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4 साल के गैप के बाद अहान शेट्टी के लिए मुश्किल रहा था शूटिंग करना, बताया कैसे नर्वसनेस को करते थे दूर
मुंबई, 29 जनवरी : देश में 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ‘बॉर्डर-2’ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। फिल्म में सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी ने नेवी अफसर की भूमिका निभाई है। अहान शेट्टी ने फिल्म की शूटिंग, बॉर्डर फिल्म की तुलना और लंबे गैप के बाद वापस सेट पर शूटिंग करने के अनुभवों को साझा किया है।
मीडिया से खास बातचीत में अभिनेता ने ‘तड़प’ के 4 साल बाद फिल्म बॉर्डर-2 में काम करने के अनुभव पर कहा, ‘लंबे गैप के बाद फिल्म की शूटिंग बड़े स्टार्स के साथ करना नर्वस कर देने वाला अनुभव था, लेकिन सनी सर, वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ ने सेट पर काफी सपोर्ट किया था, जिससे चीजें करने में काफी आसानी रही। ‘तड़प’ के बाद का समय थोड़ा मुश्किल था, लेकिन मेरे परिवार और दोस्तों ने बहुत मदद की थी। उनकी वजह से ही कभी मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और न ही रिग्रेट किया।”
फिल्म बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ाने के प्रेशर और शूटिंग के समय बड़ी स्टारकास्ट के साथ काम करने के अनुभव पर उन्होंने कहा, “मैंने सिर नीचे किया और सारा फोकस काम पर था। मैं सिर्फ हर चीज को अच्छा और परफेक्ट चाहता था और पूरी ईमानदारी के साथ काम किया। मेरे निर्देशक ने जो कहा मैंने सिर्फ वही किया और खुद को शांत रखने के लिए शूटिंग खत्म हो जाने पर मैं और वरुण रात में साथ में डिनर पर भी जाते हैं, जिससे काम को लेकर नर्वसनेस कम हो सके।”
अपने किरदार को लेकर की गई तैयारी पर अहान ने कहा, “एक नेवी अफसर का रोल निभाना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि सबसे जरूरी थी बॉडी लैंग्वेज और किरदार के साथ आई जिम्मेदारियां। उस दौरान बोलने का तरीका और नेवी अफसर की तरह एटीट्यूड रखना बहुत जरूरी था, क्योंकि एक नेवी अफसर बिना अपने बारे में सोचे देश के लिए सोचता है और चेहरे पर एक शिकन तक नहीं आती। वो जिम्मेदारी किरदार में लानी जरूरी थी।”
‘बॉर्डर’ और ‘बॉर्डर-2’ की तुलना पर अहान ने कहा, “दोनों फिल्में एक ही युद्ध पर बनी हैं, लेकिन दोनों का टाइम पीरियड अलग है। पहले जेपी सर ने फिल्म को शूट किया था और लाइव ब्लास्ट शूट किए, जो करना बहुत मुश्किल है और आज अलग तकनीक के साथ फिल्म की शूटिंग की है। कास्ट अलग है और क्रू भी। रही बात तुलना की, तो ये करना बेकार है क्योंकि ऑरिजनल, ऑरिजनल है। उसकी जगह कोई नहीं ले सकता है। सेट पर सनी सर और पापा ने भी काफी स्टोरी सुनाई कि फिल्म के दौरान कैसे शूटिंग हुई थी।”
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फिल्म फ्लॉप होने के बाद टूट गए थे सतीश कौशिक, आत्महत्या तक का कर लिया था विचार

फिल्मी दुनिया में कई बार कलाकार और निर्माता अपनी फिल्मों को सफल बनाने के लिए सालों की मेहनत और करोड़ों रुपए लगा देते हैं, लेकिन जब वही फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो उसका असर केवल करियर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और निर्देशक सतीश कौशिक से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा है, जिसने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था।
यह मामला सतीश कौशिक की फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ से जुड़ा है। यह फिल्म अपने समय की सबसे महंगी हिंदी फिल्मों में गिनी जाती थी। फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थे। बड़े सितारों और भारी बजट के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। फिल्म का निर्देशन सतीश कौशिक ने किया था, जबकि इसे बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया था।
एक सेलिब्रिटी चैट शो ‘जीना इसी का नाम है’ के दौरान सतीश कौशिक ने बताया था कि फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह इतने परेशान हो गए थे कि उन्हें बोनी कपूर से यह पूछने तक की हिम्मत नहीं हो रही थी कि फिल्म टिकट खिड़की पर कैसा प्रदर्शन कर रही है।
इसी बातचीत के दौरान बोनी कपूर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि फिल्म की असफलता से सतीश कौशिक पूरी तरह टूट चुके थे। वह इतने निराश हो गए थे कि उन्होंने आत्महत्या तक के बारे में सोच लिया था।
उन्होंने कहा, ”सतीश चलती कार से कूदने तक के लिए तैयार थे। यही नहीं, होटल पहुंचने के बाद भी वह पहली मंजिल से छलांग लगाने की बात कर रहे थे।”
हालांकि, बातचीत में इस गंभीर स्थिति को सतीश कौशिक ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब वह होटल की पहली मंजिल पर खड़े थे, तब नीचे खाने का इंतजाम किया गया था। ऐसे में उनके मन में अचानक यह ख्याल आया कि अगर वह नीचे कूद गए और खाने पर गिर पड़े, तो लोग यह समझेंगे कि वह खाने के लिए कूदे हैं, न कि आत्महत्या करने के लिए।
फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ की कहानी मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने लिखी थी। फिल्म में अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े कलाकार भी नजर आए थे। यह फिल्म 16 अप्रैल 1993 को रिलीज हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों के मुताबिक खरी नहीं उतर सकी।
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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर बनी वेब सीरीज बैन, कांग्रेस नेताओं और डीजीपी को जान से मारने की धमकी

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित वेब सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ को भारत सरकार द्वारा बैन किए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। सरकार के इस फैसले के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से कई प्रमुख नेताओं और पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को जान से मारने की धमकी दी गई है। ये धमकी सोशल मीडिया के जरिए दी गई है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पंजाब के डीजीपी गौरव यादव और दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को धमकी दी गई है।
जानकारी के अनुसार, गैंग की ओर से सोशल मीडिया के जरिए धमकी दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस बीच, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने धमकी भरे संदेशों और कॉल्स की पुष्टि की।
बता दें कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ मामले में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी 5 को पत्र लिखा है। पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने अपने सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म पर यह पत्र साझा भी किया है। इस पत्र में ओटीपी प्लेटफॉर्म से इस वेब सीरीज को रिलीज नहीं करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, पत्र में 27.10.2025 को जारी ओटीटी दिशानिर्देशों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि अगर हम इस तरह के वेब सीरीज को रिलीज होने की करने की अनुमति देते हैं, तो इससे समाज में अपराध बढ़ने की आशंका बढ़ सकती है, जिसे देखते इसे रिलीज नहीं करने का फैसला ही सही रहेगा।
मंत्रालय ने अपने पत्र में ओटीटी प्लेटफॉर्म को जारी किए गए दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि गैंगस्टर और अपराधियों पर आधारित वेब सीरीज को रिलीज करने से पहले पूरे विवेक का इस्तेमाल करें। पत्र में आगे कहा गया कि इस तरह के वेब सीरीज में युवाओं को भ्रमित करने की पूरी क्षमता होती है, जिससे युवा गुमराह हो सकते हैं।
इसके अलावा, पंजाब पुलिस ने भी सूचित किया है कि अगर इस तरह के वेब सीरीज को रिलीज करने की अनुमति दी जाती है, तो इससे सामाजिक व्यवस्था तहस नहस हो सकती है। अपराधियों को महिमामंडित करना किसी भी समाज के लिए उचित नहीं है।
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‘खलनायक रिटर्न्स’ : फिर से आ रहा ‘बल्लू बलराम’, सुभाष घई बोले- संजय दत्त फिर से साबित कर देंगे

अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर अपने खलनायक अंदाज में नजर आने वाले हैं। साल 1993 की सुपरहिट फिल्म ‘खलनायक’ का एंटी-हीरो किरदार ‘बल्लू बलराम’ अब नए रूप में बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रहा है। फिल्म की घोषणा के बाद फिल्म निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने संजय दत्त के नए किरदार का पोस्टर शेयर करते हुए खुशी जताई है।
सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स लिमिटेड की ओर से लिखा, “हम सभी यह देखकर बहुत खुश हैं कि हमारे प्यारे संजू ‘खलनायक रिटर्न्स’ के साथ वापस आ गए हैं। शुक्रवार को मीडिया को इसका एक जबरदस्त टीजर दिखाया गया, जिसे सबने खूब सराहा।”
उन्होंने आगे कहा कि बल्लू बलराम जैसे आइकॉनिक किरदार को दोबारा निभाना संजय दत्त के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि संजय इस बार भी अपने अभिनय से सभी को प्रभावित कर देंगे। घई ने संजय दत्त और पूरी टीम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।
संजय दत्त ने शुक्रवार को खुद ‘खलनायक रिटर्न्स’ फिल्म की आधिकारिक घोषणा की। यह फिल्म 1993 की मूल ‘खलनायक’ का नया संस्करण बताई जा रही है। मूल फिल्म में संजय दत्त ने खलनायक का रोल किया था, जो उस समय काफी चर्चित रहा था। ‘बल्लू बलराम’ का किरदार आज भी दर्शकों की याद में ताजा है। मूल फिल्म ‘खलनायक’ उस समय की कल्ट क्लासिक बन गई थी। इसमें संजय दत्त के अलावा माधुरी दीक्षित, जैकी श्रॉफ जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म के गाने और डायलॉग आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
शुक्रवार को मुंबई में एक इवेंट के दौरान संजय दत्त ने घोषणा की कि उनकी कंपनी ‘थ्री डायमेंशन मोशन पिक्चर्स’ और अक्षा कंबोज की ‘एस्पेक्ट एंटरटेनमेंट’ ने सुभाष घई की मुक्ता आर्ट्स से क्लासिक फिल्म ‘खलनायक’ के सीक्वल के अधिकार खरीद लिए हैं।
इवेंट में ‘खलनायक रिटर्न्स’ का छोटा टीजर भी रिलीज किया गया, जिसमें संजय दत्त अपने मशहूर किरदार ‘बल्लू बलराम’ के नए और दमदार अवतार में नजर आए।
संजय ने सुभाष घई को शुक्रिया अदा करते हुए कहा, “खलनायक का सफर बहुत लंबा रहा है। सुभाष जी के बिना यह मुमकिन नहीं था। वह एक लीजेंड हैं और एंटरटेनमेंट की दुनिया के बेताज बादशाह हैं। वे इस नई फिल्म का भी हिस्सा होंगे।”
नई फिल्म ‘खलनायक रिटर्न्स’ के बारे में ज्यादा डिटेल्स नहीं बताई गई है।
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