राष्ट्रीय
ब्लूम ग्लोबल तेजी से भारत में विकास कर रहा, व्यापक बाजार में लाइवसोर्स अधिग्रहण को शामिल किया
भारत में आक्रामक विकास की ब्लूम ग्लोबल की योजना केंद्रीय बजट की पृष्ठभूमि में अच्छी तरह से रखी गई है, जिसमें रसद और परिवहन क्षेत्र पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया गया है। एपीआई के लिए डिजाइन किए गए एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म पर सभी-मोड ऑपरेटरों के बीच डेटा एक्सचेंज लाने का कदम ब्लूम ग्लोबल की भारत रणनीति में एक महत्वपूर्ण कारक होगा। यह देखते हुए कि भारत की आपूर्ति श्रृंखला और रसद लागत वर्तमान में देश के सकल घरेलू उत्पाद का 14 प्रतिशत (लगभग 8 प्रतिशत के वैश्विक औसत की तुलना में) है, यह एक महान कदम है और भारत को विश्व मानकों के करीब लाएगा। ब्लूम शिपमेंट की रीयल टाइम ट्रैकिंग करके और अंतिम डिलीवरी स्थानों पर गतिशील ईटीए की भविष्यवाणी करके ऑपरेटर के डेटा का उपयोग करके अपने विजिबिलिटी सोल्यूशन के माध्यम से मदद कर सकता है। सार्वजनिक-निजी-साझेदारी (पीपीपी) मोड पर चार स्थानों पर मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के कार्यान्वयन के लिए अनुबंध देने के लिए केंद्रीय बजट में दूसरा कदम एक और विकास है जो कंपनी के ²ष्टिकोण की सहायता करेगा। ये मेगा लॉजिस्टिक्स पार्क न केवल भारी रोजगार पैदा करेंगे और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगे, बल्कि मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट / स्टोरेज / कस्टम क्लीयरेंस / वर्कशॉप / यार्डस / पाकिर्ंग और भी बहुत कुछ के लिए इसे एक स्टॉप शॉप बनाकर आपूर्ति श्रृंखला को आसान बनाएंगे। ब्लूम ग्लोबल अपॉइंटमेंट बुक करने और इन लॉजिस्टिक्स पार्कों पर शेड्यूलिंग में मदद करने के लिए अपने टर्मिनल वीआईपी सर्विसेज समाधान में मदद कर सकता है।
एंड-टू-एंड सप्लाई चेन विजिबिलिटी टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस के अग्रणी प्रदाता ब्लूम ग्लोबल ने दो साल से भी कम समय में भारत में वृद्धि का अनुभव किया है। 2020 में इसके बैंगलोर कार्यालय के खुलने के बाद से, भारतीय टीम में लगभग 400 कर्मचारी हो गए हैं, जो स्थानीय समुदाय में 10 मिलियन डॉलर के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ब्लूम इंडिया, जटिल निमार्ताओं के लिए एक प्रमुख बहु-उद्यम आपूर्ति श्रृंखला व्यापार नेटवर्क, लाइवसोर्स के अधिग्रहण के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में निरंतर निवेश कर रहा है। लाइवसोर्स के साथ, ब्लूम अब पूर्ण, एंड-टू-एंड आपूर्ति श्रृंखला ²श्यता प्रदान करता है, माल के परिवहन से परे ²श्यता की मानक परिभाषा का विस्तार करता है। ब्लूम एकमात्र विश्वव्यापी आपूर्ति श्रृंखला प्रौद्योगिकी प्रदाता है जो ऑर्डर डिलीवरी के माध्यम से सभी तरह से सोसिर्ंग और खरीद से रीयल-टाइम ²श्यता वाले ग्राहकों का समर्थन कर सकता है।
सुधीर ने कहा, “ब्लूम इंडिया को एकमात्र तटस्थ, एकल-स्रोत ²श्यता समाधान के साथ हमारे ग्राहकों की सेवा करने पर गर्व है, जो पूरी आपूर्ति श्रृंखला को कवर करता है, हमारे उपयोगकर्ताओं को अद्वितीय और बेजोड़ पारदर्शिता और अंतर्²ष्टि प्रदान करता है।”
ब्लूम ग्लोबल में भारत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुधीर उन्नीकृष्णन ने कहा, “हालांकि हमें महामारी के माध्यम से नेविगेट करने की चुनौतियों के साथ प्रस्तुत किया गया था, हमारी अंतिम सफलता ब्लूम ग्लोबल इंडिया की कड़ी मेहनत और लचीलेपन के लिए वसीयतनामा थी, और हम आगे बढ़ते हुए उज्जवल स्थानों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”
जब यह खुला, तो बेंगलुरु में ब्लूम का कार्यालय भारतीय बाजार में 25 वर्षीय आपूर्ति श्रृंखला प्रौद्योगिकी प्रदाता के प्रवेश का प्रतिनिधित्व करता है। तब से, इस क्षेत्र को ब्लूम की व्यापक रेल और ट्रकिंग उद्योग विशेषज्ञता से लाभ हुआ है, जिससे भारतीय कंपनियों को महामारी के दौरान अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुलझाने में मदद मिली है।
सीईओ परविंदर जौहर ने कहा, “ब्लूम इंडिया हमारे संगठन की आर एंड डी शाखा से कहीं अधिक है। यही कारण है कि हमने बैंगलोर में कंपनी के एक क्रॉस-सेक्शन को इकट्ठा करने के लिए कड़ी मेहनत की है, यह सुनिश्चित करते हुए कि हम भारत से ब्लूम मिशन के सभी पहलुओं का समर्थन कर सकते हैं। ब्लूम वास्तव में एक वैश्विक रसद प्रौद्योगिकी कंपनी है, इसलिए ऑफशोर थिंकिंग के लिए कोई जगह नहीं है।”
पसंद के नियोक्ता के रूप में मान्यता प्राप्त, ब्लूम ग्लोबल प्रतिस्पर्धी लाभों और दूरस्थ कार्य लचीलेपन के विकल्प के साथ अपने कर्मचारियों में निवेश करने के लिए समर्पित है। हाल ही में, कंपनी ने अखिल भारतीय कर्मचारियों के लिए उपलब्ध एक सीखने और विकास पहल की घोषणा की जो दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों में से एक कौरसेरा के माध्यम से सतत शिक्षा कार्यक्रम प्रदान करती है। ब्लूम के कर्मचारी आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, डेटा विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर पाठ्यक्रमों और निर्देशित परियोजनाओं तक पहुंच के साथ व्यावसायिक घंटों के दौरान सालाना 80 घंटे के प्रशिक्षण का उपयोग कर सकते हैं।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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