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Wednesday,16-September-2026
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बिहार चुनाव: प्रतिष्ठा की जंग लड़ रहे मांझी और चौधरी

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Jitan-Ram-Manjhi

बिहार विधानसभा चुनाव में गया जिले के नक्सल प्रभावित इमामगंज विधानसभा क्षेत्र की लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है। इस क्षेत्र की लड़ाई मुख्यत: दो दिग्गजों — पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी तथा पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी के बीच प्रतिष्ठा बचाने के रूप में देखी जा रही है।

इमामगंज की सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने जहां मांझी को उम्मीदवार बनाया है वहीं महागठबंधन ने राजद के कद्दावर महादलित नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। इधर, लोकजनशक्ति पार्टी ने पूर्व विधायक रामस्वरूप पासवान की बहू (पतोहू) शोभा देवी को चुनाव मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

पिछले चुनाव में मांझी ने चौधरी को 29 हजार से अधिक मतों से पराजित कर उनके विजयरथ को रोक दिया था। चौैधरी इस चुनाव में मांझी से अपने पुराने हिसाब को बराबर करना चाहते हंै।

चैधरी के करीबी रिश्ते मांझी के मुकाबले उनके सामाजिक समीकरण को भारी बनाते हैं।

सड़क के किनारे ठेला लगाकर चना बेच रहे 50 वर्षीय रामकेवट कहते हैं, यहां कोई भी चुनाव लड़ने आ जाए परंतु हमलोग उदय नारायण चौधरी को ही वोट देंगे। वे लोगों के सुख-दुख मंे शामिल होते रहते हैं।

पिछले चुनाव में चौधरी को भले ही हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन वे इमामगंज सीट से पांच बार चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं। वर्ष 1990 में जनता दल, वर्ष 2000 में समता पार्टी और फरवरी 2005, अक्टूबर-नवंबर 2005 और 2010 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

करीब 2.50 लाख मतदाताओं की संख्या वाले इमामगंज विधानसभा क्षेत्र में मतों की बहुलता की ²ष्टि से महादलित वोट सबसे अधिक है, इसके बाद अतिपिछड़ा व पिछड़ी जातियों के वोट हैं। अगड़ी जातियों का वोट यहां काफी कम है।

बांकेबाजार में रहने वाले युवा संतोष कुमार कहते हैं कि राजनीति की दिशा अब बदल गई है। उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल की बात करने वाली पार्टियों को रोजगार की भी बात करनी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा बेहतर कर ही देंगे, तो लोग रोजगार कहां से पाएंगें। उन्होंने कहा कि आखिर बिहार में विकास कहां है?

इधर, गया के एक स्कूल से सेवानिवृत्त होकर डुमरिया के रहने वाले शिक्षक उदयभान सिंह कहते हैं कि सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां हजारों एकड़ भूमि बेकार पड़ी रहती है। सही मायने में प्राइमरी से लेकर इंटर तक के सरकारी स्कूलों की दशा भी खराब है। दूसरी समस्या सड़क और रास्तों की है। पीने का पानी भी इस क्षेत्र की समस्या है।

गया के वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल कादिर कहते हैं कि मांझी के लिए सभी बड़ी समस्या लोजपा प्रत्याशी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लोजपा प्रत्याशाी शोभा देवी के चुनावी मैदान में उतर जाने से मुकाबला रोचक हो गया है। मांझी का दांगी व कुशवाहा जैसी जातियों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं और मांझी मतदाताओं की संख्या भी 50 हजार से अधिक है, जो उनके पक्ष में है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि मांझी से लोगों की शिकायत भी है।

वे स्पष्ट कहते हैं, इस चुनाव में इमामगंज की सीट हॉट सीट है और चौधरी और मांझी में सीधी टक्कर है, लेकिन लोजपा प्रत्याशी इसे त्रिकोणात्मक बनाने में जुटी है। अगर संघर्ष त्रिकोणात्मक हुआ तो मांझी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बहरहाल, इमामागंज में पहले चरण के तहत 28 अक्टूबर को मतदान होना है। बिहार में 243 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होना है।

राष्ट्रीय समाचार

पश्चिम बंगाल में बनेंगे चार नए रीजनल एयरपोर्ट, 23 सितंबर को साइन होगा एमओयू

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पश्चिम बंगाल में एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए राज्य में चार और रीजनल एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। इसके लिए अगले हफ्ते केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होगा।

यह एमओयू साइनिंग प्रोग्राम 23 सितंबर को राज्य सचिवालय नबन्ना के मुख्य सभागार नबन्ना सभागार में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मौजूद रहेंगे। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

प्रस्तावित चार रीजनल एयरपोर्ट पुरुलिया जिले के छर्रा, दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट, अलीपुरद्वार के हासीमारा और पश्चिम मिदनापुर के कलाईकुंडा में बनेंगे। इनमें हासीमारा और कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण बेस भी हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “राज्य सरकार इन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन, बिजली, पानी और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। केंद्र सरकार एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का विकास करेगी और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया एयर ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभालेगी।”

इस मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू, पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह, मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन और संबंधित जिलों के सांसद व विधायक भी मौजूद रहेंगे।

यह एमओयू केंद्र सरकार की संशोधित ‘उड़ान 6.0’ योजना के तहत साइन किया जाएगा। बता दें कि मॉडिफाइड उड़ान योजना भारत की रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम का अगला चरण है।

अधिकारी के अनुसार, इस एमओयू के साइन होने से पुरुलिया, दक्षिण दिनाजपुर, अलीपुरद्वार और पश्चिम मिदनापुर में हवाई संपर्क के बुनियादी ढांचे और रीजनल हवाई सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

केंद्र की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत समझौते के अनुसार राज्य सरकार जरूरी जमीन, संपर्क सड़कें, बिजली आपूर्ति, पानी की आपूर्ति और बुनियादी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी, जबकि केंद्र सरकार एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा तैयार करेगी।

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महाराष्ट्र

मेरा शरीर अब साथ नहीं दे रहा, बिगड़ती सेहत के बीच जरांगे पाटिल ने मुंबई मार्च रद्द करने का दिया संकेत

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मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के बीड जिले के पटोडा में रात 2:00 बजे एक बड़ी सभा को संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक शारीरिक थकान के कारण उन्हें मुंबई की ओर अपनी आगे की यात्रा रद्द करनी पड़ सकती है।

अपनी भूख हड़ताल के 18वें दिन जरांगे पाटिल ने कहा कि अगर समर्थक उनके पीछे गाड़ियों का काफिला लेकर चलते रहे, तो वह अपनी यात्रा रोक देंगे और या तो स्थानीय स्तर पर धरना शुरू करेंगे या अंतरवाली सराटी लौट जाएंगे।

रात करीब 1:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बावजूद मराठा समुदाय के हजारों लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, उनकी बात सुनने के लिए पूरी रात इंतजार करते रहे।

भीड़ को संबोधित करते हुए शारीरिक रूप से काफी कमजोर दिख रहे जरांगे पाटिल ने कहा कि 12 सितंबर को आईवी फ्लूइड (नसों के जरिए दी जाने वाली दवा/तरल पदार्थ) लेना बंद करने के बाद से वह बमुश्किल अपने हाथ-पैर हिला पा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “अपने समुदाय के बच्चों के लिए लड़ने का असर मेरे शरीर पर पड़ा है, लेकिन मैंने आप लोगों के लिए सरकार से टक्कर ली है। सरकार चाहती है कि मैं घुटने टेक दूं, लेकिन क्या मुझे अपनी मांग छोड़ देनी चाहिए? मेरा समुदाय किसी भी सरकार से बड़ा है – यह मेरे पिता के समान है। मेरे समुदाय में किसी भी सरकार को गिराने और नई सरकार बनाने की ताकत है।”

जरांगे पाटिल ने आंदोलन की प्रगति के बारे में बताया कि 58 लाख पुराने रिकॉर्ड (नोंदी) मिल गए हैं, जिससे लगभग 2.5 करोड़ समुदाय के लोगों के लिए आरक्षण का लाभ पाने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी मुख्य मकसद सरकारी गजट हासिल करना है।

उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी सीधा हमला किया और दावा किया कि उन्होंने हर कदम पर राजनीतिक चालों का मुकाबला किया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज पेन ड्राइव में सुरक्षित रख लिए गए हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस पर “उनकी जान लेने की साजिश रचने” का आरोप भी लगाया। पश्चिमी महाराष्ट्र में फलों के बागों के मालिकों से जुड़े तर्क का जवाब देते हुए उन्होंने सवाल किया, “सरकार का कहना है कि पश्चिमी महाराष्ट्र में फलों के बाग है लेकिन क्या ओबीसी समुदायों के पास बाग नहीं हैं? फिर उन्हें आरक्षण क्यों मिलता है?”

जरांगे पाटिल ने कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान रैली या दौरा करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे पटोडा से उनकी गाड़ी के पीछे न आएं बल्कि सीधे खोपोली में मिलें, वरना वे या तो अंतरवाली लौट जाएंगे या बीड जिले के पटोडा में ही अपनी भूख हड़ताल फिर से शुरू कर देंगे।

अपने परिवार के लिए एक संदेश में जरांगे पाटिल ने कहा, “मैंने अपने परिवार से आत्मसम्मान के साथ जीने को कहा है। मैंने अपने बेटे से कहा है कि अगर मैं समाज के लिए अपनी जान दे दूं, तो वह हिम्मत के साथ आगे आए। भले ही इस मकसद के लिए एक जान चली जाए, लेकिन हमारी जाति की गरिमा कभी कम नहीं होनी चाहिए।”

पुलिस से सीधे बात करने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकी शारीरिक हालत ठीक रही, तो वे पटोडा से सीधे मुंबई जाना पसंद करेंगे, न कि लोगों के बड़े हुजूम के साथ।

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राष्ट्रीय समाचार

यूपीआई में एमडीआर आने से इंडस्ट्री को 20,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है फायदा: ब्रोकरेज

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यूपीआई भुगतान में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लागू करने से बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए आय के नए स्रोत खुल जाएंगे और इससे पूरी इंडस्ट्री का रेवेन्यू पूल 10,000 करोड़ रुपए से 20,600 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यह जानकारी ब्रोकरेज फर्मों की ओर से दी गई।

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) का संचालन करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 2,000 रुपए से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पीटूएम) यूपीआई के लिए 0.4 प्रतिशत का एमडीआर 15 अक्टूबर से लगाने का ऐलान किया है। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है। इसका भुगतान मर्चेंट करेगा, न कि ग्राहक।

यूबीएस का अनुमान है कि बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए सालाना रेवेन्यू पूल 10,000–15,000 करोड़ रुपए का होगा। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बैंक इसमें से लगभग 60–70 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखेंगे, जबकि बाकी हिस्सा भुगतान कंपनियों को मिलेगा। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि फिनटेक कंपनियों की कमाई पर इसका असर ज्यादा होगा।

गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि इंडस्ट्री का संभावित रेवेन्यू पूल 20,600 करोड़ रुपए का हो सकता है। यह अनुमान इस कैलकुलेशन पर आधारित है कि कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग आधा हिस्सा पूरे 40 आधार अंक एमडीआर के दायरे में आ सकता है। जेपी मॉर्गन के अनुसार, अधिकतम रेवेन्यू पूल लगभग 17,000 करोड़ रुपए का हो सकता है, जिसमें इश्यूइंग और एक्वायरिंग बैंकों के लिए लगभग 11,700 करोड़ रुपए शामिल हैं। यह रकम लिस्टेड कमर्शियल बैंकों के वित्त वर्ष 26 के शुद्ध मुनाफे का 2.1 प्रतिशत है।

सिटी का अनुमान है कि सालाना इंडस्ट्री रेवेन्यू पूल 16,000-17,000 करोड़ रुपए का होगा, जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत बैंकों को, 25 प्रतिशत यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को और 15 प्रतिशत नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिलेगा।

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