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Sunday,20-September-2026
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राजनीति

उत्तराखंड और पंजाब के सीएम के अलावा सिध्दू,मजीठिया, कैप्टन और बादल चुनाव हारे

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एक तरफ जहां पंजाब में आम आदमी पार्टी ने भारी जीत दर्ज की है,तो वहीं कांग्रेस के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी दोनों से सीटो से चुनाव हार गए हैं..इसके अलावा नवजोत सिंह सिध्दू, सुखवीर सिंह बादल, मजीठिया और कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव हार गए हैं…

उत्तराखंड में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों ही दलों के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अपना विधानसभा चुनाव नहीं जीत सके हैं। भाजपा नेता व राज्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा से चुनाव हारे हैं। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत लालकुआं से चुनाव हार गए। आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए गए कर्नल अजय कोठियाल भी इस चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर सके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के भुवन चंद कापड़ी से चुनाव हारे हैं। धामी वर्तमान में उत्तराखंड के सीएम हैं वह अपनी मौजूदा सीट खटीमा से चुनाव लड़ रहे थे। यहां से पिछला चुनाव जीतने के बावजूद इस चुनाव में पुष्कर सिंह धामी लगातार पीछे चल रहे थे और अंत में कांग्रेस उम्मीदवार ने उन्हें चुनाव हरा दिया। बीते पांच वर्षों में धामी उत्तराखंड के तीसरे सीएम थे।

खटीमा से भुवन चंद कापड़ी को 44 हजार 479 वोट मिले जबकि मुख्यमंत्री धामी को केवल 37245 वोट मिल सके कापड़ी ने यहां तक मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए 52 फीसदी वोट हासिल किए और अपनी जीत दर्ज की।

वहीं उत्तराखंड विधानसभा का चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के बड़े हरीश रावत नेता कुमाऊं की लालकुआं सीट से चुनाव हार गए हैं। यहां से बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट ने जीत दर्ज की है। यहां हुए मुकाबले में हरीश रावत करीब 14 हजार वोटों से हार गए हैं।

लाल कुआं विधानसभा में हरीश रावत को 28251 वोट हासिल हुए जबकि उनके प्रतिद्वंदी मोहन सिंह बिष्ट ने 44851 वोट हासिल किए। बिष्ट करीब 53 फीसदी वोट लेकर विजयी रहे हैं। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को केवल 33 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

कांग्रेस के चुनाव जीतने की स्थिति में हरीश रावत को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना जा रहा था। हरीश रावत की हार के पीछे एक बड़ा कारण लालकुआं सीट से कांग्रेस की बागी प्रत्याशी संध्या डालाकोटी को भी माना जा रहा है। हरीश रावत से पहले संध्या डालाकोटी को लालकुआं से कांग्रेस का टिकट दिया गया था। हालांकि बाद में कांग्रेस ने यहां से डालाकोटी का टिकट काट कर हरीश रावत को मैदान में उतारा था। इससे नाराज डालाकोटी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में आ गई। डालाकोटी के बागी होने के कारण कांग्रेस के वोट बैंक में खासी सेंध लगी और यह भी एक कारण है कि हरीश रावत को हार का मुंह देखना पड़ा।

हरीश रावत की यह दूसरी बड़ी हार है। पिछले चुनाव में भी हरीश रावत को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा था।

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में हरीश रावत हरिद्वार और किच्छा दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़े थे और दोनों से ही वह चुनाव हार गए थे।

वहीं उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे कर्नल अजय कोठियाल भी अपनी सीट नहीं बचा सके। वह उत्तराखंड की गंगोत्री विधानसभा सीट से अपना चुनाव हार गए हैं। यानी उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी तीनों दलों के प्रमुख चेहरों को हार का सामना करना पड़ा है।

उत्तराखंड की गंगोत्री विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे कर्नल अजय सिंह कोठियाल केवल 10 फीसदी वोट ही हासिल कर सके उन्हें केवल 5998 वोट मिले हैं। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच रहा और अंत में भाजपा के सुरेशचंद्र चौहान ने गंगोत्री सीट से 28677 वोट हासिल करते हुए अपनी जीत दर्ज की है।

राष्ट्रीय समाचार

असम में भारत की बैटरी बनने की क्षमता, अदाणी ग्रुप राज्य में सर्जित करेगा 40,000 नौकरियां: जीत अदाणी

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अदाणी ग्रुप के निदेशक जीत अदाणी ने रविवार को कहा कि असम में देश के बड़े एनर्जी हब के रूप में उभरने की क्षमता है और यह भारत की बैटरी बन सकता है।

राज्य के धुबरी जिले के चापर में अदाणी पावर के 3,200 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में जीत अदाणी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में असम में जबरदस्त बदलाव आया है और राज्य भारत में निवेश के लिए सबसे आकर्षक जगहों में से एक बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा, “पिछले 5 सालों में मैं 40 बार असम आया हूं। लेकिन आज इस खूबसूरत जमीन पर आप सबके बीच खड़ा होना मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है।”

जीत अदाणी ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले सालों में असम न सिर्फ अपनी जरूरतों के लिए ऊर्जा पैदा करेगा, बल्कि एक बड़ा एनर्जी हब भी बनेगा और पूरे देश की सुरक्षा को ऊर्जा देगा। आप कह सकते हैं कि असम में ‘भारत की बैटरी’ बनने की क्षमता है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को ऐसे माहौल को बनाने का श्रेय दिया, जिससे पूरे राज्य में आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विकास और व्यापार के मौकों को बढ़ावा मिला है।

जीत अदाणी ने कहा कि असम अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि निवेश, उद्योग और बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं के केंद्र के तौर पर भी तेजी से पहचान बना रहा है।

असम में अदाणी ग्रुप के सफर पर बात करते हुए जीत अदाणी ने कहा कि कंपनी शुरू में राज्य के विकास में योगदान देने के मकसद से आई थी, लेकिन जल्द ही उन्हें कई सेक्टर में विस्तार के मौके नजर आए। उन्होंने मुख्यमंत्री सरमा के काम करने के तरीके की तारीफ की और कहा कि उनका ध्यान परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और लागू करने पर रहता है।

उन्होंने कहा, “पिछले साल ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ में हमारे ग्रुप चेयरमैन गौतम अदाणी ने घोषणा की थी कि अदाणी ग्रुप अगले 10 सालों में नॉर्थईस्ट में 1 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश करेगा। आज मुझे यह बताते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि असम में लगभग 80,000 करोड़ रुपए के निवेश के साथ काम पहले ही शुरू हो चुका है।”

उन्होंने आगे कहा कि नौकरी के मौके पैदा करना और स्थानीय लोगों की भागीदारी ग्रुप की निवेश रणनीति का मुख्य हिस्सा है। 48,000 करोड़ रुपए का आने वाला थर्मल पावर प्रोजेक्ट, जिसकी क्षमता 3,200 मेगावाट होगी, उम्मीद है कि यह नॉर्थ-ईस्ट में बिजली पैदा करने वाला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बन जाएगा।

जीत अदाणी ने कहा, “हमने यहां पहले ही 4 से 5 जॉब ड्राइव किए हैं और असम के 4,500 स्थानीय युवाओं को नौकरी पर रखा जा चुका है। असम में अदाणी ग्रुप के कारोबार से यहां के लोगों के लिए लगभग 40,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी।”

उन्होंने आगे कहा, “यह तो बस शुरुआत है। जैसे-जैसे हम असम में आगे बढ़ेंगे, स्थानीय युवाओं के लिए भी मौके बढ़ेंगे। हमारा मकसद यह पक्का करना है कि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय टैलेंट इस विकास यात्रा का सक्रिय हिस्सा बने।”

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राष्ट्रीय समाचार

भारतीय सेना के जांबाज डॉग्स ने अमेरिकी सैनिकों के सामने दिखाया कौशल

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भारतीय सेना के प्रशिक्षित सैन्य डॉग भी भारत और अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का हिस्सा बने हैं। राइस, विक्टर, जैक और राउडी नाम के चार सैन्य डॉग्स ने विशेष अभियानों में सैनिकों की मदद करने की क्षमता का प्रदर्शन किया।

अभ्यास के दौरान इन डॉग्स ने एक संदिग्ध ठिकाने में प्रवेश की कार्रवाई और रस्सी के सहारे नीचे उतरने जैसे अभ्यासों में हिस्सा लिया। यहां अमेरिकी सैनिकों को भारतीय सेना के सैन्य डॉग्स की ट्रेनिंग, फुर्ती और कठिन सामरिक परिस्थितियों में सैनिकों के साथ काम करने की क्षमता को करीब से देखने का अवसर मिला। इन चारों सैन्य डॉग्स की नस्ल भी अलग-अलग है।

राउडी और विक्टर स्वदेशी रामपुर हाउंड नस्ल के हैं। भारतीय सेना सैन्य भूमिकाओं में इस भारतीय नस्ल का इस्तेमाल लगातार बढ़ा रही है। जैक बेल्जियन मैलिनॉइस नस्ल का है, जबकि राइस लैब्राडोर रिट्रीवर है। इन सैन्य डॉग्स के पास भारत की उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर तैनाती का अनुभव भी है। रामपुर हाउंड नस्ल के डॉग्स ने इससे पहले मेघालय के उमरोई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें मणिपुर सीमा पर तैनात किया गया, जहां उन्होंने आईईडी यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का सफलतापूर्वक पता लगाया।

सेना के मुताबिक, इनके भाई-बहनों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जालंधर और अमृतसर सेक्टरों में भी तैनात किया गया था। इससे अलग-अलग इलाकों और परिस्थितियों में इस सैन्य डॉग टीम की उपयोगिता और अनुकूलन क्षमता सामने आई। ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में इनकी भागीदारी एक बार फिर दिखाती है कि आधुनिक सैन्य अभियानों में प्रशिक्षित सैन्य डॉग किस तरह सैनिकों के महत्वपूर्ण साथी बन चुके हैं।

खास तौर पर स्वदेशी रामपुर हाउंड जैसी नस्लों का बढ़ता इस्तेमाल भारतीय सेना की अपनी सैन्य क्षमता में विविधता और स्वदेशी विकल्पों को भी दर्शाता है। कठिन परिस्थितियों में डॉग्स और उनके संचालकों के बीच तालमेल इस पूरी व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में जारी है। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में है। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

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राजनीति

एसआईआर पर कांग्रेस का केंद्र पर आरोप, कहा- ‘शाह-प्रेरित वोटर हटाओ अभियान’

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कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) के कारण बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने इस प्रक्रिया को “गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर वोटरों को हटाने” की कार्रवाई बताया और दावा किया कि यह “संविधान पर हमला” है।

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को वेरिफाई और अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का तीसरा चरण शुरू किया है, जिसमें 36.73 करोड़ से अधिक वोटर शामिल हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि तीसरे चरण में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग हर तीन में से एक वोटर का नाम या तो वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था या उनके नाम हटाए जाने की संभावना थी।

उन्होंने एक बयान में कहा, “नाम हटाने की दर 17 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा, 5.43 करोड़ वोटरों को नोटिस भेजकर वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। नाम हटाए जाने का जोखिम 15 प्रतिशत और है।”

उन्होंने दावा किया कि चल रहे तीसरे चरण में 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

रमेश ने आगे दावा किया कि एसआईआर के पहले दो चरणों के परिणामस्वरूप 7.8 करोड़ नाम हटा दिए गए और नाम हटाने की दर संशोधन प्रक्रिया से पहले मतदाता सूची का 13 प्रतिशत थी।

चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के तीसरे चरण का आदेश 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दिया गया था, जिसमें 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों ने 36.73 करोड़ से अधिक मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया।

रमेश ने कहा, “इस प्रकार, चौंकाने वाली बात यह है कि 32 प्रतिशत (यानी लगभग हर तीन में से एक) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं या उनके नाम हटाए जाने का खतरा है।”

कांग्रेस नेता के बताए आंकड़ों के मुताबिक, जिन वोटरों के नाम हटा दिए गए थे या जिनके नाम हटने का खतरा था, उनका कुल अनुपात दिल्ली में 53.73, चंडीगढ़ में 52.58, तेलंगाना में 48.90, झारखंड में 39.57, हरियाणा में 37.5, उत्तराखंड में 35.71, मेघालय में 35.36 और महाराष्ट्र में 33.88 फीसदी था। कर्नाटक में यह आंकड़ा 27.6, ओडिशा में 23.67, आंध्र प्रदेश में 21.17 और पंजाब में 15.23 फीसदी था।

रमेश ने आरोप लगाया कि नाम हटाने की इस प्रक्रिया का असर समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों पर बहुत ज्यादा पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ज्यादातर बड़े राज्यों में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

उन्होंने सभी राज्यों में उन वोटरों की लिस्ट सार्वजनिक न करने के लिए चुनाव आयोग की आलोचना की, जिनके नाम हटाए जा सकते थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली ने जनता के दबाव के बाद 19 सितंबर को अपनी लिस्ट जारी की।

रमेश ने कहा, “यह अनुपात बहुत ज़्यादा है और यह पूरी एसआईआर प्रक्रिया में ढांचागत कमियों को दिखाता है।”

कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि एसाईआर प्रक्रिया ने असल में पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी है, क्योंकि उनसे ऐसे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो शायद राज्य ने उन्हें कभी दिए ही न हों।

उन्होंने कहा, “एक ऐसा टेस्ट जिसे अधिकतर नागरिक पास नहीं कर सकते, वह सिर्फ ‘बाहर करने की मशीन’ है।”

रमेश ने इस प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों की जरूरतों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया उन नागरिकों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है जो वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखना चाहते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा करते हुए रमेश ने कहा, “एसआईआर असल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं का नाम शाह ने हटाने के लिए उकसाया है। यह हमारे संविधान पर हमला है।”

एसआईआर प्रोसेस के तीसरे चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के साथ-साथ दिल्ली, चंडीगढ़ और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव भी शामिल हैं।

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