राष्ट्रीय समाचार
बिहार चुनाव 2025 से पहले आचार्य प्रशांत का आह्वान : यांत्रिक वोट नहीं, जागृत वोट
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर: बिहार चुनाव नज़दीक हैं। इस अवसर पर दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वोट को जागृति का एक अवसर मानें, न कि सिर्फ़ एक रूटीन लोकतान्त्रिक प्रक्रिया।
आचार्य प्रशांत ने कहा, “किसी भी सरकार की गुणवत्ता उसे चुनने वाले लोगों की गुणवत्ता से अधिक नहीं हो सकती। जब लोग आदत, जाति या गुस्से को आधार बनाकर वोट देते हैं, तो चुनाव मात्र एक रस्म अदायगी बनकर रह जाते हैं। सोया हुआ मन सोती हुई व्यवस्था को ही जन्म देता है।”
आचार्य प्रशांत ने कहा कि बिहार की त्रासदी केवल आर्थिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक है। “बिहार की त्रासदी यह नहीं कि वह गरीब है; बल्कि यह है कि वह जागना नहीं चाहता। धन की गरीबी बाहर से मिटाई जा सकती है, पर बोध और आत्मज्ञान की गरीबी नहीं।”
उन्होंने बिहार की लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों जैसे पलायन, बेरोजगारी, कमजोर शासन और खराब शिक्षा को मतदाताओं में जागरूकता की कमी से जोड़ते हुए कहा, “हर आंकड़ा हमारे सामूहिक मन का दर्पण बनकर सामने आता है। बिहार के घाव शासन के नहीं, दृष्टिकोण के हैं।”
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹54,000 प्रति वर्ष है, जो देश में सबसे कम है, जबकि हर साल 25 लाख से अधिक लोग रोजगार की तलाश में राज्य छोड़ते हैं। साक्षरता दर लगभग 71 प्रतिशत है (महिला साक्षरता लगभग 61 प्रतिशत), और महिला श्रम-बल भागीदारी दर मुश्किल से 25 प्रतिशत है।
“बिहार की जिस भूमि ने संसार को बुद्ध दिए, वही आज अपने बच्चों को एक अच्छा स्कूल, एक उचित क्लासरूम भी नहीं दे पा रही है। बिहार का पुनर्निर्माण उस कक्षा का पुनर्निर्माण है, उस स्कूल का पुनर्निर्माण है जो बिहार के वासियों को शिक्षा से समृद्ध कर सके। किसी मनुष्य के साथ सबसे बड़ा अन्याय यह है कि उसे अशिक्षित रखा जाए, क्योंकि तब वह यह भी नहीं जान पाता कि वह कितने तरह से बंधनों में बंधा हुआ है।”
उन्होंने कहा कि किसी एक क्षेत्र की उपेक्षा बाकी सभी को संक्रमित कर देती है। “शिक्षा की उपेक्षा बेरोजगारी को जन्म देती है; बेरोजगारी अपराध को; और अपराध अंततः ऊँचा उठने की इच्छा को ही मार देता है। जब मतदाता भीतर से अचेत व अज्ञानी होता है, तो हर क्षेत्र उसी अज्ञान से पूरित अव्यवस्था को अलग-अलग रूप में दर्शाता है।”
उन्होंने कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सेवाओं में जारी चुनौतियों को रेखांकित किया। बिहार अब भी भारत में सबसे अधिक लंबित न्यायिक मामलों वाले राज्यों में है, और प्रति व्यक्ति बिजली खपत राष्ट्रीय औसत का मात्र एक-तिहाई है। “जो प्रगति अंतिम घर तक नहीं पहुँचती, वह सिर्फ़ शाब्दिक सजावट भर रह जाती है,” उन्होंने कहा। “भीतर की अव्यवस्था के चलते बाहरी ढाँचा भी धीरे-धीरे अव्यवस्थित होकर टूट जाता है।”
अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि पर आगाह करते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा कि कोई भी अर्थव्यवस्था जनसंख्या वृद्धि की दर से तेज नहीं दौड़ सकती। बिहार की जनसंख्या घनत्व 1,200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक है, जो राष्ट्रीय औसत का लगभग तीन गुना है। “जब जनसंख्या शिक्षा, रोजगार या स्वास्थ्य के अनुपात में नहीं बढ़ती, तो हर सुधार निष्फल हो जाता है,” उन्होंने कहा। “महिलाओं की शिक्षा और परिवार नियोजन किसी सहानुभूति के चलते नहीं बल्कि जीवित रहने की ही शर्त है।”
उन्होंने कहा कि स्त्री की स्थिति ही समाज की परिपक्वता का सबसे सटीक पैमाना है। “स्त्री की स्वतंत्रता कोई सामाजिक मुद्दा नहीं; यह किसी सभ्यता के मूल का थर्मामीटर है। उसी घर में जहाँ देवियों की पूजा होती है, बेटियों को सुरक्षा के नाम पर कैद किया जाता है।”
निर्वाचन व्यवहार पर बोलते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा कि बिहार का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार दफ्तरों में नहीं, दिमागों में है। “जाति, मुफ्तखोरी, गुस्सा और भावनाएँ अब भी मतदाता की उँगली को निर्देशित करते हैं। मन प्रतिदिन आराम को विवेक के ऊपर, लालच को कृतज्ञता के ऊपर चुनता है; ईवीएम तो केवल उस भीतरी अज्ञान का अंतिम दृश्य है।”
उन्होंने मतदाताओं से कहा कि वे उदासीन न हों बल्कि विवेक से काम लें। “यदि कोई प्रत्याशी योग्य न दिखे, तो सही तरीका पूर्णता खोजने का नहीं बल्कि अयोग्यता को हटाने का है, जैसे परीक्षा में करते हैं। जो स्पष्ट रूप से अयोग्य हैं, जो भ्रष्ट हैं, हिंसक हैं, विभाजनकारी हैं, उन्हें हटाओ। जो बचें, उनमें से उस एक को चुनो जो सबसे कम हानिकारक हो, जो अब भी समझ और झूठ के नकार को तरजीह देता हो।”
उन्होंने चाटुकारिता से सावधान रहने की चेतावनी दी। “उनसे सावधान रहो जो केवल वही कहते हैं जो तुम सुनना चाहते हो। जो नेता असुविधाजनक सत्य बोलने का साहस रखता है, वही वास्तव में तुम्हारे वोट का अधिकारी है। जो तुम्हारी चापलूसी करता है, वही तुम्हारा शोषण करने की तैयारी कर रहा होता है।”
बिहार की सांस्कृतिक विरासत पर विचार करते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा कि विरासत की पूजा नहीं, उसे जीना चाहिए। “बिहार की विरासत उज्ज्वल है: बुद्ध, महावीर, नालंदा। पर उज्ज्वल स्मृति जीवित समझ का पर्याय नहीं होती। ज्ञान तभी जीवित रहता है जब वह भीतर के झूठ को काटे। जैसे ही वह विरासत, नारा या परंपरा बन जाता है, वह मुक्त नहीं करता, कमजोरियों को ढकने का साधन बन जाता है।”
उन्होंने कहा, “विरासत की जीवंतता आचरण में दिखनी चाहिए, दैनिक जीवन में दिखनी चाहिए और दिखनी चाहिए सार्वजनिक जीवन की ईमानदारी में, महिलाओं की सुरक्षा में, उन विद्यालयों में जो सच्ची जिज्ञासा करना सिखाएं, और न्यायालयों में जो न्याय दें। अन्यथा जिसे हम विरासत कहते हैं, वह केवल एक बहाना है।”
उन्होंने आगे कहा कि बिहार का असली परिवर्तन मानव मन से ही शुरू होगा। “हर बाहरी परिवर्तन किसी आंतरिक परिवर्तन से शुरू होता है। यदि हम पहले अपने भीतर के मतदाता को नहीं सुधारते, तो बाहर की व्यवस्था पुराने ढर्रे दोहराती रहेगी।”
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि आने वाले चुनाव को जागरूकता की ज़िम्मेदारी समझें। “बिहार तब उठेगा जब उसके नागरिक अर्थहीन खुशी मनाने के लिए नहीं, बल्कि जागरण के उद्देश्य से वोट देंगे। यहाँ यह समझना अत्यंत प्रासंगिक है कि असली चुनाव दलों के बीच नहीं है; यह चुनाव स्पष्टता और भ्रम के बीच है, प्रकाश और अंधकार के बीच है, जागरण और जड़ता के बीच है।”
राष्ट्रीय समाचार
टेलीग्राम बैन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित, कहा-प्रोसीजर और इमरजेंसी पावर के इस्तेमाल की होगी समीक्षा

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। टेलीग्राम की ओर से दाखिल याचिका पर जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली रिव्यू कमेटी ने टेलीग्राम के अधिकारियों की बात सुनी है और उनकी दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया गया है।
टेलीग्राम की ओर से अदालत में कहा गया कि कानून इस तरह के भेद का प्रावधान नहीं करता। इस पर कोर्ट ने कहा, ”टेलीग्राम की दलील सीधी है कि यदि आधार ही खत्म हो जाता है, तो उसके आधार पर पारित आदेश भी नहीं टिक सकता। हम अंतिम आदेश पर भी विचार करेंगे, इसलिए दोनों पहलुओं पर बहस करना बेहतर होगा।”
टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश को कानूनी खामियों से ग्रस्त बताते हुए कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी।
टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने दलील दी, ”क्या यह आदेश भारत की अखंडता और संप्रभुता के हित में है? क्या नीट जैसी परीक्षा भारत की संप्रभुता और अखंडता पर असर डालेगी?” उन्होंने आगे कहा कि सैकड़ों दूसरी एक्टिविटीज चल रही हैं, बिजनेस एक्टिविटीज हैं। वॉट्सऐप पर तो लोग मार्केटिंग कर रहे हैं।
इस दौरान अदालत ने कहा, ”जो हुआ, हम सब जानते हैं। बहुत सारे स्टूडेंट्स पर असर पड़ा। दूसरी बात यह है कि उस एक घटना को रोकने के लिए क्या आप पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर सकते हैं? सेक्शन 69ए के तहत एक पावर है। उस पावर का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसका कितना इस्तेमाल किया जा सकता है, यह सवाल है।”
सरकार की ओर से पेश तुषार मेहता ने टेलीग्राम की गोपनीयता नीति का हवाला देते हुए कहा, ”टेलीग्राम की प्राइवेसी पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि अकाउंट डिलीट करने पर उसमें स्टोर किया गया सारा डेटा, मैसेज और मीडिया डिलीट हो जाएगा।” उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि यह आतंकवादी गतिविधियों के लिए सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म है और इसकी आर्किटेक्चरल डिजाइन के कारण अन्य क्षेत्रों में भी चुनौतियां पैदा होती हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा, ”हम 150 मिलियन लोगों के अधिकारों को सिर्फ इसलिए कैसे रोक सकते हैं, क्योंकि कुछ नागरिक परीक्षा दे रहे हैं? सवाल यह है कि क्या आप किसी और के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी और के अधिकारों को रोक सकते हैं।”
इस पर तुषार मेहता ने जवाब दिया, ”जब किसी राज्य या राज्य के किसी हिस्से में इंटरनेट बैन होता है, तो सिर्फ 10 प्रतिशत लोग ही शरारती हो सकते हैं।”
कोर्ट ने आगे कहा, ”अगर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति है तो इसकी इजाजत दी जा सकती है। यहां पर तो प्रोपोर्शनैलिटी ((जब दो चीजें इस तरह जुड़ी हों कि एक बदलने पर दूसरी भी बदले) का टेस्ट का मामला है।”
तुषार मेहता ने दलील दी कि इस प्लेटफॉर्म पर बहुत सारे ग्रुप और चैनल चल रहे हैं, जिन्हें शायद दूसरे प्लेटफॉर्म पर इस तरह से चलने वाले चैनलों के बारे में कभी नहीं सुना होगा। यह पब्लिक इंटरेस्ट का मामला है, हम स्टूडेंट्स की फीलिंग को इग्नोर नहीं कर सकते।
उन्होंने टेलीग्राम के एक फीचर का जिक्र करते हुए कहा, ”टेलीग्राम के पास एक फीचर है जिसे डेट और टाइम एडिटिंग फीचर कहते हैं। मान लीजिए 21 जून को परीक्षा खत्म होने के बाद सबके पास पेपर है। कोई इसे 22 जून को टेलीग्राम पर पोस्ट कर सकता है और डेट और टाइम बदलकर कह सकता है कि यह 18 जून को अपलोड हुआ था। ऐसा 2024 में हुआ था। अनुराधा भसीन केस में कहा गया है कि आपको संभावित नुकसान और पब्लिक नुकसान के बीच बैलेंस बनाना होगा। यह प्रोपोर्शनैलिटी का बैलेंस है। अगर इस प्लेटफॉर्म पर कुछ होता है तो कौन जिम्मेदारी लेगा?”
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “स्टूडेंट्स परेशान हैं और यह समझ में आता है, लेकिन नेशनल लेवल पर एक एग्जाम की पूरी क्रेडिबिलिटी खराब हो गई है। नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है और इसीलिए मैं कह रहा हूं कि इस स्टेज पर कोर्ट दखल न दें। बस इसका एक ही मकसद है कि करोड़ों स्टूडेंट्स को गुमराह न किया जाए।”
सरकार की ओर से कहा गया कि उसका यह ऑर्डर अपने आप में पूरा है। यह प्लेटफॉर्म, अपने आर्किटेक्चर की वजह से एक फ्रेंकस्टीन (टुकड़ों से बना, असंगठित और अजीब) है। अगर हमारे जैसा देश रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठा सकता, तो हम कहां जाएंगे? पैसे के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म प्रोपोर्शनैलिटी की बात करता है। यह तर्क पूरी तरह से गलत है। हमने किसी दूसरे इंटरमीडियरी को नहीं छुआ है, जबकि वे ज्यादा पावरफुल हैं लेकिन हमने उनके खिलाफ एक्शन नहीं लिया है, क्योंकि उनका अपना फिल्टरेशन का तरीका है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हम प्रोसीजर को देखेंगे, लेकिन परेशान करने वाली बात यह है कि क्या आपका आर्किटेक्चर काफी नहीं था और इसीलिए इमरजेंसी पावर्स की जरूरत पड़ी। नीट एग्जाम से पहले टेलीग्राम ऐप प्लेटफॉर्म पर अस्थाई बैन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल टेलीग्राम की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।
राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने एवियन में वर्ल्ड लीडर्स से मुलाकात की दिखाई झलक

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 समिट में हिस्सा लिया और मेहमान सदस्य के तौर पर अपनी बात मजबूती से इस वैश्विक प्लेटफॉर्म पर रखी। एवियन में वर्ल्ड लीडर्स के साथ हुई मुलाकात के दौरान हुई बातचीत के कुछ अंश भी साझा किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से इस दौरे की झलकी दिखाई। इसमें फ्रेंच राष्ट्रपति और मेजबान इमैनुएल मैक्रों, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर, इतालवी पीएम जॉर्जिया मेलोनी, यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन समेत देश दुनिया के कई नामचीन राजनेता देखे जा सकते हैं।
खास पलों को पोस्ट करते हुए पीएम ने लिखा, “जी7 समिट के एक सफल सत्र के कुछ मुख्य बिंदु साझा कर रहा हूं, जो एवियन-लेस-बेंस में आयोजित हुआ था, जहां विश्व नेताओं ने एक साथ आकर विचारों का आदान-प्रदान किया और हमारे ग्रह के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा की।”
1 मिनट 52 सेकंड की इस क्लिप में प्रधानमंत्री का स्विट्जरलैंड के एयरपोर्ट पर उतरना, राष्ट्रपति पारमेलिन का गर्मजोशी से भरा स्वागत और फिर हेलिकॉप्टर से एवियन स्थित जी7 आयोजन स्थल पर पहुंचना शामिल है।
आयोजन स्थल में दुनिया भर से आए नेताओं से मुलाकात और फिर उनके साथ फोटो सेशन का दृश्य है। ट्रंप के साथ बिताए कुछ खास पल और द्विपक्षीय बातचीत के कुछ अंश भी इसका हिस्सा हैं।
बतौर अतिथि सदस्य आमंत्रित पीएम मोदी हाई लेवल वर्किंग सेशन में भी शामिल हुए। इसकी थीम ‘नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करना’ थी। इस सेशन में जी7 देशों के नेता, सहयोगी देशों के नेता, और वर्ल्ड बैंक और अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में संवाद और शांति को दुनिया के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “हम पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष की वजह से क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले समुद्री व्यापार में रुकावट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है।”
उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत का भी जिक्र किया। बोले, “कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना जरूरी है ताकि नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।”
राष्ट्रीय समाचार
बैंक ऑफ बड़ौदा में 65 प्रोफेशनल्स पदों पर आवेदन शुरू, 6 जुलाई तक आवेदन का अवसर

बैंकिंग सेक्टर में नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने अपने कॉर्पोरेट और इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट (सी एंडआईसी) विभाग में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर तय समय के लिए प्रोफेशनल्स की विभिन्न 65 पदों पर भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
बीओबी की ओर से जारी 65 रिक्तियों में वाइस प्रेसिडेंट (वीपी) – रिलेशनशिप हेड- रियल एस्टेट का 1, वाइस प्रेसिडेंट (वीपी) – रिलेशनशिप हेड-एमएनसी का 1, वाइस प्रेसिडेंट (वीपी) – रिलेशनशिप हेड-क्रेडिट लाइट क्लाइंट्स का 1, डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (डीवीपी) – हेड मार्केट इंटेलिजेंस यूनिट का 1, डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (डीवीपी) – हेड प्रोडक्ट सेल्स – ट्रांज़ैक्शन बैंकिंग का 1, डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (डीवीपी) – सीनियर रिलेशनशिप मैनेजर – क्रेडिट लाइट/कॉन्गलोमरेट/एमएनसी/रियल एस्टेट/कॉर्पोरेट बैंकिंग के 12, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (एवीपी) II- कॉन्गलोमरेट/रियल एस्टेट के 2, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट II (एवीपी II) – प्रोडक्ट मैनेजर – कॉर्पोरेट बैंकिंग के 3, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (एवीपी) II- सीनियर प्रोडक्ट सेल्स मैनेजर (एसपीएसएम) – ट्रांजैक्शन बैंकिंग के 2, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट II (एवीपी II) – रिलेशनशिप मैनेजर- क्रेडिट लाइट/कॉन्गलोमरेट/एमएनसी/कॉर्पोरेट बैंकिंग/रियल एस्टेट के 30, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट I (एवीपी I) – प्रोडक्ट सेल्स मैनेजर (पीएसएम)- ट्रांजैक्शन बैंकिंग के 4 और असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट I (एवीपी I) – क्रेडिट लाइट/एमएनसी/रियल एस्टेट/कॉन्गलोमरेट के 7 पद शामिल हैं।
इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 16 जून से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 6 जुलाई तय की गई है। ऐसे में जो पात्र उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे बीओबी के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कर सकते हैं।
अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से सभी पोस्ट के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन और एमबीए/पीजीडीएम या चार्टर्ड अकाउंटेंट या फाइनेंस में स्पेशलाइजेशन के साथ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री/डिप्लोमा या सीए/सीएमए/सीएफए होना चाहिए। इसी के साथ कैंडिडेट्स के पास प्रासंगिक क्षेत्र में पद के अनुसार निर्धारित 5 से 15 वर्षों का अनुभव होना भी अनिवार्य है।
आवेदकों की न्यूनतम आयु पद के अनुसार 28 से 36 वर्ष और अधिकतम आयु 38 से 52 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 1 जून के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदन की जांच, ऑनलाइन टेस्ट, शॉर्टलिस्टिंग, साइकोमेट्रिक टेस्ट या कोई अन्य टेस्ट, पर्सनल इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, आदि चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी बीओबी के वेतनमान नियमों के अनुसार होगी।
फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग के अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो सामान्य/ईडब्ल्यूएस/ओबीसी के लिए 850 रुपए के साथ जीएसी और पेमेंट गेटवे शुल्क। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी/ईएसएम/डीईएसएम और महिलाओं के लिए 175 रुपए के साथ जीएसी और पेमेंट गेटवे शुल्क तय किया गया है।
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