अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिकी यूजर्स ने वीचैट पर प्रतिबंध का किया विरोध
24 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए बैन के आदेश के खिलाफ टिकटॉक ने मुकदमा करने का फैसला लिया है। उधर अमेरिका में टिकटॉक के कर्मचारी भी सरकार के खिलाफ मुकदमा करने को तैयार हैं। इससे पहले अमेरिका में वीचैट के उपभोक्ता संगठन अमेरिकन वीचैट यूजर अलायंस ने भी अपना शिकायत पत्र उत्तरी कैलिफोर्निया जिले के संघीय अदालत को भेज दिया है। टिकटॉक और वीचैट के अमेरिकी कर्मचारियों और उपयोगकतार्ओं का मानना है कि राष्ट्रपति के प्रतिबंध आदेश से उन के अधिकारों को नुकसान पहुंचाया गया है।
अमेरिका में उपयोगकतार्ओं द्वारा टिकटॉक को 16.5 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है। और अमेरिका में वीचैट के 190 लाख उपयोगकर्ता हैं। अमेरिकी सरकार द्वारा इन दो चीनी ऐप्स के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध से लाखों अमेरिकी उपभोक्ताओं में असंतोष की लहर पैदा हुई है। उन का कहना है कि लोगों को इन ऐप्स का प्रयोग करने का अधिकार है। इसमें डेटा की सुरक्षा पर जो चिन्ता है वह निराधार है।
अमेरिकन वीचैट यूजर अलायंस के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जानता है कि सोशल मीडिया सामाजिक सार्वजनिक स्थान के बराबर है। यह एक वर्ग है जहाँ लोग जानकारी साझा कर सकते हैं, सीख सकते हैं और विश्लेषण कर सकते हैं। राष्ट्रपति के प्रतिबंध आदेश से लोगों के संविधान अधिकार को क्षति पहुँचेगी।
उधर चीनी सोश्ल विज्ञान अकादमी के अनुसंधानकर्ता चाओ ची ने कहा कि वीचैट के प्रतिबंध से न केवल उपयोगकतार्ओं को बोलने की स्वतंत्रता से वंचित किया गया है, बल्कि मुक्त व्यापार के सिद्धांत का भी उल्लंघन किया गया है। दूसरे विद्वानों का मानना है कि अमेरिका के दूसरे देशों की कंपनियों को दबाव डालने की कार्यवाही से अर्थशास्त्र के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया है और इस का परिणाम हार ही होगा।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ऐपल, फोर्ड, गोल्ड्मन सैक्श, इंटेल, मोर्गन स्टेनलेय आदि अमेरिकी कंपनियों ने अमेरिकी सरकार के प्रतिबंध आदेश के प्रति चिन्ता व्यक्त की। क्योंकि इस प्रतिबंध से चीनी बाजार में अमेरिकी कारोबारों की प्रतिस्पर्धा शक्ति को कम किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने पीएसीटीएस लॉन्च किया, साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर गुरुवार को पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी एंड सप्लाई चेन (पीएसीटीएस) को लॉन्च किया। इसका उद्देश्य साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाना है।
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “पीएसीटीएस का मकसद राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा में हमारे साझा हितों का समर्थन करना, हमारे सहयोगियों को अधिक डिजिटल विकल्प देकर सशक्त बनाना, अहम सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाना और ग्लोबल साइबर क्षमता को मजबूत करना है।”
पीएसीटीएस पांच आपस में जुड़े हुए स्तंभों पर एक साझा रणनीतिक विजन के साथ आगे बढ़ेगा, इनमें सप्लाई चेन की मजबूती और विविधता, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल मजबूती और डिफेंस रिसर्च में सहयोग शामिल है।
मंत्रालय ने कहा कि इनमें से हर स्तंभ के तहत, भारत और ऑस्ट्रेलिया प्राइवेट सेक्टर, यूनिवर्सिटीज, रिसर्च संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मौकों और खास प्रोजेक्ट्स की पहचान करेंगे।
बयान में कहा गया, “ऑस्ट्रेलिया और भारत मिलकर दोनों देशों के बढ़ते तकनीकी उद्योगों को सहारा देने के लिए सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम करेंगे। इसमें सुरक्षा से जुड़े नियमों को बढ़ावा देना, साथ ही नियमों पर आधारित द्विपक्षीय टेक्नोलॉजी व्यापार और सप्लाई चेन को मजबूत करना शामिल है।”
इसमें सेमीकंडक्टर और जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन – जिसमें रीसाइक्लिंग और रिकवरी भी शामिल है – पर मिलकर काम किया जाएगा। साथ ही, ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय व्यवसायों के बीच कमर्शियल सहयोग और व्यापार में विविधता लाने को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
पीएसीटीएस लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित, आम सहमति वाले और कई पक्षों को शामिल करने वाले फ्रेमवर्क विकसित करके भरोसेमंद और सुरक्षित एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और बेंचमार्क को आगे बढ़ाने की वैश्विक कोशिशों का लाभ उठाएगा।
बयान में कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया और भारत, मल्टी-डोमेन रक्षा चुनौतियों और क्षमताओं की साझा समझ को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा अनुसंधान साझेदारियों का लाभ उठाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।
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भारत के साथ आर्थिक संबंध बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे: ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को कहा कि वे भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए बिजनेस लीडर्स और विश्वविद्यालयों के साथ काम करते रहेंगे।
यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद पीएम अल्बनीज ने सेल्फी साझा कर कहा कि साथ मिलकर, हम अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ा रहे हैं और ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय बिजनेस को समर्थन कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “हमारे लोगों के बीच के संबंधों ने हमारी कई बिजनेस सक्सेस स्टोरीज को आगे बढ़ाया है। हम भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए बिजनेस लीडर्स और विश्वविद्यालयों के साथ काम करते रहेंगे।”
उन्होंने कहा, “यहां घर पर नौकरियां बनाना और आगे आने वाले व्यापार और निवेश के मौकों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना।”
इस बीच, पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से भी मुलाकात की और भारत-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती पर अच्छी बातचीत की। मुलाकात के बाद पूर्व पीएम स्कॉट ने एक्स पर सेल्फी साझा कर लिखा, “आज मेलबर्न में मिलने के न्योते के लिए पीएम नरेंद्र मोदी का धन्यवाद। हम सब मिलकर ऑस्ट्रेलिया-भारत के संबंध को अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर ले जा पाए। मैं उनके आने के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। और हां, उन्होंने पूछा कि मेरी इंडियन कुकिंग कैसी चल रही है।”
भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, विक्टोरिया की गवर्नर, प्रोफेसर मार्गरेट गार्डनर एसी, ने विक्टोरिया के गवर्नमेंट हाउस में पीएम मोदी का स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने भारत और विक्टोरिया के बीच बढ़ते शैक्षणिक लिंकेज पर चर्चा की, जिसमें एकेडमिक सहयोग, रिसर्च साझेदारी और स्टूडेंट मोबिलिटी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच मजबूत संबंध भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक अहम हिस्सा हैं।
इससे पहले, पीएम मोदी ने गुरुवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने दोनों देशों को वैश्विक अनिश्चितता के बीच नेचुरल और भरोसेमंद साझेदार बताया। साथ ही, उन्होंने दोनों देशों के बिजनेस से स्वच्छ ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपील की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई बिजनेस को मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, एआई, डिजिटल इकॉनमी वगैरह जैसे क्षेत्रों में भारत की ग्रोथ स्टोरी में साझेदार बनने के लिए निमंत्रण दिया।
भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम के दौरान आर्थिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स का स्वागत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी मौजूदगी भारत और ऑस्ट्रेलिया के साझे भरोसे और उम्मीदों को दिखाती है।
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “आज दुनिया अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ना स्वाभाविक और जरूरी दोनों है। पिछले कुछ सालों में हमने दोनों देशों की क्षमताओं को मिलाकर भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा बनाया है।”
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अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद लाल निशान में खुला शेयर बाजार; सेंसेक्स 78,000 के नीचे फिसला

अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बुधवार को लाल निशान में हुई। सुबह 9:22 पर सेंसेक्स 407 अंक या 0.52 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,772 अंक और निफ्टी 134 अंक या 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,264 पर था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 169 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,116 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 55 अंक या 0.29 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,164 अंक पर था।
सूचकांकों में सबसे अधिक दबाव ऑयल एवं गैस और ऑटो स्टॉक्स पर देखा जा रहा था। निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी ऑटो टॉप लूजर थे। इसके बाद निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी एफएमसीजी लाल निशान में थे। निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी आईटी और निफ्टी इंडिया डिफेंस हरे निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा गेनर्स थे। इंडिगो, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, इटरनल, एचयूएल , अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बीईएल, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, ट्रेंट और भारती एयरटेल लूजर्स थे।
वैश्विक बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो और सोल लाल निशान में थे, जबकि शंघाई और हांगकांग हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे।
बाजार में गिरावट की वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर ताजा हमले करना और ईरान के तेल बेचने के लाइसेंस को रद्द करना है।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान पर नए हमले हॉर्मुज के गुजर रहे तीन तेल से लदे जहाजों पर हमले के बाद किए गए हैं। इससे दोनों देशों में फिर से तनाव बढ़ गया है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 76.13 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.64 प्रतिशत की मजबूती के साथ 72.33 डॉलर प्रति बैरल पर था।
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