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Wednesday,18-March-2026
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बांग्लादेश : 9 महीनों में 975 महिलाओं के साथ दुष्कर्म

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बांग्लादेश के नोआखली जिले में हाल ही में हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देश में महिलाओं के खिलाफ क्रूर अत्याचार और अपराध को उजागर किया है।

मानव अधिकार निकाय ऐन ओ सलिश केंद्र (एएसके) ने कहा है कि बांग्लादेश में इस साल जनवरी से 30 सितंबर तक कम से कम 975 महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया, जिनमें से 208 सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुईं।

इन पीड़िताओं में से 45 की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई और 12 अन्य ने खुदकुशी कर ली। इसके अलावा, 161 महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का सामना किया और उनमें से 12 ने उसी अवधि के दौरान आत्महत्या कर ली।

नोआखली में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार महिला के साथ पूर्व में भी बंदूक की नोंक पर मुख्य अरोपी दिलवर हुसैन द्वारा कई बार दुष्कर्म किया गया था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोमवार को महिला से मुलाकात की, जिसके बाद यह पता चला।

एनएचआरसी में जांच के निदेशक अल महमूद फैजुल कबीर ने कहा, “जब भी महिला ने विरोध किया, तो उसे ‘दिलवर बाहिनी’ की पूरी टीम ने सामूहिक दुष्कर्म की धमकी दी।”

एएसके के अनुसार, यौन उत्पीड़न के विरोध के लिए तीन महिलाओं और नौ पुरुषों की हत्या की गई। इसके अलावा, 627 बच्चों के साथ दुष्कर्म किया गया और 20 लड़कों के साथ छेड़छाड़ हुई, जबकि 21 महिलाएं एसिड हमलों का शिकार हुईं।

ऐन ओ सलिश केंद्र की पूर्व कार्यकारी निदेशक सलीश केंद्र, शिपा हफीजा ने आईएएनएस को बताया, “महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और हिंसा धीरे-धीरे बढ़ रही है जो मुख्य रूप से सजा से छूट जाने की संस्कृति और इसे नियंत्रित करने के लिए राज्य की उदासीनता के कारण बढ़ी है।”

उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों की संख्या में वृद्धि हुई है क्योंकि अपराधियों को यह मालूम है कि वे सजा से बच जाएंगे।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि देश दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न को एक गंभीर अपराध के रूप में नहीं मान रहा है। राजनेता अभी भी यह नहीं कह रहे हैं कि वे इस तरह की क्रूरता पर शर्मिदा हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाने को लेकर आश्वस्त नहीं कर रहे हैं। दुष्कर्मियों को 150 साल पुराने कानून के तहत उचित सजा नहीं दी जा रही।”

उन्होंने आगे कहा कि कानून में संशोधन किया जाना चाहिए और इसे ठीक से लागू करना चाहिए।

एनएचआरसी के प्रतिनिधि ने आईएएनएस को बताया कि कुख्यात दिलवर ने न केवल एक साल तक महिला का यौन शोषण किया, बल्कि यह भी महसूस किया कि महिला का शरीर उसकी निजी संपत्ति है।

बेगमगंज मॉडल थाना के प्रभारी अधिकारी हरुनूर रशीद चौधरी ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि पीड़िता के साथ आरोपी द्वारा बार-बार दुष्कर्म किया गया।

उन्होंने कहा, “वीडियो फुटेज वायरल होने के बाद, उसने न तो मुझे बताया और न ही सोमवार को मजिस्ट्रेट को बताया। मुझे यह तभी पता चला जब एनएचआरसी ने मुझे बताया।”

आरएबी-11के कमांडिंग ऑफिसर सैफुल आलम ने कहा, “दिलवर ने बंदूक की नोंक पर उसके साथ ऐसा किया जो गलत है। उसके खिलाफ हत्या के दो मौजूदा आरोप हैं। उसे आगे की पूछताछ के लिए शिधिरगंज पुलिस थाने में ट्रांसफर किया जाएगा, जबकि उसके साथी बादल को बेगमगंज पुलिस स्टेशन भेजा जाएगा।”

इस बीच, हाईकोर्ट द्वारा बांग्लादेश टेलीकॉम रेगुलेटरी कमीशन (बीटीआरसी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने के 24 घंटे बाद भी कि वीडियो को वेबसाइटों और सोशल मीडिया से हटा दिया जाए, वीडियो अभी भी सर्च करने पर सहजता से उपलब्ध है।

न सिर्फ पीड़िता बल्कि उसके परिवार के सदस्य भी गांव से दूर छिपते फिर रहे हैं। उसके पिता इलाके में चाय की दुकान चलाते है, लेकिन उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ी है।

सिलहट शहर के शमीमाबाद इलाके में एक गृहिणी के साथ दुष्कर्म के आरोप में जाटिया श्रमिक लीग के एक नेता और एक अन्य व्यक्ति को सोमवार तड़के गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों की पहचान 40 वर्षीय दिलवर और 35 वर्षीय हारून मिया उर्फ चक्कू हारुन के रूप में हुई।

कोतवाली पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर रेजाउल करीम ने कहा कि दिलवर और उसके दो साथी रविवार को पीड़िता के घर गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने सोमवार सुबह कोतवाली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया।

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मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज को बम से उड़ाने की मिली धमकी

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मुंबई, 17 मार्च : मुंबई के विभिन्न स्थानों पर बम रखने की धमकी मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन किसी न किसी संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी मिल रही है। इसी कड़ी में अब मुंबई के माहिम स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी मिलने के बाद प्रशासन ने कॉलेज को खाली करवा दिया।

मुंबई पुलिस के मुताबिक, सेंट जेवियर्स कॉलेज के बाथरूम में सोमवार को बम विस्फोट की धमकी भरा एक पत्र मिला। इसके बाद प्रधानाचार्य ने मुख्य नियंत्रण कक्ष को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचकर परिसर में तुरंत तलाशी अभियान चलाया। हालांकि अभी तक कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है। पुलिस गुमनाम पत्र की जांच कर रही है। पुलिस का मानना ​​है कि यह मुख्य रूप से एक झूठी धमकी है। मुंबई पुलिस उचित कार्रवाई कर रही है और मामले की जांच कर रही है।

गौरतलब है कि 12 मार्च को भी मुंबई मेट्रो, बीएसई, हाईकोर्ट और विधानभवन को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। ईमेल के जरिए अलग-अलग ठिकानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। विधानभवन को भेजे गए ईमेल में लिखा गया था, “विधान भवन में बम रखा गया है।” इसके बाद, सुरक्षा के मद्देनजर, पूरा विधानसभा परिसर खाली करा दिया गया और पत्रकारों और कर्मचारियों को बाहर भेज दिया गया था। बम स्क्वॉड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन किसी भी तरह की विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। मुंबई मेट्रो और बैंकों को भी धमकी भरे ईमेल मिले थे।

महाराष्ट्र विधान परिषद के चेयरमैन राम शिंदे ने उस समय कहा था कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) को सुबह 6.57 बजे एक ईमेल भेजा गया था। बजट सत्र चल रहा है, इसलिए ईमेल में खासतौर पर बम का इस्तेमाल करके हमले की धमकी दी गई थी। धमकी में मुंबई में चार हाई-प्रोफाइल टारगेट की पहचान की गई थी, जिनमें विधानभवन, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई), बॉम्बे हाईकोर्ट और मुंबई मेट्रो शामिल हैं।”

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मुंबई : एयर इंडिया के 4,000 से अधिक कर्मचारियों पर जुर्माना… एयरलाइन ने कर्मचारी यात्रा नीति के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पता लगाया

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मुंबई : एयर इंडिया ने अपनी ‘एम्प्लॉई लेज़र ट्रैवल’ (ईएलटी) पॉलिसी के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ पकड़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक, 4,000 से ज़्यादा कर्मचारियों पर इस सुविधा का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है, जिसके बाद एयरलाइन ने सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इन कदमों में आर्थिक जुर्माना लगाना और गलत तरीके से ली गई सुविधाओं की वसूली करना शामिल है। ये गड़बड़ियाँ एयरलाइन द्वारा की गई एक विस्तृत आंतरिक जाँच के बाद सामने आईं। इस मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जाँच में यह पता चला कि कर्मचारियों ने ईएलटी सुविधा का इस्तेमाल करने के तरीके में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ की थीं।

‘एम्प्लॉई लेज़र ट्रैवल’ पॉलिसी के तहत, एयर इंडिया के कर्मचारियों को हर साल कुछ शर्तों के अधीन, अपने और अपने परिवार के सदस्यों (जैसे जीवनसाथी और माता-पिता) के लिए एक तय संख्या में मुफ़्त हवाई टिकट लेने की सुविधा मिलती है। हालाँकि, जाँच में कथित तौर पर यह पाया गया कि कई कर्मचारियों ने इस पॉलिसी के तहत मुफ़्त टिकट पाने के लिए, ऐसे लोगों को भी अपने परिवार का सदस्य बता दिया जिनसे उनका कोई संबंध नहीं था। कुछ मामलों में, कर्मचारियों ने कथित तौर पर इस सुविधा का इस्तेमाल करके टिकट बुक किए और फिर उन्हें दूसरों को ज़्यादा कीमतों पर बेच दिया, जिससे उन्हें आर्थिक फ़ायदा हुआ। ये उल्लंघन पिछले वित्तीय वर्ष के हैं। हालाँकि, इस दुरुपयोग का सटीक वित्तीय प्रभाव और वह निश्चित समय-सीमा, जिसके दौरान ये अनियमितताएँ हुईं, तत्काल पता नहीं लगाया जा सका।

सुधारात्मक उपायों के तहत, एयर इंडिया ने उन कर्मचारियों को निर्देश दिया है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ उठाया था, वे धोखाधड़ी वाले दावों के ज़रिए प्राप्त राशि वापस करें। पैसे की वसूली के अलावा, एयरलाइन ने उन कई कर्मचारियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है, जिन्होंने पाया गया कि उन्होंने पॉलिसी का उल्लंघन किया है।

एयर इंडिया, जिसमें 24,000 से ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं, को जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप ने खरीद लिया था। यह एयरलाइन अभी एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रही है, जिसका मकसद सालों के वित्तीय नुकसान के बाद अपने कामकाज को फिर से पटरी पर लाना है। गलत इस्तेमाल का पता चलने के बाद, एयरलाइन ने ईएलटी फ़ायदों का लाभ उठाने के लिए पात्रता की शर्तों को और कड़ा कर दिया है। अब कर्मचारियों को नॉमिनी के बारे में पूरी जानकारी के साथ-साथ, नॉमिनी व्यक्तियों के साथ अपने रिश्ते को साबित करने वाले दस्तावेज़ी सबूत भी जमा करने होंगे। ईएलटी पॉलिसी के तहत, हर कर्मचारी सालाना 14 यात्राओं या वापसी टिकटों का हकदार होता है। यह पॉलिसी ‘ओपन-जॉ’ टिकटों की भी अनुमति देती है, जिसमें वापसी की फ़्लाइट, पहुँचने की जगह से किसी दूसरी जगह से शुरू होती है।

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मुंबई में रिटायर्ड कर्मचारी को 42 दिन डिजिटल अरेस्ट में रखकर 39.60 लाख की ठगी

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मुंबई, 14 मार्च : मुंबई के भांडुप इलाके में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बुजुर्ग कर्मचारी को 42 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 39.60 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी, जिसके डर से पीड़ित लगातार उनके संपर्क में बने रहे और अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करते रहे। इस मामले में पीड़ित बुजुर्ग की शिकायत पर मुंबई साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, दीपक नारायण मॉडकर (65) भांडुप पश्चिम के उत्कर्षनगर स्थित गौरीशंकर चॉल में परिवार के साथ रहते हैं और 2019 में बेस्ट से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका परिवार पेंशन और बेटे की नौकरी की आय पर निर्भर है। 29 जनवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का फोन आया। उसने अपना नाम बिनी शर्मा बताया और कहा कि उनके नाम पर जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है।

महिला ने उन्हें मामले के लिए कोलाबा पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की बात कहकर कॉल एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी मनोज शिंदे बताते हुए व्हाट्सऐप कॉल पर उनसे पूछताछ शुरू की।

आरोपी ने बुजुर्ग से उनके परिवार, बैंक खातों और घर में मौजूद गहनों तक की जानकारी ली और कहा कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है। आरोपी ने यह भी धमकी दी कि उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। आरोपियों ने पीड़ित को लगातार फोन और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क में रखा और उन्हें घर से बाहर न निकलने तथा किसी को भी इस बारे में जानकारी न देने के लिए कहा। बुजुर्ग को 42 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया। इस दौरान आरोपियों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें कथित तौर पर कोर्ट में पेश भी किया और कहा कि मामले की जांच रिजर्व बैंक कर रहा है। जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए उनसे कहा गया कि उनके बैंक खातों में मौजूद रकम जांच के लिए बताए गए खातों में ट्रांसफर करनी होगी जो बाद में वापस कर दी जाएगी।

डर के कारण पीड़ित ने 3 फरवरी और 18 फरवरी 2026 को अपने बैंक खाते से अलग-अलग खातों में 25 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 9 फरवरी को एक अन्य व्यक्ति ने खुद को समाधान पवार बताते हुए फोन किया और कहा कि अधिकारी मनोज शिंदे छुट्टी पर हैं और अब वही केस देख रहा है। उसने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी की धमकी देते हुए बुजुर्ग को घर के सोने के गहने गिरवी रखकर पैसे भेजने के लिए कहा। पीड़ित ने नजदीकी गोल्ड लोन कंपनी में गहने गिरवी रखकर मिले पैसे भी आरोपी के बताए बैंक खाते में 14.60 लाख रुपए जमा कर दिए।

इसके बाद जब पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके फोन बंद मिले, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 13 मार्च को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने मनोज शिंदे, समाधान पवार, बिनी शर्मा और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ पुलिस अधिकारी बनकर साजिश रचने और ऑनलाइन ठगी करने की शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।

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