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Monday,02-November-2026
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चिदंबरम ने 6 लाख करोड़ रुपये के एनएमपी पर केंद्र से पूछे 20 सवाल

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को केंद्र की प्रस्तावित राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) पर 20 सवाल पूछे, जिसका मकसद कुछ संपत्तियों का ‘मुद्रीकरण’ करना और इस पर अगले चार साल तक 6 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करना है। यह कहते हुए कि सरकार को सवालों का जवाब देना चाहिए, उन्होंने एनएमपी के उद्देश्यों को जानने की मांग की और पूछा कि क्या यह केवल अगले चार वर्षों में राजस्व बढ़ाने का इरादा है।

पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान विनिवेश या निजीकरण किए जाने वाले सार्वजनिक उपक्रमों की पहचान करने के लिए अपनाए गए मानदंडों का उल्लेख करते हुए, चिदंबरम ने सवाल किया कि क्या वर्तमान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासन के साथ भी ऐसा ही है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में मीडिया को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

यह इंगित करते हुए कि सड़कों/राजमार्गों जैसी बुनियादी परियोजनाओं के लिए, एक पीपीपी नीति पहले से मौजूद है, उन्होंने पूछा कि इस (पीपीपी) मॉडल और एनएमपी के तहत केंद्र द्वारा अपनाए जाने वाले मॉडल के बीच आखिर क्या अंतर है।

चिदंबरम ने सवाल पूछा कि इसके अलावा, यदि कोई संपत्ति 30-50 वर्षों के लिए ‘मुद्रीकृत’ है, तो उस कागज के टुकड़े का क्या मूल्य है, जो सरकार को उस संपत्ति का मालिक घोषित करता है और सरकार को किस तरह की संपत्ति वापस की जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि चूंकि एनएमपी इस विषय पर चुप है, क्या सरकार अनुबंध में यह निर्धारित करेगी कि मूल्यह्रास की राशि को मूल्यह्रास आरक्षित खाते में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी जवाब मांगा कि क्या पट्टेदार द्वारा संपत्ति-स्ट्रिपिंग को रोकने के लिए अनुबंध में प्रावधान होगा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि मुद्रीकरण प्रक्रिया उस क्षेत्र में एकाधिकार या एकाधिकार नहीं बनाती है।

वित्त विशेषज्ञ ने पूछा कि क्या पट्टेदार मुद्रीकृत संपत्ति में रोजगार के मौजूदा स्तरों और आरक्षण की नीति, या अन्य नीतियों, क्षेत्रीय नियामकों के अधीन् आदि का प्रबंधन करेगा।

रेलवे को ‘रणनीतिक क्षेत्र’ के रूप में पहचाने जाने वाले यूपीए की ओर इशारा करते हुए उन्होंने पूछा कि केंद्र ने ‘कोर’ या ‘रणनीतिक’ के रूप में किन अन्य क्षेत्रों की पहचान की है, जिन्हें एनएमपी के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

चिदंबरम ने सवाल पूछा, “क्या सरकार ने संबंधित क्षेत्र/उद्योग में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर एनएमपी के कार्यान्वयन के प्रभाव की जांच की है? मुद्रीकृत संपत्ति के पट्टेदार द्वारा कीमतों में वृद्धि की स्थिति में सरकार या नियामक क्या करेंगे।”

चार वर्षों में 6,00,000 करोड़ रुपये के अनुमानित राजस्व के सरकार के रहस्योद्घाटन का उल्लेख करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या सरकार पहचान की गई संपत्ति में कुल पूंजी निवेश पर प्रकाश डालेगी, जिससे उपरोक्त राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

कांग्रेस नेता ने आगे सवाल पूछते हुए कहा, “पहचान की गई संपत्ति वर्तमान में हर साल एक निश्चित राजस्व अर्जित कर रही होगी। क्या सरकार ने चार वर्षों की अवधि में वर्तमान राजस्व (अघोषित) और अपेक्षित राजस्व (6,00,000 करोड़ रुपये) के बीच अंतर की गणना की है? यदि हां, तो चार साल की अवधि के दौरान प्रत्येक वर्ष दो राशियों के बीच का अंतर क्या है?”

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ने सत्ता में रहते हुए, घाटे में चल रही संपत्तियों का मुद्रीकरण किया, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार इसके उलट कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी सामरिक महत्व वाली संपत्तियों को नहीं बेचा।

चिदंबरम ने जोर देकर कहा, “हमने हमेशा सुनिश्चित किया कि किसी तरह का एकाधिकार नहीं होना चाहिए।” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के अनुसार, सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि छह लाख करोड़ रुपये के राजस्व का उपयोग 2021-22 के दौरान 5.5 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे के संदर्भ में आंशिक रूप से नहीं होगा।

उन्होंने सरकार से यह बताने का भी आग्रह किया कि एनएमपी के उद्देश्य क्या हैं और छह लाख करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र करने का मुख्य लक्ष्य क्या है ?

इसके अलावा, उन्होंने केंद्र से आश्वासन मांगा कि 6,00,000 करोड़ रुपये की अपेक्षित राशि को सामान्य राजस्व में विलय नहीं किया जाएगा या सामान्य व्यय के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या सरकार ने एनएमपी पर एक परामर्श पत्र जारी किया, श्रमिकों या ट्रेड यूनियनों सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श किया?

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एनएमपी पर संसद में चर्चा हुई थी, और यदि नहीं, तो क्या केंद्र विपक्षी दलों से परामर्श करने या संसद में बहस करने की योजना बना रहा है।

चिदंबरम ने पूछा, “क्या सरकार एनएमपी को लागू करते समय इसी तरह के उपायों को पेश करने का इरादा रखती है।”

इसके साथ ही कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा, “केंद्र इन सवालों के जवाब देने के लिए बाध्य है और मीडिया को सरकार से जवाब मांगना चाहिए।”

राजनीति

दीपावली के बाद 9 नवंबर को तमिलनाडु में सरकारी छुट्टी घोषित, कोयंबेडु सब्जी मंडी भी रहेगी बंद

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तमिलनाडु सरकार ने दीपावली के अगले दिन 9 नवंबर को सरकारी दफ्तरों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए छुट्टी घोषित की है, ताकि त्योहार के लिए अपने गृहनगर गए लोगों की वापसी आसान हो सके।

इस साल दीपावली 8 नवंबर (रविवार) को मनाई जा रही है। सोमवार को अतिरिक्त छुट्टी मिलने से छात्रों, माता-पिता, शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को परिवार के साथ जश्न मनाने के बाद लौटने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

सरकारी आदेश के अनुसार, यह छुट्टी पूरे तमिलनाडु में सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगी।

अतिरिक्त छुट्टी की भरपाई के लिए 28 नवंबर को कामकाजी दिन घोषित किया गया है। इस फैसले से आदेश के दायरे में आने वाले लोग रविवार को जश्न के तुरंत बाद यात्रा करने के बजाय सोमवार को अपनी वापसी की योजना बना सकेंगे।

एक साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए यह सरकारी कर्मचारियों और छात्रों की छुट्टी व्यवस्था को भी एक जैसा बनाता है। भरपाई वाला कामकाजी दिन शनिवार को पड़ रहा है। इसलिए घोषणा के दायरे में आने वाले कार्यालय और संस्थान संशोधित शेड्यूल का पालन करेंगे, जिसमें 9 नवंबर को छुट्टी होगी और महीने के अंत में निर्धारित भरपाई वाली तारीख को काम फिर से शुरू होगा।

इस बीच, चेन्नई की कोयंबेडु सब्जी मंडी त्योहार से पहले व्यापारी संघों द्वारा लिए गए अलग फैसले के बाद 9 नवंबर को एक दिन के लिए बंद रहेगी।

यह बंदी एकीकृत बाजार संघ महासंघ के अध्यक्ष जीटी राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई सलाहकार बैठक में सर्वसम्मति से मंजूर की गई। बैठक में तय किया गया कि दीपावली तक सभी सब्जियों की दुकानें खुली रहेंगी, ताकि ग्राहक और व्यापारी छुट्टी से पहले अपनी खरीदारी पूरी कर सकें। संघ ने कहा कि बाजार मंगलवार, 10 नवंबर से अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू करेगा।

यह बंदी सिर्फ दीपावली के अगले दिन सब्जी बाजार तक ही सीमित है। लोगों और व्यापारियों से कहा गया है कि वे सोमवार की बंदी को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरी खरीदारी पहले से ही कर लें।

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मनोरंजन

जब धुन चोरी के आरोपों से घिरे थे अनु मलिक, कहा था- ‘ईश्वर के अलावा कोई ओरिजिनल नहीं’

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यह कहानी है, हंगामाखेज संगीतकार की, जिन्होंने महज सात साल की उम्र में हुनर दिखाना शुरू कर दिया था। पता चल गया था कि आगे चलकर यह बालक एक बड़ा संगीतकार बनेगा। जिनका नाम है, अनवर मलिक और उन्हें अब सभी लोग अनु मलिक के नाम से जानते हैं।

2 नवंबर 1960 को जन्मे अनु मलिक के घर में संगीतमय माहौल रहता था, जिसका गहरा असर बचपन से ही उन पर रहा। उन पर शंकर-जयकिशन के गानों ने गहरा असर छोड़ा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं खुशनसीब हूं कि सरदार मलिक (संगीत निर्देशक) का बेटा हूं और मेरे मामा हसरत जयपुरी (जाने-माने गीतकार) हैं। मैं बचपन से उस माहौल में पला-बढ़ा हूं।”

जब अनु मलिक ने एक मराठी कविता को कंपोज किया था, जिसे बाद में अपने पिता सरदार मलिक को सुनाया तो वह हैरान थे। इसके बाद उन्होंने बेटे का इम्तिहान लिया और बहुत सारे अलग-अलग गाने उनके सामने रख दिए। अनु मलिक को उन गानों की धुन बनाने को कहा गया था। फिर अनु मलिक ने धुन बनाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक अलग-अलग धुन बना डाली। उन धुनों को सुनकर पिता बेहद खुश हुए और अनु मलिक को गले लगा लिया।

बहुत ही कम उम्र में अनु मलिक गानों को कंपोज करने लगे थे। मामा हसरत जयपुरी के लिखे गाने को जब उन्होंने कंपोज किया, तब उसे सुनकर सब दीवाने हो गए। 16-17 साल की उम्र में अनु मलिक को बतौर म्यूजिक कंपोजर काम करने का अवसर मिला। अपने जमाने के कमीडियन मोहन चोटी की 1978 में फिल्म ‘हंटरवाली 77’ आई, जिसमें पिता सरदार मलिक की जगह अनु मलिक को काम करने का मौका मिला।

“जुल्मों सितम पर इतराने वाले, तू भी तो इक दिन मिट जाएगा। तेरा जमाना है मैंने माना, मेरा भी एक दिन आ जाएगा।” इस गाने को मशहूर गायिका आशा भोसले ने गाया था, जिसे संगीत अनु मलिक ने दिया। यह उनका पहला गाना था। इस गाने के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे। एफसी मेहरा की फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से अनु मलिक को सही शुरुआत मिली और फिर एक फिल्म मिली ‘सोनी महिवाल’, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा।

फिल्म ‘बाजीगर’ में दिए गए संगीत ने अनु मलिक को नई पहचान दिलाई। फिर फिल्म ‘बॉर्डर’ में अनु मलिक के संगीतबद्ध सभी गाने हिट रहे। फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

शौहरत की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद अनु मलिक पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गानों की धुनें और संगीत संयोजन (अरेंजमेंट) चुराने के आरोप भी लगते रहे। 2017 में ‘एंटरटेनमेंट की रात’ शो के दौरान ‘रोडीज’ फेम रघु राम ने उनसे सीधे तौर पर धुनें चुराने के बारे में सवाल किया। इसके जवाब में मलिक ने अपना बचाव करते हुए कहा कि ‘ईश्वर के अलावा कोई भी मौलिक (ओरिजिनल) नहीं है’ और प्रेरणा लेना, चोरी करने से बिल्कुल अलग बात है। उन्होंने इस संदर्भ में ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘मैं हूं ना’ जैसी फिल्मों के अपने काम का उदाहरण दिया था।

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राजनीति

पंजाब : विधायक हरमीत और चेतन का ‘आप’ से इस्तीफा, पार्टी बोली- ऐसे लोग ही भाजपा को चाहिए

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पंजाब के पटियाला जिले की दो विधानसभा सीटों से आम आदमी पार्टी के विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पार्टी ने कहा है कि इन दोनों विधायकों को कार्रवाई के तहत निकाला गया है।

सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हरमीत सिंह पठानमाजरा पंजाब विधानसभा में सनौर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। वे 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे।

बताया जा रहा है कि उनकी अपनी ही सरकार ने विधायक पठानमाजरा के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के खिलाफ तीखे तेवर अपना लिए थे और अब इस्तीफा दे दिया है।

वहीं समाना से विधायक चेतन सिंह जोड़ामाजरा ने भी अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इसकी जानकारी दी। उन्होंने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में आई आम आदमी पार्टी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं था, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया है।

चेतन सिंह जोड़ामाजरा साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर समाना से भारी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद वे भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर पंजाब ‘आप’ प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने एक्स पोस्ट में लिखा, “आम आदमी पार्टी ने हमेशा पंजाब को प्राथमिकता दी है। अगर हमारे किसी नेता ने कभी भ्रष्टाचार किया या पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने की कोशिश की, तो हमने बिना किसी हिचकिचाहट के उनके खिलाफ कार्रवाई की और ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर निकाल दिया। अब, भाजपा इन्हीं निकाले गए लोगों को इकट्ठा कर रही है, क्योंकि उसका अपना कोई आधार नहीं है और उसे पंजाब के हितों की कोई परवाह नहीं है। जो व्यक्ति पंजाब पुलिस पर गोलियां चलाकर भाग गया हो, और जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दुष्कर्म के आरोप में जेल भेजा हो, वह पंजाब का क्या भला करेगा? लेकिन भाजपा को ठीक ऐसे ही लोग चाहिए। इससे साफ पता चलता है कि पंजाब में भाजपा पूरी तरह से खोखली है। उसके पास अपना कुछ भी नहीं है।”

आम आदमी पार्टी के महासचिव और मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने आज पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इन दोनों की हरकतों की वजह से पार्टी ने इन्हें पहले ही किनारे कर दिया था। अब ये दोनों उस भाजपा में शामिल होंगे जिसे पंजाब में उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे। भाजपा असल में ऐसे लोगों की पार्टी बन गई है जिन्हें कहीं और से निकाल दिया गया हो। यहां बस दूसरी पार्टियों से निकाले गए लोग ही जाते हैं।”

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