राजनीति
मुख्यमंत्री योगी ने सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने को लागू करने के निर्देश दिए
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने दूसरे राज्यों में बढ़ रहे कोविड केसों को लेकर यहां पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। कहा कि एनसीआर के जिलों तथा लखनऊ में सभी के लिए सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क लगाए जाने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को टीम 9 की बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से विभिन्न राज्यों में कोविड के केस में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। एनसीआर के जिलों में भी इसका प्रभाव है। विगत 24 घंटे में गौतमबुद्ध नगर में 103 और गाजियाबाद में 33 नए पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हुई है। लोगों को कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन के लिए जागरूक किया जाए।
एनसीआर के जिलों में भी इसका प्रभाव है। विगत 24 घंटे में गौतमबुद्ध नगर में 103 और गाजियाबाद में 33 नए पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हुई है। एनसीआर के जिलों तथा लखनऊ में सभी के लिए सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क लगाए जाने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
प्रदेश में वर्तमान में कुल एक्टिव केस की संख्या 856 है। विगत 24 घंटों में 1 लाख 13 हजार कोरोना टेस्ट किए गए, जिसमें 170 नए कोरोना मरीजों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 110 लोग उपचारित होकर कोरोना मुक्त भी हुए। उन्होंने कहा, हमें पूरी सावधानी और सतर्कता बरतनी होगी।
सीएम ने कहा कि कोविड टीकाकरण अभियान की प्रगति भी संतोषप्रद है। किंतु बच्चों के टीकाकरण को और तेज करने की आवश्यकता है। 30 करोड़ 86 लाख से अधिक कोविड टीकाकरण के साथ ही 18 वर्ष से अधिक आयु की पूरी आबादी को टीके की कम से कम एक डोज लग चुकी है, जबकि 86.69 प्रतिशत से अधिक वयस्क लोगों को दोनों खुराकें मिल चुकी है। 15 से 17 आयु वर्ग में 94.26 प्रतिशत किशोरों को पहली खुराक मिल चुकी है। 12 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को पहली डोज के बाद अब पात्रता के अनुसार दूसरी डोज भी दी जाए।
मुख्यमंत्री बोले 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को बूस्टर डोज लगाए जाने में तेजी की अपेक्षा है। प्रत्येक दशा में यह सुनिश्चित किया जाए कि एक भी नागरिक टीकाकवर से वंचित न रहे। बूस्टर डोज की महत्ता और बूस्टर टीकाकरण केंद्रों के बारे में आमजन को जागरूक किया जाए।
राजनीति
शिक्षक दिवस पर अखिलेश का योगी सरकार पर हमला, बोले- ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो पीडीए पढ़ेगा’

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षक दिवस पर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में बंद किए गए प्राथमिक विद्यालयों को फिर से खोलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही शोषित, वंचित, गरीब और पीड़ित समाज में सामाजिक-राजनीतिक चेतना और जागरूकता पैदा कर सकती है।
इसी संदेश के साथ समाजवादी पार्टी शुक्रवार को प्रदेश के बंद प्राथमिक विद्यालयों में ‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी का नारा है— ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो पीडीए पढ़ेगा।’
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्टर जारी कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि उप्र में जो 26 हज़ार प्राथमिक विद्यालय भाजपा सरकार ने बंद किए हैं, उन सभी स्कूलों में समाजवादी पार्टी आज शिक्षक दिवस 5 सितंबर के दिन ‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिसका मूल उद्देश्य ये संदेश देना है कि ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो पीडीए पढ़ेगा’।
सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि इस कार्यक्रम के पीछे मूल भावना ये है कि शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए क्योंकि शिक्षा से ही शोषित-वंचित, गरीब-पीड़ित समाज में वो सामाजिक-राजनीतिक चेतना और जागरूकता आएगी जो प्रभुत्ववादियों के वर्चस्व को चुनौती देकर भेदभाव को खत्म करेगी, बराबरी लाएगी और समता-समानता पर आधारित ‘सामाजिक न्याय का राज’ लाकर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाएगी, हमारे ‘बंधु राष्ट्र’ के संकल्प को साकार कर दिखाएगी।
इसके पहले अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में उनकी सरकार बनने पर बंद किए गए 26 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने के बजाय सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, जिसका सबसे अधिक असर पीडीए वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा से ही वंचित और पिछड़े समाज में जागरूकता और सामाजिक चेतना पैदा होगी तथा बराबरी और सामाजिक न्याय की दिशा मजबूत होगी।
राष्ट्रीय समाचार
शिक्षक दिवस पर राहुल गांधी और खड़गे ने दी शुभकामनाएं, डॉ. एस राधाकृष्णन को किया नमन

शिक्षक दिवस पर लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दी और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर याद किया।
राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें सादर नमन। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं। अपने ज्ञान, सेवा और समर्पण से आप छात्रों का भविष्य संवारते हैं और देश की आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं। आपका योगदान अमूल्य है।”
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और पोस्ट में लिखा, “आज भारत की शिक्षा व्यवस्था हमारे सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हमें मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां हर छात्र को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक उज्ज्वल भविष्य मिले।”
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “शिक्षक ही लोगों की सोच को आकार देते हैं, उनमें अच्छे संस्कार डालते हैं और हमारे देश के भविष्य की नींव रखते हैं। शिक्षक दिवस पर हम उन सभी शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जिनका ज्ञान, धैर्य और समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता है। हम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि देते हैं, जो एक महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनेता थे। उनकी बुद्धिमत्ता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।”
बता दें कि डॉ. राधाकृष्णन का योगदान शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा रहा है। साल 1948 में उनकी अध्यक्षता में ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ का गठन किया गया था, जिसने स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा की रूपरेखा तैयार की और ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (यूजीसी) की स्थापना की मजबूत सिफारिश की थी।
1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति बने, लेकिन इसके बाद भी उनका जीवन बेहद सादा रहा। कहा जाता है कि जब वे राज्यसभा के सभापति थे, तो सदन में तीखी बहस होने पर वे अचानक संस्कृत के श्लोक या बाइबिल की पंक्तियां पढ़ने लगते थे, जिससे तनाव भरा माहौल तुरंत शांत हो जाता था।
1962 में जब उन्होंने राष्ट्रपति का पद संभाला, तो उनके कुछ पुराने छात्रों और दोस्तों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन बड़े स्तर पर मनाने की इजाजत मांगी। इस पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया, जो उनके महान चरित्र का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने कहा था, “मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय, यदि 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।” तभी से हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
खेल
पहली बार भारत और जापान के बीच खेला जाएगा टी20 इंटरनेशनल मुकाबला, बीसीसीआई ने किया ऐलान

भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर इस महीने के आखिर में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक टी20 इंटरनेशनल मुकाबला खेला जाएगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शुक्रवार को इस बात की घोषणा की है।
‘सुजुकी कप’ नाम का यह मैच 22 सितंबर को तोचिगी प्रान्त के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाएगा। यह मैच ‘स्पोर्ट 75’ नाम की एक बड़ी द्विपक्षीय पहल की शुरुआत करने वाला मुख्य कार्यक्रम है। यह पहल जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शिखर सम्मेलन में हुए समझौते से शुरू हुई थी, जिसका मकसद खेलों के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देना है।
शुक्रवार को बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने एक बयान में कहा, “बीसीसीआई इस ऐतिहासिक मौके का हिस्सा बनकर खुश है, क्योंकि भारत और जापान की पुरुष टीमें जापान में एक खास टी20 इंटरनेशनल मैच के लिए एक साथ आ रही हैं। यह क्रिकेट के लिए एक अहम पल है, क्योंकि इससे भारतीय टीम एक नई जगह पर जा रही है और जापान व पूर्वी एशिया में ज्यादा लोगों तक खेल को पहुंचाने का मौका मिल रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत और जापान के बीच मजबूत रिश्ते और लंबे समय से चली आ रही दोस्ती है। हमें खुशी है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के 75 साल पूरे होने के जश्न में क्रिकेट भी शामिल होगा। हम इस मैच को मुमकिन बनाने की कोशिशों के लिए जापान क्रिकेट एसोसिएशन (जेसीए) का शुक्रिया अदा करते हैं।”
सैकिया ने आगे कहा कि भारतीय बोर्ड गैर-पारंपरिक इलाकों में खेल के विस्तार की कोशिशों में मदद करने की अपनी जिम्मेदारी को समझता है। उन्होंने कहा, “बीसीसीआई का मानना है कि क्रिकेट का विकास इसके पारंपरिक इलाकों से आगे बढ़ना चाहिए, और दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बोर्ड के तौर पर हम उस विकास में योगदान देने की अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं। बीसीसीआई, जापान में क्रिकेट को और मजबूत करने और आने वाले वर्षों में इस रिश्ते को और आगे बढ़ाने के लिए जेसीए के साथ मिलकर काम करेगा।”
फैन्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए आयोजक सानो वेन्यू की क्षमता को आमतौर पर 500 दर्शकों से बढ़ाकर 2,000 करने की योजना बना रहे हैं। जल्द ही आधिकारिक तौर पर टिकटों की बिक्री शुरू होने की उम्मीद है। भारतीय पुरुष टीम 24 सितंबर से 3 अक्टूबर तक एशियन गेम्स के पुरुष इवेंट में खेलने के लिए जापान आ रही है।
जापान क्रिकेट एसोसिएशन के चीफ एग्जीक्यूटिव नाओकी मियाजी ने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियंस के आने को स्थानीय स्तर पर इस खेल के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। “मौजूदा वर्ल्ड चैंपियंस को जापान में क्रिकेट के लिए घर में बुलाना हमारी एसोसिएशन के लिए एक यादगार पल है। हम इस लक्ष्य को हासिल करने में हमारे साथ काम करने के लिए बीसीसीआई का शुक्रिया अदा करते हैं और भारतीय क्रिकेट फैंस के जोश का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साहित हैं। इसके साथ ही, हम क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाले स्थानीय जापानी लोगों को भी हमारी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि यह वाकई एक यादगार मौका होगा।”
इस बीच, बाएं हाथ के स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर विक्की ओस्तवाल, तेज गेंदबाज रसिक सलाम और कार्तिक त्यागी नेट बॉलर के तौर पर एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम के साथ जाएंगे। उनके पासपोर्ट और वीजा से जुड़ी औपचारिकताएं चल रही हैं। उम्मीद है कि ये तीनों 19 सितंबर को नई दिल्ली से भारतीय टीम के साथ टोक्यो के लिए रवाना होंगे।
बीसीसीआई के एक सूत्र ने शुक्रवार को बताया, “इन तीनों की प्रोग्रेस पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के क्रिकेट हेड वीवीएस लक्ष्मण बारीकी से नजर रख रहे हैं, जो एशियन गेम्स में टीम के हेड कोच भी हैं। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने और मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का अनुभव लेने से इन तीनों को अच्छा एक्सपोजर मिलेगा।
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