राजनीति
गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों व बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज पर सरकार को घेरेगी कांग्रेस
नई दिल्ली, 28 जनवरी : गेहूं के आटे की कीमतें 10 साल के उच्च स्तर पर पहुंचने और अन्य आवश्यक वस्तुओं के भी उत्तर की ओर बढ़ने के साथ, विपक्ष को उम्मीद है कि सरकार केंद्रीय बजट में बढ़ती मुद्रास्फीति की जांच के उपायों की घोषणा करेगी और देश में रोजगार पैदा करने के लिए एमएसएमई के लिए रियायतें भी देगी। विपक्ष सरकार को बढ़ते राष्ट्रीय ऋण पर भी घेरेगा, जो 2014 के बाद से 250 प्रतिशत बढ़ गया है, जब मनमोहन सिंह सरकार थी। कांग्रेस का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में प्रति भारतीय कर्ज 43,124 रुपये से बढ़कर 1,09,373 रुपये हो गया है और 2014 की तुलना में यह 2.53 गुना अधिक हो गया है।
कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि भारत सरकार का कुल बकाया कर्ज, जो 31 मार्च, 2014 को 55.87 लाख करोड़ रुपये था, अब 31 मार्च, 2023 तक बढ़कर 155.31 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा, वित्तीय वर्ष 2023 के अंत तक, प्रत्येक भारतीय को 1,09,373 रुपये का ऋण देना होगा, एक ऐसा ऋण जो उन्होंने कभी नहीं लिया। 1947 से 31 मार्च 2014 तक, प्रति भारतीय ऋण 43,124 रुपये था। लेकिन पिछले नौ वर्षों में, प्रति भारतीय ऋण 2014 की तुलना में 2.53 गुना हो गया है। पिछले नौ वर्षों में प्रति भारतीय ऋण में 66,249 रुपये की वृद्धि हुई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोगों से अपील की थी कि वे अपने घरों से बाहर निकलें और महंगाई, बेरोजगारी और भाजपा और आरएसएस द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ संघर्ष में शामिल हों।
उन्होंने कहा: राहुल गांधी ने 7 सितंबर को कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी और अब अपने अंतिम गंतव्य के करीब है। मैं सभी से घरों से बाहर निकलने और भाजपा और आरएसएस द्वारा फैलाई गई महंगाई, बेरोजगारी और नफरत के खिलाफ खड़े होने की अपील करता हूं।
हालांकि दिसंबर 2022 के लिए थोक मूल्य सूचकांक-आधारित (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति लगभग दो साल के निचले स्तर 4.95 प्रतिशत पर आ गई, खाद्य और कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोलियम की कीमतों में गिरावट के कारण नवंबर 2022 में डब्ल्यूपीआई-आधारित मुद्रास्फीति 5.85 प्रतिशत थी।
विशेषज्ञों ने कहा कि इसके कारण वित्त वर्ष 2023 की चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में गिरावट आएगी।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, खाद्य पदार्थों, खनिज तेलों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, खाद्य उत्पादों, वस्त्रों और रसायनों और रासायनिक उत्पादों की कीमतों में गिरावट ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट में योगदान दिया है।
डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति फरवरी 2021 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत से नीचे रही, जब यह 4.83 प्रतिशत थी।
गेहूं और गेहूं के आटे की कीमतें करीब 10 साल के उच्चतम स्तर पर हैं। विपक्ष का कहना है कि यह असमान जीएसटी और दोषपूर्ण खरीद नीति के कारण है। गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना के तहत 30 लाख मीट्रिक टन गेहूं बिक्री के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह फैसला लिया गया कि अगले दो महीनों के भीतर, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) खुले बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत विभिन्न मार्गों के माध्यम से केंद्रीय पूल स्टॉक से 30 एलएमटी गेहूं को बाजार में उतारेगा।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि घरेलू गेहूं और आटे की कीमतों को कम करने के लिए व्यापारियों, राज्य सरकारों और सहकारी समितियों और संघों के साथ-साथ सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से गेहूं की बिक्री की सुविधा प्रदान की जाएगी।
बैठक में यह फैसला लिया गया कि आटा मिलों और थोक खरीदारों को ई-नीलामी के तहत एफसीआई क्षेत्र से प्रति नीलामी अधिकतम 3,000 मीट्रिक टन प्रति खरीदार की मात्रा के लिए ई-नीलामी के माध्यम से गेहूं की पेशकश की जाएगी।
ई-नीलामी के बिना राज्य सरकारों को उनकी योजनाओं के लिए भी गेहूं की पेशकश की जाएगी। उपरोक्त चैनलों के अलावा, ई-नीलामी के बिना सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों, सहकारी समितियों और महासंघों को 2,350 रुपये प्रति क्विंटल की रियायती दर पर गेहूं की पेशकश की जाएगी।
इस विशेष योजना के तहत बिक्री इस शर्त के अधीन होगी कि खरीदार गेहूं से आटा बनाएगा और इसकी कीमत जनता के लिए 29.50 रुपये प्रति किलोग्राम रखेगा।
राजनीति
एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सांसदों के जोरदार नारेबाजी के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना है, ताकि सहकारी समितियों के लिए निधिकरण प्रक्रिया को तेज और अधिक लचीला बनाया जा सके।
इस विधेयक का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, एनसीडीसी (एनसीडीसी) की भूमिका का विस्तार करना है, जो सहकारी समितियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करता है, ताकि देशभर में सहकारी क्षेत्रों को वित्तपोषित किया जा सके।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
इसके बाद लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित हो गया और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, भी लोकसभा में लगातार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे।
नित्यानंद राय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने के विधेयक पर चर्चा नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। जब हंगामा बंद नहीं हुआ, तो विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
यूक्रेन पर रूसी मिसाइल हमलों में 6 लोगों की मौत, जेलेंस्की ने की कड़े प्रतिबंधों की मांग

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की अधिकतम कोशिश कर रहा है। सोमवार रात रूस के मिसाइल हमलों में छह लोगों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हुए हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”जापोरिज्जिया में रूसी हमले के बाद से रात भर राहत और बचाव कार्य जारी हैं। शहर पर उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों, ‘जिरकॉन’ मिसाइलों और ग्लाइड बमों से हमला किया गया। यह एक बेहद गंभीर हमला था, जिसे नागरिक ढांचे को अधिकतम नुकसान पहुंचाने के इरादे से अंजाम दिया गया।”
जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में शहर में छह लोगों की मौत हुई है और 19 लोग घायल हुए हैं। मैं पीड़ित परिवारों और उनके करीबियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। बचावकर्मी अभीी हमले वाली एक जगह पर लगी आग बुझाने में जुटे हुए हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि कीव में मिसाइल हमले से एक संक्रामक रोग अस्पताल की इमारत और एक औद्योगिक इकाई को नुकसान पहुंचा है। वहीं, अग्रिम मोर्चे के करीब रहने वाले समुदायों पर ड्रोन हमलों का सिलसिला रोज जारी है।
उन्होंने बताया कि खेरसोन और खार्किव में रात के दौरान बिजली सब-स्टेशनों पर हमले हुए, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सभी संबंधित सेवाएं परिवारों तक दोबारा बिजली पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं।
इसके अलावा डोनेट्स्क, द्नीप्रोपेत्रोव्स्क और मिकोलाइव क्षेत्रों पर भी हमले किए गए। मिसाइलों के साथ-साथ पूरे यूक्रेन में 120 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिनमें अधिकांश जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन थे।
जेलेंस्की ने कहा कि रूस के हर कदम, चाहे वह बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना हो, उत्तर कोरियाई हथियारों का इस्तेमाल करना हो या नई सैन्य लामबंदी की तैयारी करना हो, यह साफ दिखाता है कि मॉस्को शांति की दिशा में नहीं बल्कि संघर्ष को और बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया को इसका जवाब अभी देना होगा, इंतजार नहीं करना चाहिए। रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देने वाले उद्योगों और संस्थानों पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। साथ ही यूक्रेन को वायु रक्षा (एयर डिफेंस) के क्षेत्र में और मदद की जरूरत है। शांति के लिए अवसर बनाने के लिए ये सभी कदम जरूरी हैं। मदद करने वाले सभी देशों और लोगों का धन्यवाद।
यूक्रेन की फर्स्ट लेडी ओलेना जेलेंस्का ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
ओलेना जेलेंस्का ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, ”रूस लगातार यूक्रेनियों की जान ले रहा है। बीती रात दुश्मन ने कीव, कीव क्षेत्र, जापोरिज्जिया क्षेत्र, निप्रॉपेट्रोव्स्क क्षेत्र, खार्किव क्षेत्र और कई अन्य इलाकों पर गोलाबारी की। मैं सभी पीड़ितों और जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।”
उन्होंने कहा कि हम दुनिया को इस स्थिति का आदी नहीं होने दे सकते। यूक्रेनियों की मौतों, तबाह हुए घरों और हर नए हमले की खबर को सामान्य बात नहीं माना जाना चाहिए। ये वो लोग हैं, जिनसे रूस हर दिन उनके घर, उनके अपनों और उनकी जिंदगी छीन रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु विधानसभा ने ‘नीट’ को खत्म करने का प्रस्ताव पास किया, भाजपा ने किया वॉकआउट

तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए ‘नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट’ को खत्म करने की मांग की गई। इस प्रस्ताव के जरिए राज्य ने इस सेंट्रलाइज्ड एंट्रेंस एग्जाम के प्रति अपने लंबे समय से चले आ रहे विरोध को फिर से दोहराया।
इस दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली और भाजपा विधायक एम. भोजराजन ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए वोटिंग से ठीक पहले सदन से वॉकआउट कर दिया।
राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण मंत्री केजी अरुणराज ने सदन के पटल पर नीट विरोधी प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह मेडिकल प्रवेश की इस केंद्रीकृत व्यवस्था को तुरंत समाप्त करे। सरकार ने अपने प्रस्ताव में नीट को खत्म करने के मुख्य कारण गिनाए, जिनमें परीक्षा के आयोजन में सामने आई कथित अनियमितताएं, महंगी कोचिंग सेंटरों का तेजी से बढ़ता कारोबार और सबसे दुखद, छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं शामिल थीं।
मंत्री अरुणराज ने मांग की है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग अधिनियम 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम 2020 सहित अन्य प्रासंगिक केंद्रीय कानूनों में जरूरी संशोधन करे। सरकार की स्पष्ट मांग है कि पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए, ताकि तमिलनाडु फिर से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश दे सके।
प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया गया है कि नीट परीक्षा सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है और यह मेडिकल शिक्षा के मामलों में राज्यों के अधिकारों को भी प्रभावित करती है। तर्क दिया गया कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों पर असमान रूप से बुरा असर डाल रही है। विशेषकर उन छात्रों पर जिन्होंने तमिल माध्यम से पढ़ाई की है और जिनके पास महंगी प्राइवेट कोचिंग लेने के साधन नहीं हैं। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि इस प्रणाली ने छात्रों का ध्यान नियमित स्कूली पाठ्यक्रम से हटाकर केवल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी तक सीमित कर दिया है, जिससे कोचिंग सेंटरों को भारी फीस वसूलने का मौका मिल रहा है।
बता दें कि तमिलनाडु पहले भी नीट से छूट पाने की कोशिश कर चुका है। वर्ष 2021 में जब डीएमके सत्ता में आई थी, तब भी विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया था। हालांकि, उस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रख लिया गया था और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। अब इस नए प्रस्ताव के जरिए राज्य ने अपनी मांग फिर से दोहराई है।
सदन में दूसरा विशेष प्रस्ताव एफसीआरए 2026 कानून से जुड़ा था। मंत्री राजमोहन ने इस प्रस्ताव को लेकर कहा, “विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) साल 2010 से ही लागू है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत में आने वाले विदेशी फंड को रेगुलेट करना है ताकि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और संप्रभुता पर कोई प्रभाव न पड़े।”
उन्होंने सदन को जानकारी दी कि केंद्र ने संसद में एफसीआरए 2026 संशोधन विधेयक पेश किया है। इसी सिलसिले में बीते कल ही अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। नेताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि वे केंद्र पर इस संशोधन बिल को वापस लेने का दबाव बनाएं, क्योंकि इसका असर शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और अन्य संगठनों पर पड़ सकता है।
मंत्री राजमोहन ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार को इन संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार को मिलने वाली अतिरिक्त शक्तियों पर सख्त आपत्ति है। राज्य सरकार यह मानती है कि विदेशी चंदे का विनियमन होना चाहिए, लेकिन यह संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि एफसीआरए से जुड़ा कोई भी नया ढांचा ऐसा होना चाहिए जो न्याय, वैध संपत्तियों की सुरक्षा और सबसे बढ़कर संघवाद के सिद्धांतों का मजबूती से सम्मान करे। इसलिए, तमिलनाडु विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से इस संशोधन विधेयक को वापस लेने का आग्रह करती है।
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