राष्ट्रीय समाचार
10 साल बाद और कई संघर्षों के बाद संभावना सेठ के घर आई खुशखबरी, दी प्रेगनेंसी की गुड न्यूज़
अभिनेत्री और बिग बॉस की पूर्व प्रतियोगी संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी के घर लंबे इंतज़ार के बाद खुशियों ने दस्तक दी है।
कपल ने घर में नन्हे मेहमान के आने की खुशखबरी शेयर की है। इस दिन का इंतज़ार कपल को काफी समय से था क्योंकि संभावना सेठ ने कई मिसकैरेज और आईवीएफ का दर्द झेला है।
10 साल बाद संभावना सेठ ने मां बनने की खुशखबरी शेयर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पति अविनाश द्विवेदी के साथ लिटिल बेबी के शूज की फोटो पोस्ट की है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “वी आर प्रेग्नेंट…प्यार, उम्मीद और सरोगेसी के ज़रिए हमारी सबसे खूबसूरत कहानी अब साकार होने की राह पर है, काउंटडाउन शुरू हो चुका है।” हालांकि अभिनेत्री का कौन सा महीना चल रहा है, इसको लेकर जानकारी नहीं है क्योंकि उन्होंने अपना बेबी बंप छिपा रखा है लेकिन उन्होंने अपने अल्ट्रासाउंड की फोटो शेयर की है।
संभावना सेठ व अविनाश द्विवेदी के साथ ही उनके फैंस के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी है क्योंकि संभावना काफी समय से बच्चे के लिए ट्राई कर रही थी, लेकिन कई मिसकैरेज के बाद उन्होंने आईवीएफ का सहारा लिया। अभिनेत्री के तीन आईवीएफ भी विफल रहे थे। इस बात का खुलासा खुद उन्होंने कई इंटरव्यू में किया था।
अपने मिसकैरेज पर बात करते हुए संभावना ने बताया था कि उन्होंने 15 दिनों तक जहर को पाला था क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि भ्रूण का विकास रुक चुका है। संभावना ने कहा था, गर्भावस्था के दौरान मुझे असामान्य रूप से बेचैनी महसूस होने लगी। शरीर में कुछ गड़बड़ थी, लेकिन इसका कारण समझ नहीं आ रहा था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि भ्रूण का विकास रुक चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मुझे 15 दिनों तक इस स्थिति का पता भी नहीं चला। शरीर ने कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं दी या कोई संकेत नहीं दिखाया, जिसकी वजह से इलाज में देरी हुई।”
अभिनेत्री ने यह भी साझा किया था कि वे प्रेग्नेंसी बेबी शूट भी करा चुके थे, लेकिन सोशल मीडिया पर जानकारी देने से पहले ही सब कुछ बिगड़ गया।
राजनीति
टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर भड़का विपक्ष, सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस, सपा और ‘आप’ का वॉकआउट

संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि बैठक में पार्टी के कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के विरोध में विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया।
महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया। उनका आरोप था कि एक गैर-मान्यता प्राप्त गुट को बैठक में स्थान दिया गया, जबकि लोकसभा टेबल ऑफिस की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद दर्ज हैं।
मोइत्रा ने सवाल उठाया कि पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों को संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर बैठक में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद अलग गुट के आधार पर मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी विपक्ष के वॉकआउट को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा तथा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के समर्थन में यह कदम उठाया है। उनका कहना था कि किसी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले कोई निष्कर्ष निकालना पूरी तरह असंवैधानिक है।
बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं ने बैठक में यह मुद्दा उठाया कि आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस सांसदों के बजाय पहले कथित बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई। उन्होंने इसे सरकार का अलोकतांत्रिक कदम बताया।
सर्वदलीय बैठक से विपक्ष के वॉकआउट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि आज देश में विभिन्न तरीकों से सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को सुनियोजित ढंग से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बगावत करने वाले सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जबकि स्पीकर ने अभी तक उन्हें मान्यता नहीं दी है।
महुआ माजी ने परिसीमन के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों का काफी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा दिलाए कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी विपक्षी दल इस पर सहमत हों, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
राष्ट्रीय समाचार
युवाओं को नशे से बचाने का अनोखा संकल्प, पंजाब का परिवार कर रहा 2,500 किमी की पदयात्रा

युवाओं को नशे की लत से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पंजाब का एक परिवार अनोखी पहल कर रहा है। यह परिवार बिना जूते-चप्पल के पंजाब से महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक करीब 2,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है। रास्ते में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है।
पदयात्रा कर रहे सरदार लाल सिंह ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “हम अमृतसर से आए हैं। हमने अपने गांव से सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़ तक लगभग 2,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। पंजाब में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। हम सभी के सुख-समृद्धि और भलाई की अरदास करते हैं। हमारी यह यात्रा युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए समर्पित है। यह मेरा 13वां साल है। हम वर्ष 2013 से लगातार यह यात्रा कर रहे हैं।”
नशे की बढ़ती समस्या आज युवाओं के सामने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता, विशेष रूप से निर्णय लेने वाला हिस्सा यानी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स विकसित हो रहा होता है। ऐसे में कम उम्र में नशे की शुरुआत जीवनभर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी तथा व्यवहार संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की रोकथाम के लिए परिवार और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं से खुलकर और संवेदनशीलता के साथ बातचीत करनी चाहिए। माता-पिता और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों की सही जानकारी देना भी जरूरी है। समय पर पहचान, विशेषज्ञों की सलाह और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे उपचार प्रभावी साबित होते हैं। भारत में नशे से प्रभावित बच्चों और युवाओं को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सरकारी सेवाओं के माध्यम से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा भी उपलब्ध है।
राष्ट्रीय समाचार
आधार ऐप ने 4 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार किया, डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से मिली रफ्तार

सरकार-समर्थित आधार ऐप ने 4 करोड़ (40 मिलियन) डाउनलोड का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि डिजिटल पहचान (डिजिटल आइडेंटिटी) सेवाओं को तेजी से अपनाए जाने का संकेत देती है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि लाखों भारतीय निवासी इस ऐप के जरिए आधार से जुड़ी जानकारी अपडेट करने, सुरक्षा सेटिंग्स मैनेज करने और अन्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
मंत्रालय के अनुसार, आधार ऐप अब आधार से जुड़ी कई सेवाओं के लिए वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुका है, जिसके जरिए घर बैठे पता (एड्रेस) अपडेट करना, मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट करना, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक करना और ई-आधार डाउनलोड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ऐप लॉन्च होने के बाद से अब तक इसके माध्यम से 11.65 लाख से अधिक एड्रेस अपडेट किए जा चुके हैं। इससे लोगों को आधार नामांकन (एनरोलमेंट) या अपडेट सेंटर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे घर बैठे अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं।
इसके अलावा, ऐप के जरिए अब तक करीब 49 लाख मोबाइल नंबर अपडेट किए जा चुके हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपने आधार से जुड़े संपर्क विवरण (कॉन्टैक्ट डिटेल्स) को सही और अपडेट रख पा रहे हैं।
1 जुलाई से शुरू हुई ईमेल अपडेट सुविधा के बाद अब तक करीब 12.5 लाख ईमेल आईडी जोड़ी या अपडेट की जा चुकी हैं। सरकार ने बताया कि पहले इस सेवा के लिए 75 रुपए शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब 31 दिसंबर 2026 तक आधार ऐप के जरिए यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है।
ऐप में उपलब्ध प्राइवेसी और सिक्योरिटी फीचर्स को भी लोगों ने बड़े पैमाने पर अपनाया है। अब तक 1.91 करोड़ से अधिक बार बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक सुविधा का इस्तेमाल किया गया है। यह फीचर आधार धारकों को अपने बायोमेट्रिक डेटा को तुरंत लॉक या अनलॉक करने की सुविधा देता है, जिससे उसके दुरुपयोग की आशंका कम हो जाती है।
मंत्रालय ने कहा कि आधार ऐप को इस तरह तैयार किया गया है कि आधार नंबर धारक अपनी पहचान को आसानी, सुरक्षित तरीके और प्राइवेसी-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ दिखा, साझा और सत्यापित (वेरिफाई) कर सकें। साथ ही यह डिजिटल इंडिया मिशन के तहत विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने और लोगों के जीवन को अधिक आसान बनाने में भी योगदान दे रहा है।
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने बताया था कि आधार ऐप में नई सुविधा शुरू होने के पहले दो दिनों के भीतर ही 2.5 लाख से अधिक लोगों ने अपने आधार में ईमेल आईडी अपडेट की थी।
यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने अब आधार धारकों को आधार ऐप के जरिए सीधे अपनी ईमेल आईडी जोड़ने या अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध करा दी है, जिसके लिए अब किसी आधार एनरोलमेंट या अपडेट सेंटर जाने की जरूरत नहीं है।
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