व्यापार
अदाणी ग्रीन एनर्जी की ऊर्जा बिक्री पहली छमाही में 32 प्रतिशत बढ़ी; एबिटडा 7,900 करोड़ रुपए के पार
अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने बुधवार को नतीजे जारी किए। कंपनी का एबिटडा (‘ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पूर्व आय) वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 41 प्रतिशत बढ़कर 7,957 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, ऊर्जा की बिक्री सालाना आधार पर 32 प्रतिशत बढ़कर 25.75 अरब यूनिट्स हो गई है।
कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में बिजली आपूर्ति से होने वाली आय सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 8,299 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि इस दौरान एबिटडा मार्जिन 92.9 प्रतिशत रहा।
इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में कैश प्रॉफिट सालाना आधार पर 35 प्रतिशत बढ़कर 4,176 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी ने 17,160 करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय भी किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 38 प्रतिशत अधिक है। नेट डेट और रन-रेट एबीआईटीडीए का अनुपात 5.6 गुना रहा।
कंपनी के अनुसार, आय और मुनाफे में यह मजबूत वृद्धि लगातार क्षमता विस्तार, आधुनिक रिन्यूएबल एनर्जी तकनीकों को अपनाने और अपनी परियोजनाओं के बेहतर संचालन प्रदर्शन के कारण हुई है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष खन्ना ने कहा कि कंपनी को अपनी अक्षय ऊर्जा संपत्तियों के बेहतर क्रियान्वयन से लगातार फायदा मिल रहा है, जिससे ऊर्जा उत्पादन और वित्तीय प्रदर्शन में वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा, “हमने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हमने खावड़ा में अपनी चालू बीईएसएस (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) क्षमता को बढ़ाकर 6.63 गीगावाट घंटा कर दिया है, जो कि एक ही स्थान पर स्थित दुनिया का सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज इंस्टॉलेशन है।”
खन्ना ने बताया, “इसके साथ ही एजीईएल भारत का सबसे बड़ा बीईएसएस ऑपरेटर बन गया है, जिसकी हिस्सेदारी देश की कुल चालू क्षमता के आधे से भी अधिक है। हमारा ध्यान स्टोरेज क्षमता को बढ़ाने पर है, साथ ही हम ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं।”
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में, एजीईएल की ऊर्जा बिक्री 33 प्रतिशत बढ़कर 12,090 मिलियन यूनिट हो गई। बिजली आपूर्ति से प्राप्त आय सालाना आधार पर 45 प्रतिशत बढ़कर 4,019 करोड़ रुपए हो गया, जबकि बिजली आपूर्ति से प्राप्त एबिटडा 51 प्रतिशत बढ़कर 3,835 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। तिमाही नकद लाभ 45 प्रतिशत बढ़कर 1,951 करोड़ रुपए हो गया।
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केंद्र सरकारी बैंकों में एफडीआई की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर कर रही विचार

केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने एक प्रारूप कैबिनेट नोट तैयार किया है और प्रस्तावित बदलाव पर अन्य मंत्रालयों से राय मांगी है।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर सरकारी बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने पर जल्द विचार करने की सिफारिश की है।
फिलहाल निजी क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई की सीमा 74 प्रतिशत है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में यह केवल 20 प्रतिशत तक सीमित है। देश के 12 सरकारी बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में सबसे अधिक 11.07 प्रतिशत विदेशी निवेश है। इसके बाद केनरा बैंक में 10.55 प्रतिशत एफडीआई हिस्सेदारी दर्ज की गई है।
हालांकि, इस विषय पर अब तक वित्त मंत्रालय या आरबीआई की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस बीच, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में एफडीआई प्रवाह 6 प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 18.62 अरब डॉलर था।
मासिक आधार पर अप्रैल में एफडीआई लगभग दोगुना होकर 12.1 अरब डॉलर रहा, जो एक वर्ष पहले इसी महीने 6.6 अरब डॉलर था। इसके बाद मई में यह घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा, जबकि जून में फिर बढ़कर 4.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र ने सबसे अधिक 7.04 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में 2.84 अरब डॉलर, व्यापार क्षेत्र में 1.92 अरब डॉलर, गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.24 अरब डॉलर और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 62.2 करोड़ डॉलर का निवेश आया।
कुल एफडीआई, जिसमें इक्विटी निवेश, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी शामिल है, अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
राज्यों में तमिलनाडु 5.95 अरब डॉलर के निवेश के साथ टॉप पर रहा। इसके बाद महाराष्ट्र में 4.22 अरब डॉलर, दिल्ली में 2.67 अरब डॉलर, कर्नाटक में 2.11 अरब डॉलर और गुजरात में 1.3 अरब डॉलर का एफडीआई दर्ज किया गया।
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बर्नस्टीन ने निफ्टी का टारगेट घटाकर 25,000 किया; कहा- आय की चिंताओं से बढ़त सीमित

ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने निफ्टी के लिए इस साल के अंत तक का टारगेट प्राइस घटाकर 25,000 कर दिया है, जो कि पहले 26,000 था। इसकी वजह अमेरिका से ट्रेड डील पर अनिश्चितता और भारतीय इक्विटी की आय में सुधार को लेकर चिंताएं बने रहना है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बाजार में कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन बिगड़ते व्यापाक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कॉरपोरेट आय पर लगातार दबाव के बीच, इसमें लंबे समय तक बढ़त की गुंजाइश सीमित दिखती है।
बर्नस्टीन ने लगातार दूसरी बार निफ्टी के टारगेट प्राइस में कटौती की है। इससे पहले ब्रोकेरज फर्म ने इस साल की शुरुआत में निफ्टी के लिए 28,100 का लक्ष्य निर्धारित किया था। ब्रोकरेज फर्म को अपने पिछले साल के अंत के टारगेट से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
हालांकि, लगातार खराब होते वैश्विक आर्थिक हालातों, ऊर्जा की महंगी कीमतों और कमजोर आय के आउटलुक के चलते ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए अपना टारगेट प्राइस घटाया है।
बर्नस्टीन ने अपनी भारत स्ट्रेटजी रिपोर्ट में कहा है कि सकारात्मक रिटर्न की उनकी उम्मीदें बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी पर आधारित हैं, न कि भारतीय इक्विटी के दृष्टिकोण में किसी व्यापक सुधार पर।
भारतीय बाजार में गिरावट पर बर्नस्टीन ने कहा कि निफ्टी का आगामी 12 महीनों का ‘प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो’ (पीई रेशियो) गिरकर 16.6 पर आ गया है, जो पिछले छह वर्षों में इसका सबसे निचला स्तर है। जून 2022 के बाद पहली बार इस इंडेक्स का वैल्यूएशन 17 गुना से नीचे आ गया है। यह स्तर लगभग वैसा ही है, जैसा कोविड-19 के दौरान बाजार में आई गिरावट और 2022 में हुई गिरावट के समय देखा गया था।
बर्नस्टीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, “पिछले दो वर्षों में कमाई में मामूली वृद्धि के बावजूद, निफ्टी का मूल्यांकन (वैल्यूएशन) छह साल के निचले स्तर पर होना एक आकर्षक विकल्प लग सकता है।” साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंडेक्स के अपने इतिहास से इसकी तुलना करना भ्रामक हो सकता है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद भी, कई एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर अभी भी महंगे हैं। उन्होंने ऊंचे मूल्यांकन के कारणों के रूप में व्यापक बाजार की कमजोरी और घरेलू फंड के मजबूत प्रवाह का जिक्र किया है।
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आईडीबीआई बैंक का मुनाफा वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही 39 प्रतिशत गिरा

आईडीबीआई बैंक ने शनिवार को कहा कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा 39.2 प्रतिशत घटकर 2,206 करोड़ रुपए रह गया है, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 3,627 करोड़ रुपए पर था।
इसमें आई भारी गिरावट का कारण पिछले साल का ऊंचा आधार था, जिसमें एनएसडीएल में रणनीतिक निवेश की बिक्री से हुआ 1,699 करोड़ रुपए का एकमुश्त लाभ शामिल था।
हालांकि, बैंक ने बताया कि इसे हटा दें तो शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
तिमाही आधार पर बैंक का शुद्ध मुनाफा 4 प्रतिशत बढ़कर 2,115 करोड़ रुपए हो गया है।
वित्त वर्ष 27 की सितंबर तिमाही में शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,227 करोड़ रुपए हो गई। तिमाही आधार पर इसमें 21 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
इसके अलावा, शुद्ध ब्याज अंतर (एनआईएम) सालाना आधार पर 3.71 प्रतिशत से बढ़कर 4.11 प्रतिशत हो गया। यह पिछली तिमाही के 3.61 प्रतिशत से 50 आधार अंक अधिक है।
सितंबर तिमाही में बैंक का लागत से आय सुधारकर 48.17 प्रतिशत हो गया है, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 385 आधार कम है। वहीं, डिपॉजिट की लागत पिछले साल के 4.69 प्रतिशत से घटकर 4.55 प्रतिशत पर आ गई है।
कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 3,55,684 करोड़ रुपए हो गया है जो पहले 3,03,408 करोड़ रुपए था। वहीं, नेट एडवांस 18 प्रतिशत बढ़कर 2,30,220 करोड़ रुपए से 2,71,533 करोड़ रुपए हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले, डिपॉजिट में 9 प्रतिशत और एडवांस में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सीएएसए डिपॉजिट सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 1,55,877 करोड़ रुपए हो गए। सीएएसए अनुपात 43.82 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 18 आधार अंक अधिक है।
इस हफ्ते की शुरुआत में, कैबिनेट ने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपए में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी है।
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