राजनीति
कांग्रेस ने मुंगेर घटना की तुलना जलियांवाला हत्याकांड से की
कांग्रेस ने बुधवार को मुंगेर घटना की तुलना जलियांवाला बाग हत्याकांड से की और बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि क्या देश में दुर्गापूजा त्योहार में शामिल होना अपराध है? यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने घटना की तुलना 13 अप्रेल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड से की, जब कार्यकारी ब्रिगेडियर जनरल रेजिनल्ड डायर ने ब्रिटिश भारतीय सेना को अमृतसर में निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पुलिस मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अधीन बेखौफ हो चुकी है और लोगों को जानवरों की तरह मार रही है।
उन्होंने कहा, “भाजपा-जदयू सरकार के अंतर्गत पुलिस बिहार में दुर्गा मां के भक्तों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है? उन्हें बिना किसी कारण के बुरी तरह पीटा गया।”
सिंघवी ने कहा कि वह वह भक्तों पर फायरिंग की वजह जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक और असभ्य है।
पुलिस ने मंगलवार को कहा था, “मुंगेर में सोमवार को रात 11.30 बजे दीन दयाल उपाध्याय चौक पर मां दुर्गा के मूर्ति विसर्जन के दौरान पुलिस के लाठी चार्ज और अज्ञात व्यक्तियों द्वारा फायरिंग की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए, जिसमें कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत से व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का नुकसान: रिपोर्ट

भारत के साथ वर्ष 2019 से व्यापारिक संबंध निलंबित होने के कारण पाकिस्तान को अनुमानित 40 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत से आयात बंद होने के बाद पाकिस्तानी कारोबारियों को दूसरे और दूरस्थ देशों से सामान मंगाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी वृद्धि हुई है। पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष ने यह जानकारी दी।
कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, काउंसिल के अध्यक्ष नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के चलते वाणिज्यिक संबंध बाधित हुए। इसका सीधा असर पाकिस्तान के कारोबार और उद्योगों पर पड़ा है। भारत से पहले जिन वस्तुओं का आयात आसानी से हो जाता था, अब उन्हें दूसरे देशों से मंगाने में अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
कसूरी ने बताया कि पाकिस्तान का दवा उद्योग पहले भारत से मिलने वाले कच्चे माल पर काफी हद तक निर्भर था। उनके अनुमान के मुताबिक, भारत से आयात दोबारा शुरू होने पर पाकिस्तान को हर साल 2 से 3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर कपास उत्पादन में गिरावट के कारण पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग पर भी अतिरिक्त 5 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। कपड़ा मिलों को अब ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कपास मंगानी पड़ रही है। वहीं, कपास उत्पादन वाले पारंपरिक क्षेत्रों के किसान तेजी से गन्ने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यह संकट और गंभीर हो सकता है।
कसूरी के मुताबिक, पाकिस्तान भारत की पर्याप्त उत्पादन क्षमता के बावजूद चीनी, उर्वरक, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा और इस्पात, सब्जियां तथा भारी मशीनरी जैसी वस्तुएं दूरस्थ बाजारों से आयात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बहाल होने से परिवहन लागत कम हो सकती है और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार आ सकता है। भारत की तेल रिफाइनरियां भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के अधिक नजदीक हैं, इसलिए भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात सस्ता पड़ सकता है। इसके अलावा, भारतीय कृषि और औद्योगिक उत्पादों की उपलब्धता से पाकिस्तान के कई उद्योगों की उत्पादन लागत भी घट सकती है।
कसूरी ने कहा कि व्यापारिक संबंधों के निलंबन का असर पर्यटन पर भी पड़ा है। पाकिस्तान आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में बड़ी कमी आई है। इनमें धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ अपने पैतृक घरों और गांवों को देखने आने वाले लोग भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों की नींव बन सकते हैं।
कसूरी ने क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का उदाहरण देते हुए श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत की ओर से दी गई वित्तीय सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में क्षेत्रीय सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर हादसा, बंगाल के 5 ट्रैकर्स समेत 8 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड में ट्रैकिंग के दौरान हिमस्खलन और अचानक आए हिमपात में फंसने से पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पांच ट्रैकर्स समेत एक अभियान दल के आठ सदस्य लापता हो गए हैं। इस घटना के संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को जानकारी दी।
बांकुरा के लापता ट्रैकर्स की पहचान तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल, उदय घोष और मनोज खवास के रूप में हुई है। पहले चार सालबानी गांव के निवासी हैं, जबकि मनोज उसी जिले के केशरा गांव के रहने वाले हैं। अन्य तीन लापता सदस्यों में से दो उत्तर प्रदेश के लखनऊ से और एक उत्तराखंड के उत्तरकाशी से हैं।
बांकुरा के पांचों ट्रैकर्स 24 अक्टूबर को उत्तराखंड के लिए रवाना हुए थे और उन्हें नवंबर की शुरुआत में घर लौटना था।
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लापता ट्रैकर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है।
अधिकारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, “उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक के दौरान खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण लापता हुए बांकुरा के पांच युवा ट्रैकर्स के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है।”
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्थिति पर नजर रखने के लिए उत्तराखंड सरकार और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ लगातार संपर्क में है।
उन्होंने कहा, “नई दिल्ली स्थित हमारे रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन चैनलों के माध्यम से, हम अपने लड़कों को खोजने और बचाने के लिए चल रहे व्यापक खोज और बचाव अभियान पर नियमित रूप से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि बांकुरा जिले के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) और पुलिस अधीक्षक को घटनास्थल पर उत्तराखंड एसडीआरएफ, स्थानीय जिला अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने बांकुरा में पीड़ित परिवारों से संपर्क किया है और उन्हें हर संभव रसद और भावनात्मक सहायता प्रदान कर रहा है।
अधिकारी ने कहा, “हम परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपने युवाओं की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। हम उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना करते हैं।”
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चार शेरपाओं और एक सहायक सहित 12 सदस्यीय अभियान दल गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। दल ने निर्धारित दिन पर बेस कैंप से अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पहाड़ी इलाके में आगे बढ़ते समय दल के अधिकांश सदस्य अचानक आए हिमपात में फंस गए और लापता हो गए।
अभियान दल के चार सदस्य, जिनमें एक शेरपा और सहायक शामिल थे, अंततः 30 अक्टूबर को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने बाद में अधिकारियों को सूचित किया कि दल के शेष आठ सदस्य लापता हैं।
इस सूचना के बाद उत्तराखंड सरकार ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित एक हेलीकॉप्टर की सहायता से उत्तराखंड एसडीआरएफ की एक टीम पिछले दो दिनों से लापता पर्वतीय क्षेत्र में खोज कर रही है, हालांकि अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
उत्तराखंड सरकार ने कहा कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण बचाव अभियान में लगातार बाधा आ रही है। स्थानीय प्रशासन ने लापता पर्वतारोहियों के परिवारों से संपर्क कर उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।
बांकुरा के जिला मजिस्ट्रेट अनीश दासगुप्ता ने मंगलवार को बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने परिवारों से संपर्क किया और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि पर्वतों में पहुंचने के बाद से वे पर्वतारोहियों के साथ नियमित संपर्क में थे, हालांकि पिछले दो-तीन दिनों से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। लापता पर्वतारोहियों के मोबाइल भी बंद हैं, जिससे उनके परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
राजनीति
हिंदू-मुस्लिम करके देश को बांटना चाहती है भाजपा, दीया मिर्जा मामले में कोर्ट का फैसला सराहनीय : अबू आजमी

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा बीएमसी को फटकार लगाते हुए अभिनेत्री दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने के आदेश दिए जाने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस फैसले से साबित होता है कि देश में न्याय अभी भी जिंदा है।
अबू आजमी ने कहा, “जज साहब ने जो किया, मैं उन्हें सैल्यूट करता हूं। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को तुरंत वापस अपलोड करो। यह बहुत बड़ी बात है।”
उन्होंने कहा, “जब भी देश में कोई ऐसी चीज आए जो संविधान के खिलाफ हो, जहां जबरदस्ती गुंडागर्दी फैलाई जा रही हो, अगर अदालतें इसी तरह से सख्ती दिखाएंगी, तो इस देश में अराजकता फैला रहे भाजपा के लोगों का दिमाग सही हो जाएगा। भाजपा के लोग अपनी मनमानी कर रहे हैं, देश के संविधान को ठुकरा रहे हैं और सिर्फ हिंदू-मुस्लिम करके इस देश को बांटना चाहते हैं और सत्ता में बने रहना चाहते हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि मेयर रितु तावडे़ कह रही हैं कि दीया मिर्जा हिंदू विरोधी बात कर रही थीं, इसलिए उनका वीडियो हटाया गया, तो अबू आजमी ने मेयर पर ही सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने कहा, “मेयर से पूछिए, आप आज तक कहां थीं? इससे पहले तो आप बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस में थीं। भाजपा में अधिकतर लोग वही हैं, जो पहले कांग्रेस में रहकर भाजपा को गाली देते थे और अब उन्हीं के साथ काम कर रहे हैं।”
उन्होंने बीएमसी कमिश्नर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “क्या सारी सरकारी संस्थाएं और सारे गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन बीजेपी के हो गए हैं? उनके कहने पर आप लोगों ने वीडियो हटा दिया और अब जब कोर्ट कह रहा है तो आपको शर्म आ रही होगी कि हमने गलत काम किया। आप लोग संविधान के मुताबिक काम कीजिए, किसी सरकार के प्रभाव में काम करना संविधान के खिलाफ है।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चुनाव आयोग, एसआईआर और घुसपैठियों के मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की बात पर अबू आजमी ने कहा कि सरकार जनता के वोट की कीमत नहीं समझ रही है।
उन्होंने कहा, “जनता ने वोट देकर सरकार बनाई है। क्या अमित शाह जनता के वोटों की कोई कीमत नहीं समझते? किसी ने कहा था कि जब सड़क सुनसान हो जाएगी तो संसद आवारा हो जाएगी। अभी संसद आवारा हो गई है, अपनी मनमानी कर रही है। पहले सड़क सुनसान थी, अब सड़क भर गई है। पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर लोग आंदोलन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वोट चोरी से सरकार बनाई गई है। सरकार को उसे प्रूफ करना चाहिए और लोगों को संतुष्ट करना चाहिए। आप पार्लियामेंट में बुलाकर बात करेंगे और वहां वोटिंग करा देंगे, मेजॉरिटी है तो आपकी बात हो जाएगी, ऐसा नहीं चलता। 140 करोड़ जनता में से जो लोग सड़क पर उतरे हैं, जब तक वे संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा।”
ईडी द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई और करोड़ों की संपत्ति जब्त करने के मामले में अबू आजमी ने इसे सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा, “आजम खान कई सालों से जेल में हैं। अगर ईडी के पास कोई सबूत था तो वह जेल में जाकर उनसे स्टेटमेंट ले सकती थी और कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन जब-जब उनकी जमानत होती है, तब-तब एक नया केस लाया जाता है। अभी उनकी जमानत हुई है और फिर से कार्रवाई की जा रही है। यह सब सरकार के इशारे पर हो रहा है।”
अबू आजमी ने कहा कि आजम खान ने कोई पैसा नहीं कमाया है, उन्होंने लोगों से पैसे लेकर यूनिवर्सिटी बनाई है। आजम खान दस बार विधायक, मंत्री और सांसद रह चुके हैं और उनके साथ इस तरह का जुल्म किया जा रहा है। सरकार समझती है कि इस तरह की हरकतों से वह चुनाव जीत जाएगी, लेकिन अब जनता जाग चुकी है और उनकी यह नीति चलने वाली नहीं है।
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