अपराध
नेपाल विमान दुर्घटना में चार भारतीयों समेत सभी यात्रियों की मौत
सोमवार को एयरलाइन द्वारा जारी यात्री सूची के अनुसार, चार भारतीय नागरिकों सहित सभी यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण तारा एयर में यात्रा कर रहे थे। पोखरा से जोमसोम के लिए उड़ान भरने वाले 19 यात्रियों और चालक दल के तीन सदस्यों को लेकर तारा एयर के 9 एनएईटी डबल इंजन वाले विमान का पोखरा हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद रविवार सुबह संपर्क टूट गया था।
नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सोमवार दोपहर ट्वीट किया, “मुझे यह सुनकर दुख हुआ कि तारा एयर में सवार सभी यात्रियों की जान चली गई है।” उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
भारतीय नागरिकों की पहचान वैभवी बंदरकर, अशोक कुमार त्रिपाठी, धनुष त्रिपाठी और रितिका त्रिपाठी के रूप में हुई है। माना जा रहा है कि वे पुणे से हैं। इसी तरह हादसे में एक नेपाली परिवार के सात सदस्यों की भी मौत हो गई।
तारा एयर के प्रवक्ता सुदर्शन बरतौला के अनुसार, सोमवार दोपहर तक दुर्घटनास्थल से 20 शव निकाले जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, “खोज और बचाव दल बाकी दो शवों के लिए इलाके की छानबीन कर रहे हैं। दुर्घटना स्थल पर लगभग 100 लोग हैं, जिनमें नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस, पर्वतारोहण बचाव अधिकारी और स्थानीय लोग शेष शवों की तलाश कर रहे हैं।”
शव मुख्य प्रभाव बिंदु से 100 मीटर के दायरे में बिखरे हुए हैं।
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने पहले ही दिवंगत भारतीय नागरिकों के परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क स्थापित कर लिया है।
विमान दुर्घटना के बाद, नेपाल के नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए सोमवार को पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।
नेपाल के गृह मंत्रालय ने कहा कि एक बार शवों को काठमांडू लाए जाने के बाद, उन्हें परिवारों को सौंप दिया जाएगा।
लापता विमान मस्टैंग जिले में दुर्घटनाग्रस्त होने के 24 घंटे बाद मिला था।
नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल नारायण सिलवाल ने रविवार की सुबह लापता विमान की तस्वीर ट्वीट करते हुए बताया कि लापता विमान सैनोसवेयर, थासांग-2, मस्टैंग जोम्सम हवाई अड्डे के पास मिला है। सेना द्वारा जारी तस्वीर के अनुसार, 19 यात्रियों और चालक दल के तीन सदस्यों को लेकर जा रहा विमान के कई टुकड़े हो गये।
रविवार को खराब मौसम के कारण खोज और बचाव अभियान में बाधा आने के बाद सेना ने मिशन को रद्द कर दिया और सोमवार सुबह अभियान फिर से शुरू किया।
रविवार की सुबह संपर्क टूटने के कुछ देर बाद ही तारा के विमान की तलाश शुरू हुई। लेकिन विमान का पता नहीं चल सका। पोखरा से जोमसोम पहुंचने में 20 मिनट का समय लगता है। लेकिन उड़ान भरने के 12 मिनट के भीतर ही विमान का संपर्क टूट गया।
देश के नागरिक उड्डयन कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, तारा एयर के अनुसार, लापता विमान रविवार सुबह 10.07 बजे घोडेपानी में जोमसोम टॉवर के संपर्क में आया था।
विमान के संपर्क से बाहर होने के तुरंत बाद, नेपाल सेना ने अपने कर्मियों को लेटे इलाके में तलाशी के लिए तैनात कर दिया।
विमान में 13 नेपाली, चार भारतीय और दो जर्मन सवार थे।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने 1073 किलोग्राम से अधिक पटाखे जब्त किए, 10 एफआईआर दर्ज

त्योहारों के मौसम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पटाखों की अवैध बिक्री और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने पांच थाना क्षेत्रों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं और 1,073.426 किलोग्राम पटाखे जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों के तहत लाहौरी गेट, बुराड़ी, कोतवाली, बारा हिंदू राव और सब्जी मंडी थाना क्षेत्रों में ये बरामदगी की गई है। सबसे ज्यादा 622.88 किलोग्राम पटाखे सब्जी मंडी इलाके से बरामद हुए।
इसके बाद बारा हिंदू राव से 178.5 किलोग्राम, कोतवाली से 107.6 किलोग्राम, लाहौरी गेट से 88.916 किलोग्राम और बुराड़ी से 75.53 किलोग्राम पटाखे जब्त किए गए।
लाहौरी गेट थाना क्षेत्र में 16 अक्टूबर को बीएनएस की धारा 223(बी) और 288, तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 5 और 9बी के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई। सर शोभा सिंह पॉलीक्लिनिक के सामने वाले इलाके से कुल 88.916 किलोग्राम पटाखे बरामद किए गए।
बुराड़ी इलाके में, 18 अक्टूबर को बीएनएस की धारा 223(ए) और 288, तथा विस्फोटक अधिनियम की धारा 9बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने हिमगिरी के इलाके से 75.53 किलोग्राम पटाखे बरामद किए।
कोतवाली पुलिस ने इन बरामदगी के संबंध में दो एफआईआर दर्ज की हैं। 18 अक्टूबर को, प्रभा धर्मशाला के पास अंगूरी बाग फूल वाला रोड से 93 किलोग्राम पटाखे बरामद होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद, 27 अक्टूबर को चांदनी चौक में मोती सिनेमा के पास 14.6 किलोग्राम पटाखे मिलने पर एफआईआर दर्ज की गई।
नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने कहा कि पटाखों का अनधिकृत भंडारण और असुरक्षित तरीके से उन्हें संभालना आग लगने और चोट लगने का गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, खासकर भीड़-भाड़ वाले बाजारों और रिहायशी इलाकों में।
निवासियों, व्यापारियों, दुकानदारों और संपत्ति मालिकों से नियमों का पालन करने और पटाखों की अनधिकृत बिक्री, उन्हें अपने पास रखने या उनका भंडारण करने से बचने की अपील की गई है। नागरिकों से यह भी कहा गया है कि वे नियमों के उल्लंघन का कोई भी मामला सामने आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
पुलिस ने लोगों की जान-माल की सुरक्षा करने और त्योहारों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मनाना सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया। इन मामलों में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है।
अपराध
झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर बताकर युवती से दुष्कर्म का आरोपी गयाजी से गिरफ्तार

झारखंड पुलिस में दरोगा होने का झूठा रौब दिखाकर एक युवती को अपने जाल में फंसाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को बिहार के गया जिले से गिरफ्तार किया गया है। रांची पुलिस और गया के मुफस्सिल थाना की संयुक्त टीम ने मानपुर इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
आरोपी की पहचान अविनाश कुमार उर्फ राज शर्मा के रूप में हुई है, जो गया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित विष्णु विहार कॉलोनी निवासी बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले आई है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर इसी वर्ष 15 मई को रांची महिला थाने में भारतीय न्याय संहिता और संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की कांड संख्या 15/26 के तहत दर्ज इस मुकदमे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता युवती के अनुसार, आरोपी ने खुद को झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर (दारोगा) बताकर सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के जरिए उससे संपर्क साधा था। आरोप है कि वर्दी और पद का खौफ तथा झूठा प्रभाव दिखाकर उसने युवती को विश्वास में लिया और उसका यौन शोषण किया।
आरंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जब पीड़िता को आरोपी के दावों की पोल खुलने और उसकी असली पहचान का पता चला, तो उसने हिम्मत जुटाकर रांची महिला थाने का दरवाजा खटखटाया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही रांची पुलिस और महिला थाना की विशेष टीम आरोपी की सुरागकशी में जुटी हुई थी। तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस के जरिए रांची पुलिस को यह पुख्ता सुराग मिला कि नाम बदलकर छिप रहा आरोपी वर्तमान में बिहार के गया जिले में शरण लिए हुए है।
इसके बाद रांची पुलिस की एक विशेष टीम गया पहुंची और स्थानीय मुफस्सिल थाना पुलिस के सहयोग से मानपुर क्षेत्र में घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, 2.5 करोड़ की संपत्ति जब्त

दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बैंक खाताधारकों के रूप में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी ‘रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट’ (आरटीजीएस) निर्देशों के जरिए बैंक अधिकारियों को 22.56 लाख रुपए का चूना लगाया था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ लगभग 2.50 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें सोने के आभूषण, 101 सोने के सिक्के, नकद और एक एसयूवी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से एक ‘घोषित अपराधी’ है, जो नकली नोटों से जुड़े एक मामले में सात साल से अधिक समय से फरार चल रहा था।
यह मामला राजेंद्र प्लेस में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच से जुड़ा है। ब्रांच मैनेजर ने एक शिकायत दर्ज कराई थी और बताया कि 5 अगस्त को एक व्यक्ति ने खुद को दीपक मल्होत्रा बताकर बैंक अधिकारियों से संपर्क किया। दीपक मल्होत्रा कई ऐसी कंपनियों के निदेशक हैं, जिनका इस शाखा में खाता है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पहले अधिकारियों का भरोसा जीतने के लिए 1 करोड़ रुपए की ‘फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट’ (एपडीआर) बनाने की बात की। बाद में उसने फिर संपर्क किया और दावा किया कि कंपनी को एक भुगतान करना है, लेकिन उनकी चेकबुक खत्म हो गई है। उसने अनुरोध किया कि इस लेनदेन को ईमेल के जरिए पूरा किया जाए।
आरोपी ने कंपनी के रजिस्टर्ड ईमेल पते से मिलता-जुलता एक ईमेल आईडी इस्तेमाल करके फर्जी भुगतान अनुरोध भेजा। ईमेल में कंपनी का जाली लेटरहेड लगा था और बैंक को 22,56,922 रुपए किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था।
जब बैंक अधिकारियों ने जरूरी ‘इंडिमनिटी’ (क्षतिपूर्ति) दस्तावेजों की मांग की, तो फोन करने वाले ने यह कहकर दबाव डाला कि पहले भी ऐसे लेनदेन किए जा चुके हैं और भुगतान बहुत जरूरी है। इसके बाद बैंक ने वह फर्जी आरटीजीएस ट्रांसफर कर दिया।
शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की। पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम पश्चिम बंगाल के बंधन बैंक में खुले एक ‘म्यूल’ खाते में गई थी। टेलीकॉम रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और बातचीत के विवरण के तकनीकी विश्लेषण से जांचकर्ताओं को संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इनकी पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (लोनी) निवासी 36 वर्षीय विनय कुमार यादव और नोएडा निवासी 65 वर्षीय अनिल कुमार सहगल के रूप में हुई है।जांच से पता चला है कि आरोपी कॉर्पोरेट बैंक ट्रांजेक्शन को निशाना बनाने के लिए फर्जी कंपनी लेटरहेड, धोखेपूर्ण ईमेल आईडी, सोशल इंजीनियरिंग और ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद, इस पैसे को अन्य संपत्तियों में निवेश कर दिया जाता था, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक जौहरी से खरीदा गया सोना भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी गाजियाबाद, सहारनपुर, अयोध्या और फरीदाबाद सहित कई जगहों पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पहले भी शामिल रहे हैं। बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान इनकी जान-पहचान हुई थी। इससे पहले ये लोग ‘मैजिक पेन’ का इस्तेमाल करके चेक से जुड़ी धोखाधड़ी में भी शामिल रह चुके हैं।
इन गिरफ्तारियों से पुलिस को गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में दर्ज छह अन्य मामलों को सुलझाने में भी मदद मिली है। इन मामलों में 16.65 लाख रुपए से लेकर 2.98 करोड़ रुपए तक की धोखाधड़ी हुई थी। साथ ही, 88 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने की एक कोशिश भी शामिल है।
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