अंतरराष्ट्रीय समाचार
रोहिंग्याओं के स्थानांतरण के प्रयास की गलत व्याख्या न करें : बांग्लादेश मंत्रालय
बांग्लादेश के 1,642 रोहिंग्या मुसलमान नोआखली के हटिया उपजिला के अंतर्गत आने वाले एक द्वीप भषन चार में बस रहे हैं, जो अब उनका नया घर है। रोहिंग्या संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश में इसे एक मील का पत्थर कहा जा सकता है। शुक्रवार को 5 नेवी और एक सेना के जहाज समेत 19 जहाजों के जरिए चटगांव से रोहिंग्याओं को स्थानांतरित कर दिया गया। इस दौरान बांग्लादेश की नौसेना रोहिंग्याओं को ले जाने वाले जहाजों की सुरक्षा प्रभारी थी।
एक प्रेस नोट में बांग्लादेश सरकार ने सभी को अत्यधिक सावधानी बरतने के लिए कहा है, ताकि रोहिंग्याओं के जीवन और आजीविका में सुधार लाने के इस शानदार प्रयास की गलत व्याख्या न की जाए। यहां आए रोहिंग्या अपने नए घर को पाकर खुश हैं। सरकार ने पहले चरण में शिविरों से द्वीप तक लगभग 2,500 लोगों को स्थानांतरित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अज्ञात कारणों से यह नहीं हो सका।
यहां पहुंचने से पहले लगभग एक दर्जन रोहिंग्याओं ने कहा कि वे द्वीप के बारे में जानकारी लेने के बाद स्वेच्छा से भषन चार जा रहे हैं। रोहिंग्या महिला अमीना बेगम ने कहा, “कॉक्स बाजार में शिविरों में बिगड़ते हालातों ने उन्हें हमें भषन चार ले जाने के लिए प्रेरित किया।”
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि सरकार ने कॉक्स बाजार शिविरों में अत्यधिक भीड़ बढ़ने और अन्य अनुचित घटनाओं के कारण मौत के जोखिम को रोकने के लिए रोहिंग्याओं को स्थानांतरित करने का फैसला किया है। इसके लिए बांग्लादेश सरकार ने 13,000 एकड़ जमीन पर आवास परियोजना को विकसित करने के लिए 35 करोड़ डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है, जिसमें सभी आधुनिक सुविधाएं हैं। मसलन- साल भर ताजे पानी की आपूर्ति, निर्बाध बिजली की आपूर्ति, खेती के लिए जगह, चक्रवात आने पर बचने के लिए आश्रय, दो अस्पताल, चार सामुदायिक क्लीनिक, मस्जिद, गोदाम, दूरसंचार सेवाएं, पुलिस स्टेशन, मनोरंजन और शिक्षण केंद्र, खेल के मैदान आदि।
भषन चार में बने घर इतने मजबूत हैं कि चक्रवात, ज्वार की लहरों और सुपर-साइक्लोन अम्फान जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सकते हैं। इसके अलावा यहां रोहिंग्याओं के लिए कोविड-19 परीक्षण की पर्याप्त सुविधाएं और उपचार सुविधाएं भी दी हैं।
बता दें कि बांग्लादेश की सरकारी एजेंसियों के अलावा, लगभग 22 गैर सरकारी संगठन पहले से ही रोहिंग्याओं को स्थानांतरित करने के लिए हर संभव समर्थन देने के लिए काम कर रहे हैं। कई गैर-सरकारी संगठनों और पत्रकारों ने भी द्वीप का दौरा किया, उन सभी ने इसे लेकर संतोष व्यक्त किया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्थानांतरण संयुक्त राष्ट्र के साथ कई दौर की चर्चाओं के बाद किया गया।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा था, “हम आशा करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र, अपने नियमों के मुताबिक बहुत जल्द इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।”
बता दें कि अगस्त 2017 में म्यांमार में सेना की कार्रवाई के बाद भागे 750,000 रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में टेकनाफ सीमा पर शरण ली थी। वे उन 3 लाख रोहिंग्याओं के पास आकर मिल गए जो दशकों पहले रखाइन राज्य में हुई हिंसा के बाद से बाजार में रह रहे थे। इसके बाद कॉक्स बाजार में 11 लाख से अधिक शरणार्थी रह रहे हैं।
बांग्लादेश के नौसैनिक प्राधिकरण ने कॉक्स बाजार के शिविरों में भीड़ को कम करने के लिए भाशन चार में टीके3 नाम से 100 करोड़ की आवासीय परियोजना तैयार की है।
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गाजा में इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त बहुमंजिला इमारत गिरी, 11 बच्चों समेत 21 लोगों की मौत

पश्चिमी गाजा शहर में एक रिहायशी इमारत गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मृतकों में 11 बच्चे और 6 महिलाएं शामिल हैं। इस हादसे में 25 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।
नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद बासल ने बताया कि ‘अल-सादा’ नाम की छह मंजिला इमारत बुधवार तड़के ढह गई। यह इमारत पहले इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। यह इमारत निकट पूर्व में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुख्यालय के पास स्थित थी। इस इमारत में लगभग 100 विस्थापित लोग रह रहे थे।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बासल ने कहा कि बचाव टीमों ने 16 घंटे तक चले अभियान के दौरान 45 लोगों को सुरक्षित निकाला और 21 शव बरामद किए। उन्होंने बताया कि 35 अन्य लोग खुद ही निकलने में सफल रहे।
इमारत के मलबे के बाहर दर्जनों शोकाकुल परिजन इकट्ठा हुए। कई लोग अपने हाथों से ही मलबा हटाकर अपने प्रियजनों को खोजने की कोशिश करते दिखाई दिए। 54 वर्षीय लुआय अल-अजला ने इस हादसे में अपने परिवार के लगभग 10 लोगों को खो दिया।
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि बचाव कार्यों के लिए जरूरी भारी मशीनों और उपकरणों को लाने पर इजरायल की पाबंदियों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
गाजा में हमास की ओर से संचालित मीडिया कार्यालय ने एक बयान में कहा कि पूरे गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लापता लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। बयान के अनुसार, भारी मशीनरी और बचाव उपकरणों की कमी के कारण उन्हें निकालना मुश्किल हो रहा है। कार्यालय ने हजारों क्षतिग्रस्त इमारतों को टाइम बम जैसा खतरा बताया।
महमूद बासल ने चेतावनी दी कि सर्दियों के करीब आने के साथ 2,000 से अधिक रिहायशी इमारतों के गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और युद्धविराम की गारंटी देने वाले देशों से अपील की कि बचाव उपकरणों को गाजा में आने की अनुमति दिलाई जाए।ऐसा न होने पर ‘कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।’
यह इमारत ऐसे समय में गिरी है जब युद्धविराम के उल्लंघन की घटनाएं जारी हैं। अक्टूबर 2025 में लागू हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, हमास और इजरायल के बीच चल रही बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
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मक्का के पास ड्रोन हमले पर भारत ने जताई गहरी चिंता, क्षेत्र में जल्द शांति बहाली की उम्मीद

भारत ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर बुधवार को गहरी चिंता जताते हुए क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में जारी बयान में कहा कि मक्का के पास हुई यह घटना शहर के धार्मिक महत्व को देखते हुए विशेष रूप से चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, “मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर हमें गहरी चिंता है। भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हमलों और नागरिकों के जीवन तथा बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली हर कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है। मक्का के पास हुई यह घटना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि दुनिया भर के मुसलमानों के लिए इस शहर का अत्यंत पवित्र महत्व है।”
जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होगी।
विदेश मंत्रालय का यह बयान उस घटना के बाद आया है, जब सऊदी अरब की रॉयल एयर डिफेंस फोर्स ने मंगलवार शाम मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए एक ड्रोन को मार गिराया।
यमन में वैध सरकार की बहाली के लिए गठित गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने मक्का के दक्षिणी क्षेत्र में इस ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
अल-मालिकी ने कहा कि मक्का को निशाना बनाने की यह दूसरी कोशिश है। इससे पहले 27 जुलाई 2017 को बैलिस्टिक मिसाइल से भी ऐसा प्रयास किया गया था। उन्होंने इसे “आतंकी और शर्मनाक कृत्य” बताते हुए कहा कि यह दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने और उमराह यात्रियों में दहशत फैलाने की कोशिश थी।
उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और उमराह यात्रियों की सुरक्षा “रेड लाइन” है और गठबंधन बल हूती मिलिशिया की ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवश्यक और कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
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विदेश मंत्री जयशंकर का दो दिवसीय भूटान दौरा, राजा और प्रधानमंत्री से करेंगे मुलाकात

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 16 और 17 सितंबर को भूटान दौरे पर रहेंगे। उनकी यह दो दिवसीय यात्रा भूटान के विदेश और बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डीएन ढुंग्येल के निमंत्रण पर हो रही है।
एमईए के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर भूटान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा, उनकी भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से शाही मुलाकात भी तय है। वे भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भी मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और भूटान के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क की परंपरा को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद घनिष्ठ मित्रता तथा सहयोग को और मजबूत करने के लिए की जा रही है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और भूटान के बीच लगातार उच्चस्तरीय और संस्थागत स्तर पर बातचीत व सहयोग जारी है। दोनों देश कूटनीति, विकास और लोगों से जुड़े कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने थिम्पू में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। यह उनके तीन दिवसीय भूटान दौरे की शुरुआत थी। ज्ञानेश कुमार भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में भी हिस्सा लेने वाले हैं।
भूटान के राजा ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। भूटान की तीन दिन की यात्रा पर आए भारतीय मुख्य चुनाव आयुक्त को आज शाही मुलाकात का अवसर दिया गया।”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की यात्रा का उद्देश्य भारत के चुनाव आयोग और भूटान के चुनाव आयोग के बीच संस्थागत सहयोग को और मजबूत करना है।
उनकी यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम मंगलवार को पारो स्थित जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस का समारोह था।
भारत और भूटान समुदाय स्तर पर विकास परियोजनाओं में भी मिलकर काम कर रहे हैं। अगस्त में भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने बताया था कि झेमगंग जिले के पानबांग क्षेत्र में तीन हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (एचआईसीडीपी) का उद्घाटन किया गया।
भूटान में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत के सहयोग से पूरी की गई ये एचआईसीडीपी परियोजनाएं कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचने में मदद करेंगी, लोगों की आजीविका बेहतर करेंगी और पानबांग क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएंगी।”
जयशंकर की यह यात्रा भारत और भूटान को अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करने का अवसर देगी। उनकी भूटान के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर रहने की उम्मीद है।
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