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Saturday,01-August-2026
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परीक्षा से पहले देशभर के छात्रों संग त्री स्तरीय संवाद करेंगे शिक्षा मंत्री

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कोविड महामारी के बीच स्कूल, कॉलेज की परीक्षाएं करवाना एक चुनौती है। इसे स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षाओं का आयोजन करवाने का फैसला लिया है। हालांकि इससे पहले छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से त्री स्तरीय संवाद के जरिए परीक्षाओं के आयोजन संबंधी समस्याओं पर विचार किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक विद्यार्थियों की प्रगति एवं बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए परीक्षाओं का आयोजन बेहद जरूरी है। आमतौर पर नवंबर और दिसंबर में देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में यह परीक्षाएं आयोजित होती हैं।

इस साल परीक्षाओं के आयोजन को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अबतक कोविड के चलते देशभर के स्कूल कॉलेज पूरी तरह से नहीं खोले जा सके हैं। बोर्ड परीक्षाओं के रजिस्ट्रेशन से लेकर कक्षा संचालन तक सारे कार्य वर्चुअल या ऑनलाइन तरीके से संचालित हो रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, “लगातार स्कूल कॉलेज से दूर रह रहे छात्रों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई करना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए छात्रों को हमेशा तैयार रहना चाहिए।”

ऐसी तमाम संभावनाओं को देखते हुए कोविड महामारी के बीच समय पर परीक्षाओं के संचालन के लिए सरकार ने नई पहल की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने परीक्षाओं के संचालन के पूर्व छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ त्रिस्तरीय संवाद की योजना बनाई है। शिक्षा मंत्री डॉ. निशंक तीन अलग अलग तिथियों पर छात्रों, अभिभावकों शिक्षकों के साथ वेबिनार के जरिए सीधे संवाद करेंगे।

केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, “बेहतर संकल्प और इच्छाशक्ति के साथ पढ़ाई और समय पर रिजल्ट जारी करवाना सबसे बड़ी चुनौती है, ताकि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो। कोरोना नियमों का पालन करते हुए इन परीक्षाओं के आयोजन से छात्रों की योग्यता, विश्वसनीयता और विश्व के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश की स्वीकार्यता और बेहतर भविष्य-निर्माण की संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।”

वर्चुअल संवाद के जरिए शिक्षा मंत्री देशभर में शिक्षा और शिक्षण से जुड़े लोगों के साथ संवाद स्थापित करेंगे। वेबिनार की सूचना शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट समेत देशभर के तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और माननीय शिक्षा मंत्री के ट्विटर एकाउंट और फेसबुक पेज पर भी उपलब्ध होगा।

इस वर्चुअल संवाद के बाद शिक्षा मंत्री राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की समीक्षा करेंगे। इस प्रकार स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय के आदेशों के अनुसार परीक्षाओं के संचालन की विस्तृत योजना बनाई जाएगी। सरकार की पूरी कोशिश होगी कि परीक्षाओं के संचालन में छात्रों का समय बेकार न बर्बाद हो। साथ ही विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को लेकर सरकार पूरी निगरानी रखेगी।

परीक्षाओं के आयोजन में सरकार को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। छात्रों के स्वास्थ्य और कोरोना काल में सामाजिक दूरी समेत कई तरह की जिम्मेदारियों से रूबरू होना पड़ता है। रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, “हाल ही में नीट और जेईई की परीक्षाओं के संचालन में बेहतर सूझबूझ का परिचय दिया गया। समय पर परीक्षाओं का आयोजन करवाकर एक मिसाल पेश की गई। तमाम विरोधों की परवाह किए बगैर अपने निर्णय पर अडिग रहकर हमने नीट और जेईई का आयोजन करवाया था।”

निशंक ने कहा, “वैश्विक आपदा कोविड-19 के कारण संपूर्ण विश्व का शैक्षिक एवं अकादमिक जगत व्यापक रूप से प्रभावित हो रहा है। वर्तमान हालात में शीघ्र ही इस बीमारी से निजात मिलती हुई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए देशभर में परीक्षाओं का समय पर आयोजन करवाना जरुरी है।”

महाराष्ट्र

मुंबई साइबर फ्रॉड: बैंक से 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश में 7 लोग गिरफ्तार, 84 साइबर केस में वॉन्टेड आरोपी पुलिस कस्टडी में

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मुंबई; मुंबई साइबर पुलिस ने साइबर फ्रॉड में शामिल 7 लोगों को बैंक अकाउंट से 10 लाख रुपये निकालते हुए गिरफ्तार करने का दावा किया है। साइबर पुलिस को जानकारी मिली थी कि मुंबई में ओवरसीज बैंक बोरीवली ब्रांच से सलमान पठान अपने मेवल बैंक अकाउंट से पैसे निकालने वाला है। जब उसके साथी इंडिया ओवरसीज बैंक आए और 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश की, तो पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया। उनसे पूछताछ की गई। दोनों चेक के जरिए बैंक से 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने सलमान पठान के केजीएन ऑफिस पर छापा मारा और यहां से चार लोगों को हिरासत में लिया। जब सातों आरोपियों से पूछताछ की गई, तो पता चला कि फर्जी अकाउंट बनाकर फ्रॉड किया जा रहा था और बैंकों से पैसे निकाले जा रहे थे। इस मामले में केस दर्ज कर सात आरोपियों सलमान हबीब पठान (37), साजिद नौशाद कोटवाल (43), चिराग केतन (31), सैयद वजाहत (41), राकेश रमाशंकर मिश्रा (42), रश्तित राजंद (35) और आर्यन रितेश ठक्कर (18) को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 10 लाख रुपये कैश, 16 मोबाइल फोन, अलग-अलग कंपनियों की 31 सील, अलग-अलग कंपनियों के 23 सिम कार्ड, कुल 22 बैंक अकाउंट, 7 इंडियन ओवरसीज बैंक अकाउंट, एक कैश गिनने की मशीन, बैंक अकाउंट खोलने के डॉक्यूमेंट, 11 लोगों के आधार कार्ड, अलग-अलग बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट खोलने वाले टैब मिले हैं। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि उनके खिलाफ देशभर में 84 से ज़्यादा केस दर्ज हैं। साइबर सेल ने अपील की है कि साइबर जालसाजों के जाल में न फंसें और अपने बैंक अकाउंट की डिटेल न दें। साथ ही, सोशल मीडिया पर बात करते समय अपनी पर्सनल डिटेल न बताएं क्योंकि उनका इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया जाता है। साइबर डीसीपी बजरंग बनसोडे ने बताया कि पुलिस को इस मामले में साइबर फ्रॉड की जानकारी मिली थी और पुलिस ने साइबर मामलों में वॉन्टेड आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। उनके पास से 10 लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपियों के डॉक्यूमेंट्स समेत दूसरी चीजें भी जब्त की हैं।

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राष्ट्रीय समाचार

पिंगली वेंकैया: ब्रिटिश सैनिकों को सलामी देते देख आया था राष्ट्रीय ध्वज का विचार, फिर बना भारत का तिरंगा

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15 अगस्त 1947 को सुबह 5:30 बजे फहराया गया ध्वज एक नए युग के उदय के प्रतीक के रूप में शान से खड़ा था। सदियों के औपनिवेशिक शासन को सहने वाले राष्ट्र के लिए यह अपार खुशी, गौरव और राहत का क्षण था। उस विजयपूर्ण सुबह तक का सफर लंबा और कठिन था, जिसमें भारत के राष्ट्रीय ध्वज के विभिन्न स्वरूपों में बदलाव हुए। तीन रंगों और 24 चक्रों वाला राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा किसी डिजाइनर की कल्पना से नहीं बना, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रप्रेम की भावना और देश को विश्व में अपनी विशिष्ठ पहचान देने का एक संकल्प था। पिंगली वेंकैया ही वे शख्सियत थे, जिन्होंने हिंदुस्तान को उसके अभिमान का प्रतीक तिरंगा दिया।

2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे पिंगली वेंकैया एक स्वतंत्रता सेनानी थे। आजादी की लड़ाई के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को डिजाइन किया, जो आजादी के आंदोलन का प्रतीक बन गया था। जुलाई 1947 में हुई संविधान सभा की बैठक में इस ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया।

इतिहास में दर्ज है कि पिंगली वेंकैया ने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा की और दक्षिण अफ्रीका के एंग्लो-बोअर युद्ध में भाग लिया था। यहीं से पिंगली गांधीजी के संपर्क में आए और उनकी विचारधारा से बहुत प्रभावित हुए।

युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों को उनके ध्वज को सलाम करते देखकर वह अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने सोचा कि भारत के पास इस प्रकार का कोई ध्वज नहीं है और यहां से भारत के ध्वज के डिजाइन बनाने की शुरुआत हुई।

1906 में एआईसीसी के अधिवेशन में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को बनाने की इच्छा दिखाई। उन्होंने गांधीजी को सुझाव दिया कि हमारा अपना ध्वज होना चाहिए। गांधीजी को सुझाव पसंद आया और उन्होंने कहा कि अच्छा होगा कि वे स्वयं ध्वज का डिजाइन करें।

इतिहासकार राजीव लोचन ने एक इंटरव्यू में बताया, “पिंगली वेंकैया ने विचार किया कि हमें देश के लिए अलग से झंडा बनाना चाहिए, जोकि हमारे देश को आसानी से बता सके और उन्होंने झंडे के लिए तकरीबन 25 डिजाइनें चुनीं। झंडे के बारे में उन्होंने लोगों से चर्चा करना भी शुरू कर दिया था।”

कई बदलाव के बाद उन्होंने महात्मा गांधी के सामने एक फाइनल डिजाइन प्रस्तुत किया। 1921 में ध्वज ने अपना अधिक परिचित स्वरूप धारण किया, जिसे पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। तीन पट्टियां भारत के अलग-अलग समुदायों का प्रतिनिधित्व करती थीं और विविधता में एकता का आह्वान करती थीं। केंद्र में स्थित चरखा भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक था।

अंतिम परिवर्तन 1931 में हुआ, जब ध्वज के रंगों को अंतिम रूप दिया गया। केसरिया रंग साहस का, सफेद रंग शांति का और हरा रंग उर्वरता और विकास का प्रतीक था। चरखे की जगह धर्म चक्र को शामिल किया गया, जो शाश्वत धर्मचक्र और प्रगति का प्रतीक है। यह ध्वज, जिसे संविधान सभा की ओर से 22 जुलाई 1947 को औपचारिक रूप से अपनाया गया था, आज हमारा पूजनीय तिरंगा बन गया।

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राष्ट्रीय समाचार

जुलाई में यूपीआई ट्रांजैक्शन में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी, लेनदेन का कुल मूल्य बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए पहुंचा

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देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन्स की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 23.66 अरब हो गई। वहीं, इन ट्रांजैक्शनों का कुल मूल्य 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई के दौरान प्रतिदिन औसतन 76.3 करोड़ (763 मिलियन) यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए। वहीं, प्रतिदिन औसतन 96,383 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।

इससे पहले, जून 2026 में यूपीआई के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जो सालाना आधार पर 23 प्रतिशत अधिक थे। जून में इनका कुल मूल्य 20 प्रतिशत बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपए रहा था। उस महीने प्रतिदिन औसतन 75.7 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे और दैनिक औसत लेनदेन मूल्य 96,405 करोड़ रुपए था।

सरकार के अनुसार, पिछले पांच वित्त वर्षों में यूपीआई ट्रांजैक्शन में लगातार तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए था। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ और कुल मूल्य 139.15 लाख करोड़ रुपए हो गया।

इसके बाद वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई के जरिए 13,112.95 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनका मूल्य 199.95 लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन और 260.56 लाख करोड़ रुपए के कुल ट्रांजैक्शन तक पहुंच गई।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले महीने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया था कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल), जिसकी स्थापना अप्रैल 2020 में एनपीसीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में की गई थी, भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी कर रही है।

इन साझेदारियों के जरिए भारतीय पर्यटक और विदेशों में रहने वाले भारतीय आसानी से सीमा पार डिजिटल भुगतान कर पा रहे हैं। साथ ही, साझेदार देशों को भी यूपीआई जैसी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली और रुपे जैसी घरेलू कार्ड भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल रही है।

फिलहाल यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में भारत की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।

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