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Friday,29-May-2026
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बजट में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में किये गये प्रयास सराहनीय

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बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए घोषित प्रावधानों को लेकर देश के शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ शिक्षाविद् शिक्षा के डिजिटलीकरण की दिशा में किये गये प्रयासों को सराहनीय बता रहे हैं तो कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर में सुधार के लिए और कदम उठाने चाहिए थे।

देश के कुछ नामी शिक्षाविद् एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किये बजट में शिक्षा को दिये गये महत्व की प्रशंसा कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ई विद्या योजना के तहत घोषित ‘एक क्लास एक टीवी चैनल’ कार्यक्रम जैसे डिजिटल टूल से मानव संपदा को बढ़ावा मिलेगा।

बजट को शिक्षा क्षेत्र के लिए सकारात्मक बताने वाले शिक्षाविदों के मुताबिक सरकार ने डिजिटल विश्वविद्यालय शुरू करने, विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय को बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने और कई कौशल विकास कार्यक्रमों को शुरू कराने की घोषणा करके देश की आबादी का लाभ उठाने की योजना बनायी है, जो प्रगतिवादी दृष्टिकोण है।

केंद्रीय बजट 2022-2023 में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के लिए 63,449.37 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं, जो चालू वित्त वर्ष के लिए आवंटित की गयी 9,000 करोड़ रुपये की राशि से करीब 6.6 प्रतिशत अधिक है। यह कौशल को बढ़ाने, दोबारा कुशल बनाने और नयी पीढ़ी के कौशल से दक्ष बनाने जैसे कई कदम उठाकर देश के युवाओं की रोजगार योग्यता बढ़ाने की दिशा में किये गये प्रयास हैं।

इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी के संस्थापक एवं सीईओ दिलीप पुरी ने बजट की सराहना करते हुए कहा, हम इस बार बजट में देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए घोषित नयी पहलों का स्वागत करते हैं। सरकार ने उन क्षेत्रों की पहचान की है कि जिन्हें वित्तीय सहायता और मदद की जरूरत है और साथ ही शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटल विश्वविद्यालय की घोषणा एक प्रगतिशील कदम है, जिसका उद्देश्य देश के सुदूूरवर्ती हिस्सों के प्रत्येक छात्र तक पहुंच बनाना है। विश्वस्तरीय संस्थानों और शिक्षकों से समन्वय स्थापित करके शिक्षा तक उन छात्रों की पहुंच बनायी जायेगी। हमें आशा है कि इसे आसानी से लागू किया जायेगा और इससे एडुटेक का विकास तीव्र होगा। कौशल क्षेत्र में उठाये गये कदमों से हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में भी रोजगारपरकता बढ़ेगी।

फिक्की एराइज के अध्यक्ष एवं सेठ आनंदराम जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष शिशिर जयपुरिया ने कहा, बजट में घोषित प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निहित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विजन को पूरा करने की दिशा में उठाये गये कदम हैं। प्रधानमंत्री ई विद्या योजना को 200 टीवी चैनल तक विस्तारित करने और उच्च गुणवत्ता वाले ई कंटेंट को सभी भाषाओं में विकसित करने से कक्षा एक से 12वीं तक के छात्रों को लाभ होगा, जिन्हें कोरोना संकट के कारण स्कूलों के बंद होने से पढ़ाई में परेशानी आयी है।

उन्होंने कहा, डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना से देश के दूर दराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में विश्व स्तर की शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। शिक्षकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित करने और गुणवत्तापूर्ण ई कंटेट विकसित करने के लिए उन्हें सशक्त बनाने से बेहतर परिणाम सामने आयेगा। मैं विज्ञान और गणित के 750 ई लैब स्थापित करने और 75 कौशल ई लैब स्थापित करने की घोषणा का स्वागत करता हूं।

जयपुरिया ने कहा,सरकार ने शहरी प्लानिंग और डिजाइन के पाठ्यक्रम को मुहैया कराने वाले पांच संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मान्यता देने का निर्णय लेकर सही कदम उठाया है। इससे भारत के लिए अनुकूल शहरी विकास के विजन को पूरा करने में मदद मिलेगी। बजट में ई लर्निग को बढ़ाने, शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और शिक्षा को समेकित करने की दिशा में कई प्रयास किये गये हैं।

एचएसएनसी यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट निरंजन हीरानंदानी ने भी बजट में शिक्षा तक सबकी बराबर पहुंच बढ़ाने और पृष्ठभूमि से इतर छात्रों की मानसिकता में विकास के लिए उठाये गये कदमों की प्रशंसा की।

हीरानंदानी ने कहा, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योग बजट में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए डिजिटल आधारभूत ढांचे के निर्माण और उनके उन्नयन पर ध्यान देकर डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर जोर दिये जाने की सराहना करते हैं। हइ और स्पोक मॉडल का अनुसरण करके डिजिटल विश्वविद्यालयों की स्थापना से ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए शिक्षा की उपलब्धता बढ़ेगी। क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा तक आसान पहुंच से प्रत्येक छात्र को खुद को सशक्त करने और जानकारी से सुसज्जित करने का अवसर प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा बेहतर ई शिक्षण परिणाम हेतु शिक्षकों को प्रभावी तरीके से शिक्षित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण ई कंटेंट तैयार करने का कदम आशाजनक है। इसके साथ ही व्यक्तिगत शिक्षा के विकल्प में भी बढ़त हुई है, खासकर डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में। बजट में कौशल पर भी विशेष जोर दिया गया है, जो किसी व्यक्ति को रोजगार के योग्य और रोजगार क्षेत्र में टिकाऊ बनाती है। कौशल आधारित पाठ्यक्रमों से न सिर्फ शिक्षा हासिल करने वालों को तार्किक सोच और रचनात्मकता का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि इससे वे उद्योग जगत के लिए भी तैयार होंगे और यह बेहतर भविष्य के लिए देश के युवाओं को समुचित रूप से तैयार करने का सबूत है।

कौशल आधारित शिक्षा की आवश्यकता को समझते हुए सेठ आनंदराम जयपुरिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीएफओ विक्रम अग्रवाल ने भी बजट में घोषित प्रावधानों की सराहना की।

अग्रवाल ने कहा, इस बार पेश बजट में सबसे महत्वपूर्ण है , डिजिटल शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के लिए उठाये गये कदम। डिजिटल यूनिवर्सिटी का गठन और सभी भारतीसय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण ई कंटेंट को बनाने की पहल से शिक्षा सभी के लिए समावेशी बनेगी। इनके अलावा देश स्टैक ई पोर्टल लांच करने का निर्णय कौशल विकसित करने और कौशल को बेहतर बनाने में मददगार होगा।

उन्होंने कहा, इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य आधुनिक कृषि की व्यवहारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पाठ्यक्रम को संशोधित और बेहतर करके कृषि विश्वविद्यालयों की शिक्षा को बेहतर बनाना है। मैं मिलिट्री प्लेटफार्म और सैन्य उपकरणों की बेहतर डिजाइनिंग और विकास के लिए रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में अकादमी क्षेत्र को शामिल करने के फैसले की भी सराहना करता हूं। इस बजट का दायरा काफी व्यापक है। यह शिक्षा क्षेत्र के कई पहलुओं को छूता है, जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े उपरोक्त व्यक्तियों ने जहां सरकार द्वारा बजट में घोषित प्रावधानों की प्रशंसा की है, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में और प्रयास करने चाहिए थे। बजट की ओलाचना करने वालों का मानना है कि गत साल की तुलना में इस साल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कम निवेश किया गया है और पहल भी अपेक्षाकृत कम हैं।

आईआईएम अहमदाबाद में अर्थशास्त्र किे एसोसिएट प्रोफेसर तरूण जैन ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने गत दो साल की शिक्षा हानि के लिए अतिरिक्त टीवी चैनलों के जरिये पूरक शिक्षण का उल्लेख किया है। यह प्रयास उस हानि को कम करने की दिशा में बहुत ही छोटा है, जो हमारे बच्चों को दो साल के दौरान शिक्षण में हुई है। स्कूल की गुणवत्ता में सुधार के लिए उल्लेखनीय निवेश से ही पूरी आबादी को उसका लाभ मिलेगा। हमें इस वास्तविकता को ध्यान में रखना होगा कि मात्र आठ प्रतिशत ग्रामीण छात्रों और 23 प्रतिशत शहरी छात्रों की पहुंच इंटरनेट तक है।

उन्होंने कहा कि यहां जब छात्रों की पहुंच इंटरनेट तक है, तब भी ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। उन्होंने कहा, हमें देश के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप बजट प्रतिबद्धता को करना होगा। उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा युवाओं की आशाओं का महत्वपूर्ण घटक है और इसमें निवेश से अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक रिटर्न भी प्राप्त होता है। इसीलिए सरकार को सार्वजनिक शिक्षा में निवेश को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

कुल मिलाकर केंद्र सरकार को डिजिटलीकरण द्वारा संचालित कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए अनुकूल प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। कौशल को बेहतर बनाने, दोबारा कुशल बनाने, अप्रेंटिसशिप जैसे शॉर्ट टर्म कार्यक्रम और आजीवन शिक्षण के लिए हजारों कौशल केंद्रों और विशेष प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना करके प्रशिक्षण के व्यापक अवसर प्रदान किये गये हैं। यह बजट सुनिश्चित करता है कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण पर सरकार का ध्यान बना रहेगा, जिससे देश के विकास और अर्थव्यवस्था में योगदान मिलेगा।

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नीट परीक्षा रद्द, सीबीआई करेगी जांच, जल्द होगा नई परीक्षा की डेट का ऐलान

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नई दिल्ली, 12 मई। देश भर में आयोजित की गई मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। यह परीक्षा एमबीबीएस में दाखिले के लिए थी। मंगलवार को यह जानकारी साझा की गई।

परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि 3 मई को आयोजित की गई नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है। अब यह परीक्षाएं दोबारा से आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है।

गौरतलब है कि नीट परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न परीक्षा होने से पहले ही लीक होने की बातें सामने आई थी। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा से जुड़े सारे दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यह बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है।

यह परीक्षा 3 मई रविवार को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, 8 मई 2026 को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों व कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त जांच रिपोर्टों तथा तथ्यों की समीक्षा की गई है। प्राप्त रिपोर्ट व सूचनाओं और निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखना उचित नहीं होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए नीट की परीक्षा दोबारा करवाना अनिवार्य हो गया है। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है। इसलिए अब विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि दोबारा आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा की नई तिथियां और नए प्रवेश पत्र जारी करने का कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से घोषित किया जाएगा। भारत सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच के लिए इस प्रकरण को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीई) को सौंपने का भी निर्णय लिया है। एजेंसी ने कहा कि वह जांच एजेंसी को सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यह माना कि परीक्षा दोबारा कराने से छात्रों और उनके परिवारों को वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन एजेंसी के अनुसार परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने मंगलवार को इस विषय में जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह कदम नहीं उठाया जाता तो राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को अधिक गंभीर और दीर्घकालिक नुकसान पहुंच सकता था।

इसके साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 चक्र में छात्रों द्वारा किया गया पंजीकरण, उम्मीदवार विवरण और चुने गए परीक्षा केंद्र पुनर्परीक्षा में स्वत मान्य रहेंगे। जिन छात्रों ने नीट परीक्षा के लिए आवेदन किया था ऐसे छात्रों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले आवेदन कर चुके या परीक्षा में शामिल हो चुके छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी।

पुनर्परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी अपने आंतरिक संसाधनों से आयोजित करेगी। एजेंसी ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों से बचें। छात्रों की सहायता के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। अभ्यर्थी 011-40759000 और 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं।

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पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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