राजनीति
मुख्यमंत्री ने 36,590 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटे
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में बहुप्रतीक्षित 69 हजार शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई। योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अपने सरकारी आवास से ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से 36,590 सहायक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 अगस्त को 31,227 सहायक स्कूल शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किया था। 69,000 शिक्षक भर्ती अभियान 2020 के तहत शनिवार को 36,950 शिक्षकों को उनके नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है। उन्होंने कहा है कि उप्र सरकार ने शुचिताएं पारदर्शिता के साथ बिना भेदभाव सिर्फ और सिर्फ मेरिट के आधार पर नौकरी देने का जो संकल्प लिया है, आज उस कड़ी में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। इस 69 हजार शिक्षक चयन की प्रक्रिया को जनवरी 2020 में ही पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थो और कुत्सित राजनीति से प्रेरित होकर चंदा वसूली कर जैसे तैसे हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक इसे उलझाए रखा। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उप्र सरकार की रीति और नीति को ही सही माना। अंतत: आज यह महत्वपूर्ण चयन प्रक्रिया सम्पन्न हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मिशन रोजगार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। यह आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 36,590 नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में 5 नवचयनित युवाओं को मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ, जबकि जिलों में आयोजित कार्यक्रम में सरकार के मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नियुक्ति पत्र वितरित किए।
योगी ने कहा कि अभी जबकि कोविड काल में स्कूल बंद हैं, यह शिक्षक स्कूलों की ओर जरूर जाएं, वहां अभिभावकों से मिलें और बच्चों की मंडली से भेंट करें। उन्हें कुछ न कुछ नया अभिनव सिखाते रहें और जागरूक करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों को यह समझना होगा कि एक शिक्षक आजीवन शिक्षक ही होता है। उसकी सेवाओं को घण्टे में सीमित नहीं किया जा सकता। सीएम योगी ने शिक्षकों से पाठ्यक्रम के सरलीकरणए पाठ्य विधि को रोचक बनाने, नवाचारों को प्रोत्साहित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी नवनियुक्त शिक्षकों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की एक एक प्रति उपलब्ध कराई जाए।
बता दें किए इससे पहले प्रदेश सरकार द्वारा 16 अक्टूबर 2020 को 31,227 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे, जबकि विगत 23 अक्टूबर 2020 को माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 3,317 नवचयनित सहायक अध्यापकों को पदस्थापन एवं नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। प्रदेश सरकार द्वारा पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया को अपनाते हुए विभिन्न राजकीय सेवाओं में 04 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरियां दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा कार्यालयों की स्थिति में सुधार के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि कोविड काल के बाद जब स्कूल खुलें तब तक इन कार्यलयों का कायाकल्प हो। स्वच्छता रहे, ऊर्जावान माहौल रहे। सेवानिवृत्त शिक्षकों से मर्यादित व्यवहार हो और अगर कहीं से भ्रष्टाचार की शिकायत मिली तो कोई बख्शा नहीं जाएगा।
नियुक्ति पत्र वितरण के अवसर पर मुख्यमंत्री ने 05 नवनियुक्त शिक्षकों सीतापुर की पूजा शुक्ला, बाराबंकी के वीरेन्द्र कुमार मौर्य तथा श्री जफर बेग, रायबरेली की सरिता सिंह, हरदोई की नेहा देवी एवं लखीमपुर खीरी के नवीन राणा को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने 05 जनपदों के नवनियुक्त शिक्षकों बदायूं की भावना सिंह, गोण्डा की नमिता सिंह, रामपुर की क्षमा कपूर, हरदोई की ललिता त्रिपाठी एवं महोबा की राखी आर्य से बातचीत भी की।
राजनीति
दीपावली के बाद 9 नवंबर को तमिलनाडु में सरकारी छुट्टी घोषित, कोयंबेडु सब्जी मंडी भी रहेगी बंद

तमिलनाडु सरकार ने दीपावली के अगले दिन 9 नवंबर को सरकारी दफ्तरों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए छुट्टी घोषित की है, ताकि त्योहार के लिए अपने गृहनगर गए लोगों की वापसी आसान हो सके।
इस साल दीपावली 8 नवंबर (रविवार) को मनाई जा रही है। सोमवार को अतिरिक्त छुट्टी मिलने से छात्रों, माता-पिता, शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को परिवार के साथ जश्न मनाने के बाद लौटने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
सरकारी आदेश के अनुसार, यह छुट्टी पूरे तमिलनाडु में सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगी।
अतिरिक्त छुट्टी की भरपाई के लिए 28 नवंबर को कामकाजी दिन घोषित किया गया है। इस फैसले से आदेश के दायरे में आने वाले लोग रविवार को जश्न के तुरंत बाद यात्रा करने के बजाय सोमवार को अपनी वापसी की योजना बना सकेंगे।
एक साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए यह सरकारी कर्मचारियों और छात्रों की छुट्टी व्यवस्था को भी एक जैसा बनाता है। भरपाई वाला कामकाजी दिन शनिवार को पड़ रहा है। इसलिए घोषणा के दायरे में आने वाले कार्यालय और संस्थान संशोधित शेड्यूल का पालन करेंगे, जिसमें 9 नवंबर को छुट्टी होगी और महीने के अंत में निर्धारित भरपाई वाली तारीख को काम फिर से शुरू होगा।
इस बीच, चेन्नई की कोयंबेडु सब्जी मंडी त्योहार से पहले व्यापारी संघों द्वारा लिए गए अलग फैसले के बाद 9 नवंबर को एक दिन के लिए बंद रहेगी।
यह बंदी एकीकृत बाजार संघ महासंघ के अध्यक्ष जीटी राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई सलाहकार बैठक में सर्वसम्मति से मंजूर की गई। बैठक में तय किया गया कि दीपावली तक सभी सब्जियों की दुकानें खुली रहेंगी, ताकि ग्राहक और व्यापारी छुट्टी से पहले अपनी खरीदारी पूरी कर सकें। संघ ने कहा कि बाजार मंगलवार, 10 नवंबर से अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू करेगा।
यह बंदी सिर्फ दीपावली के अगले दिन सब्जी बाजार तक ही सीमित है। लोगों और व्यापारियों से कहा गया है कि वे सोमवार की बंदी को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरी खरीदारी पहले से ही कर लें।
मनोरंजन
जब धुन चोरी के आरोपों से घिरे थे अनु मलिक, कहा था- ‘ईश्वर के अलावा कोई ओरिजिनल नहीं’

यह कहानी है, हंगामाखेज संगीतकार की, जिन्होंने महज सात साल की उम्र में हुनर दिखाना शुरू कर दिया था। पता चल गया था कि आगे चलकर यह बालक एक बड़ा संगीतकार बनेगा। जिनका नाम है, अनवर मलिक और उन्हें अब सभी लोग अनु मलिक के नाम से जानते हैं।
2 नवंबर 1960 को जन्मे अनु मलिक के घर में संगीतमय माहौल रहता था, जिसका गहरा असर बचपन से ही उन पर रहा। उन पर शंकर-जयकिशन के गानों ने गहरा असर छोड़ा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं खुशनसीब हूं कि सरदार मलिक (संगीत निर्देशक) का बेटा हूं और मेरे मामा हसरत जयपुरी (जाने-माने गीतकार) हैं। मैं बचपन से उस माहौल में पला-बढ़ा हूं।”
जब अनु मलिक ने एक मराठी कविता को कंपोज किया था, जिसे बाद में अपने पिता सरदार मलिक को सुनाया तो वह हैरान थे। इसके बाद उन्होंने बेटे का इम्तिहान लिया और बहुत सारे अलग-अलग गाने उनके सामने रख दिए। अनु मलिक को उन गानों की धुन बनाने को कहा गया था। फिर अनु मलिक ने धुन बनाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक अलग-अलग धुन बना डाली। उन धुनों को सुनकर पिता बेहद खुश हुए और अनु मलिक को गले लगा लिया।
बहुत ही कम उम्र में अनु मलिक गानों को कंपोज करने लगे थे। मामा हसरत जयपुरी के लिखे गाने को जब उन्होंने कंपोज किया, तब उसे सुनकर सब दीवाने हो गए। 16-17 साल की उम्र में अनु मलिक को बतौर म्यूजिक कंपोजर काम करने का अवसर मिला। अपने जमाने के कमीडियन मोहन चोटी की 1978 में फिल्म ‘हंटरवाली 77’ आई, जिसमें पिता सरदार मलिक की जगह अनु मलिक को काम करने का मौका मिला।
“जुल्मों सितम पर इतराने वाले, तू भी तो इक दिन मिट जाएगा। तेरा जमाना है मैंने माना, मेरा भी एक दिन आ जाएगा।” इस गाने को मशहूर गायिका आशा भोसले ने गाया था, जिसे संगीत अनु मलिक ने दिया। यह उनका पहला गाना था। इस गाने के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे। एफसी मेहरा की फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से अनु मलिक को सही शुरुआत मिली और फिर एक फिल्म मिली ‘सोनी महिवाल’, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा।
फिल्म ‘बाजीगर’ में दिए गए संगीत ने अनु मलिक को नई पहचान दिलाई। फिर फिल्म ‘बॉर्डर’ में अनु मलिक के संगीतबद्ध सभी गाने हिट रहे। फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
शौहरत की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद अनु मलिक पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गानों की धुनें और संगीत संयोजन (अरेंजमेंट) चुराने के आरोप भी लगते रहे। 2017 में ‘एंटरटेनमेंट की रात’ शो के दौरान ‘रोडीज’ फेम रघु राम ने उनसे सीधे तौर पर धुनें चुराने के बारे में सवाल किया। इसके जवाब में मलिक ने अपना बचाव करते हुए कहा कि ‘ईश्वर के अलावा कोई भी मौलिक (ओरिजिनल) नहीं है’ और प्रेरणा लेना, चोरी करने से बिल्कुल अलग बात है। उन्होंने इस संदर्भ में ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘मैं हूं ना’ जैसी फिल्मों के अपने काम का उदाहरण दिया था।
राजनीति
पंजाब : विधायक हरमीत और चेतन का ‘आप’ से इस्तीफा, पार्टी बोली- ऐसे लोग ही भाजपा को चाहिए

पंजाब के पटियाला जिले की दो विधानसभा सीटों से आम आदमी पार्टी के विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पार्टी ने कहा है कि इन दोनों विधायकों को कार्रवाई के तहत निकाला गया है।
सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हरमीत सिंह पठानमाजरा पंजाब विधानसभा में सनौर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। वे 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे।
बताया जा रहा है कि उनकी अपनी ही सरकार ने विधायक पठानमाजरा के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के खिलाफ तीखे तेवर अपना लिए थे और अब इस्तीफा दे दिया है।
वहीं समाना से विधायक चेतन सिंह जोड़ामाजरा ने भी अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इसकी जानकारी दी। उन्होंने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में आई आम आदमी पार्टी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं था, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया है।
चेतन सिंह जोड़ामाजरा साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर समाना से भारी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद वे भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर पंजाब ‘आप’ प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने एक्स पोस्ट में लिखा, “आम आदमी पार्टी ने हमेशा पंजाब को प्राथमिकता दी है। अगर हमारे किसी नेता ने कभी भ्रष्टाचार किया या पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने की कोशिश की, तो हमने बिना किसी हिचकिचाहट के उनके खिलाफ कार्रवाई की और ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर निकाल दिया। अब, भाजपा इन्हीं निकाले गए लोगों को इकट्ठा कर रही है, क्योंकि उसका अपना कोई आधार नहीं है और उसे पंजाब के हितों की कोई परवाह नहीं है। जो व्यक्ति पंजाब पुलिस पर गोलियां चलाकर भाग गया हो, और जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दुष्कर्म के आरोप में जेल भेजा हो, वह पंजाब का क्या भला करेगा? लेकिन भाजपा को ठीक ऐसे ही लोग चाहिए। इससे साफ पता चलता है कि पंजाब में भाजपा पूरी तरह से खोखली है। उसके पास अपना कुछ भी नहीं है।”
आम आदमी पार्टी के महासचिव और मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने आज पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इन दोनों की हरकतों की वजह से पार्टी ने इन्हें पहले ही किनारे कर दिया था। अब ये दोनों उस भाजपा में शामिल होंगे जिसे पंजाब में उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे। भाजपा असल में ऐसे लोगों की पार्टी बन गई है जिन्हें कहीं और से निकाल दिया गया हो। यहां बस दूसरी पार्टियों से निकाले गए लोग ही जाते हैं।”
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