राजनीति
1825 निर्माण श्रमिकों को 10,000 रुपये की कोरोना सहायता राशि
दिल्ली बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड ने 1825 निर्माण श्रमिकों को 10,000-10,000 रुपयों की कोरोना राहत राशि का वितरण किया है। दिल्ली सरकार ने इस साल पहले ही 2,17,039 निर्माण श्रमिकों को कोरोना राहत वितरण राशि के रूप में 5000-5000 रुपये वितरित किया था। कोरोना संकट के दौरान निर्माण श्रमिक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है। सरकार की ओर से निर्माण श्रमिकों को ये राहत राशि अतिरिक्त लाभ के रूप में मिली है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के तहत रजिस्टर्ड उन निर्माण श्रमिकों को राहत राशि वितरित करने का निर्णय लिया, जो 30 सितंबर, 2018 तक बोर्ड के साथ पंजीकृत थे। जिन सदस्यों ने अपना रेजिस्ट्रेशन रिन्यू करवा लिया है वे भी इस राहत राशि के लिए पात्र होंगे। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सभी निर्माण श्रमिकों से जो 30 सितंबर, 2018 से पहले बोर्ड के सदस्य थे, निर्माण बोर्ड के साथ अपनी सदस्यता को नवीनीकृत करने का आग्रह किया है ताकि वे संवितरण लाभ प्राप्त कर सकें।
सिसोदिया ने कहा की जब पिछले साल महामारी के कारण पहला लॉकडाउन लगाया गया था उस दौरान दिल्ली सरकार मार्च 2020 के महीने में बोर्ड के साथ पंजीकृत सभी 39600 श्रमिकों को राहत देने वाली देश की पहली सरकारों में से एक थी।
श्रम विभाग द्वारा नवंबर 2020 में, दिल्ली के श्रम कार्यालयों में निरीक्षण और सामूहिक पंजीकरण अभियान चलाए गए हैं। इन निरीक्षणों और पंजीकरण अभियानों के आधार पर श्रम विभाग में कई सुधार किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, 6 महीने के भीतर निर्माण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की संख्या बढ़कर 2.38 लाख हो गई है।
इसके अलावा निर्माण श्रमिकों के रेजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है। अब रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन प्रोसेस को ऑनलाइन कर दिया गया है। पहले श्रमिकों को अपना आवेदन जमा करने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे श्रमिक बिना किसी परेशानी और ज्यादा समय लगाए स्वयं का रेजिस्ट्रेशन कर सकते है और उन्हें अपने काम पर से छुट्टी भी नहीं लेनी होती है।
दिल्ली सरकार की ओर से आने वाले हफ्तों में 10,000 से अधिक निर्माण श्रमिकों को भी राहत राशि मिलेगी। ये निर्माण श्रमिक समाज के सबसे गरीब वर्ग के हैं, जिन्हें कोरोना संकट के दौरान सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। निर्माण श्रमिकों के लिए यह राहत संवितरण इस कठिन समय के दौरान उनकी मुश्किलों को कम करने का काम करेगा।
महाराष्ट्र
नीट प्रोटेस्ट पर दिविजा फडणवीस की अपील-प्रदर्शनकारी शिक्षा सुधार का करें समर्थन, राजनीति का नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा फडणवीस ने नीट और शिक्षा सुधारों को लेकर देशभर में चल रहे प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करने, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या उसकी विचारधारा का बिना सोचे-समझे समर्थन न करने की अपील की।
दिविजा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उनसे कई बार इन प्रदर्शनों पर अपनी राय देने के लिए कहा गया। ऐसे में उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर हिंसा और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, दोनों की अनुमति नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने लिखा कि लोग शिक्षा सुधारों की मांग का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन जिस राजनीतिक दल या विचारधारा के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा है, उसका आंख मूंदकर समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का समर्थन करने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य को समझना जरूरी है।
दिविजा फडणवीस ने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत विपक्ष का उद्देश्य देश के हित में काम करना होना चाहिए। विपक्ष को सरकार को बेहतर फैसले लेने में मदद करनी चाहिए, न कि केवल सत्ता पक्ष को बदनाम कर उसका विरोध करना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने लिखा कि सिर्फ इसलिए किसी आंदोलन का हिस्सा न बनें, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। किसी भी विचारधारा के प्रभाव में आए बिना सोच-समझकर फैसला लें।
दिविजा ने कहा कि जब तक आंदोलन छात्रों के हित, शिक्षा सुधार, नीट, पेपर लीक और एनटीए से जुड़े मुद्दों तक सीमित रहता है, तब तक यह उचित है। लेकिन जैसे ही आंदोलन धर्म या इन मुद्दों से बाहर के विषयों की ओर मुड़ता है, उसके इरादे बदल जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
504 करोड़ रुपए के सरकारी धन गबन मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, चंडीगढ़-लुधियाना में छापेमारी

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन गबन मामले में कार्रवाई करते हुए गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं।
सीबीआई के अनुसार, कुल पांच स्थानों पर तलाशी ली गई। इनमें गबन की गई राशि के लाभार्थियों के घर और कारोबारी प्रतिष्ठान, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना तथा जांच से जुड़े निजी संस्थानों के परिसर शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम सबूत मिले हैं। इनमें डिजिटल स्टोरेज ड्राइव, डिजिटल सिग्नेचर, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। अब इन दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की बारीकी से जांच और विश्लेषण किया जा रहा है।
सीबीआई ने बताया कि यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपए सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के जरिए निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर भेज दिया गया।
इस मामले में अब तक सीबीआई 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियां और छह व्यक्ति शामिल हैं।
सीबीआई ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े दो अन्य मामलों की जांच की। जिनमें पहला मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और नगर निगम चंडीगढ़ से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) से संबंधित है।
इन दोनों मामलों में भी सीबीआई पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सीएससीएल मामले में पांच बैंक अधिकारियों, एक सीएससीएल अधिकारी और एक निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। वहीं सीआरईएसटी मामले में पांच बैंक अधिकारी, दो सीआरईएसटी अधिकारी, चार निजी व्यक्ति और दो कंपनियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है।
सीबीआई ने कहा कि वह इस पूरे मामले में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही गबन किए गए सार्वजनिक धन की पूरी शृंखला का पता लगाकर अपराध से अर्जित राशि को ट्रेस करने की दिशा में जांच लगातार जारी रहेगी।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुई छात्रा को वेंटिलेटर से हटाया गया: आरएमएल अस्पताल

आरएमएल अस्पताल की ओर से बुधवार को बताया गया कि राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी एक घटना में गंभीर रूप से घायल हुई 21 वर्षीय महिला का डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा था। उसकी हालत में काफी सुधार होने के बाद उसे वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया है।
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि मरीज को सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया है।
बयान में कहा गया, “उन्हें सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और अब वह खुद से सांस ले रही हैं। वह होश में हैं और निर्देशों का सही जवाब दे रही हैं। उनके दिमाग और रीढ़ की हड्डी का एमआरआई नॉर्मल है।
अस्पताल के अनुसार, उनकी हालत में उत्साहजनक सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट हटाने का फैसला लिया गया।
बयान में कहा गया कि इलाज शुरू होने के बाद से उनकी क्लिनिकल हालत में लगातार सुधार हो रहा है और इलाज करने वाली टीम की कड़ी निगरानी में उन्हें पूरी मेडिकल देखभाल मिल रही है।
अस्पताल ने कहा कि महिला को जरूरी इलाज और लगातार निगरानी दी जा रही है।
यह महिला सोमवार को जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हो गई थी। खबरों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान बैरिकेड से टकराने से उन्हें चोटें आईं।
जंतर-मंतर से संसद तक सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान अफरातफरी मच गई।
प्रदर्शनकारियों ने नीट-यूजी पेपर लीक विवाद समेत परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि झड़प के दौरान 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने यह भी बताया कि 20 से ज्यादा पुलिस गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।
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