस के कई नामों ने सकारात्मक रिटर्न दिया और ये नाम रक्षात्मक क्षेत्रों से नहीं हैं। मौजूदा बाजार परि²श्य में, केवल डॉलर ही अच्छा कर रहा है। बांड की कीमतें नीचे हैं, वस्तुओं में सुधार हो रहा है, अचल संपत्ति में तरलता के मुद्दे हैं, और कीमतें स्थिर हैं और बढ़ती नहीं हैं, एफडी दरें अभी भी आकर्षक नहीं हैं। इसलिए इक्विटी में रहने के लिए संपत्ति की श्रेणी बनी हुई है, लेकिन बुल मार्केट के विपरीत सब कुछ नहीं बढ़ेगा और एक बहुत चयनात्मक होना होगा।”
दमानिया ने कहा, “छोटे आकार की कंपनी स्पेस में, ग्लोबस पावर, किरी इंडस्ट्रीज, रेस्तरां ब्रांड, ब्राइटकॉम ग्रुप, कैलकॉम विजन, सेलिब्रिटी फैश, एक्सिटा कॉटन, लेमन ट्री होटल, इंडियाबुल रियल एस्टेट और कैमलिन फाइन कुछ ऐसे स्टॉक हैं, जहां एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इनमें ग्लोबस पावर की हिस्सेदारी में सबसे ज्यादा 18 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई।”
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च के प्रमुख दीपक जसानी ने इस अस्थिरता के बीच निवेशकों को क्या करना चाहिए, इस पर जवाब देते हुए कहा, “उन निवेशकों के लिए जिन्होंने पूरी तरह से निवेश नहीं किया है या जिन्होंने हाल के दिनों में मुनाफावसूली करके नकदी जुटाई है, ये समय धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो के इक्विटी हिस्से को बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं। निवेश योग्य शेयरों को शॉर्टलिस्ट करते समय, किसी को उन क्षेत्रों या शेयरों के संपर्क में नहीं आने से सावधान रहना होगा, जो बहुत अधिक मूल्यांकन या बहुत उच्च वित्तीय पूर्वानुमानों के कारण प्राप्त किए गए हैं, जिन्हें हासिल करना मुश्किल लगता है।”
“इसके अलावा, जिन शेयरों ने पिछले एक विषम वर्ष में कमोडिटी में तेजी के कारण अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें आय की स्थिरता के लिए बारीकी से जांच करने की आवश्यकता है, जबकि जिन शेयरों में कमजोर या लंबी रिकवरी देखी जा सकती है, उन्हें भी टालने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि बाजार के नकारात्मक क्षेत्र में होने पर, खुदरा निवेशक अपनी हिस्सेदारी को औसत करने या कुछ पसंदीदा शेयरों में अपने इक्विटी हिस्से को ऊपर करने के अलावा बाजारों में बड़ी नई प्रतिबद्धताओं से बचना चाहेंगे।
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नीट परीक्षा रद्द, सीबीआई करेगी जांच, जल्द होगा नई परीक्षा की डेट का ऐलान

नई दिल्ली, 12 मई। देश भर में आयोजित की गई मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। यह परीक्षा एमबीबीएस में दाखिले के लिए थी। मंगलवार को यह जानकारी साझा की गई।
परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि 3 मई को आयोजित की गई नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है। अब यह परीक्षाएं दोबारा से आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है।
गौरतलब है कि नीट परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न परीक्षा होने से पहले ही लीक होने की बातें सामने आई थी। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा से जुड़े सारे दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यह बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है।
यह परीक्षा 3 मई रविवार को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, 8 मई 2026 को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों व कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त जांच रिपोर्टों तथा तथ्यों की समीक्षा की गई है। प्राप्त रिपोर्ट व सूचनाओं और निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखना उचित नहीं होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए नीट की परीक्षा दोबारा करवाना अनिवार्य हो गया है। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है। इसलिए अब विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि दोबारा आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा की नई तिथियां और नए प्रवेश पत्र जारी करने का कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से घोषित किया जाएगा। भारत सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच के लिए इस प्रकरण को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीई) को सौंपने का भी निर्णय लिया है। एजेंसी ने कहा कि वह जांच एजेंसी को सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यह माना कि परीक्षा दोबारा कराने से छात्रों और उनके परिवारों को वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन एजेंसी के अनुसार परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने मंगलवार को इस विषय में जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह कदम नहीं उठाया जाता तो राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को अधिक गंभीर और दीर्घकालिक नुकसान पहुंच सकता था।
इसके साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 चक्र में छात्रों द्वारा किया गया पंजीकरण, उम्मीदवार विवरण और चुने गए परीक्षा केंद्र पुनर्परीक्षा में स्वत मान्य रहेंगे। जिन छात्रों ने नीट परीक्षा के लिए आवेदन किया था ऐसे छात्रों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले आवेदन कर चुके या परीक्षा में शामिल हो चुके छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी।
पुनर्परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी अपने आंतरिक संसाधनों से आयोजित करेगी। एजेंसी ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों से बचें। छात्रों की सहायता के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। अभ्यर्थी 011-40759000 और 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं।
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पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।
एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।
डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।
वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।
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राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।
यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।
न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।
साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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