राजनीति
बीजेपी ने उठाई मांग, दिल्ली में ईमानदारी से लागू हो इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को ईमानदारी से लागू करने की मांग उठाई है। पार्टी ने केजरीवाल सरकार पर हवा हवाई दावे करने पर निशाना भी साधा है। पार्टी ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल सरकार सिर्फ वादे करना जानती है, जिम्मेदारी से काम करना नहीं। प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा, “इस कोरोना काल को देखते हुए ई-रिक्शा चालकों को सब्सिडी की राशि ब्याज सहित वापस करने की जरूरत है। लेकिन केजरीवाल सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। केजरीवाल सरकार सिर्फ घोषणा करना जानती है, जिम्मेदारी से काम करना नहीं।”
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “सिर्फ हवाई घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, केजरीवाल सरकार को इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को ईमानदारी से लागू करना होगा।”
प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मोदी सरकार की तारीफ की।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ठोस और दूरदर्शी निर्णयों के कारण आज दुनिया भर में भारत का वर्चस्व बना है। आज देश में चार लाख से अधिक पीपीई किट बनाए जाते हैं। आपदा को देशवासियों ने अवसर में बदल दिया।”
राष्ट्रीय समाचार
उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर हादसा, बंगाल के 5 ट्रैकर्स समेत 8 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड में ट्रैकिंग के दौरान हिमस्खलन और अचानक आए हिमपात में फंसने से पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पांच ट्रैकर्स समेत एक अभियान दल के आठ सदस्य लापता हो गए हैं। इस घटना के संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को जानकारी दी।
बांकुरा के लापता ट्रैकर्स की पहचान तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल, उदय घोष और मनोज खवास के रूप में हुई है। पहले चार सालबानी गांव के निवासी हैं, जबकि मनोज उसी जिले के केशरा गांव के रहने वाले हैं। अन्य तीन लापता सदस्यों में से दो उत्तर प्रदेश के लखनऊ से और एक उत्तराखंड के उत्तरकाशी से हैं।
बांकुरा के पांचों ट्रैकर्स 24 अक्टूबर को उत्तराखंड के लिए रवाना हुए थे और उन्हें नवंबर की शुरुआत में घर लौटना था।
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लापता ट्रैकर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है।
अधिकारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, “उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक के दौरान खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण लापता हुए बांकुरा के पांच युवा ट्रैकर्स के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है।”
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्थिति पर नजर रखने के लिए उत्तराखंड सरकार और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ लगातार संपर्क में है।
उन्होंने कहा, “नई दिल्ली स्थित हमारे रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन चैनलों के माध्यम से, हम अपने लड़कों को खोजने और बचाने के लिए चल रहे व्यापक खोज और बचाव अभियान पर नियमित रूप से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि बांकुरा जिले के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) और पुलिस अधीक्षक को घटनास्थल पर उत्तराखंड एसडीआरएफ, स्थानीय जिला अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने बांकुरा में पीड़ित परिवारों से संपर्क किया है और उन्हें हर संभव रसद और भावनात्मक सहायता प्रदान कर रहा है।
अधिकारी ने कहा, “हम परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपने युवाओं की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। हम उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना करते हैं।”
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चार शेरपाओं और एक सहायक सहित 12 सदस्यीय अभियान दल गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। दल ने निर्धारित दिन पर बेस कैंप से अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पहाड़ी इलाके में आगे बढ़ते समय दल के अधिकांश सदस्य अचानक आए हिमपात में फंस गए और लापता हो गए।
अभियान दल के चार सदस्य, जिनमें एक शेरपा और सहायक शामिल थे, अंततः 30 अक्टूबर को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने बाद में अधिकारियों को सूचित किया कि दल के शेष आठ सदस्य लापता हैं।
इस सूचना के बाद उत्तराखंड सरकार ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित एक हेलीकॉप्टर की सहायता से उत्तराखंड एसडीआरएफ की एक टीम पिछले दो दिनों से लापता पर्वतीय क्षेत्र में खोज कर रही है, हालांकि अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
उत्तराखंड सरकार ने कहा कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण बचाव अभियान में लगातार बाधा आ रही है। स्थानीय प्रशासन ने लापता पर्वतारोहियों के परिवारों से संपर्क कर उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।
बांकुरा के जिला मजिस्ट्रेट अनीश दासगुप्ता ने मंगलवार को बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने परिवारों से संपर्क किया और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि पर्वतों में पहुंचने के बाद से वे पर्वतारोहियों के साथ नियमित संपर्क में थे, हालांकि पिछले दो-तीन दिनों से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। लापता पर्वतारोहियों के मोबाइल भी बंद हैं, जिससे उनके परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
राजनीति
हिंदू-मुस्लिम करके देश को बांटना चाहती है भाजपा, दीया मिर्जा मामले में कोर्ट का फैसला सराहनीय : अबू आजमी

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा बीएमसी को फटकार लगाते हुए अभिनेत्री दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने के आदेश दिए जाने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस फैसले से साबित होता है कि देश में न्याय अभी भी जिंदा है।
अबू आजमी ने कहा, “जज साहब ने जो किया, मैं उन्हें सैल्यूट करता हूं। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को तुरंत वापस अपलोड करो। यह बहुत बड़ी बात है।”
उन्होंने कहा, “जब भी देश में कोई ऐसी चीज आए जो संविधान के खिलाफ हो, जहां जबरदस्ती गुंडागर्दी फैलाई जा रही हो, अगर अदालतें इसी तरह से सख्ती दिखाएंगी, तो इस देश में अराजकता फैला रहे भाजपा के लोगों का दिमाग सही हो जाएगा। भाजपा के लोग अपनी मनमानी कर रहे हैं, देश के संविधान को ठुकरा रहे हैं और सिर्फ हिंदू-मुस्लिम करके इस देश को बांटना चाहते हैं और सत्ता में बने रहना चाहते हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि मेयर रितु तावडे़ कह रही हैं कि दीया मिर्जा हिंदू विरोधी बात कर रही थीं, इसलिए उनका वीडियो हटाया गया, तो अबू आजमी ने मेयर पर ही सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने कहा, “मेयर से पूछिए, आप आज तक कहां थीं? इससे पहले तो आप बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस में थीं। भाजपा में अधिकतर लोग वही हैं, जो पहले कांग्रेस में रहकर भाजपा को गाली देते थे और अब उन्हीं के साथ काम कर रहे हैं।”
उन्होंने बीएमसी कमिश्नर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “क्या सारी सरकारी संस्थाएं और सारे गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन बीजेपी के हो गए हैं? उनके कहने पर आप लोगों ने वीडियो हटा दिया और अब जब कोर्ट कह रहा है तो आपको शर्म आ रही होगी कि हमने गलत काम किया। आप लोग संविधान के मुताबिक काम कीजिए, किसी सरकार के प्रभाव में काम करना संविधान के खिलाफ है।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चुनाव आयोग, एसआईआर और घुसपैठियों के मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की बात पर अबू आजमी ने कहा कि सरकार जनता के वोट की कीमत नहीं समझ रही है।
उन्होंने कहा, “जनता ने वोट देकर सरकार बनाई है। क्या अमित शाह जनता के वोटों की कोई कीमत नहीं समझते? किसी ने कहा था कि जब सड़क सुनसान हो जाएगी तो संसद आवारा हो जाएगी। अभी संसद आवारा हो गई है, अपनी मनमानी कर रही है। पहले सड़क सुनसान थी, अब सड़क भर गई है। पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर लोग आंदोलन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वोट चोरी से सरकार बनाई गई है। सरकार को उसे प्रूफ करना चाहिए और लोगों को संतुष्ट करना चाहिए। आप पार्लियामेंट में बुलाकर बात करेंगे और वहां वोटिंग करा देंगे, मेजॉरिटी है तो आपकी बात हो जाएगी, ऐसा नहीं चलता। 140 करोड़ जनता में से जो लोग सड़क पर उतरे हैं, जब तक वे संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा।”
ईडी द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई और करोड़ों की संपत्ति जब्त करने के मामले में अबू आजमी ने इसे सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा, “आजम खान कई सालों से जेल में हैं। अगर ईडी के पास कोई सबूत था तो वह जेल में जाकर उनसे स्टेटमेंट ले सकती थी और कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन जब-जब उनकी जमानत होती है, तब-तब एक नया केस लाया जाता है। अभी उनकी जमानत हुई है और फिर से कार्रवाई की जा रही है। यह सब सरकार के इशारे पर हो रहा है।”
अबू आजमी ने कहा कि आजम खान ने कोई पैसा नहीं कमाया है, उन्होंने लोगों से पैसे लेकर यूनिवर्सिटी बनाई है। आजम खान दस बार विधायक, मंत्री और सांसद रह चुके हैं और उनके साथ इस तरह का जुल्म किया जा रहा है। सरकार समझती है कि इस तरह की हरकतों से वह चुनाव जीत जाएगी, लेकिन अब जनता जाग चुकी है और उनकी यह नीति चलने वाली नहीं है।
अपराध
कर्नाटक: नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ईडी की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया है।
ईडी की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त से चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह केस तवरेकेरे पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
यह एफआईआर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस वालों की ओर से 18 अगस्त को सीके तांड्या गांव में एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर की गई जॉइंट सर्च और रेड से जुड़ी है, जहां आरोपी बिना वैलिड लाइसेंस, परमिट या ऑथराइजेशन के दवाएं और फार्मास्युटिकल ड्रग्स स्टोर करते हुए और स्टोर की गई दवाओं पर लेबल बदलते हुए पाए गए।
ईडी ने केस दर्ज किया और पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की। जांच से पता चला है कि आर. प्रशांत ने कथित तौर पर बिना ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं को बनाने, री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग के लिए बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। अलग-अलग राज्यों के मैन्युफैक्चरिंग सेंटरों से मंगाए गए सस्ते बल्क फॉर्मूलेशन को कथित तौर पर नई शीशियों में रीपैकेज किया गया और धोखे से महंगे फाइजर एंटीबायोटिक्स, जैसे कि जेविसेफ्टा, एम्ब्लेवो वगैरह के तौर पर रीलेबल किया गया।
शीशियों में जेनेरिक दवाएं थीं, लेकिन उन पर फाइजर-ब्रांडेड लेबल थे। ये दवाएं कथित तौर पर मेसर्स डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए बांटी गईं और मेसर्स कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई की गईं। इसके बाद मेसर्स कृपा हेल्थकेयर ने पता लगने से बचने के लिए असली दवाओं के साथ दूसरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों और अस्पतालों को भी सप्लाई कीं।
छापेमारी के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक अकाउंट में लगभग 9 लाख रुपए थे। उस अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, सर्च एक्शन के दौरान अलग-अलग लोगों के डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और गलत जानकारी देने वाले डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए। इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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