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Thursday,06-August-2026
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मुख्यमंत्री योगी भारत-नेपाल रिश्ते दुरुस्त करने में तुरुप का पत्ता साबित होंगे

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चीन से तनातनी के बीच मौजूदा समय में नेपाल-भारत रिश्तों की अनदेखी नहीं कि जा सकती है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि चीन के दबाव में आकर नेपाल ने सदियों पुराने रोटी-बेटी के रिश्तों को दरकिनार कर दिया है। बावजूद इसके गोरखनाथ मंदिर और आम जनमानस के मधुर रिश्तों से दोनों देशों के पुराने रिश्तों में रवानगी लाई जा सकती है। इसे दुरुस्त करने को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं।

बता दें कि योगी ने हाल ही में नेपाल को आगाह किया था कि उसे अपने देश की राजनैतिक सीमाएं तय करने से पहले तिब्बत के हश्र को याद रखना चाहिए। इस बात पर नेपाली प्रधानमंत्री ओली काफी नाराज थे और इसे राजनैतिक तूल देकर एक ऐतिहासिक भूल करते हुए योगी को ही नसीहत दी थी।

नेपाल शोध अध्ययन केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रदीप राव ने आईएएनएस को बताया, “नाथपंथ और नेपाल का संबंध सांस्कृतिक-धार्मिक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण है। महायोगी गोरखनाथ नेपाल के राजगुरू रहे। नेपाल की मुद्राओं पर गोरखनाथ के नाम का अंकन है। पहले उस पर उनकी चरण पदुकाएं अंकित रहती थी, अब पृथ्वीनाथ की कटार अंकित है। यह नेपाली मुद्रा पर आज भी है। किसी भी राष्ट्र की मुद्रा उसकी प्रतीक होती है। जैसे भारत में आशोक चक्र और महात्मा गांधी हैं, ठीक वैसे ही नेपाल की मुद्रा पर गोरखनाथ और नाथपंथ से जुड़े प्रतीक आज भी अंकित हैं। यह जनमानस में रचा बसा है। वहां की कम्युनिस्ट सरकार भी उनका प्रतीक नहीं हटा पाई। हम आज तक इसका उपयोग भारत नेपाल के संबंध में नहीं कर पाएं, नहीं तो आज यह स्थिति न होती है। गोरखनाथ को केन्द्र में रखकर यदि भारत नेपाल सांस्कृतिक विरासत की बात करेंगे तो बिना गोरखनाथ मंदिर के यह कैसे संभव है। नेपाल की जनता गोरखनाथ के पीठाधीश्वर को आज भी गोरखनाथ का प्रतिनिधि मानती है।”

गौरतलब है कि नाथपंथ और नेपाल के रिश्ते हजारों वर्ष पुराने हैं। महायोगी गोरखनाथ जी द्वारा प्रवर्तित नाथपंथ के प्रभाव से पूर्व नेपाल में योगी मत्स्येन्द्रनाथ की योग परम्परा का प्रभाव दिखायी देता है, जिन्हें नेपाल के सामाजिक जनजीवन में अत्यंत सम्मान प्राप्त है। इसकी झलक नेपाली समाज में प्रसिद्घ मत्स्येन्द्र-यात्रा-उत्सव के रूप में मिलती है। गुरु गोरक्षनाथ के प्रताप से गोरखा राष्ट्र, जाति, भाषा, सभ्यता एवं संस्कृति की प्रतिष्ठा हुई।

शाह राजवंश के सभी नरेशों ने गुरु गोरखनाथ को अपना इष्टदेव स्वीकारा। नेपाल के शाहवंशी शासकों ने अपने सिक्कों पर गुरु गोरखनाथ की चरणपादुकाओं का चिह्न् अंकित कराया।

नेपाल की जनता एवं शाह राजवंश परम्परागत रूप से महायोगी गोरक्षनाथ को प्रतिवर्ष भारत के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मन्दिर में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी चढ़ाते हैं। आज भी नेपाली जनता के बीच गोरखनाथ राष्ट्रगुरु के रूप में पूज्य हैं। यह नाथपंथ का नेपाल में प्रभाव और तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ के प्रति आदर ही था कि 1950 के दशक में शाह राजवंश और राणा शासकों में जारी सत्ता संघर्ष के दौर में तत्कालीन सरकार को उनकी मदद लेनी पड़ी। बावजूद इसके भारत के प्रति नेपाल का यह रवैया दुखद है। वह भी तब जब योगी जी के गुरु ब्रह्मलीन अवेद्यनाथ अक्सर यह कहा करते थे कि नेपाल सिर्फ हमारा पड़ोसी मित्र राष्ट्र ही नहीं समान और साझा सांस्कृतिक विरासत के कारण सहोदर भाई जैसा एकात्म राष्ट्र है।

नेपाल के प्रति ऐसी ही सद्भावना उनके गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ की भी थी। वह नेपाल के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप किए बिना भारत से हमेशा सद्भावना मंडल भेजे जाने पर बल देते थे।

ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ ने भी आजीवन नेपाल के प्रति इन्हीं विचारों और नीतियों का समर्थन और अनुकरण किया। वह बार-बार भारत सरकार को नेपाल में हो रहे सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के बारे में सचेत करते रहे। माओवादी गतिविधियां, आईएसआई की पैठ और धमार्ंतरण को भारत विरोधी गतिविधियां बताते रहे।

अपने गुरु की इस सोच को योगी आदित्यनाथ भी अक्सर उल्लेख किया करते हैं। ऐसे वक्त में भारत की वर्तमान सरकार को नेपाल के साथ अपने संबंधों को सुदृढ करने के लिए नाथ सम्प्रदाय की आध्यात्मिक उपस्थिति और प्रभाव का सहयोग लेना चाहिए। एक स्थिर नेपाल ही भारत के लिये हितकारी है, ऐसी स्थिति में योगी आदित्यनाथ, भारत सरकार के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

न्यूजीलैंड: 15 साल बाद वेलिंगटन में बर्फबारी, कई प्रमुख राजमार्ग बंद

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एक तरफ जहां यूरोप के कई इलाके भीषण गर्मी की मार अब भी झेल रहे हैं वहीं ओशिनिया के द्वीपीय देश न्यूजीलैंड की राजधानी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड का सामना कर रहा है। अंटार्कटिका से आई भीषण शीत लहर के प्रभाव से न्यूजीलैंड के बड़े हिस्से में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वेलिंगटन में करीब 15 वर्षों बाद समुद्र तल तक बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि दक्षिणी शहर डुनेडिन में लोगों ने दुनिया की सबसे खड़ी सड़क पर स्कीइंग कर इस दुर्लभ मौसम का आनंद लिया।

स्थानीय मीडिया आउटलेट स्टफ के अनुसार, राजधानी वेलिंगटन में बर्फबारी से शहर सफेद चादर में ढक गया। लंबे समय बाद हुई इस बर्फबारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर बर्फबारी की तस्वीरें और वीडियो भी तेजी से साझा किए जा रहे हैं।

दक्षिणी शहर डुनेडिन में भारी बर्फबारी के कारण कई स्कूल बंद कर दिए गए। बर्फ से ढकी दुनिया की सबसे खड़ी सड़क ‘बाल्डविन स्ट्रीट’ पर स्थानीय लोगों ने स्की और स्नोबोर्ड चलाकर मौसम का आनंद लिया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को देश के कई हिस्सों में तापमान शून्य से नौ डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच गया। बर्फबारी और फिसलन के कारण कई प्रमुख राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं, जबकि क्राइस्टचर्च हवाई अड्डे पर भी उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है। पुलिस ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

न्यूजीलैंड की मौसम एजेंसी ‘मेटसर्विस’ ने कहा है कि बुधवार को कुछ क्षेत्रों में मौसम में अस्थायी सुधार हो सकता है, लेकिन इसके बाद ठंड की एक और लहर आने की संभावना है। एजेंसी के मुताबिक, गुरुवार कई इलाकों में इस वर्ष की सबसे ठंडी सुबह हो सकती है।

इस बीच, राष्ट्रीय बिजली ग्रिड संचालक ‘ट्रांसपावर’ ने रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज होने की जानकारी दी है और सप्ताह के अंत तक बिजली आपूर्ति पर दबाव बने रहने की चेतावनी दी है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

इजरायली राजदूत अजार ने भारत और इजरायल के स्टार्टअप, इको सिस्टम और शिक्षा की सराहना की

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Israeli Ambassador

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भारत और इजरायल की शिक्षा, स्टार्टअप और इको सिस्टम की सराहना की। हाल के दिनों में भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी आई है। इस बीच इजरायली राजदूत ने ये बयान दिया।

भारत में इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष यूनिवर्सिटी में से 6 इजरायली और 5 भारतीय को इस बात की संभावना के लिए चुना गया है कि उनके ग्रेजुएट में से कोई एक वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, जिससे एक यूनिकॉर्न कंपनी बनेगी!”

अजार का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और इजरायल के बीच तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड का यह विश्लेषण वेंचर कैपिटल फंडिंग और यूनिकॉर्न बनने की दर के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही इजरायली राजदूत ने द जेरुसेलम पोस्ट का एक लेख भी साझा किया।

इसमें दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज के पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की सफलता को मापा गया। द जेरुसेलम पोस्ट में लिखा गया कि स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के मुताबिक, नेगेव की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी इस मामले में इजरायल में पहले और अमेरिका के बाहर की यूनिवर्सिटी में तीसरे नंबर पर है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि उसका कोई ग्रेजुएट जो वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, वह आगे चलकर एक यूनिकॉर्न कंपनी बनाएगा।

अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष रैंक वाली संस्थाओं में छह इजरायली विश्वविद्यालय शामिल हुए, जो किसी भी अन्य देश से ज्यादा हैं। इजरायली संस्थानों में बेन-गुरियन विश्वविद्यालय का ऑड्स रेशियो 6.6 रहा, जो सबसे ऊंचा है। इसके बाद राइखमान विश्वविद्यालय, टेक्नियन-इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बार-इलान विश्वविद्यालय, तेल अवीव विश्वविद्यालय और हिब्रू विश्वविद्यालय यरूशलम का नंबर आता है।

इजरायली संस्थानों में राइखमान विश्वविद्यालय 5.4 के ऑड्स रेशियो के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद टेक्नियन 3.1 के साथ, बार-इलान विश्वविद्यालय 2.9 के साथ, तेल अवीव विश्वविद्यालय 2.8 के साथ और हिब्रू विश्वविद्यालय 2.2 के साथ रहा। शीर्ष 18 में भारत के 5 संस्थान शामिल थे, जबकि कनाडा के 3 और यूनाइटेड किंगडम के 2 संस्थान इस सूची में थे।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान के साथ शांति समझौता बरकरार रखने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना जरूरी है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए शांति समझौते (एमओयू) पर कायम रहने के लिए मजबूर करना चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि एमओयू पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों के बीच एक राय है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि उनका मानना ​​है कि यह एमओयू भविष्य में ईरान के विदेशी संबंधों का केंद्र बिंदु होगा।

उन्होंने कहा, “हमें दुश्मन को उस बात पर मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू से देश, इलाके और हमारे साथियों की सुरक्षा बेहतर होगी।”

इस बीच, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि तेहरान हर दुश्मन की धमकी को वास्तविक और गंभीर मानता है। उन्होंने इसे महज मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दिए जाने को खारिज कर दिया।

अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम न तो आश्चर्यचकित होंगे और न ही निष्क्रिय रहेंगे। हम धमकियों को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत विकसित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।”

यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ नए हमले टालने की बात कहने के बाद आया।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ सैन्य आतंक, ताकत और शक्ति के उस स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखा गया।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने हमला टाल दिया है। उन्होंने एक आगामी समझौते का हवाला दिया जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा।

इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ्ते के अंत में हमले शुरू कर सकते हैं।

18 जून को, ईरान और अमेरिका ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों को आखिरी समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के अंदर बातचीत करनी थी। हालांकि, उनके बीच हाल ही में हुए तनाव के कारण बातचीत का नतीजा अधर में लटका हुआ है।

अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए थे और इनका मकसद कमर्शियल शिपिंग को धमकाने की ईरान की क्षमता को कम करना था। ईरान ने इस इलाके में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

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