राजनीति
जयंती विशेष: गणेश घोष, एक क्रांतिकारी जिसने अपने जीवन के 27 साल जेल में बिताए
नई दिल्ली, 21 जून। गणेश घोष एक क्रांतिकारी और राजनेता थे। आजादी के बाद वे कई बार विधायक, सांसद रहे और देश के नीति निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई।
गणेश घोष का जन्म चटगांव में एक बंगाली कायस्थ परिवार में 22 जून 1900 को हुआ था। अब यह क्षेत्र बांग्लादेश में पड़ता है। विद्यार्थी जीवन में ही वे स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित हो गए थे। 1922 की गया कांग्रेस में जब बहिष्कार का प्रस्ताव स्वीकार हो गया तो गणेश घोष और उनके साथी अनंत सिंह ने नगर का सबसे बड़ा विद्यालय बंद करा दिया था। इन दोनों युवकों ने चिटगाँव की सबसे बड़ी मज़दूर हड़ताल की भी अगुवाई की।
1922 में उन्होंने कलकत्ता के बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया। वह चटगांव युगांतर पार्टी के सदस्य रहे। 18 अप्रैल 1930 को सूर्य सेन और अन्य क्रांतिकारियों के साथ चटगांव शस्त्रागार छापे में उन्होंने भाग लिया था। इस वजह से उन्हें चटगांव से भागना पड़ा। वह हुगली के चंदननगर में रहने लगे। कुछ ही दिन के बाद पुलिस कमिश्नर चार्ल्स टेगार्ट ने चंदननगर के उनके घर पर हमला कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उस गिरफ्तारी अभियान के समय पुलिस ने उनके एक युवा साथी क्रांतिकारी जीबन घोषाल उर्फ माखन को मार डाला था।
पुलिस ने गणेश घोष को गिरफ्तार करने के बाद उन पर मुकदमा किया और 1932 में पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल में भेज दिया। स्वतंत्रता के बाद भी उन्होंने अनेक आंदोलनों में भाग लिया और अपने जीवन के लगभग 27 वर्ष जेल में बिताए। 1964 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के बाद गणेश भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के साथ जुड़ गए। 1952, 1957 और 1962 में बेलगछिया से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए। 1967 में कलकत्ता दक्षिण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार के रूप में चौथी लोकसभा के लिए चुने गए। 1971 की लोकसभा में वे फिर से कलकत्ता दक्षिण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार थे। इस बार उन्हें एक युवा नेता के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
यह युवा नेता कोई और नहीं, प्रिय रंजन दास मुंशी थे। सिर्फ 26 साल की उम्र में दास ने गणेश घोष को हराया था। गणेश घोष की मृत्यु 16 अक्टूबर, 1994 को कोलकाता में हुई थी।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के बाद एमपीएससी का बड़ा फैसला, एफडीए ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने इस भर्ती से जुड़ा विज्ञापन भी वापस ले लिया है और अब इस पद के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। आयोग की ओर से इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति भी जारी कर दी गई है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से अभ्यर्थी इस परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप लगा रहे थे। उम्मीदवारों का कहना था कि कुछ लोगों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध हो गया था। इन शिकायतों के बाद एमपीएससी ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कराई।
जानकारी के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-बी भर्ती के लिए एमपीएससी ने 29 जुलाई 2025 को विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद मार्च 2026 में स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा महाराष्ट्र के छह विभागीय मुख्यालयों में बनाए गए केंद्रों पर ऑफलाइन मोड में हुई थी।
परीक्षा के बाद कई अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी की शिकायत की। आयोग को जुलाई 2026 में ईमेल के माध्यम से कई शिकायतें मिलीं। आरोप था कि कुछ उम्मीदवारों को पहले ही प्रश्नपत्र मिल गया था। इसके बाद एमपीएससी ने 27 जुलाई 2026 को मुंबई पुलिस आयुक्त के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच में यह संकेत मिले कि किसी उम्मीदवार के पास परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचा था। इस रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया।
एमपीएससी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर देने के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। नई परीक्षा की तारीख और प्रक्रिया को लेकर आयोग जल्द ही आधिकारिक नोटिस जारी करेगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जापान दौरे पर पीयूष गोयल ने दिग्गज निवेशकों से भारत में निवेश बढ़ाने पर चर्चा की

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि उन्होंने जापान के शीर्ष कारोबारी और वित्तीय लीडर्स के साथ हुई चर्चाओं के दौरान व्यापार, मोबिलिटी, औद्योगिक, बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में भारत में निवेश बढ़ाने और मौजूद कारोबारी अवसरों के बारे में बताया।
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि जापान यात्रा के तीसरे दिन गोयल ने टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (एसएमबीसी) ग्रुप, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (एमयूएफजी) और निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।
टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और सीईओ तोशिमित्सु इमाई के साथ बैठक में गोयल ने भारत में व्यापार, मोबिलिटी और औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनी की भागीदारी बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चर्चा में भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता का लाभ उठाने और देश की भूमिका को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री एसएमबीसी ग्रुप के डिप्टी प्रेसिडेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर योशिहिरो हयाकुतोमे से मुलाकात की और बैंकिंग क्षेत्र में अधिक निवेश एवं सहयोग सहित भारत-जापान वित्तीय संबंधों को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।
गोयल ने एमयूएफजी के डिप्टी चेयरमैन यासुशी इतागाकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैंकिंग, वाणिज्यिक वित्त और निवेश के क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा की।
मंत्री ने ‘एक्स’ पर कहा, “भारत का गतिशील वित्तीय क्षेत्र जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ गहरी साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।”
इसके अतिरिक्त, निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और ग्लोबल बिजनेस प्रमुख मिनोरू किमुरा के साथ बैठक में गोयल ने बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
गोयल ने कहा कि भारत के तेजी से विस्तार कर रहे बीमा बाजार में अधिक सहयोग की महत्वपूर्ण संभावनाएं मौजूद हैं।
जापानी कंपनियों के साथ ये चर्चाएं ऐसे समय में हुई हैं जब भारत जापान के साथ आर्थिक और निवेश संबंधों को और मजबूत करने और भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में जापानी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की अधिक भागीदारी आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
ऑपरेशन सिंदूर में किराना हिल्स पर टकराया हो सकता है युद्धक ड्रोन: पूर्व सीडीएस जनरल चौहान

भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन (युद्धक ड्रोन) संभवत पाकिस्तान के किरना हिल्स इलाके से टकराया हो सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बलों ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था।
गौरतलब है कि किराना हिल्स पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के परमाणु ढांचे से जुड़ा महत्वपूर्ण इलाका माना जाता है। जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की परिस्थितियों पर आयोजित ‘विमर्श’ कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने ऑपरेशन के दौरान किराना हिल्स को लेकर सामने आई रिपोर्टों और घटनाक्रम पर विस्तार से बात की तथा बताया कि भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन के उस इलाके तक पहुंचने की संभावित वजह क्या हो सकती है।
जनरल चौहान के मुताबिक, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सरगोधा इलाके और उसके आसपास मौजूद रडारों की तलाश तथा उन्हें निशाना बनाने के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। इनमें से एक लोइटरिंग म्यूनिशन को इजरायल में डिजाइन किए गए हारोप ड्रोन के रूप में बताया गया है। उन्होंने बताया कि यह म्यूनिशन अपने निर्धारित इलाके में लक्ष्य की तलाश कर रहा था, लेकिन उसे लक्ष्य नहीं मिला और किराना हिल्स के आसपास संचालन के दौरान उसका ईंधन खत्म हो गया। ऐसी स्थिति में उसके संभवतः किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराने की संभावना है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के तत्कालीन महानिदेशक वायु अभियान, सेवानिवृत्त एयर मार्शल ए.के. भारती ने भी स्पष्ट किया था कि भारतीय सशस्त्र बलों ने किराना हिल्स में मौजूद परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया था। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा था, “हमें यह बताने के लिए धन्यवाद कि किराना हिल्स में कोई न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन है। हमें इसके बारे में पता नहीं था। और हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया है, चाहे वहाँ कुछ भी हो।”
जनरल चौहान ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमले शुरू होने से पहले भारतीय बलों ने सरगोधा और किराना हिल्स की दिशा में बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। उन्होंने कहा, “उन हमलों से पहले, हमने सरगोधा और किराना हिल्स (जो सरगोधा से 10 किमी उत्तर में है) की तरफ बहुत से ‘लोइटर एम्युनिशन’ भेजे थे। ये ‘लोइटर एम्युनिशन’ सरगोधा और उसके आस-पास मौजूद रडार की तलाश कर रहे थे, और इनकी एक निश्चित समय-सीमा (लाइफटाइम) होती है।”
लोइटरिंग म्यूनिशन की कार्यप्रणाली समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह हथियार किसी निर्धारित इलाके में कुछ समय तक घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश कर सकता है। यदि उसे लक्ष्य नहीं मिलता है तो उसकी निर्धारित संचालन अवधि पूरी होने के बाद वह नीचे गिर सकता है। जनरल चौहान ने कहा, “यह लगभग दो घंटे तक हवा में मंडराता रहेगा और अगर इसे कोई टारगेट नहीं मिला, तो यह कहीं न कहीं जाकर टकरा जाएगा। यह उन्हीं पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया होगा।”
इस तरह जनरल चौहान के बयान से किराना हिल्स को लेकर सामने आई अटकलों को एक संभावित स्पष्टीकरण मिला है। उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि किराना हिल्स भारतीय सैन्य अभियान का जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं था। कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित स्कर्दू पर हमला करने की मंजूरी दी गई थी। हालांकि, खराब मौसम के कारण स्कर्दू में प्रस्तावित कार्रवाई को बाद में रद्द करना पड़ा और मिशन का रुख भोलारी की ओर कर दिया गया।
जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख ने उनसे सरगोधा पर हमला करने को लेकर पूछा था। इसकी अनुमति दी गई थी साथ ही दो और लक्ष्यों की पहचान करने को कहा था। इनमें से एक लक्ष्य स्कर्दू था। जनरल चौहान के अनुसार, स्कर्दू क्षेत्र में मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं रहने के कारण वहां नियोजित अभियान को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने मिशन को भोलारी की ओर मोड़ दिया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई को भारतीय वायुसेना द्वारा भोलारी में किए गए हमले का दृश्य बाद में पूरे अभियान के सबसे प्रमुख दृश्यों में शामिल रहा। इस हमले में भोलारी स्थित वायुसेना के एक हैंगर को निशाना बनाया गया था। यह अभियान भारतीय वायुसेना की गांधीनगर स्थित दक्षिण पश्चिमी वायु कमान द्वारा संचालित हवाई अभियान का हिस्सा था।
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान के ताजा बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य अभियानों में लक्ष्यों का चयन, लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल और मौसम जैसी परिचालन परिस्थितियों के आधार पर योजनाओं में बदलाव किस तरह किया गया। किराना हिल्स के मामले में उन्होंने साफ किया कि वहां किसी परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की कोई पूर्व नियोजित कार्रवाई नहीं थी।
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