राजनीति
सीएम ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को पत्र, कहा- बिना गलती के परेशान किए जा रहे वोटर
कोलकाता, 12 जनवरी: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में हो रही कथित गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया से आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और कई योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
ममता बनर्जी ने पत्र में लिखा कि जिन मतदाताओं को सुनवाई नोटिस भेजे जा रहे हैं, वे पहले से ही वर्ष 2002 की मतदाता सूची से स्वयं या अपने परिजनों के माध्यम से मैप किए जा चुके हैं। ऐसे मामलों में सुनवाई नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे न केवल मतदाताओं में भ्रम फैल रहा है, बल्कि उन्हें बेवजह मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
साथ ही, इन नोटिसों को लेकर फील्ड में काम कर रही टीमों को भी जनता के विरोध और नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मतदाता इसे बिना किसी गलती के उत्पीड़न मान रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने एसआईआर के दौरान सामने आ रही दो बड़ी खामियों की ओर विशेष रूप से ध्यान दिलाया। पहली खामी यह है कि सुनवाई के दौरान मतदाता अपनी पात्रता से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में इन दस्तावेजों की कोई पावती या रसीद उन्हें नहीं दी जा रही। बाद में जब सत्यापन या अगली सुनवाई होती है, तो वही दस्तावेज ‘रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं’ बताए जाते हैं और इसी आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं। ममता बनर्जी ने इसे पूरी तरह से गलत और अस्वीकार्य प्रक्रिया बताया।
उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की रसीद न देना मतदाताओं को असहाय बना देता है और उन्हें प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होना पड़ता है। यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी औपचारिकताओं पर आधारित और यांत्रिक हो गई है, जिसमें विवेकपूर्ण निर्णय का अभाव है। इससे एसआईआर का मूल उद्देश्य ही विफल हो रहा है, जिसका मकसद मतदाता सूची को शुद्ध और मजबूत बनाना है, न कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं को बाहर करना।
दूसरी बड़ी खामी के रूप में मुख्यमंत्री ने 2002 की मतदाता सूचियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि पुराने, गैर-डिजिटाइज्ड मतदाता रिकॉर्ड को एआई टूल के जरिए स्कैन और अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया गया, जिसमें नाम, उम्र, लिंग, रिश्ते और अभिभावक के नाम जैसी जानकारियों में गंभीर गलतियां हुईं। इन त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की श्रेणी में डाल दिया गया।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि पिछले 23 वर्षों में कई मतदाताओं ने फॉर्म-8 के जरिए अपने विवरण सही कराए थे, जिन्हें विधिसम्मत सुनवाई के बाद चुनाव अधिकारियों ने मंजूरी दी थी और वे 2025 की मतदाता सूची में शामिल हैं। इसके बावजूद, अब चुनाव आयोग उन्हीं मतदाताओं से दोबारा पहचान और पात्रता साबित करने को कह रहा है, जो पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक है।
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि प्रक्रिया को फिर से 2002 पर ले जाया जा रहा है, तो क्या इसका मतलब यह है कि पिछले दो दशकों में किए गए सभी संशोधन अवैध थे?
उन्होंने कहा कि नाम या उम्र में मामूली अंतर जैसे ‘केआर’ और ‘कुमार’ या ‘शेख’ और ‘एसके’ जैसी त्रुटियों को बिना सुनवाई के, टेबल-टॉप स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है।
बनर्जी ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान दे ताकि नागरिकों की पीड़ा समाप्त हो, प्रशासनिक तंत्र पर अनावश्यक दबाव न पड़े, और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालती दस्तावेज पोस्ट करने के खिलाफ चेतावनी दी

एक वकील ने मंगलवार को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने ब्रिटेन में रहने वाले ‘भगोड़े आर्थिक अपराधी’ विजय माल्या को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान अदालती दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने की चेतावनी दी है।
वकील आशीष मेहता ने बताया कि कथित तौर पर ब्रिटेन में मौजूद भगोड़े व्यवसायी को हाई कोर्ट का यह निर्देश ईडी द्वारा माल्या को जांच एजेंसी के हलफनामे को अदालत द्वारा उस पर विचार किए बिना ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड करने पर आपत्ति जताने के बाद आया है।
मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को तय करते हुए हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को ईडी द्वारा किए गए खुलासों को ध्यान में रखते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, माल्या ने फरवरी में हाई कोर्ट को बताया था कि वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि वह भारत कब लौटेंगे।
उन्होंने इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला दिया, जिनके कारण वह देश छोड़ने में असमर्थ हैं।
उच्च न्यायालय माल्या द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
एक याचिका में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका में उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में भी रिट याचिकाओं की सुनवाई हुई थी।
उन्होंने कहा कि माल्या के खिलाफ ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है और उनके मुवक्किल को इसकी जानकारी है, लेकिन बाध्यकारी अदालती आदेशों के कारण वे ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने माल्या के अदालत में पेश होने के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे ब्रिटेन के अदालती आदेशों पर भरोसा कर रहे हैं, जबकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन आदेशों को चुनौती दी गई है या नहीं।
अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह के भरोसे को सर्वमान्य औचित्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने देसाई को सुनवाई के दौरान दिए गए सभी बयानों को रिकॉर्ड पर रखते हुए एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को भी कहा, ताकि भारत सरकार तदनुसार जवाब दे सके।
राष्ट्रीय समाचार
स्पाइसजेट की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर सरकार की कड़ी नजर, सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं: नागर विमानन मंत्री

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) स्पाइसजेट की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में यात्री सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
स्पाइसजेट की स्थिति पर सरकार की निगरानी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि डीजीसीए को एयरलाइन के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन दोनों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।
नायडू ने कहा कि नियामक लगातार स्पाइसजेट के प्रदर्शन की निगरानी कर रहा है और एयरलाइन के साथ नियमित संवाद बनाए हुए है। सरकार भी कंपनी के साथ बातचीत कर रही है और उसे अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि वह अपने कारोबार को स्थिर कर सके।
स्पाइसजेट पिछले कुछ समय से वित्तीय दबाव, घटते विमान बेड़े और घरेलू बाजार हिस्सेदारी में कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। एयरलाइन परिचालन क्षमता बहाल करने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने के प्रयास कर रही है।
मंत्री ने बताया कि स्पाइसजेट इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के तहत वित्तीय सहायता की संभावनाएं भी तलाश रही है। हाल ही में सरकार ने इस योजना का विस्तार कर विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।
इस महीने सरकार ने ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी देते हुए विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपए के लक्षित ऋण समर्थन की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य एयरलाइंस को वित्तीय दबाव कम करने में मदद करना है।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की ऊंची कीमतें, हवाई क्षेत्र संबंधी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कमी जैसी वजहों से विमानन उद्योग दबाव में है।
इन चुनौतियों के बावजूद नागर विमानन मंत्री ने दोहराया कि सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्रालय और डीजीसीए यह सुनिश्चित करने पर फोकस कर रहे हैं कि वित्तीय या परिचालन चुनौतियों का असर नियामकीय अनुपालन और यात्रियों की सुरक्षा पर न पड़े।
स्पाइसजेट के साथ सरकार का यह निरंतर संवाद ऐसे समय हो रहा है, जब एयरलाइन भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार में अपनी क्षमता बढ़ाने, वित्तीय स्थिति सुधारने और खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्रीय समाचार
पुलिस ने चोरी का किया खुलासा, नाबालिग के कब्जे से 16 लाख के आभूषण और नकदी बरामद

नोएडा के सेक्टर-39 थाने की पुलिस ने चोरी की एक घटना का खुलासा करते हुए एक नाबालिग आरोपी को पुलिस हिरासत में लिया है। पुलिस ने उसके कब्जे से करीब 16 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के आभूषण और 1,09,650 रुपए नकद बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई मैनुअल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से की गई। पुलिस के मुताबिक, 20 सितंबर को एक व्यक्ति ने थाना सेक्टर-39 में अपने घर से सोने-चांदी के आभूषण और नकदी चोरी होने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
घटना के खुलासे के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया था। जांच के दौरान पुलिस टीम ने मैनुअल इंटेलिजेंस के साथ इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का सहारा लिया और महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। जांच के आधार पर पुलिस टीम ने 22 सितंबर को सेक्टर-47/48 क्षेत्र से एक नागालिग आरोपी को नियमानुसार पुलिस संरक्षण में लिया।
पुलिस का दावा है कि उसके पास से चोरी किए गए आभूषण और नकदी बरामद हुई है। बरामद सामान की कुल कीमत करीब 16 लाख रुपए बताई गई है।
पुलिस द्वारा जारी बरामदगी विवरण के अनुसार, नाबालिग के कब्जे से सोने के एक गले के हार, दो हाथ के कंगन, दो मंगलसूत्र, तीन चेन, एक मांग का टीका, एक नाक की नथुनी, दो अंगूठियां, एक ओम पेंडल और तीन जोड़ी झुमके बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, चांदी की तीन जोड़ी पाजेब भी बरामद हुई हैं। इन आभूषणों के साथ पुलिस ने 1,09,650 रुपए नकद भी बरामद किए हैं। पुलिस पकड़े गए नाबालिग के पुराने इतिहास और उसके अन्य साथियों की भी जानकारी जुटा रही है।
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